भारत को स्टेल्थ फ्रिगेट टेक्नोलॉजी ऑफर
जापान ने भारत को एक बड़ा ज़बरदस्त ऑफर दिया है। जापान का ऑफर है अपने Mogami-Class स्टेल्थ फ्रिगेट्स को मेक इन इंडिया के तहत ज्वाइंट प्रोडक्शन करने का। इसके तहत इन अत्याधुनिक युद्धपोतों का ना सिर्फ निर्माण भारतीय शिपयार्ड्स में किया जा सकेगा बल्कि डिजाइन से लेकर पूरी तकनीक भी शेयर की जाएगी। इसके साथ ही जापान मटीरियल सपोर्ट और तकनीकी सहयोग भी देगा। जापान का यह प्रस्ताव भारत–जापान नौसैनिक सहयोग को मज़बूत करेगा और चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का संतुलन बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा भारत के दृष्टिरोण से यह भारतीय शिपबिल्डिंग क्षमता को बढ़ावा देगा और आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत रक्षा उत्पादन को मज़बूत करेगा। जापान का यह प्रस्ताव उसकी बदलती रक्षा निर्यात नीति को दर्शाता है, जो पारंपरिक प्रतिबंधों से आगे बढ़ रही है। आपको बता दें की साल 2014 के बाद जापान ने हथियार एक्सपोर्ट के लिए खोलना शुरू किए थे और अब Mogami-class जैसे advanced platforms अपने allies को ऑफर कर रहा है।
क्यों खास है Mogami Class स्टेल्थ फ्रिगेट ?
Mogami-Class एक अत्याधुनिक stealth multi-role frigate है, जिसे आधुनिक युद्ध की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें केवल लगभग 90 नाविकों का छोटा क्रू होता है, क्योंकि इसमें बेहद उच्च स्तर की automation तकनीक अपनाई गई है। यह जहाज़ आधुनिक सेंसर, रडार और मिसाइल सिस्टम से लैस है और तीनों भूमिकाओं — एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (anti-submarine warfare), एंटी-शिप ऑपरेशन्स (anti-ship operations), और एयर डिफेंस(air defence) — में समान रूप से सक्षम है। Mogami-Class एक अत्याधुनिक मल्टीपरपज़ स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे आधुनिक तकनीक और उच्च स्तर की ऑटोमेशन के साथ तैयार किया गया है। इसका डिस्प्लेसमेंट लगभग 4,000 टन है और यह 30 नॉट्स से अधिक की गति तक पहुँच सकता है। इसके अपग्रेडेड वर्ज़न में 32-सेल VLS (Vertical Launch System) लगाया गया है, जो इसे मिसाइल क्षमता के मामले में और भी शक्तिशाली बनाता है। इसकी प्रति जहाज़ लागत लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है।
भारत के पास Mogami -Class की टक्कर के कौन से विकल्प हैं
| विशेषता / क्लास | Mogami-Class (जापान) | Nilgiri-Class (Project 17A, भारत) | Shivalik-Class (Project 17, भारत) | Talwar-Class (Krivak III, रूस निर्मित भारत के लिए) |
|---|---|---|---|---|
| डिस्प्लेसमेंट | ~5,500 टन | ~6,700 टन | ~6,200 टन | ~4,000 टन |
| गति (Speed) | 30 knots+ | ~28 knots | ~30 knots | ~30 knots |
| क्रू (Crew) | ~90 (ऑटोमेशन ज़्यादा) | ~150–170 | ~250 | ~180 |
| हथियार प्रणाली (VLS) | 32-cell VLS (अपग्रेडेड संस्करण) | 32–48 Barak-8 VLS | 24 VLS (Barak-1, Klub) | 24 VLS (Shtil SAM, Klub) |
| मिसाइलें | एंटी-शिप, एंटी-एयर, टॉरपीडो | BrahMos, Barak-8 | BrahMos, Klub, Barak-1 | BrahMos, Klub, Shtil |
| भूमिकाएँ (Roles) | मल्टी-रोल: एंटी-सबमरीन, एंटी-शिप, एयर डिफेंस | मल्टी-रोल: ASW, AAW, Surface strike | मल्टी-रोल: ASW, AAW, Surface strike | मुख्यतः Surface strike + AAW |
| तकनीक | स्टील्थ डिज़ाइन, आधुनिक सेंसर, रडार, उच्च ऑटोमेशन | स्टील्थ डिज़ाइन, AESA रडार, Barak-8 | स्टील्थ डिज़ाइन, पुराने सेंसर सिस्टम | रूसी डिज़ाइन, सीमित स्टील्थ |
| स्थिति | जापान में सेवा में, भारत को ऑफ़र | निर्माणाधीन (7 जहाज़) | सेवा में (3 जहाज़) | सेवा में (6 जहाज़) |
भारत के पास पहले से ही Nilgiri-Class (Project 17A), आने वाले Project 17B, और सेवा में मौजूद Shivalik-Class और Talwar-Class फ्रिगेट्स हैं, जो Mogami-Class की टक्कर के विकल्प माने जाते हैं। फिर भी भारत जापान के Mogami-Class फ्रिगेट्स में दिलचस्पी दिखा रहा है क्योंकि यह सौदा केवल जहाज़ खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि अतिरिक्त तकनीकी बढ़त और एक रीज़नल प्रोडक्शन हब बनने का अवसर देता है।
भारत को किस तरह का फायदा ?
- ज्वाइंट प्रोडक्शन मॉडल: जापान ने प्रस्ताव दिया है कि इन फ्रिगेट्स का निर्माण भारतीय शिपयार्ड्स में हो, जिससे Make in India और Atmanirbhar Bharat को बढ़ावा मिलेगा।
- तकनीकी बढ़त: Mogami-Class में उच्च ऑटोमेशन है, जिससे कम क्रू (~90 नाविक) के साथ संचालन संभव है। यह भारतीय फ्रिगेट्स की तुलना में अधिक आधुनिक और कुशल है।
- स्टेल्थ और मल्टी-रोल क्षमता: Mogami-Class एंटी-सबमरीन, एंटी-शिप और एयर डिफेंस तीनों भूमिकाओं में सक्षम है, जो Indo-Pacific में चीन की बढ़ती समुद्री शक्ति का संतुलन बनाने में मदद करेगा।
- रणनीतिक सहयोग: जापान के साथ यह डील भारत को न केवल आधुनिक फ्रिगेट्स देगी बल्कि साइबर सुरक्षा, स्पेस-आधारित ISR और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम्स में भी सहयोग का रास्ता खोलेगी।
जापान की ऑस्ट्रेलिया से भी डील डन
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रोजेक्ट SEA 3000 के तहत जापान के साथ एक डील हो चुकी है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी को भी मॉडर्न फ्रिगेट्स की ज़रूरत थी। इसकी बिडिंग प्रक्रिया में जापान की Mitsubishi Heavy Industries (MHI) और जर्मनी की Thyssenkrupp Marine Systems (TKMS) ने हिस्सा लिया था। ऑस्ट्रेलिया ने MHI को चुना क्योंकि जापान का प्रस्ताव सस्ता, ज़्यादा क्षमता वाला और समय पर पूरा करने की गारंटी देता था। ऑस्ट्रेलिया का कहना था कि इस डील में सिर्फ़ आधुनिक Mogami-Class फ्रिगेट्स ही नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाली औद्योगिक साझेदारी का मॉडल भी शामिल है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और इसे जापान का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात सौदा माना जा रहा है। समझौते के तहत शुरुआती तीन अपग्रेडेड फ्रिगेट्स का निर्माण जापान में होगा, जबकि बाकी जहाज़ ऑस्ट्रेलिया के Henderson Defence Precinct में बनाए जाएंगे। कुल मिलाकर Royal Australian Navy को 11 नए फ्रिगेट्स मिलेंगे, जिनमें से पहला जहाज़ 2029 तक मिलने की योजना है।








