चीन-पाक दोस्ती की खुली पोल, पाकिस्तान छोड़ भागने लगीं चीनी कंपनियां

By Alok Ranjan

Published On:

Date:

CPEC वाली चीनी कंपनी बंद

पुरानी कहावत है दोस्तों कि जब जहाज़ डूबने लगता है तो सबसे पहले चूहे भागते हैं। और अगर ये डूबता जहाज़ अर्थव्यवस्था का तो तब क्या होता है। तब बाहर से आई कंपनियां अपना बोरिया बिस्तर समेट कर भागती हैं। तो पाकिस्तान एक ऐसा ही डूबता जहाज़ है, जिसकी इकॉनमी कई दशकों से गोते लगा रही है। और इस डूबते जहाज़ से विदेशी कंपनियों का लगातार एक्जिट जारी है। इन कंपनियों में बिल्कुल ताजा-ताजा नाम जुड़ा है HanGeng Trade Company का। HanGeng ने पाकिस्तान में अपने प्लांट बंद कर दिये हैं और कर्मचारियों को निकाल दिया है। HanGeng एक चाइनीज़ एक्सपोर्ट कंपनी है। ये कई प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट से जुड़ी हुई है। ये कंपनी CPEC यानी चाइना पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर से जुड़ी शुरुआती कंपनियों में से भी एक है। 2021 में ग्वादर फ्री जोन में कारोबार के लिए इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया था।

Hangeng एक ट्रेडिंग कंपनी है। शुरुआत में ये प्लास्टिक, सेरेमिक और दूसरे कई प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट करती थी। साउथ अमेरिका और अफ्रीका से कच्चा माल मंगवा कर उसे ग्वादर में प्रोसेस किया जा रहा था और फिर चीन भेजा जा रहा था। उस समय इस कंपनी ने ग्वादर साउथ फ्री ज़ोन में अपनी प्रोसेसिंग यूनिट तैयार कर ली थी और नॉर्थ ज़ोन का काम चल रहा था। 4 मई 2024 को पाकिस्तान के तत्कालीन मैरिटाइम मिनिस्टर ने Hangeng & Yuanhua Group के एग्रीकल्चरल इंडस्ट्रीयल पार्क का उद्घाटन किया था। तो 4 मई 2024 को उद्घाटन और 1 मई 2026 को शटर डाउन। जी हां, यही है कहानी ग्वादर में अपना एग्रीकल्चरल इंडस्ट्रीयल पार्क बनाने वाली चाइनीज़ कंपनी Hangeng की। 1 मई को जब पूरी दुनिया मज़दूर दिवस मना रही थी, उस दिन Hangeng ने अपनी फैक्ट्री बंद करने और सभी मजदूरों को निकाल बाहर करने का एलान कर दिया।

चीनी कंपनी पाक से भागी क्यों ?

ऐसा क्या हो गया कि CPEC से जुड़ी, वो भी चीन की कंपनी को पाकिस्तान से अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ गया जबकि इसी साल जनवरी में Hangeng को पाकिस्तान से डंकी मीट यानी गधों का मीट और खाल, चीन एक्सपोर्ट करने की मंज़ूरी भी मिल गई थी। Hangeng के पाकिस्तान से बैकपैक करने की वजह कंपनी ने खुद बताई है। उसने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। दो पन्नों के इस स्टेटमेंट में पाकिस्तान में बिजनेस करने के चैलेंज के साथ-साथ पाकिस्तान में इन्वेस्टर्स के साथ किये जाने वाले रवैये का भी जिक्र किया गया है। कंपनी ने लिखा कि

प्रिय भागीदारों, मीडिया और दोस्तों,हमें बड़े दुख के साथ यह घोषणा करनी पड़ रही है कि 1 मई, 2026, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर, हमें पाकिस्तान और चीन में अपने सभी कर्मचारियों को यह सूचित करने के लिए विवश होना पड़ रहा है कि, मौजूदा गैर-बाजार कारकों और परिचालन बाधाओं के कारण, कंपनी अब अपने सामान्य परिचालन को जारी रखने में असमर्थ है और उसे अपनी फैक्ट्री बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।हमारी फेसेलिटी ने चीन सीमा शुल्क के निरीक्षण और क्वारंटीन मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है और यह अंतरराष्ट्रीय HACCP खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का भी पालन करती है। हालांकि, सभी अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों को पूरा करने के बावजूद, इस परियोजना को व्यावहारिक रूप से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त नहीं हुई हैं, और निर्यात अवरुद्ध ही रहा है। पिछले तीन महीनों के दौरान, हमने सभी संबंधित अधिकारियों के साथ धैर्य और पूर्ण सहयोग बनाए रखा है, और साथ ही उच्च-स्तरीय समन्वय के माध्यम से समाधान खोजने के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। इस अवधि के दौरान, कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें कर्मचारियों का वेतन, संविदात्मक दंड, बिजली का खर्च और कंटेनर विलंब शुल्क शामिल हैं।

चीनी कंपनी ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल

Hangeng ने सीधे पाकिस्तान सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है। कहा है कि पाकिस्तान सरकार सही मायनों में निवेश के लिए माहौल बनाए। इतना ही नहीं कंपनी ने उन निवेशकों को भी सावधान किया है जो पाकिस्तान में इन्वेस्ट करना चाह रहे हैं। माना जाता है कि कंपनी ने ग्वादर फ्री जोन में अपने फैक्ट्री सेटअप के लिए 50 मिलियन डॉलर से भी ज़्यादा का निवेश किया था। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कंपनी ने एकदम से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। बल्कि ये कंपनी पिछले कई सालों से लगातार ग्वादर फ्री जोन की अव्यवस्थाओं और सरकारी लेट-लतीफी से परेशान हो चुकी थी। 24 अगस्त 2024 को कंपनी के ऑफिशियल X हैंडल से एक ट्वीट किया था। इसमें लहसुन के बीच में फंसे एक संतरे की कली की तस्वीर थी। ट्वीट में लिखा गया था कि जिस जगह से आप जुड़े हुए ना हों उस जगह में खुद को फिट करने की कोशिश ना करें। वैसे तो इस ट्वीट के कई मायने हो सकते हैं लेकिन आज जब इस कंपनी ने पाकिस्तान को टाटा-बाय-बाय बोल दिया है तो फिर इस ट्वीट और इस तस्वीर के मायने समझ में आ रहे हैं कि कंपनी को पाकिस्तान में काम करना कितना मुश्किल हो रहा था।

19 जून 2025 को कंपनी ने एक और ट्वीट किया था। इस ट्वीट में लिखा था कि पाकिस्तान में एक इन्वेस्टर के तौर पर, मुझे कई मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आप सोच सकते हैं कि पाकिस्तानी लोगों के लिए यह कितना मुश्किल है। मैं दुआ करता हूं कि अल्लाह पाकिस्तानी लोगों पर कृपा करे।

अगस्त 2025 को किए ट्वीट में लिखा था कि ग्वादर फ्री ज़ोन में अभी भी साफ़ पानी, पक्की सड़कें और अब तो पक्की बिजली भी नहीं है। बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना एक फ्लैगशिप इन्वेस्टमेंट हब कैसे काम कर सकता है?हम सरकार से ज़ोर देकर कहते हैं कि वह तुरंत एक्शन ले और अपने वादे पूरे करे!

बताइये, पाकिस्तान दुनिया भर में ग्वादर के बारे में ढोल पीटता रहता है, झूठ पर झूठ बोलता रहता है और उसने अब तक अपने इन्वेस्टर्स के लिए पानी, सड़क और बिजली जैसी बेसिक फेसेलिटी का इंतज़ाम नहीं किया है। HanGeng का ये ट्वीट उसकी बढ़ती फ्रस्ट्रेशन को दिखा रहा था। एक ट्वीट में तो कंपनी ने पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर से ही ग्वादर की हालत ठीक करने की अपील की थी।लेकिन ये सब कुछ नहीं हुआ। हुआ क्या, इन शिकायतों के बाद कंपनी का कामकाज और अटकाया जाने लगा। किसी भी चीज़ की मंज़ूरी मिलने में टालमटोल की जाने लगी जिससे कंपनी को जबरदस्त घाटा होने लगा और इसी वजह से आखिरकार हार-पार कर HanGeng ने पाकिस्तान से बिजनेस समेटने का एलान कर दिया।

सैकड़ों कंपनियों ने पाकिस्तान छोड़ा

लेकिन पाकिस्तान छोड़ने वाली HanGeng अकेली कंपनी नहीं है। पिछले कुछ सालों में 1-2 नहीं बल्कि 125 से ज़्यादा कंपनियों ने पाकिस्तान में अपना कामकाज समेट लिया है…और आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इन कंपनियों में बहुत सारी पाकिस्तान के आयरन क्लैड ब्रदरहुड वाले चीन की भी हैं।इनमें BGP चाइना नेशनल पेट्रोलियम कोरपोरेशन, China Datang Overseas investment, China Metallurigical  Construction समेत और भी कई कंपनियां शामिल हैं। दो दिन पहले ही ख़बर आई है कि UAE बेस्ड टेलीकॉम जाइंट पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी लिमिटेड में किये गये अपने इनवेस्टमेंट से पीछे हटने वाला है। हालांकि कंपनी ने अभी इस बात से इनकार किया है लेकिन पाकिस्तान की मीडिया और बिजनेस कम्यूनिटी में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर हैं। इससे पहले टेलीनॉर ने भी पाकिस्तान छोड़ दिया था। माइक्रोसॉफ्ट ने पाकिस्तान में अपना कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया है। कंपनी ने सारे स्टॉफ को भी निकाल दिया था।पिछले साल प्रॉक्टर एंड गैंबल ने भी पाकिस्तान में अपने ऑपरेशन को समेटने का एलान किया था। वो अब पाकिस्तान में केवल थर्ड पार्टी डिस्ट्रिब्यूशन करेगी। टोयोटा, होन्डा जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के भी प्रोडक्शन बीच-बीच में बंद करने पड़े हैं। पिछले साल के अंत तक फाइज़र, सनोफी, नोवार्टिस समेत कई दिग्गज फार्मा कंपनियों ने भी पाकिस्तान को अलविदा बोल दिया है।

सच छुपाने की भरपूर कोशिश

अब जब इतनी सारी कंपनियों के पाकिस्तान छोड़ने पर बवाल हुआ तो अपनी नाकारियों को छिपाने का भी काम शुरू हो गया। डॉन ने पिछले साल अक्तूबर में छापी अपनी रिपोर्ट में इसके पीछे 3 पॉइन्ट्स बताए थे। पहला कि पाकिस्तान छोड़ने के पीछे कंपनियों की अपनी वजहें हैं, वो अपने बिजनेस में बदलाव के लिए पाकिस्तान छोड़ रही हैं। दूसरा पॉइन्ट ये कहा गया कि कंपनियां भले पाकिस्तान छोड़ रही हैं लेकिन उनके प्रोडक्ट्स पाकिस्तान की बाज़ारों में आ रहे हैं और तीसरा पॉइन्ट ये कि कंपनी अपने स्ट्रैटेजिक शिफ्ट की वजह से रिलोकेट कर रही हैं…हो सकता है कुछ कंपनियों पर ये तर्क सही बैठ जाएं लेकिन सारी कंपनियों के पाकिस्तान छोड़ने की वजह यही हैं, ये नहीं हो सकता। तो फिर वजह क्या है।

पाकिस्तान में बिज़नेस क्यों है मुश्किल ?

वजह है पाकिस्तान की इकॉनमिक पॉलिसी। पाकिस्तान की टैक्स पॉलिसी। पाकिस्तान में इकॉनमिक पॉलिसी की जो गत है वो तो दुनिया देख रही है।IMF और वर्ल्ड बैंक के साथ-साथ चीन, साउदी अरब और कतर जैसे देशों के टुकड़े पर पल रहे पाकिस्तान की आर्थिक नीति सालों से डांवाडोल रही है। यहां पॉलिसी इकॉनमी को देखकर नहीं बल्कि पाकिस्तानी आर्मी और पाकिस्तानी सियासत के फायदे के हिसाब से बनाई जाती है। नतीजा ये कि फॉरेन इन्वेस्टमेंट के लिए ख़ूब ज़ोर लगाकर पाकिस्तान में कारोबार शुरू करवाए जाते हैं और फिर उन कारोबारियों को इतना टॉर्चर कर दिया जाता है कि वो अपना धंधा पानी सब बेच-बाच कर भाग जाते हैं। तो ऐसी कंपनियों की संख्या अब 125 से ज़्यादा हो चुकी है। इसमें पाकिस्तान में रहने वाली पॉलिटिकल स्टैबिलिटी भी एक बड़ी वजह है। फिर कानूनी अड़चनों का भी बोझ है। तो पाकिस्तान में इन्वेस्ट करने वाली कंपनियों की ना सरकार सुनती है, ना FBR सुनती है और ना ही अदालतों में उनकी कोई सुनवाई होती है। 60 परसेंट का भारी भरकम टैक्स चुकाने के बाद भी उन्हें किसी तरह की कोई सहूलियत नहीं मिलती, बल्कि बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तक मुहैया नहीं कराए जाते जैसा कि HanGeng के साथ हुआ। तो कोई कंपनी कैसे पाकिस्तान में टिकेगी, कैसे बिजनेस करेगी। चीन से जुड़ी हुई कंपनियां तो सरकार के दबाव में कुछ साल काम भी कर ले रही हैं नहीं तो वो तो कब का अपना राशन पानी पाकिस्तान से समेट ले।

Leave a Comment