अवैध टैरिफ के पैसे अमरिका वापस करेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो 12 बिलियन डॉलर टैरिफ के नाम पर भारत से लूटे थे, अब वो वापस भारत को मिल सकते हैं। और सिर्फ यही नहीं, भारत के तो केवल 12 बिलियन डॉलर हैं, दुनिया भर के 166 बिलियन डॉलर चुकाने हैं। अमेरिका ने टैरिफ के नाम पर लूटे गये पैसों को लौटाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अमेरिकी कस्टम डिपार्टमेंट ने इसके लिए अपनी वेबसाइट पर नोटिस भी डाल दिया है। इस प्रोसेस को नाम दिया गया Consolidated Administration and Processing of Entries यानी CAPE, CAPE को डिपार्टमेंट ने अपने ACE portal पर अपलोड किया है। अब जिन देशों ने अमेरिका को एक्सेस टैरिफ दिया था वो इसमें रिफंड के लिए अप्लाई करेंगे।
अमेरिका पैसे क्यों लौटा रहा है ?
सवाल उठता है कि जो ट्रम्प राष्ट्रपति बनते ही दुनिया भर को टैरिफ के नाम पर ब्लैकमेल करते रहे, किसी पर 50 परसेंट किसी पर 200 परसेंट टैरिफ ठोकते रहे, उसी प्रेसिडेंट ट्रम्प की गर्वमेंट अब टैरिफ के वसूले गये पैसे वापस करने की प्रोसेस क्यों शुरू कर रही है। इसका जवाब है अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का फैसला। इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प के दुनिया भर से अधिक टैरिफ वसूलने के ऑर्डर को अवैध ठहरा दिया था। तब डोनाल्ड ट्रम्प अपने ही देश की सुप्रीम कोर्ट के जजों पर आग-बबूला हो गये थे। जजों के खिलाफ ख़ूब अनाप शनाप बका था और एलान किया था कि कोर्ट के ऑर्डर की ऐसी कि तैसी। सारे टैरिफ जारी रहेंगे बल्कि उन्होंने तो और टैरिफ ठोकने की बात भी कर दी थी। तो सुप्रीम कोर्ट के जजों को हड़काने वाले, उन्हें अमेरिका विरोधी बताने वाले ट्रम्प को आख़िरकार सरेंडर करना पड़ गया है। फैसले के करीब दो महीने बाद अमेरिकी गर्वमेंट ने टैरिफ को वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। और इसी के लिए Consolidated Administration and Processing of Entries को डाला गया है।
कुल 166 बिलियन डॉलर वापस करने हैं
अब अमेरिका को दुनिया के अलग-अलग देशों से वसूले गये करीब 166 बिलियन डॉलर का टैरिफ वापस करना पड़ेगा। और इस 166 बिलियन डॉलर में भारत के भी 10 से 12 बिलियन डॉलर होंगे। टेक्नोलॉजी, ट्रेड और क्लाइमेंट चेंज पर रिसर्च करने वाली संस्था GTRI यानी ग्लोबल ट्रेड एं रिसर्च इनिशियेटिव ने पिछले एक साल में भारत के अमेरिका को चुकाये गये एक्सेस टैरिफ का कैलकुलेशन कर ये आंकड़ा बताया है। इस रिपोर्ट में सेक्टर वाइज़ भी बताया गया है कि भारत को कैसे-कैसे किस सेक्टर में कितने पैसे वापस मिल सकते हैं।
| Sector | Estimated India-Linked Refund Potential |
|---|---|
| Textiles & Apparel | $4 billion |
| Engineering Goods | $4 billion |
| Chemicals & Related Products | $2 billion |
| Other Sectors Smaller shares | $2 billion |
टैरिफ से भारत का एक्सपोर्ट गिरा
असल में भारत अमेरिका को टेक्स्टाइल और कपड़े एक्सपोर्ट करने वाले प्रमुख देशों में से एक है। 2024 में भारत के टोटल Textile & Apparel Exports का 28.5% एक्सपोर्ट अमेरिका को किया गया था। ये करीब 10.47 बिलियन डॉलर का था। 2025 में ये 9.68 बिलियन डॉलर का रहा। हालांकि अप्रैल 2025 में ट्रम्प के रेसिप्रोकल टैरिफ लगाये जाने के बाद से इसमें लगातार गिरावट देखी गई। इस साल फरवरी में तो अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट 28% तक गिर गया था।वजह यही थी, ट्रम्प के टैरिफ का प्रेशर। ट्रम्प ने 25% टैरिफ के साथ-साथ रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% की पेनाल्टी भी भारत पर लगाई हुई थी। इससे भारत का एक्सपोर्ट गिर गया था।
इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट को भी नुकसान
फिनांशियल ईयर 2025 में भारत का इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट 116.7 बिलियन डॉलर का था। आंकड़ों के मुताबिक भारत के टोटल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट का 18% केवल अमेरिका को जाता है। इसके बाद 6% UAE को और 4-4% सिंगापोर, जर्मनी, यूनाटेड किंगडम, साउदी अरब और इटली को जाता है। और ये आंकड़ा भी जुलाई 2025 तक का ही है यानी इसके बाद और भी एक्सपोर्ट हुए होंगे। इसी वजह से टेक्स्टाइल के साथ-साथ Engineering Goods एक्सपोर्ट पर अमेरिका ने सबसे अधिक टैरिफ वसूला था। और अब यही टैरिफ अमेरिका को वापस करना पड़ेगा। देखना ये है कि बात-बात पर पलटी मारने वाले डोनाल्ड ट्रम्प टैरिफ की वापसी को लेकर फिर से कहीं पलटी ना मार दे।








