मिलिए भारत के पहले स्वदेशी कामिकेज़ टैंक किलर ड्रोन DRAP से

By Bhuwan Venu

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ड्रोन वॉरफेयर में बढ़ती ताकत

भारत बहुत तेज़ी से ड्रोन वारफेयर में खुद को मजबूत बना रहा है। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स जंग के मैदान में अलग-अलग तरह के ड्रोन के बेहतर से बेहतर इस्तेमाल पर काम कर रही है। लगातार तीनों ही सेनाओं में ड्रोन ऑपरेटर्स तैयार किए जा रहे हैं ताकि आने वाली लड़ाईयों में ड्रोन वॉरफेयर में हम पीछे ना रह जाएं। अच्छी बात ये है कि इसके साथ-साथ तेजी से भारत में ड्रोन डेवलपमेंट और प्रोडक्शन का भी काम हो रहा है। और ये ड्रोन उसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है- इसका नाम है DRAP यानी Deployable Reconnaissance and Attack Platform।

मेड इन इंडिया है DRAP

ये कोई मामूली ड्रोन नहीं है बल्कि भारत का पहला स्वदेशी कामिकेज टैंक किलर ड्रोन है। बैंगलोर बेस्ड ड्रोन डेवलपर जुलू डिफेंस ने इस कामिकेज ड्रोन को बनाया है। सबसे पहले साल 2024 में कंपनी ने इस ड्रोन का कॉन्सेप्ट दुनिया के सामने रखा था। और तभी से इसे भारत का पहला स्वदेशी कामिकेज टैंक किलर ड्रोन के नाम से पुकारा जाने लगा था। इंडियन आर्मी से रिटायर्ड मेजर समर तूर जुलू डिफेंस के चीफ ग्रोथ ऑफिसर हैं। DRAP को जब कंपनी ने अनविल किया था तब उन्होंने बताया था कि ये ड्रोन ना केवल नई तकनीक का है बल्कि इसके ज़्यादातर पार्ट्स भारत में ही बनाये गये हैं। अब मेजर समर तूर ने ट्वीट कर बताया है कि जुलू डिफेंस का ये DRAP ड्रोन मिशन के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है।

https://twitter.com/samartoor3086/status/1980472275540574288

DRAP की खूबियां क्या हैं ?

DRAP एक कामिकेज़ ड्रोन है लेकिन ये अटैक के साथ-साथ Reconnaissance यानी टोह लगाने का भी काम कर सकता है। ये एक VTOL Loitering Munition है यानी वर्टिकल टेक ऑफ और लैंड कर सकता है। ये बैटल फील्ड में होवर कर सकता है यानी इसमें हवा में मंडराने की क्षमता है। इससे ये टारगेट को सही तरह से देखकर, उस पर सटीक निशाना लगाकर हमला कर सकता है। इसमें 1.5 किलोग्राम तक का पेलोड रहता है और इसकी रेंज 30 किलोमीटर के करीब है। फिलहाल कंपनी ने इसकी और स्पेसिफिकेशन्स डिस्क्लोज नहीं की है, जैसे इसमें किस नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है- ये फुली ऑटोनोमस है या फिर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इसमें GPS और INS नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।

AI ने बनाया और ज्यादा खतरनाक

इसके साथ-साथ इसमें AI-Assisted Targeting की तकनीक भी है जो टारगेट को पहचानने और सटीक हमला करने में मदद करती है। इसमें FPV यानी First Person View की कैपेब्लिटी भी हो सकती है जिससे ऑपरेटर को रियल टाइम फीड मिलती रहे। इस ड्रोन को खास तौर पर शॉर्ट रेंज में मौजूद दुश्मन के आर्मर्ड व्हिकल्स, टैंक्स और रडार को तबाह करने के लिए बनाया गया है। हल्का और छोटा होने की वजह से ये टैक्टिकल मिशन के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है। इसे इंटरसेप्ट करने के लिए दुश्मन को अपना अच्छा खासा एफर्ट लगाना पड़ेगा…यानी भारत का ये पहला होवरिंग एंटी टैंक कामिकेज ड्रोन बैटलफील्ड में दुश्मन की लोकेशन का पता लगाने के साथ-साथ उस पर हमला करने और उसे तबाह करने की क्षमता रखता है।

भविष्य की लड़ाई के लिए तैयारी

उम्मीद है भारत की सेना में शामिल हो कर ये ड्रोन अपनी योग्यता भी साबित करेगा। वैसे जुलू डिफेंस के और भी कई ड्रोन्स की टेस्टिंग की जा रही है। सेना भी इन ड्रोन्स को परख रही है। इनमें हथेली से लॉन्च किये जा सकने वाले होवर बी, टोही मिशन के लिए खास तौर पर बनाये गये Recon90 और वेपनाइज्ड UAS प्लेटफॉर्म Volume35 शामिल है। Volume35 81 MM के मोर्टार शेल्स को ऊंचाई से दुश्मन पर गिरा देता है।तो DRAP के साथ-साथ ये सभी UAS ड्रोन वारफेयर में ख़तरनाक हथियार साबित हो सकते हैं। इनकी टेस्टिंग चल रही है। देखते हैं इन्हें कब तक सर्विस में शामिल किया जाता है।

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