INS अरिदमन हुई इंडियन नेवी में शामिल, भारत की तीसरी परमाणु न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन

By Alok Ranjan

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भारत की बढ़ती अंडरवाटर ताकत

भारत ने 3 अप्रैल 2026 को अपने तीसरे स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन को नौसेना में शामिल कर लिया है। इससे पहले INS अरिहंत (2016) और INS अरिघात (2024) को सेवा में शामिल किया गया था। इस ऐतिहासिक क्षण ने भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को नई ऊंचाई दी है। इसका रणनीतिक महत्व ये है कि INS अरिदमन के साथ भारत के पास पहली बार तीन सक्रिय SSBN एक साथ मौजूद हैं। यह निरंतर समुद्री प्रतिरोधक क्षमता (Continuous At-Sea Deterrence) सुनिश्चित करता है। INS अरिदमन को Strategic Forces Command (SFC) में शामिल किया जाएगा। यह संगठन भारत के परमाणु हथियारों के संचालन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

INS अरिदमन

कमीशनिंग: 3 अप्रैल 2026
विशेषताएँ: 7,000 टन विस्थापन, 130 मीटर लंबाई,83 मेगावाट न्यूक्लियर रिएक्टर।
मारक क्षमताएं: 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स, K-4 और K-15 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस।

न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी (SSBN) की ज़रूरत क्या है ?

परमाणु-संचालित पनडुब्बियां लंबी अवधि तक पानी के अंदर रह सकती हैं और परमाणु मिसाइलों से लैस होती हैं, जो भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती हैं। न्यूक्लियर ट्रायड जो कि थल, वायु और समुद्र आधारित परमाणु हथियारों का संतुलन है उसमें बेहद अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा ये सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी यानी किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी हमला करने की क्षमता प्रदान करती है।

सामरिक विश्लेषण

निरंतर प्रतिरोधक क्षमता मिलती है, यानी तीन SSBN होने से भारत हमेशा कम से कम एक पनडुब्बी को समुद्र में तैनात रख सकता है। क्षेत्रीय सुरक्षा में बेहद अहम रोल निभाती है जैसे हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों का संतुलन इसके द्वारा किया जा सकता है। इसके शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बीच भारत की स्थिति मजबूत हुई है। सभी SSBN स्वदेशी तकनीक से निर्मित हैं, जो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भर भारत को दर्शाता है।

INS अरिहंत

लॉन्च: 2009
कमीशनिंग: अगस्त 2016
विशेषताएँ: 6,000 टन विस्थापन, 111 मीटर लंबाई, 83 मेगावाट न्यूक्लियर रिएक्टर।
भूमिका: भारत की परमाणु त्रयी (Nuclear Triad) का समुद्री हिस्सा बनने वाली पहली पनडुब्बी।

INS अरिघात

लॉन्च: 2017
कमीशनिंग: 29 अगस्त 2024
विशेषताएँ: 6,000 टन विस्थापन, 111.6 मीटर लंबाई, 83 मेगावाट न्यूक्लियर रिएक्टर।
महत्व: अरिहंत की क्षमता को आगे बढ़ाते हुए भारत की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया।

चौथी न्यूक्लियर पनडुब्बी ट्रायल में 5वीं पर काम शुरू

INS अरिसुदन भारत की चौथी Arihant-क्लास परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैI फिलहाल इसके सी ट्रायल्स हो रहे हैंI INS अरिसुदान भारत के परमाणु ट्रायड Nuclear Triad) को और मजबूत करेगी और देश की निरंतर समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगी। यह पनडुब्बी तकनीकी और सामरिक दृष्टि से अपने पूर्ववर्तियों से उन्नत मानी जाती है और भारत की समुद्री सुरक्षा और सामरिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा 5वीं SSBN पर भी काम शुरु हो चुका है, जो बाकी चार से ज्यादा बड़ी और ज्यादा शक्तिशाली होगीI

INS अरिसुदन

लॉन्च: अक्टूबर 2024
अनुमानित कमीशनिंग: 2027
विस्थापन: लगभग 7,000 टन
लंबाई: लगभग 130 मीटर
रिएक्टर क्षमता: 83 मेगावाट कॉम्पैक्ट लाइट-वाटर रिएक्टर (CLWR-B1)
मिसाइल क्षमता: 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइलें
गति: सतह पर 12-15 नॉट्स, पानी के अंदर 24 नॉट्स
गहराई: परीक्षण गहराई 300-400 मीटर
सेंसर: USHUS सोनार, पंचेंद्रिय एकीकृत सोनार और संचार प्रणाली

कितनी मजबूत है भारत की सबमरीन फ्लीट ?

चीन के पास एक्टिव सबमरीन्स 70-75 के करीब हैं, जिनमें से 32 न्यूक्लियर पावर्ड हैंI वहीं पाकिस्तान के पास 8 पनडुब्बियां हैं, उसके पास एक भी न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन नहीं हैI जबकि भारत के पास कुल लगभग 24 पनडुब्बियां हैं, जिनमें से 3 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) हैं। बाकी पनडुब्बियां डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें मुख्य रूप से Type 209/1500 और Scorpene क्लास की पनडुब्बियां शामिल हैं।

भविष्य की योजनाएं

भारत भविष्य में अपनी पनडुब्बी क्षमता को और बढ़ाने के लिए सक्रिय है। वर्तमान में, भारत ने तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिदमन को शामिल किया है, और इसके बाद भी नई परमाणु पनडुब्बियों के विकास की योजना है। इसके अलावा, डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के क्षेत्र में भी भारत का Project 75I चल रहा है, जिसके तहत छह नई उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल की जाएंगी। ये पनडुब्बियां एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे उनकी पानी के अंदर रहने की क्षमता बढ़ेगी। इस प्रकार, भारत की नौसेना अपनी पनडुब्बी बेड़े को परमाणु और डीजल दोनों प्रकार की पनडुब्बियों से मजबूत करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है, जो भविष्य में समुद्री सुरक्षा और सामरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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