पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड ने दर्जन भर बलोचों को गोलियों से भूना, बलोचिस्तान में भयंकर तनाव

By Shilpi Sharma

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13 की मौत, दर्जनों घायल

बलूचिस्तान के ग्वादर ज़िले के कंतानी में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने मछुआरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। शुरुआती रिपोर्टों में 8 लोगों की मौत बताई गई थी, लेकिन ताज़ा जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। दर्जनों लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद कंतानी क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया है और स्थानीय लोग भयभीत हैं। रिपोर्टों के अनुसार, फायरिंग बिना किसी चेतावनी के की गई, जिससे मछुआरे और मजदूर सीधे निशाने पर आ गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हालिया कार्रवाई के बाद माहौल डर और असुरक्षा से भर गया है। रिपोर्टों के अनुसार, फायरिंग और झड़पों के दौरान न केवल कई लोग घायल हुए बल्कि संपत्ति को भी नुकसान पहुँचा है—घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा बल इस समय ग्वादर और पसनी में संदिग्ध उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों का असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ रहा है, क्योंकि मछुआरे और मजदूर अक्सर बीच में फँस जाते हैं। लगातार सैन्य गतिविधियों और अचानक हुई फायरिंग ने लोगों में यह आशंका पैदा कर दी है कि आगे और हिंसा हो सकती है।

बलोचों पर बढ़ता पाकिस्तानी ज़ुल्म

बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन – आज़ाद BSO‑Azad ने आरोप लगाया है कि बलोच नागरिकों को बेहद कठिन हालात में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि सरकारी अधिकारी—जिनमें पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड, फ्रंटियर कॉर्प्स, सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के लोग शामिल हैं—गरीब ड्राइवरों और दुकानदारों से जबरन रिश्वत वसूल रहे हैं। संगठन का कहना है कि तयशुदा रकम लेने के बावजूद सुरक्षा कर्मी मज़दूरों को पीटते और अपमानित करते हैं, यहाँ तक कि उनकी गाड़ियाँ और दुकानें जला दी जाती हैं। BSO‑Azad ने आगे कहा कि कंतानी की घटना बलोच लोगों पर जारी बड़े पैमाने के अत्याचार और जनसंहार का हिस्सा है। उनके अनुसार पाकिस्तान रोज़ाना निर्दोष बलोच नागरिकों का खून बहा रहा है। बलोचिस्तान में जीवन के हर पहलू को तबाह कर दिया गया है—आर्थिक अधिकार छीन लिए गए हैं, लोगों को उजाड़ा जा रहा है और इससे बलोच आबादी में गहरी आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।

बलोच युवकों को लापता करना जारी

मई 2026 तक बलूचिस्तान में हालात बेहद अस्थिर हो गए हैं, साल के शुरुआत में ही अलगाववादियों के खिलाफ भारी झड़पें हुईं, जिनमें सैकड़ों हताहत हुए।। यहाँ लगातार लापता किए जाने (enforced disappearances) और ग़ैर-न्यायिक हत्याओं (extrajudicial killings) के आरोप पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर लग रहे हैं। PAANK मानवाधिकार विभाग ने रिपोर्ट दी कि 6 मई को तुरबत से एक 35 वर्षीय दुकानदार और क्वेटा से 15 वर्षीय छात्र सईद बलोच को उठा लिया गया। इसके अलावा बलोच यकज्हती कमेटी (BYC) ने बताया कि कई शव मिले हैं जिनमें नसराम बलोच भी शामिल हैं, जो डेढ़ साल से लापता थे। रिपोर्टों के अनुसार शवों पर गंभीर यातना के निशान थे। इसके विरोध में फ्री बलोचिस्तान मूवमेंट ने 28 मई को हेग (नीदरलैंड) में “आसरोख – शोक दिवस” मनाने के लिए प्रदर्शन की घोषणा की है। यह दिन बलोचिस्तान में परमाणु परीक्षणों के दीर्घकालिक प्रभावों को याद करने के लिए रखा गया है।

CPEC की सुरक्षा है पाकिस्तान की प्राथमिकता

पसनी इलाके में हुई मुठभेड़ में चार फाइटर्स को मार गिराया गया और दो सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई। इसके अलावा डुकी क्षेत्र में एक लैंडमाइन विस्फोट में दो सुरक्षा कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को खुफ़िया जानकारी मिली थी कि पसनी के तटीय इलाके में हथियारबंद लड़ाके छिपे हुए हैं, जिसके बाद वहाँ अभियान शुरू किया गया। ग्वादर और पसनी दोनों ही चीन‑पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं, इसलिए इन इलाकों में इस तरह की गतिविधियों को रोकना पाकिस्तान की प्राथमिकता है। हाल के महीनों में बलूचिस्तान में हिंसा और हमले बढ़े हैं—सैन्य काफ़िलों, सुरक्षा चौकियों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा रहा है। इसी वजह से सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर अभियान तेज़ कर दिया है, ताकि फाइटर्स की मौजूदगी को खत्म किया जा सके और CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

राजनीतिक अधिकारों से वंचित बलोचिस्तान

पाकिस्तान और बलोचिस्तान के बीच विवाद राजनीतिक हक़, संसाधनों के बंटवारे और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़ा है। बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा इलाका है, लेकिन वहाँ के लोग कहते हैं कि उन्हें बराबरी का हक़ और राजनीतिक अधिकार नहीं मिले। गैस, खनिज और तटीय इलाकों से अमीर होने के बावजूद, स्थानीय जनता का आरोप है कि इनसे होने वाली कमाई का फायदा बाहर वालों को मिलता है और ग्वादर बंदरगाह व CPEC जैसी परियोजनाओं पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। बलोच फ्रीडम फाइटर्स को रोकने के लिए सेना लगातार अभियान चलाती है, लेकिन आम लोग अक्सर बीच में फँस जाते हैं, जिससे गुस्सा और असंतोष बढ़ता है। साथ ही, बलोच लोग अपनी भाषा और संस्कृति को बचाना चाहते हैं, पर उन्हें लगता है कि पाकिस्तान की नीतियाँ उनकी पहचान को दबा रही हैं। यही वजह है कि बलोचिस्तान में तनाव और विवाद लगातार बना रहता है।

BLA को ऑस्ट्रेलिया ने किया आतंकवादी संगठन घोषित

ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) को आतंकवादी संगठन घोषित कर उस पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। इस फैसले का बलोच नेता मीर यार बलोच ने विरोध किया है। उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सबूत दिखाए कि BLA ने कभी ऑस्ट्रेलियाई हितों पर हमला किया हो। मीर यार बलोच का आरोप है कि यह कदम पाकिस्तान के दबाव और लॉबिंग का नतीजा है, जिसमें बलोचिस्तान की असली हालत और वहाँ के मानवाधिकार संकट को नज़रअंदाज़ किया गया है। उन्होंने भारत समेत दुनिया की ताक़तों से अपील की है कि वे बलोच राष्ट्र के साथ सीधे राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बनाएँ और बलोच संस्थाओं—पासपोर्ट और मुद्रा तक—को मान्यता दें।

बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) बलोचिस्तान का सबसे बड़ा फ्रीडम फाइटर्स का संगठन है, जो पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र बलोच राज्य बनाने की माँग करता है। इसे कई देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है क्योंकि इसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी ढाँचे और चीनी परियोजनाओं पर कई हिंसक हमले किए हैं। BLA की शुरुआत 2000 के आसपास हुई थी और यह गुरिल्ला युद्ध, बम धमाके और आत्मघाती हमलों जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल करता है। संगठन का कहना है कि वह बलोच पहचान, भाषा और संसाधनों की रक्षा के लिए लड़ रहा है।

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