न्यूज़ीलैंड के विपक्ष से कुछ सीखे भारत का विपक्ष, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सरकार के साथ न्यूज़ीलैंड का विपक्ष

By Shilpi Sharma

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Prime Minister Narendra Modi greets New Zealand Prime Minister Christopher Luxon in New Delhi

FTA के लिए उत्साहित न्यूज़ीलैंड

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक Free Trade Agreement (FTA) साइन होने जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह FTA 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में साइन होने की संभावना है। भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों ही देशों ने इस व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा पिछले वर्ष 22 दिसंबर को की थी। इस समझौते के तहत भारत के कई उत्पादों को न्यूज़ीलैंड में ड्यूटी-फ्री (Zero Duty) एक्सेस मिलेगा तो वहीं न्यूज़ीलैंड के उत्पादों को भारत के बाजार में आसान एंट्री दी जाएगी। इस FTA के तहत कुशल सेवाओं (Services) और प्रोफेशनल्स के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। देखा जाए तो यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का अहम हिस्सा है।

न्यूज़ीलैंड का विपक्ष सरकार के साथ

न्यूज़ीलैंड की मुख्य विपक्षी पार्टी, लेबर पार्टी (Labour Party) ने 23 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर भारत के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अपना समर्थन दे दिया है। यह समर्थन भारत और न्यूज़ीलैंड के व्यापारिक संबंधों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। न्यूज़ीलैंड की गठबंधन सरकार की एक साथी पार्टी (न्यूज़ीलैंड फर्स्ट) इस समझौते का विरोध कर रही थी। ऐसे में सरकार को इसे संसद से पास कराने के लिए विपक्षी लेबर पार्टी के समर्थन की सख्त जरूरत थी। अब लेबर पार्टी के ‘हाँ’ कहने से इस समझौते के लागू होने की रुकावट खत्म हो गई है।

दोनों देशों के लिए ‘विन-विन सिचुएशन’

इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच वर्ष में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करना है। दोनों देशों को इस FTA (Free Trade Agreement) से अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण लाभ होंगे।

भारत का फायदा

  • ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस: भारतीय वस्त्र, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा और IT सेवाओं को न्यूज़ीलैंड में बिना शुल्क प्रवेश मिलेगा।
  • इन्वेस्टमेंट: अगले 15 वर्षों में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश भारत में आने की उम्मीद है।
  • रोज़गार: हर साल 5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स को न्यूज़ीलैंड में काम करने का मौका मिलेगा।
  • रणनीतिक फायदा: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति मज़बूत होगी।

न्यूज़ीलैंड का फायदा

  • एक्सपोर्ट: न्यूज़ीलैंड के 95% निर्यात (जैसे ऊन, वाइन, कोयला) पर शुल्क घटेगा, जिससे भारतीय बाज़ार में उनकी पहुँच बढ़ेगी।
  • बाज़ार: भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाज़ार तक आसान पहुँच मिलेगी।
  • सर्विस सेक्टर: IT और हेल्थकेयर में भारतीय प्रोफेशनल्स न्यूज़ीलैंड की कमी को पूरा करेंगे।
  • रणनीतिक साझेदारी: भारत के साथ गहरे आर्थिक संबंध न्यूज़ीलैंड की इंडो-पैसिफिक रणनीति को मज़बूत करेंगे।

भारतीय किसानों और उद्योगों पर नहीं पड़ेगा बुरा असर

भारत ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में FTA के तहत शुल्क छूट नहीं दी है ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके। इसका मुख्य मकसद किसानों की सुरक्षा और आय को स्थिर रखना। कृषि और संबंधित उद्योगों में रोजगार बचाना और साथ ही FTA से निवेश और निर्यात का लाभ लेना, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों को बचाना।

  • डेयरी उत्पाद (दूध, दही, चीज़): न्यूज़ीलैंड डेयरी क्षेत्र में मज़बूत है। शुल्क हटाने से भारतीय किसानों पर दबाव पड़ता।
  • प्याज़ और चीनी: आयात बढ़ने से घरेलू कीमतें गिर सकती थीं और किसानों की आय प्रभावित होती।
  • मसाले और खाद्य तेल: भारत इनका बड़ा उत्पादक है। शुल्क छूट देने से स्थानीय उद्योग को नुकसान होता।
  • रबर: छोटे किसानों और उद्योगों की आजीविका से जुड़ा क्षेत्र।

क्या कहते हैं 2024-2025 में दोनों देशों के बीच हुए व्यापार के आंकड़े

दोनों देशों के बीच अच्छी दोस्ती रही है। यात्रा, IT, और बिज़नेस सेवाओं से मिला है दोनों देशों को लाभ।

कितने देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ?

भारत अब तक अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ 9 प्रमुख फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) कर चुका है, जो कुल 38 देशों को कवर करते हैं। इसमें हाल ही में संपन्न हुए यूरोपीय संघ (EU) के 27 देश और EFTA के 4 देश भी शामिल हैं।

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