अबकी बार पश्चिम बंगाल में BJP सरकार, घुसपैठियों बांग्लादेशियों का क्या होगा ?

By Alok Ranjan

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बांग्लादेशियों में डर का माहौल

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है लेकिन बीजेपी की इस जीत से खलबली बांग्लादेश में मच रही है। एग्जिट पोल से लेकर काउंटिंग और रिजल्ट तक। बांग्लादेश की मीडिया एक-एक घटनाक्रम को लगातार फॉलो कर रही थी। पहली बार भारत में हुए किसी स्टेट इलेक्शन ने बांग्लादेश को इतनी टेंशन दे दी है। और इस टेंशन की वजह है बांग्लादेशी घुसपैठिये। वो बांग्लादेशी घुसपैठियों जो सालों से नहीं दशकों से भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। भारत के डॉक्यूमेंट्स बनवा चुके हैं, सरकारी योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं, यहां तक कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी तक कर रहे हैं। लेकिन अब उन्हें बांग्लादेश भगाये जाने का ख़तरा बढ़ गया है।

पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण की वोटिंग के बाद आए एग्जिट पोल में बीजेपी को बढ़त मिलने के साथ ही बांग्लादेश में कई लोगों का BP हाई हो गया। ऐसा ही BP बढ़ा था बांग्लादेश की रंगपुर सीट के सांसद और युनूस ब्रिगेड की पार्टी NCP के नेता अख़्तर हुसैन का। अख़्तर, शेख हसीना के तख्ता-पलट कराने वाली आतंकी ब्रिगेड के सो कॉल्ड स्टूडेंट लीडर्स में से एक है। अब तो चुनाव भी जीत चुका है, पार्लियामेंट भी पहुंच चुका है लेकिन एजेंडा तो भारत विरोध का ही है ना। तो  अख़्तर को जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत नज़र आने लगी तो वो बौखला गया। पार्लियामेंट तक में कहने लगा कि अगर बीजेपी जीत जाएगी तो बांग्लादेश में रिवर्स माइग्रेशन की बाढ़ आ जाएगी। बांग्लादेश में रिफ्यूजी क्राइसिस की हालत हो जाएगी। ये स्टेटमेंट अख़्तर हुसैन ने बांग्ला में दिया है।

अगर एग्जिट पोल में BJP की जीत दिखाई देती है और अगर पार्टी सरकार बनाती है, तो वे उन सभी ‘कंगाल’ लोगों को बांग्लादेश भेज देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा मानवीय, आर्थिक और शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हमें इस बात की चिंता है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि किसी पड़ोसी देश से मुसलमानों को निकाले जाने पर शरणार्थियों की लहर पैदा नहीं होगी। लोगों को एकजुट रहना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे देश हमेशा एक साथ खड़ा रहा है, खासकर 1971 और 2024 में।Akhtar Houssen, MP, Bangladesh

अवैध बांग्लादेशी चुनाव में बड़ा मुद्दा था

अख़्तर ने किसी स्टेट का नाम नहीं लिया लेकिन ये साफ है कि बात पश्चिम बंगाल की ही हो रही थी। बांग्लादेश की सीमा से लगने वाले दो राज्यों में चुनाव हुए हैं। असम और पश्चिम बंगाल। असम में भी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा गर्म है लेकिन वहां पिछले 10 सालों से बीजेपी की ही गर्वमेंट है। बदलाव पश्चिम बंगाल में ही हो रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि बांग्लादेश में अख़्तर जैसे लोगों को डर क्यों लग रहा है? डर इसलिए लग रहा है क्योंकि अवैध बांग्लादेशियों को बाहर करना बीजेपी का मेन चुनावी एजेंडा था। बीजेपी के टॉप लीडर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ-साथ हर नेता ने अपनी चुनावी रैलियों और स्टेटमेंट्स में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाया था। और अब जबकि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है तो ये साफ है कि अवैध बांग्लादेशी इस नई सरकार के निशाने पर होंगे।

देशभर से अवैध बांग्लादेशियों पर एक्शन

असम से लगातार अवैध बांग्लादेशियों को बांग्लादेश वापस भेजा जा रहा है। चुनाव से कुछ दिनों पहले तक ये एक्शन जारी था। दावा किया जाता है कि पिछले कुछ सालों में असम से 30 हज़ार से ज़्यादा अवैध घुसपैठियों को बांग्लादेश भेज दिया गया है। और इस तरह के दावे प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंता बिश्वशर्मा खुद कर चुके हैं। दिल्ली में भी अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ ड्राइव चलाया जा रहा है। 24 मार्च को 1589 इललीगल बांग्लादेशियों को पकड़ा गया था।इस तरह के ड्राइव महाराष्ट्र और गुजरात समेत और भी राज्यों में चलाये गये हैं। पिछले साल महाराष्ट्र से 2000 अवैध बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया गया था। पिछले साल गुजरात में भी अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ एक्शन लिया गया था और करीब 1000 ऐसे लोगों को पकड़ा भी गया था।

असल में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भारत में कोई नया मुद्दा नहीं है। 1970 के आसपास ये घुसपैठ बाढ़ में बदल गई थी। पाकिस्तानी सेना के क्रैकडाउन से बचने के लिए लाखों बांग्लादेशी भारत में घुस आए थे। हालांकि जंग के बाद बहुत से लोग वापस भी चले गये थे लेकिन तब से घुसपैठ एक बड़ी समस्या में तब्दील हो गई।भारत-बांग्लादेश के बीच 4 हजार 96 दशमल 7 किलोमीटर की सीमा है। बांग्लादेश से भारत के 5 राज्यों की सीमा मिलती है। सबसे लंबी सीमा West Bengal की है- 2 हज़ार 216 दशमलव 7 किलोमीटर की। इसके बाद त्रिपुरा है-856 किलोमीटर। फिर मेघालय की 443 किलोमीटर। मिजोरम की 318 किलोमीटर और असम की 263 किलोमीटर।

भारत की बड़ी समस्या हैं बांग्लादेशी घुसपैठिए

अब आपको भारत में अवैध बांग्लादेशियों की क्राइसिस के बारे में बताता हूं। नवंबर 2016 में सेंटर गर्वमेंट ने राज्यसभा में बताया था कि देश में 2 करोड़ बांग्लादेशी अवैध तरीके से रह रहे हैं। ऐसा ही एक डाटा सेंटर गर्वमेंट ने 2004 में भी पेश किया था। उसमें बताया गया था कि देश में 1 करोड़ 20 लाख के करीब अवैध बांग्लादेशी हैं जो देश के 17 अलग-अलग राज्यों में रह रहे हैं। इनमें से सबसे ज़्यादा अवैध बांग्लादेशियों में से असम में 50 लाख जबकि पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 57 लाख रह रहे थे।

पिछले साल इलेक्शन कमीशन ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेसिव रिविजन यानी SIR शुरू किया था। हैरानी की बात तब सामने आई थी जब SIR के शुरू होते ही हज़ारों घुसपैठियों के पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भागने की ख़बरें आने लगी थी।बांग्लादेश से लगने वाले बॉर्डर पर ऐसे लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही थी। SIR के पूरा होने पर पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख वोटर्स के नाम काटे गये थे। हालांकि ऐसा नहीं है कि सारे के सारे 90 लाख लोग बांग्लादेशी हैं जिन्होंने फर्जी तरीके से वोटर आईडी बनवा ली थी लेकिन ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि इनमें से एक बड़ी संख्या अवैध बांग्लादेशियों की नहीं हो सकती। तो SIR की प्रक्रिया तो अभी चल रही है, रिविजन और अपील के साथ-साथ मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है। लेकिन इधर पश्चिम बंगाल में सरकार बदल चुकी है इसलिए बांग्लादेश में बेचैनी है।

बांग्लादेश की हालत खराब

पश्चिम बंगाल से 40-50 लाख अवैध बांग्लादेशियों को अगर वापस भेज दिया जाए तो बांग्लादेश में तो रिवर्स माइग्रेट करने वालों की बाढ़ ही आ जाएगी। बांग्लादेश पहले से ही कंगाली की हालत से जूझ रहा है। हाल ही में आई ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फूड क्राइसिस की रिपोर्ट में बांग्लादेश 7वें नंबर पर आया है। उसकी सिचुएशन पाकिस्तान से भी खराब है। बांग्लादेश के 16 मिलियिन लोग जबरदस्त फूड क्राइसिस से गुजर रहे हैं। भुखमरी की नौबत है, ऐसे में अगर 40-50 लोग भारत से वापस भगा दिये जाते हैं तो बांग्लादेश की ये क्राइसिस और विकराल रूप धारण कर लेगी। इकॉनमी पर बोझ तो बढ़ेगा ही, सामाजिक स्तर पर भी एक गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। यही वजह है कि बांग्लादेशियों को पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने से डर लग रहा है। और ज़रूरी ये है कि इस डर को हकीकत में भी बदल दिया जाए। भारत में अवैध रूप से रहने वाले हर शख्स को निकाल बाहर करना ज़रूरी है। तभी देश के रिसोर्सेज उन लोगों तक पहुंच पाएंगे जिन्हें उन रिसोर्सेज की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। अवैध घुसपैठिये, अनाज में घुन की तरह होते हैं जो अंदर ही अंदर समाज और अर्थव्यवस्था, दोनों को खोखला कर देते हैं। अब पश्चिम बंगाल की नई सरकार इसे कैसे लागू करती है ये तो आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन बांग्लादेश में अभी इसे लेकर और बवाल मचना तय है।

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