नाकामी पर पाकिस्तानी आर्मी का चूरन
पाकिस्तान आर्मी बार-बार ये जो भारत-भारत चिल्लाती है, वो बस अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश करती है। कोर कमांडर्स की बैठक में पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने इंडस वाटर ट्रीटी का मुद्दा उठाया था, कहा था कि पाकिस्तान आर्मी ये सिक्योर करेगी कि पाकिस्तान को उसके हक का पानी मिलता रहे। ये सारी बातें बलोचिस्तान से लेकर गुलाम कश्मीर तक में पाकिस्तानी आर्मी के फेल्योर को छिपाने के लिए की जाती हैं। और देखिये- उस फेल्योर का ताजा-ताजा उदाहरण भी सामने आ गया है।
7 जुलाई को पाक ऑक्यूपाइड बलोचिस्तान की राजधानी क्वेटा से सिर्फ 130 किलोमीटर दूर ज़ियारत में एक बड़े हमले को अंजाम दिया गया। ज़ियारत के मंगी में पुलिस पोस्ट पर हथियारबंद हमलावरों ने धावा बोल दिया। इस हमले में 9 पुलिसवाले मौके पर ही मारे गये। मरने वालों में SHO मंगी मुहम्मद हुसैन, SHO कवास सोहबत खान, Anti-Terrorist Force in Charge- Head Constable Saifullah समेत दूसरे पुलिसवाले शामिल हैं। आरोप लग रहे हैं कि जब हमला हुआ तो पुलिसवालों के पास गोली-बारूद ही नहीं बचा था कि वो काउंटर फायर कर पाए।

बगैर हथियार-गोालबारूद के कैसे लड़ते पुलिसवाले ?
अब हमले के समय ना तो पुलिसवालों के पास हथियार थे और ना ही बैकअप समय पर मिल पाया, नतीजा ये हुआ कि सारे के सारे उस हमले में मारे गये। भले ही बैकअप समय पर नहीं पहुंचा लेकिन उनकी डेड बॉडी के लिए ताबूत फौरन ले आया गया। लाशें उठाने के लिए एंबुलेंसेज़ भी तुरंत पहुंच गईं, लाइन लग गई थी एंबुलेंस की। इस हमले में मारे गये ज़्यादातर पुलिसवाले लोकल हैं, इसलिए स्थानीय इलाकों में इसे लेकर गुस्सा भी बहुत ज़्यादा है। बलोचिस्तान के CM सरफराज़ बुग्ती मारे गये पुलिसवालों के जनाज़े में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन लोगों ने उन्हें वापस भेज दिया।
BLA और TTP के हमलों की रफ्तार बढ़ी
मंगी में हुए हमले के बाद पाकिस्तानी फौज ने काउंटर ऑपरेशन लॉन्च किया। N-25 हाई-वे पर मौजूद हमलावरों से मुठभेड़ भी हुई। और गजब देखिये कि इसमें भी हमलावरों से ज़्यादा पाकिस्तानी फौजी मारे गये हैं। इस इनकाउंटर में 18 जवान ढेर हो गये। पाकिस्तानी आर्मी के मुताबिक दोनों हमलों में 26 हमलावर मारे गये हैं। मंगी, बलोचिस्तान में है लेकिन यहां हमला बलोच लड़ाकों ने नहीं बल्कि TTP ने किया है। TTP ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और दावा किया है कि पुलिस पोस्ट पर किये गये हमले में 20 पुलिसवाले मारे गये हैं। इससे ठीक एक दिन पहले बलोचिस्तान के हाना उरक में भी एक बड़ा हमला हुआ था। इस हमले में 4 लोग मारे गये थे जबकि 9 जख्मी हो गये थे। शनिवार को ग्वादर के जिवनी पोर्ट पर भी हमला हुआ था। इस आत्मघाती हमले में 3 फौजी मारे गये थे जबकि 15 के घायल होने की ख़बर है।
नाकामी पर आर्मी से सवाल क्यों नहीं ?
मंगी में पुलिस पोस्ट पर हमला हुआ तो ज़ियारत के SP को सस्पेंड कर दिया गया है। SoP फॉलो नहीं करने से लेकर तमाम तरह के आरोप लगाये गये हैं, लेकिन पाकिस्तान में हमले तो आर्मी कैंपों पर भी हो रहे हैं। ग्वादर पोर्ट तो पूरी तरह से पाकिस्तानी आर्मी की सिक्योरिटी में है। लेकिन कभी आपने सुना कि किसी आर्मी ऑफिसर को सस्पेंड किया गया हो। सुनेंगे भी नहीं। भई पाकिस्तान में किसकी औकात है पाकिस्तानी आर्मी पर हाथ डालने की। सवाल पूछने की कि सिक्योरिटी तुम्हारी थी तो हमला कैसे हो गया? मिलिट्री इंटेलिजेंस से ये पूछने की कि हर दिन हमले हो रहे हैं, तुम्हारी इंटेलिजेंस कर क्या रही है।
पाक का भारत और अफगानिस्तान पर टोपी ट्रांसफर
अब इन हमलों के बाद पाकिस्तान का ब्लेमगेम भी शुरू हो गया है- भारत और अफगानिस्तान पर आरोप लगाये जा रहे हैं। दुनिया जानती है कि भारत का पाकिस्तान में हो रहे इन हमलों में कोई हाथ नहीं है लेकिन पाकिस्तान आर्मी अपनी नाकामियों को ढंकने के लिए भारत पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश करती रहती है। वैसे इन हमलों ने मुनीर को उन 15 सौ बलोच और मुनीर के साले और पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नक़वी के एक SHO की मार वाले डॉयलॉग की याद दिला दी है। पाकिस्तान आर्मी PoJK, KpK और पाक ऑक्यूपाइड बलोचिस्तान में बुरी तरह से फेल हो चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर में वो भारत से पिट चुकी है और घर में वो बलोच फ्रीडम फाइटर्स और TTP से मार खा रही है। लेकिन अभी तो और धुनाई होनी है, केवल पाकिस्तानी आर्मी की नहीं, उसके चीफ आसिम मुनीर की भी। बस आगे-आगे देखते जाइये-होता है क्या








