पाकिस्तानियों R-37M मिसाइल की खबर मिली क्या ? बिना घुसे आसमान से भीतर तक मारेगा भारत

By Shilpi Sharma

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पाक फाइटर जेट्स का काल

भारत के पास R-37M के रूप में एक ऐसी मिसाइल मिलने वाली है जो पाकिस्तानी फाइटर जेट्स के लिए काल साबित होगी। यह मिसाइल IAF की रीढ़ कहलाने वाले फाइटर जेट SU-30 MKI को और ज़्यादा खतरनाक बनाएगी। भारत ने करीब 300 R‑37M मिसाइलें खरीदी हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 1.2 अरब डॉलर है। मिसाइलों की डिलिवरी अगले 12–18 महीनों में शुरू हो सकती है। यह सौदा भारतीय वायुसेना की हवाई मारक क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाने वाला है और चीन‑पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा। फिलहाल पाकिस्तान के पास लंबी दूरी की बियोंड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल में चीनी PL-17 और PL-15E है। इन मिसाइलों को पाकिस्तान ने चीन से लिए J-10CE और JF-17 के साथ इंटीग्रेट किया हैI

क्यों खास है R‑37M मिसाइल ?

R‑37M की खासियत सिर्फ उसकी तकनीकी क्षमता नहीं है, बल्कि भारत को मिलने वाली रणनीतिक बढ़त भी है। इसके आने से भारत की सुरक्षा और हवाई युद्ध क्षमता बड़े पैमाने पर बदल सकती है क्योंकि इसमें दुश्मन के अहम विमानों को बहुत दूर से गिराने की ताकत है।

  • रेंज : यह मिसाइल 350–400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान को मार सकती है।
  • स्पीड : R‑37M साउंड स्पीड से लगभग छह गुना तेज (Mach‑6) चलती है।
  • वॉरहेड : इसमें 61 किलो का वॉरहेड होता है, जो दुश्मन के बड़े और अहम विमानों को भी गिरा सकता है।
  • खास निशाना : यह सिर्फ लड़ाकू विमानों को नहीं, बल्कि दुश्मन के AWACS और टैंकर्स को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है।
  • Su‑30MKI के लिए सूटेबल: भारतीय वायुसेना के Su‑30MKI लड़ाकू विमान इस मिसाइल को आसानी से ले जा सकते हैं, जिससे उनकी मारक क्षमता तीन गुना तक बढ़ जाएगी।
  • रणनीतिक बढ़त: इससे पाकिस्तान और चीन को अपने विमानों को फ्रंट लाइन से पीछे हटाना पड़ सकता है, यानी भारत को हवाई युद्ध में बड़ी बढ़त मिलेगी।

इसका मतलब यह है कि आधुनिक हवाई युद्ध में जिन विमानों और उनके सहायक विमानों पर पूरे ऑपरेशन की सफलता निर्भर करती है, उन्हें गिराकर दुश्मन को पूरी तरह से कमज़ोर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि R‑37M भारत के लिए एक गेम‑चेंजर हथियार साबित हो सकता है।

सुपर सुखोई अपग्रेड में शामिल R-37M

भारत ने फरवरी के आखिर में यह तय किया कि वह रूस की मदद से अपने Su‑30MKI लड़ाकू विमानों को “Super Sukhoi” प्रोग्राम के तहत पूरी तरह से आधुनिक बनाएगा। इसी समय R‑37M मिसाइलों की खरीद का फैसला भी सामने आया। दोनों कदम मिलकर भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊँचाई देंगे। इस योजना के तहत सबसे पहले 84 Su‑30MKI विमानों को अपग्रेड किया जाएगा। इसमें नए रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पॉड्स और उन्नत R‑77M (मीडियम रेंज एयर टू एयर) मिसाइलें शामिल होंगी। R‑37M मिसाइलें, जो मूल रूप से दुनिया के सबसे भारी इंटरसेप्टर विमान MiG‑31BM के लिए बनाई गई थीं, अब Su‑30MKI जैसे भारी विमानों पर भी लगाई जा सकेंगी।

दुश्मन पर कैसे भारी पड़ेगी R‑37M मिसाइल ?

R‑37M भारत को सिर्फ लड़ाई जीतने की ताकत नहीं देता, बल्कि दुश्मन की हवाई रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता देता है।

  1. कंवेंशनल वॉर से एक कदम आगे – पहले हवाई युद्ध का मतलब होता था डॉगफाइटिंग—यानी लड़ाकू विमान आमने‑सामने भिड़ते थे। लेकिन R‑37M जैसी मिसाइलें इसे बदल देती हैं। अब लड़ाई का फोकस बहुत दूर से दुश्मन को गिराने पर है।
  2. नेटवर्क‑सेंट्रिक वॉरफेयर – R‑37M को सिर्फ विमान से नहीं, बल्कि ग्राउंड रडार, S‑400 सिस्टम और भविष्य में Su‑57 जैसे फाइटर से मिलने वाले डेटा के साथ जोड़ा जा सकता है। इसका मतलब है कि भारतीय वायुसेना अब एक नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली पर काम करेगी, जहाँ हर हथियार और सेंसर एक‑दूसरे को सपोर्ट करेंगे।
  3. दुश्मन के सिस्टम को निशाना – AWACS और रडार विमान पूरे हवाई क्षेत्र की निगरानी करते हैं और लड़ाकू विमानों को निर्देश देते हैं। R‑37M जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें इन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर से गिरा सकती हैं और दुश्मन के लड़ाकू विमान को को बिना गाइडेंस के छोड़ सकती है। हवाई ईंधन टैंकर लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरकर लंबे समय तक उड़ने की क्षमता देते हैं। अगर इन्हें निशाना बनाया जाए, तो दुश्मन के विमान जल्दी वापस लौटने पर मजबूर होंगे और उनकी ऑपरेशन क्षमता घट जाएगी।कमांड‑कंट्रोल प्लेटफॉर्म पूरे नेटवर्क को जोड़ते हैं। इनके गिरने से दुश्मन का कम्युनिकेशन और कोऑर्डिनेशन टूट जाएगा।
  4. रणनीतिक बढ़त – चीन की PL‑15/PL‑17 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का जवाब।
    • पाकिस्तान के तेजी से बढ़ते चीनी लड़ाकू विमानों पर दबाव।
    • भारत को हवाई युद्ध में पहले वार करने की क्षमता मिलती है।
मिसाइलदेशरेंजस्पीडखासियतसीमाएँ
R‑37Mरूस (भारत खरीद रहा है)350–400 kmMach‑6AWACS, टैंकर और बड़े टार्गेट गिराने में सक्षम; भारी वॉरहेड (61 kg)बड़े आकार के कारण हल्के विमानों पर सीमित उपयोग; रडार/डेटा पर निर्भरता
PL‑15चीन~200 kmMach‑5AESA रडार सीकर; J‑20 और J‑10C पर तैनातR‑37M से कम दूरी; लेकिन स्टेल्थ प्लेटफॉर्म पर ज्यादा प्रभावी
PL‑17चीन~300–400 kmMach‑5+R‑37M जैसी लंबी दूरी; नेटवर्क‑सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइनअभी सीमित जानकारी; ऑपरेशनल स्थिति स्पष्ट नहीं
AIM‑174 (AMRAAM‑ER)अमेरिका~300 kmMach‑4.5नेवी और एयरफोर्स दोनों के लिए; मल्टी‑प्लेटफॉर्मR‑37M से धीमी; लेकिन NATO नेटवर्क में बेहतर इंटीग्रेशन
Astra Mk2/Mk3 (भारत)भारत (विकासाधीन)Mk2: ~160–170 km Mk3: ~300 kmMach‑4.5–5स्वदेशी; डुअल‑पल्स मोटर; PL‑15 का जवाबअभी विकासाधीन; ऑपरेशनल होने में समय लगेगा

भारत तेज़ी से काम कर रहा है स्वदेशी Astra Mk2 और Mk3 पर

भारत तेज़ी से अपनी स्वदेशी लंबी दूरी की एयर‑टू‑एयर मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिनमें Astra Mk2 और Mk3 सबसे अहम हैं।

Astra Mk2

  • यह मिसाइल लगभग 160–170 किलोमीटर तक मार कर सकती है।
  • इसमें बेहतर रडार सीकर और जैमिंग रेजिस्टेंस है, जिससे यह दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र्स को झेल सकती है।
  • Su‑30MKI और Tejas जैसे विमानों पर इसे लगाया जा सकता है।

Astra Mk3

  • Astra Mk2 से भी ज्यादा लंबी दूरी वाली मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक हो सकती है।
  • इसे खास तौर पर चीन की PL‑15 जैसी मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
  • इसमें डुअल‑पल्स मोटर और उन्नत गाइडेंस सिस्टम होगा, जिससे यह दुश्मन के हाई‑वैल्यू टार्गेट्स को दूर से गिरा सकेगी।

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