- अवैध मस्जिद की की धूम-धाम से ओपनिंग की गयी
- ग्रैंड ओपनिंग में पाकिस्तानी एंबैसडर चीफ गेस्ट थे
- स्थानीय लोगों ने मस्ज़िद के खिलाफ मोर्चा खोला
- जांच में मस्ज़िद अवैध तरीके से बनायी पायी गयी
जापान में अवैध मस्जिद पर बवाल बढ़ा
अवैध मस्जिद पर बुलडोजर चलने वाला है, लेकिन ये बुलडोज़र ना तो यूपी में चलेगा, ना पश्चिम बंगाल में और ना ही महाराष्ट्र में, ये बुलडोज़र चलेगा जापान में। वो कहावत है ना दोस्तों, एक सड़ा हुआ सेब पूरी टोकरी में रखे सेब को सड़ा देता है। पाकिस्तानियों पर ये कहावत बिल्कुल फिट बैठती है। अपने देश को पूरी तरह से सड़ा देने के बाद ये पाकिस्तानी जहां जाते हैं उस देश को पाकिस्तान बनाने में लग जाते हैं। ताजा मामला जापान का है, जहां पाकिस्तानियों ने एक ऐसा कांड किया है जिसके चर्चे जापान के साथ-साथ पाकिस्तान और भारत तक में गूंज रहे हैं। तो आपको पाकिस्तानियों के इस जापानी कांड की पूरी कहानी बताता हूं। ये इनविटेशन कार्ड देखिये। जापान जामे मस्जिद रमज़ान, ग्रैंड ओपनिंग सेरेमनी, फ्राइडे 3 अप्रैल 2026, जुम्मा प्रेयर 12.30 बजे दोपहर.और चीफ गेस्ट के नाम देखिये। अब्दुल हमीद भुट्टा- अंबेसेडर- पाकिस्तान।

यानी 3 अप्रैल 2026 को जापान के साइतामा-केन के कावागो में जापान की जामे मस्जिद रमज़ान की ग्रैंड ओपनिंग हुई है। ये तस्वीर उसी मस्जिद की है। और ये उसी ग्रैंड ओपनिंग की तस्वीरें हैं जिसमें जापान में पाकिस्तान के अंबेसेडर अब्दुल हमीद भुट्टा भी मौजूद थे। इस फोटो में भुट्टा मस्जिद की ओपनिंग सेरेमनी में माइक थामे हुए हैं। दूसरी तस्वीर में वो मस्जिद से जुड़े लोगों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं। उनके ठीक पीछे नई नवेली मस्जिद भी दिखाई दे रही है। पाकिस्तानी अंबेसेडर तो उस दिन बहुत खुश थे कि देखो, पाकिस्तानियों ने जापान में एक और मस्जिद बना डाली है। सोच रहे होंगे कि बहुत जल्द जापान को भी पाकिस्तानियों से भर देंगे और जापान को भी इस्लामिक देश बना डालेंगे। लेकिन उनके इस ख्वाब को जापानियों ने 11 हज़ार वोल्ट का झटका देकर तोड़ डाला है।
कावागो की लोकल अथॉरिटी ने इस मस्जिद को इललीगल यानी अवैध करार दे दिया है। कावागो की मेयर ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा है कि वो इस अवैध निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगी।तो जापान में पाकिस्तानियों ने एक अवैध मस्जिद बना डाली। बिना अथॉरिटी से परमिशन लिये, बिना नक्शा पास कराए, बिना किसी कागजी कार्यवाही के , मस्जिद बना ली, उद्घाटन में पाकिस्तानी अंबेसेडर को बुला लिया, उद्घाटन भी करवा लिया। है ना गजब। लेकिन इन पाकिस्तानियों को लगा था कि ये पाकिस्तान है, जहां मजहब के नाम पर कोई कुछ भी कर सकता है। ज़मीन हड़प सकता है, इमारत कब्जा कर सकता है, यहां तक कि किसी की जान ले सकता है। लेकिन ये देश पाकिस्तान तो था नहीं, ये तो जापान था। बस फिर क्या था। लोकल अथॉरिटी से लेकर नेताओं तक ने इस अवैध मस्जिद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
Yusuke Kawai जापानी पॉलिटिशियन हैं। वो टोडा सिटी काउंसिल के मेंबर भी है। जब उन्हें पता चला कि उनके इलाके में एक अवैध मस्जिद बनाई गई है तो वो उस जगह पर पहुंचे। वहां मौजूद एक शख्स से जानकारी लेनी चाहिए, लेकिन उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। कावई ने अपनी इस विजिट का पूरा वीडियो भी बनाया था जिसे उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल और X अकाउंट पर पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि यहां किया गया पूरा का पूरा कंस्ट्रक्शन ही अवैध है ….कावागो में जिस जगह इस अवैध मस्जिद को बनाया गया है वो शिमो-अकासाका में स्थित है। 4500 स्क्वॉयर मीटर का ये प्लॉट अर्बनाइजेशन कंट्रोल एरिया में है जहां इस तरह का कंस्ट्रक्शन अलाउ ही नहीं है। ये ज़मीन माउंटेन फॉरेस्ट के लिए तय की हुई है और यहां इन पाकिस्तानियों ने एक नहीं 4 बिल्डिंग बना ली जिसमें से एक मस्जिद भी है।
जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर बनायी गयी मस्जिद
अब आपको बताता हूं कि ये पाकिस्तानी कैसे दूसरे देशों में फर्जीवाड़े को अंजाम देते हैं। इस मस्जिद का काम 2024 से ही किया जा रहा था। अक्तूबर 2024 में जब इसका स्ट्रक्चर ऊंचा हुआ तब आसपास के लोगों को इसका पता चला और तभी इसकी शिकायत लोकल अथॉरिटी से की गई थी।उसी वक्त अधिकारी इस स्पॉट पर पहुंचें थे और ज़मीन और कंस्ट्रक्शन के कागजात मांगे गये थे। लेकिन वहां मौजूद पाकिस्तानियों ने कुछ भी नहीं समझने का नाटक करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें जापानी समझ में नहीं आती। कंस्ट्रक्शन तो छोड़िये, ज़मीन के कागज भी नहीं दिखाए गये। इसके बाद कई बार लोकल अथॉरिटी से जुड़े लोग कंस्ट्रक्शन साइट पर गये और काम रोकने के लिए कह कर आए, लेकिन काम नहीं रुका। अथॉरिटी को ये भी नहीं पता चल पाया कि ज़मीन आख़िर है किसके नाम। फिर मार्च 2025 में इस ज़मीन की ओनरशिप एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम ट्रांसफर की गई और इस कंपनी का हेड कावागो में रहने वाला एक पाकिस्तानी था। उसी महीने कंपनी ने अथॉरिटी को बताया कि ज़मीन पर चल रहे अवैध निर्माण को हटा दिया जाएगा। लेकिन कंस्ट्रक्शन हटाना तो दूर, उसे पूरा भी कर दिया गया।
जब ज़मीन के मालिक से एक जर्नलिस्ट ने फोन पर सवाल जवाब किये तो उसने बताया कि जब ज़मीन खरीदी गई तो इमारत उस पर पहले से बनी हुई थी। इमारत को हटाने की बात चल रही है लेकिन उसमें खर्च आएगा और इसी वजह से काम रुका हुआ है। इतना ही नहीं, इस कंपनी ने ऑफर दिया कि इस मस्जिद को अगले 5 साल के दौरान गिरा दिया जाएगा। धूर्तता देख रहे हैं। पहले तो अवैध निर्माण कराओ, फिर कागज नहीं दिखलाओ, और फिर जब बात आगे बढ़ जाए तो कहो कि अवैध निर्माण गिराने का खर्च कौन उठाएगा। अगर भारत में ऐसा अवैध निर्माण किया होता तो इमारत भी गिरती और इमारत तोड़ने का खर्च भी देना पड़ जाता। और ये पाकिस्तानी ये भी जानते हैं कि 5 साल तक अगर कोई मस्जिद टिक गई तो उसे गिराना और मुश्किल हो जाएगा।
मेयर ने कहा अवैध मस्ज़िद को तोड़ना ही होगा
अप्रैल में मस्जिद की ग्रैंड ओपनिंग हो गई तब आसपास के लोगों ने अथॉरिटी में जाकर हंगामा शुरू कर दिया और इसके बाद बवाल बढ़ गया और इसी के बाद कावागो सिटी की मेयर Hatsue Morita ने कहा इस अवैध मस्जिद को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा-

यह शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में बिना अनुमति के बनाया गया एक अवैध निर्माण है, और हम इस नीति के तहत काम कर रहे हैं कि हम मौजूदा स्थिति को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने की पूरी कोशिश करेंगे।
–कावागो सिटी की मेयर Hatsue Morita
इसी के बाद इस अवैध मस्जिद समेत ज़मीन पर किये गये दूसरे कंस्ट्रक्शन को गिराने की कवायद शुरू हो गई है। इतने बवाल के बाद अब जापान में मौजूद पाकिस्तानी अंबेसेडर पर भी सवाल उठ रहे हैं। भई, कोई राजदूत भला कैसे किसी अवैध इमारत या मस्जिद की ओपनिंग में शिरकत करने चला जाएगा। लेकिन जापान में पाकिस्तानी अंबेसेडर तो गये उस अवैध मस्जिद की ग्रैंड अपनिंग करने, जिसे इललीगली बनाया गया था। अब जब इस अवैध धंधें में गर्दन फंसी तो पाकिस्तानी अंबेसेडर ने फौरन से चाल बदल ली। एक लंबा-चौड़ा ट्वीट किया- सफाई दी कि मुझे तो मालूम ही नहीं था कि ये कंस्ट्रक्शन अवैध है? मुझे तो किसी बात की जानकारी ही नहीं थी। और ये भी कहा कि जापान में रहने वाले पाकिस्तानियों को जापान के कायदे-कानून का पालन करना चाहिए।
वैसे ये तो हुई जापान में एक मस्जिद की बात लेकिन पाकिस्तानी और जापान में रहने वाले दूसरे मुस्लिम, जापान में तेज़ी से अपने धर्म के प्रचार-प्रसार और देश को मस्जिदों से भर देने के मिशन में जुटे हुए हैं। जापानी न्यूज़ वेबसाइट The Asahi Shimbun की रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई 2025 तक जापान में करीब 160 मस्जिदें थीं, जिसमें सबसे ज़्यादा 17, Saitama Prefecture में थीं। ये वही इलाका है जहां की कावागो में ये अवैध मस्जिद बनाई गई है। वैसे जापान में पिछले कुछ सालों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों का विरोध बढ़ता जा रहा है। फुजिशावा में भी मस्जिद बनाने के खिलाफ आम लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। ईस्टर्न जापान में इचिकावा के तोबिशिमा के लोग भी इनसे परेशान हैं। यहां की मस्जिद में नमाज पढ़ने आने वाले लोग सड़क पर ही अपनी गाड़ियां पार्क कर देते है। इससे आम लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं इचिकावा में ही लोकल अथॉरिटी ने एक मस्जिद के ठीक सामने वाले म्यूनिसिपल पार्क का साल में दो बार इस्तेमाल की इजाजत इस शर्त पर दी है कि वहां नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी।
मुसलमानों की हरकतों से पूरी दुनिया परेशान
असल में पूरी दुनिया को ये पता है कि नमाज के नाम पर ये पार्क और सड़कों पर कब्जा जमा लेते हैं और जब कुछ सालों बाद उन्हें हटाया जाए तो उसे इस्लामोफोबिक बताते फिरते हैं। दूसरी बात ये कि ये गंदगी भी बहुत फैलाते हैं। जापानी पॉलिटिशियन Yusuke Kawai अपने इलाके की एक और मस्जिद के मुआयने पर गये थे। इस मस्जिद का नाम टोड़ा मस्जिद है। असल में आसपास के लोगों ने शिकायत की थी कि मस्जिद से गंदगी उनके घरों और सड़कों पर गिरती है। इसी की जांच करने Yusuke मस्जिद गये थे और जब मस्जिद की छत पर वो पहुंचे तो वहां उन्हें केवल कचरा ही कचरा नज़र आया।ये भी एक बड़ी वजह है जिसके कारण जापानी नई मस्जिदें बनाने का विरोध कर रहे हैं…..एक और बड़ी वजह है कनवर्जन और डेमोग्राफिकल चेंज का। जापानी यूरोपियन देशों का हाल देख रहे हैं। वहां तेज़ी से बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसके नतीजे देख रहे हैं। इसी वजह से वो नहीं चाहते कि उनके देश का हाल भी यूरोप के जैसा हो जाए।
जापान में इस्लाम कायम करने का मिशन ?
जापान में साल 2019 में मुस्लिम आबादी 2 लाख 30 हज़ार थी जो 2024 के अंत तक 4 लाख 20 हज़ार हो गई।जापान पहले से बर्थ रेट के निचले पायदान पर पहुंच चुका है। वहां का बर्थ रेट केवल 1.14% रह गया है….ऐसे में उनकी मूल आबादी तेज़ी से कम हो रही है। ना केवल वहां मुस्लिम आबादी बाहर से पहुंच रही है बल्कि वहां रहने वाले मुसलमानों का बर्थ रेट भी जापानियों से कहीं ज़्यादा है। यानी जापानियों पर अपने ही देश में अल्पसंख्यक होने का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है, और यही वजह है कि जापान में इमिग्रेंट्स और रिफ्यूजी, खास तौर पर मुस्लिम्स के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है। उस पर अवैध मस्जिदों का निर्माण जैसा कि इन पाकिस्तानियों ने किया, इसने जापानियों का गुस्सा और भड़का दिया है और अब नौबत उस अवैध मस्जिद पर बुलडोज़र चलने की आ चुकी है।








