क्या इंडियन एयरफोर्स ने सीक्रेटली स्टेल्थ डिटेक्टर रडार डिप्लॉय कर दिया है ? S-400 के साथ बनेगी किलर कॉम्बिनेशन

By Alok Ranjan

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रूसी रडार कब लिया पता नहीं ?

एक रडार जो Stealth Fighter Jets को भी Detect कर सकता है। एक रडार जो 250 किलोमीटर दूर से ही चीन के J-20 और J-35 को ट्रैक कर सकता है। एक रडार जो 600 किलोमीटर दूर से आ रही क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल की जानकारी दे सकता है। ये है इंडियन एयरफोर्स का नया 55Zh6ME Nebo-UM Very High Frequency Radar। देख रहे हैं ये कितना विशालकाय रडार है। इसी साल फरवरी में हुए वायु शक्ति 2026 में ये विशाल रडार नज़र आया था, यानी तभी से ये भारत पहुंच चुका था लेकिन इंडियन एयरफोर्स ने इसे अब अपनी सर्विस में शामिल किया है। अब इस रडार को तैनात कर दिया गया है।

ये Nebo-UM Very High Frequency Radar एक रशियन रडार है। रूस की Nizhny Novgorod Research Institute of Radio Engineering ने इसे ख़ास तौर पर VLO Targets यानी वेरी लो ऑब्जरवेबल टारगेट्स को डिटेक्ट और ट्रैक करने के लिए बनाया है। ये अलग-अलग तरह के एयर ऑब्जैक्ट्स को ट्रैक कर सकता है। दावा किया जाता है कि ये रडार Stealth Aircrafts को भी Detect और Track कर सकता है और तभी ये रडार एयर सर्विलांस का सबसे ज़बरदस्त हथियार माना जा रहा है।

क्यों है ये स्टेल्थ डिटेक्टर रडार ?

ये एक Integrated Multi-Functional 3D Radar है। ये Air Objects के Coordinate measurements, Coordinate data transmission, Range, Azimuth, Altitude, Direction को बिल्कुल सटीकता के साथ बताता है। इसमें Jammers के Active Noise को ढूंढने, Friend or Foe Identification और Radar Data Acquisition जैसे सिस्टम्स भी हैं। ये रडार वेरी हाई फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। इसमें 133-144 MHz और 216-225 MHz की फ्रिक्वेंसी बैंड यूज़ होती है और इसी वजह से ये Low Observable Aircraft को भी डिटेक्ट कर पाता है।

जबकि Conventional Fire Control Radar X-Band या Ku Band की फ्रिक्ववेंसी का इस्तेमाल करते हैं जिसे Stealth Aircraft चकमा दे देते हैं। इसकी डिटेक्शन रेंज 600 किलोमीटर तक है। ये रडार Stealth Fighter Jets को 250 किलोमीटर दूर से ही ट्रेस और ट्रैक कर सकता है। इतना ही नहीं, क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल्स जैसे एरियल थ्रेट्स को ये 600 किलोमीटर दूर से डिटेक्ट कर लेता है। ये रडार एक साथ 200 Targets को ट्रैक कर सकता है।

भारत क्या कर रहा है ?

ये ना केवल Stealth Fighter जेट्स और मिसाइलों को डिटेक्ट और ट्रैक कर लेता है बल्कि उनकी सटीक रेंज, Azimuth, Altitude और Direction की भी पुख्ता जानकारी अपने कंट्रोल रूम को देता है। इससे उन्हें इंटरसेप्ट करना बहुत आसान हो जाता है। भारत के पास अब तक इस क्षमता वाले रडार नहीं थे। DRDO ने Very High Frequency वाला Surya VHF Radar बनाया है जिसे इंडियन एयरफोर्स मार्च 2025 से ही इस्तेमाल कर रही है। इस रडार की डिटेक्शन रेंज 360 किलोमीटर है। हालांकि ये रडार भी Fifth Generation Fighter Jets को detect और Track कर सकता है।

वहीं DRDO ने एक और VHF-Short Range Radar भी बनाया है। इस रडार की रेंज 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है। ये भी Stealth Aircrafts को डिटेक्ट कर सकता है। हालांकि अभी ये टेस्टिंग से ही गुजर रहा है।लेकिन इन दोनों की तुलना में रूस से आया Nebo-UM Very High Frequency Radar हर पैमाने पर अधिक कारगर लग रहा है। इसकी रेंज भी अधिक है और ये एक साथ 200 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है।

S-400 के साथ किलर कॉम्बिनेशन

अब ये वेरी हाई फ्रिक्वेंसी रडार भारत के S-400 एयर डिफेंस के साथ मिलकर एक किलर कॉम्बिनेशन बनाने वाली है। ये 400 किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम S-400 की इंटरसेप्टर मिसाइलों को पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स और मिलिट्री एयरक्राफ्ट तक बिल्कुल सटीकता के साथ पहुंचा सकती है। पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका के F-16 और चीन के J-10C और J17 इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा वो चीन से 5th जेनरेशन के J-35 खरीद रहा है और इन सारे जेट्स को ये वेरी हाई फ्रिक्वेंसी रडार आसानी से डिटेक्ट और ट्रैक कर सकता है और जब ये जेट्स ट्रैक हो गये तो फिर उन्हें इंटरसेप्ट करना भी S-400 के लिए मुश्किल का काम नहीं होगा।

भारत और रूस के बीच इस रडार को लेकर डील कब हुई इसका कोई अता-पता नहीं है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि ये रडार भारत और रूस के बीच हुए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील का ही हिस्सा है। तो अब जबकि ये रडार एयरफोर्स ने तैनात कर दिया है तो भारत के दुश्मनों की हर हवाई हलचल पर अब भारत की और पैनी नज़र गड़ गई है।

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