अब पनडुब्बी से भी फायर होगी ब्रह्मोस मिसाइल, 800 किमी दूर तक डीप स्ट्राइक करने में सक्षम

By Bhuwan Venu

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ब्रह्मोस बिल्कुल नए अवतार में

ज़मीन से…आसमान से….समंदर से….दुश्मन के ठिकानों पर तबाही के अंगारे बरसाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का अब एक नया अवतार आने वाला है। अब तक हमने ब्रह्मोस के लैंड लॉन्च्ड, एयर लॉन्च्ड और Surface Ship Based वर्जन देखे हैं। लेकिन बहुत जल्द समंदर का सीना फाड़ कर ये मिसाइल दुश्मन को तबाह करने के लिए निकलने वाली है। DRDO इस घातक मिसाइल का सबमरीन लॉन्च्ड वर्जन भी तैयार करने वाला है वो भी एक्सटेंडेड रेंज। एक्स्टेंडेड रेंज की ब्रह्मोस यानी 800 किलोमीटर की रेंज।

पाकिस्तान पहुंचने में बस कुछ मिनट

मतलब ये हुआ कि अगर इस मिसाइल को भारत की सबमरीन अरब सागर में भारतीय समुद्री सीमा में रहते हुए ही दागे तो ये कराची और ग्वादर दोनों को तबाह कर सकती है। गुजरात के सोमनाथ के पास समुद्र से कराची की दूरी केवल 590 किलोमीटर है। तो 3 मैक की स्पीड वाली ये मिसाइल केवल साढ़े 9 मिनट में कराची पर कहर बरपा सकती है। और द्वारिका के पास अरब सागर से अगर ये मिसाइल दागी जाएगी तो ये 652 किलोमीटर दूर ग्वादर को सिर्फ 10.30 मिनट में आसानी से हिट कर सकती है। समुद्र के अंदर सबमरीन से दागे जाने की वजह से इसके लॉन्चर को ट्रैक करना और इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल होगा।

ब्रह्मोस-ER (Extended Range)

ब्रह्मोस ER का सबसे पहला परीक्षण साल 2017 में किया गया था। उस वक्त ब्रह्मोस की रेंज 290 किलोमीटर से बढ़ा कर 400 किलोमीटर की गई थी। फिर मई 2018 में ब्रह्मोस का एक और टेस्ट किया गया। इस टेस्ट की कामयाबी के बाद ब्रह्मोस की रेंज 800 किलोमीटर तक करने की बात कही गई थी। ब्रह्मोस और ब्रह्मोस ER में केवल रेंज का ही अंतर नहीं है। ER में पहले के मुकाबले नई और अपग्रेडेड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बताया जा रहा है कि ब्रह्मोस ER के नेविगेशन और प्रोपल्शन सिस्टम में बदलाव किये गये हैं।

ब्रह्मोस-ER में क्या बदला है ?

ब्रह्मोस में INS यानी Inertial Navigation System और GPS के साथ Global Navigation Satellite System यानी GNSS का इस्तेमाल किया गया है जबकि ब्रह्मोस ER में ये पूरा सिस्टम Hybrid है। इसमें INS और GPS के साथ-साथ NavIC गाइडेंस के अलावा एडवांस सीकर भी लगा है। ब्रह्मोस में कन्वेन्शल रैमजेट इंजन और बूस्टर लगा है जो मिसाइल को पावर देता है लेकिन ब्रह्मोस ER में Modified Ramjet इंजन है जबकि इसके एयर लॉन्च्ड वर्जन में बूस्टर भी नहीं है। ब्रह्मोस की रेंज 290 किलोमीटर है जबकि ब्रह्मोस ER की 800 किलोमीटर। रेंज बढ़ने का मतलब भी समझिये दोस्तों। पहले इस मिसाइल से सीमित दूरी के टैक्टिकल टारगेट्स पर ही स्ट्राइक की जा सकती थी लेकिन अब 800 किलोमीटर की रेंज वाली ये ब्रह्मोस दुश्मन के स्ट्रैटेजिक टारगेट्स तक डीप स्ट्राइक करने की क्षमता हासिल कर लेगी।

12 साल से काम जारी

मिसाइल का ये इम्पैक्ट और बढ़ जाएगा जब इसे समुद्र के अंदर पनडुब्बी से लॉन्च किया जाएगा। वैसे ब्रह्मोस एयरोस्पेस और DRDO सबमरीन लॉन्च्ड ब्रह्मोस के डेवलपमेंट पर साल 2012-13 से ही काम कर रही है। पहली बार 20 मार्च 2013 को विशाखापट्टनम के पास बंगाल की खाड़ी में एक सबमर्ज्ड प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया गया था।इस टेस्ट के बाद से ही सबमरीन लॉन्च्ड ब्रह्मोस को तैयार करने का रास्ता साफ हुआ था।

प्रोजेक्ट 77 क्या है ?

अब ये समझिये कि इस मिसाइल को जिन प्रोजेक्ट 77 सबमरीन्स में तैनात किये जाने की बात है- वो है क्या। तो प्रोजेक्ट 77 भारतीय नौसेना का बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसके तहत 6 SSN यानी Nuclear Powered Attack Submarine बनाई जा रही हैं।लगभग 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत इन पनडुब्बियों को विशाखापट्टनम में बनाया जाएगा। DRDO ब्रह्मोस के इस वर्जन को इंडियन नेवी के प्रोजेक्ट 77 के तहत बनाई जाने वाली न्यूक्लियर अटैक सबमरीन के लिए तैयार कर रहा है। 10 हजार टन वाली इन सबमरीन्स में 1 CLWR-B2 यानी Compact Light-Water Reactor, 200MW और 35 MW के न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन और Turbine-Electric Powertrain लगाये जाएंगे। इसके अलावा 1 Single Shaft Pump-Jet Propulsor भी होगा।

इंडियन नेवी की बढ़ती ताकत

न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली इन पनडुब्बियों की रेंज अनलिमिटेड होगी। इन पनडुब्बियों को ब्रह्मोस ER के अलावा निर्भय क्रूज मिसाइल, वरुणास्त्र और तक्षक हैवी वेट टॉरपीडो से भी लैस किये जाने की योजना है। यानी ये न्यूक्लियर अटैक सबमरीन इंडियन नेवी को एक सेकेंड स्ट्राइक कैपेब्लिटी दे देगी। तभी तो इस प्रोजेक्ट को इंडियन नेवी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।

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