हाइपरसोनिक मिसाइल का Phase‑II परीक्षण
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने अपनी स्वदेशी लॉन्ग‑रेंज हाइपरसोनिक एंटी‑शिप मिसाइल (LR‑AShM) का दूसरा सफल परीक्षण किया है। इसका पहला परीक्षण 14 नवंबर 2024 को ओडिशा तट से ही किया गया था। यह मिसाइल DRDO की एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी द्वारा विकसित की गई है और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा और लंबी दूरी की समुद्री स्ट्राइक एबिलिटी के लिए बनाई गई है।
इस मिसाइल की गति 10 मैक यानि आवाज़ से दस गुना तेज़ है और यह 1500 किलोमीटर से अधिक दूरी की मारक क्षमता हासिल करने में सक्षम है, और भविष्य में इसे 3500 किलोमीटर तक पहुँचाने की योजना है। इससे इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में उसकी डिटरेंस पोज़िशन और मज़बूत होगी और चीन‑पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक गंभीर चुनौती सामने आएगी।
बेहद खास है भारतीय LR‑AShM
भारत की लॉन्ग‑रेंज हाइपरसोनिक एंटी‑शिप मिसाइल (LR‑AShM) कई विशेषताओं से लैस है, और इसका तकनीकी डिज़ाइन अत्याधुनिक है, जो इसे समुद्री युद्धक्षेत्र में बेहद प्रभावी बनाता हैं। यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड तकनीक पर आधारित है और क्वासी‑बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के साथ उड़ान भरती है। इसमें टू‑स्टेज सॉलिड रॉकेट मोटर का प्रयोग किया गया है जिसमें पहले चरण में बर्नआउट और अलगाव होता है, दूसरे चरण में बूस्ट मिलता है और उसके बाद मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड करती है। इसका कुल भार लगभग 12 टन है, लंबाई 13 मीटर और व्यास 1.4 मीटर है।
भारतीय LR‑AShM को कंवेंशनल वारहेड्स के साथ कॉन्फ़िगर किया जा सकता है, जिन्हें अलग‑अलग मिशनों के अनुसार बदला भी जा सकता है। इस लचीलेपन के कारण यह मिसाइल कई तरह के नौसैनिक लक्ष्यों पर सटीक और प्रभावी प्रहार करने में सक्षम है, फिर चाहे वह दुश्मन के चलते हुए युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर हों या फिर स्थिर लक्ष्य जैसे बंदरगाह और बेस। इस मिसाइल का गाइडेंस सिस्टम और स्टेल्थ कैपेबिलिटी इसे बेहद घातक बनाती हैं। उड़ान के बीच में यह इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और मल्टी‑GNSS का इस्तेमाल करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ती है। साथ ही इसकी बेहतरीन एयरोडायनामिक कैपेबिलिटी उड़ान के दौरान हवा का असर (drag) कम करती है, इससे भी मिसाइल को आसानी से आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
अंतिम चरण में यह एक्टिव रडार होमिंग (ARH) तकनीक का प्रयोग करती है, जो लक्ष्य पर बिल्कुल सटीक प्रहार सुनिश्चित करती है। इसका उड़ान मार्ग खास तरह से तैयार किया गया है—यह स्किपिंग, कम ऊँचाई और रडार से बचने वाले रास्तों से उड़ती है। कम ऊँचाई पर उड़ान भरने से दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाते। इसकी बेहद तेज़ गति और लचीलेपन के कारण इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है।
हाइपरसोनिक मिसाइल क्लब में भारत
भारत की LR‑AShM जैसी या उससे बेहतर हाइपरसोनिक एंटी‑शिप मिसाइलें रूस और चीन के पास पहले से तैनात हैं, जबकि अमेरिका, फ्रांस और जापान अभी विकास के चरण में हैं। रूस की Zircon और चीन की DF‑21D/DF‑26 मिसाइलें ऑपरेशनल हैं, अमेरिका की Dark Eagle (LRHW) और CPS जल्द तैनात होंगी।
| देश | मिसाइल | गति | रेंज | स्थिति / उपयोग |
|---|---|---|---|---|
| रूस | Tsirkon (Zircon) | मैक 8–9 | ~1000 किमी | पहले से तैनात; जहाज़ और पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल। |
| चीन | DF‑21D “Carrier Killer” | मैक 10+ | ~1500 किमी | बैलिस्टिक एंटी‑शिप मिसाइल; अमेरिकी कैरियर को निशाना बनाने के लिए। |
| चीन | DF‑26 | मैक 10+ | ~3500–4000 किमी | लंबी दूरी की एंटी‑शिप बैलिस्टिक मिसाइल; परमाणु और पारंपरिक दोनों भूमिकाओं में। |
| अमेरिका | Dark Eagle (LRHW) | मैक 5+ | ~3500 किमी | 2026 में पहली तैनाती; ग्राउंड‑बेस्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल। |
| अमेरिका | CPS (Conventional Prompt Strike) | मैक 5+ | ~2500 किमी | विकासाधीन; नौसेना जहाज़ और पनडुब्बी से लॉन्च। |
| फ्रांस | ASN4G (भविष्य की मिसाइल) | मैक 7–8 | ~1000 किमी | विकासाधीन; परमाणु क्षमता के साथ। |
| जापान | HVGP (Hypersonic Glide Vehicle) | मैक 5–7 | ~1000 किमी | विकासाधीन; तटीय रक्षा और जहाज़ों को रोकने के लिए। |
| भारत | LR‑AShM | मैक 10 (बूस्ट), मैक 5 (ग्लाइड) | ~1500 किमी | Phase‑II परीक्षण सफल; पूरी तरह स्वदेशी, नौसेना के लिए। |
क्या मौजूदा डिफेंस सिस्टम रोक पाएंगे LR‑AShM को ?
दुनिया में अभी कोई भी ऐसा डिफेंस सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है जो भारत की LR‑AShM जैसी हाइपरसोनिक मिसाइल को निश्चित रूप से रोक सके। कुछ देशों ने हाइपरसोनिक मिसाइल‑डिफेंस पर काम शुरू किया है, लेकिन यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और चुनौतियों से भरी मानी जाती है। अगर भारत की इस हाइपरसोनिक मिसाइल की बात करें तो इसे पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि इसकी स्पीड बेहद तेज़ होती है। यह रडार इवेडिंग रास्तों पर आगे बढ़ती है और रडार पर देर से दिखती है। इसके अलावा यह टर्मिनल फेज़ में दिशा बदल सकती है, जिससे इंटरसेप्टर मिसाइल भ्रमित हो जाती है। दुनिया में कई देश में हैं जो हाइपरसोनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहे हैं।
| देश/संगठन | सिस्टम | क्षमता | स्थिति |
|---|---|---|---|
| अमेरिका | Aegis Combat System + SM‑6 / SM‑3 | सुपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम, लेकिन हाइपरसोनिक के खिलाफ सीमित। | ऑपरेशनल, पर हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए पर्याप्त नहीं। |
| अमेरिका | Glide Phase Interceptor (GPI) | खास तौर पर हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल को रोकने के लिए डिज़ाइन। | विकासाधीन, 2030 तक तैनाती की संभावना। |
| रूस | S‑400 / S‑500 सिस्टम | बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों को रोकने में सक्षम; S‑500 को हाइपरसोनिक इंटरसेप्शन के लिए डिज़ाइन किया गया। | S‑500 सीमित तैनाती में, लेकिन वास्तविक क्षमता पर सवाल। |
| चीन | HQ‑19 / HQ‑26 | बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस; हाइपरसोनिक मिसाइलों के खिलाफ रिसर्च जारी। | विकासाधीन। |
| इज़राइल + अमेरिका | Arrow‑4 (भविष्य) | बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस; हाइपरसोनिक खतरे को ध्यान में रखकर डिज़ाइन। | विकासाधीन। |








