कौन-कौन से हथियारों से लड़ी थी मेजर शैतान सिंह की फौज ?
कंपनी के पास टोटल 9 LMG थी, सैनिकों के पास 303 एनफिल्ड रायफल और 600 गोलियां थीं। ये रायफल सेकेंड वर्ल्ड वॉर की थी और इसमें एक गोली फायर करने के बाद दोबारा लोड करनी पड़ती थी। चार्ली कंपनी के पास 3 इंच और 2 इंच मोर्टार थे जिनके लिये 1000 रॉकेट्स दिये गये थे। इस बटालियन के पास ना तो लैंड माइन्स थी और ना ही आर्टिलरी सपोर्ट। इतना ही नहीं जमा देने वाली इस ठंड में इनके पास ना तो सही गर्म कपड़े और जूते थे ना ही टेंट। इतना ही नहीं, खाना खाना भी इनके लिए मुहाल हो गया था। इतनी ठंड में ना सब्ज़ियां पकती थीं, ना दाल गलती थी। बावजूद इसके क़रीब माइनस 30 डिग्री टेम्प्रेचर, शरीर को चीर देने वाली हवा और भारी बर्फ़बारी के बीच चार्ली कंपनी डटी हुई थी।
4 दिन के बाद लड़ाई रूकी
रचना सिंह बिष्ट ने परवमीर विजेताओं पर एक किताब THE BRAVE’ लिखी है। इसमें भी उन्होंने हवलदार रामचंद्र के हवाले से बताया है कि पतली जर्सी, पतला कोट और कॉटन पैंट पहने जवानों का वहां टिकना मुश्किल हो रहा था। इंडियन आर्मी की 114 इन्फेंट्री अब चीनी दुश्मनों से मुक़ाबले के लिए तैयार थी। मिशन एक ही था। चुशुल एयरस्ट्रिप की तरफ़ बढ़ने वाले दुश्मन के हर एक क़दम का मुंहतोड़ जवाब देना। लड़ाई 19 अक्तूबर को छिड़ चुकी थी। दुश्मन सेना तेज़ी से एक-एक पोस्ट पर कब्ज़ा करती हुई आगे बढ़ रही थी। अब ख़तरा चुशुल पर था लेकिन इसी बीच 4 दिन की लड़ाई के बाद भारत और चीन के बीच बातचीत शुरू हो गई। चीन ने भी अपनी सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया। अब दोनों सेनाएं एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी थी।
सेना ने मेजर शैतान सिंह को पोस्ट छोड़ने को कहा
क़रीब 3 हफ़्ते तक यही स्थिति बनी रही। बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला तो दोनों देशों के बीच लड़ाई फिर शुरू हो गई। 14 नवंबर को शुरू हुई लड़ाई में चुशुल में हमला 18 तारीख़ को हुआ। चीन ने एक साथ स्पैंगुर गैप और रेज़ांग ला पर अटैक किया।चीन ने इस बार हमले की शुरुआत NEFA यानी अरुणाचल प्रदेश से की लेकिन ये साफ़ था कि वो किसी भी समय लद्दाख में भी अटैक करेगा। 13 कुमाऊं के ब्रिगेड कमांडर को मालूम था कि चीन अगर हमला करता है तो उसके पास ना केवल हथियार ज़्यादा होंगे बल्कि फौजी भी बहुत ज़्यादा संख्या में होंगे। इसलिए चार्ली कंपनी को ऑर्डर दिया गया कि एम्युनिशन ख़त्म होने पर कंपनी पीछे हट जाए। लेकिन जब ये संदेश मेजर शैतान सिंह ने अपने फौजियों को सुनाकर उनसे राय ली तो एक भी फौजी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं था। सबने एक सुर में कहा कि भले ही जान चली जाए लेकिन पोस्ट नहीं छोड़ेंगे। कंपनी रेज़ांग ला में डटी रही।
हड्डियां जमा देने वाली ठंड में दोबारा युद्ध शुरू हुआ
17 नवंबर की शाम आउट पोस्ट पर तैनात फौजी ने आकर रिपोर्ट दी। उसने बताया कि भारी संख्या में चीनी सैनिक, टैंक और आर्टिलरी रेज़ांगला के सामने की पहाड़ी के गैप में गई। फौजी की इस रिपोर्ट के बाद सबको ये समझ में आ गया था कि चीन किसी भी वक़्त हमला करने वाला है। 17 नवंबर की रात क़रीब दस बजे से चुशुल में भारी बर्फ़बारी शुरू हो गई। दो घंटे बाद मौसम थोड़ा साफ़ हुआ। धुंध छट चुकी थी और सामने बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहा था। हर कोई अपनी पोजिशन पर मुस्तैद था। और फ़िर वो वक़्त भी आ गया जब चार्ली कंपनी का चीन से मुक़ाबला हुआ, तारीख़ थी 18 नवंबर 1962, समय- क़रीब 3.30 बजे, रात के अंधेरे में LMG की ब्रस्ट फायरिंग ने हर किसी को चौंका दिया |
चीन का पहला हमला कैसे हुआ नाकाम ?
इसके साथ ही फ्लेयर लाइट से पूरा आसमान लाल रोशनी से नहा उठा| फ़ायरिंग के बाद मेजर शैतान सिंह ने हवलदार राम चंदर से कहा कि पता करो फ़ायरिंग कहां हुई है।हवलदार राम चंदर ने 8 प्लाटून को फोन लगाया। जमादार हरि राम से बात हुई तो पता लगा कि सामने पहाड़ की गली से क़रीब 10 चीनी सैनिक पोस्ट की तरफ़ बढ़ रहे थे। लिसनिंग पोस्ट से LMG ने घुसपैठिये चीनियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। 10 में से 7 वहीं ढेर हो गये जबकि 3 वापस भाग गये। चीन का पहला हमला नाकाम हो चुका था। थोड़ी ही देर बाद 7 प्लाटून से कंपनी कमांडर के पास फोन आया। जमादार सुरजा राम ने बताया कि 500 से अधिक चीनी फौजी सामने पहाड़ की गली से आगे बढ़ रहे हैं। चार्ली कंपनी ने इस गली का Code Name मैना रखा था। सुरजा राम के फोन के बाद सब तैयार हो गये। दुश्मन तब दूर था।
मेजर शैतान सिंह ने की जबरदस्त व्यूह रचना
THE BRAVO में रचना बिष्ट ने लिखा है कि मेजर शैतान सिंह ने तब तक फायरिंग के ऑर्डर नहीं दिये जब तक चीनी 300 गज की रेंज में नहीं आ गये। जैसे ही वो रेंज में आये, मेजर शैतान सिंह ने ऑर्डर दे दिया और इसके साथ ही 7 प्लाटून की 3 LMG और 9 प्लाटून की 2 LMG ने एक साथ फ़ायरिंग शुरू कर दी। इसके साथ ही मोर्टार को मैना गैप में फायरिंग करने का ऑर्डर दिया गया। LMG और मोर्टार की एक साथ हुई फ़ायरिंग ने चीनी फौज पूरी तरह तबाह हो गई। सैकड़ों की संख्या में चीनी फौजी मैना गैप में मारे गये। रेज़ांगला पर चीन का दूसरा अटैक भी फेल हो चुका था। इधर 8 प्लाटून ने ख़बर की कि क़रीब 800 चीनी फौजी तेज़ी से उनकी पोस्ट की तरफ़ बढ़ रहे हैं।
चीनियों को वीर अहिरों की ललकार
हवलदार राम चंद्र ने बताया कि मेजर शैतान सिंह ने जमादार हरि राम से कहा- आप वीर अहीर हैं, पूरे जोश से लड़िये। अपने मेजर की बात सुन कर हरि राम ने भी जवाब दिया- आप चिंता ही मत करिये साहब, हम लड़ेंगे।इस बार भी जैसे ही चीन के सैनिक रेंज में आए, 8 प्लाटून और 9 प्लाटून के साथ-साथ निहाल सिंह ने भी अपनी LMG से उन पर आग बरसानी शुरू कर दी। एक साथ 7-8 LMG से बरसती गोलियों ने 100 से ज़्यादा चीनी फौजियों को वहीं ढेर कर दिया। बाकी पीठ दिखा कर भाग गये। इस बार भी चीनी फौजियों का अटैक फेल हो गया।थोड़ी देर बाद 7 प्लाटून ने चीनी फौजियों के आगे बढ़ने की ख़बर दी। इस बार चीनियों की तादाद 1000 के क़रीब थी। तीनों प्लाटून ने इस बार भी उन्हें आगे तक आने दिया और फ़िर एक साथ हमला बोला। LMG की फ़ायरिंग के बाद रेज़ांगला की बर्फ़ से ढंके गैप चीनी सैनिकों के ख़ून से लाल हो गये।




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