अमेरिका की नई Precision Strike Missile (PrSM) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। एक ताजा जांच में दावा किया गया है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान के दक्षिणी शहर लामेर्ड में हुए तीन मिसाइल हमलों में इसी अमेरिकी मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था और इसके घातक प्रभाव से विस्फोट वाली जगह से 50 मीटर तक दूर तक मौजूद नागरिकों की मौत हुई। जांच के मुताबिक एक मामले में मिसाइल के प्रभाव से नुकसान का क्षेत्र 170 मीटर तक फैला मिला।
यह निष्कर्ष कॉन्फ्लिक्ट मॉनिटर ‘एयरवार्स’ ने खुले स्रोतों से जुटाए फोटो, वीडियो, सैटेलाइट तस्वीरों और जियो-लोकेशन विश्लेषण के आधार पर निकाला है। Associated Press (AP) ने Airwars के निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच की और वहां दिखाई देने वाले नुकसान के पैटर्न को हथियार विशेषज्ञों के आकलन के साथ मिलाया।
हालांकि एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सेना ने लामेर्ड पर हमला करने से साफ इनकार किया है।
28 फरवरी को लामेर्ड में क्या हुआ?
लामेर्ड, ईरान के फार्स प्रांत में स्थित एक शहर है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान शुरू होने के दौरान यहां कई विस्फोट हुए। Airwars के मुताबिक तीन अलग-अलग घटनाओं में मिसाइलें एक खेल परिसर और दो रिहायशी इलाकों के ऊपर या आसपास फटीं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में कम से कम 21 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें सात बच्चे शामिल थे।
Airwars ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर मौतों और नुकसान के स्थानों को मैप किया। AP ने भी स्थानीय रिपोर्टों, वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों के साथ इस विश्लेषण की जांच की। लामेर्ड के Shahid Naimi Sports Hall के आसपास का इलाका इस घटना का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वहां खेल गतिविधियां चल रही थीं। एक हमले में आसपास के स्कूल और इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।
महत्वपूर्ण यह है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लामेर्ड में वास्तविक सैन्य लक्ष्य क्या था। आसपास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एक परिसर मौजूद है, लेकिन Airwars और AP द्वारा देखी गई सैटेलाइट तस्वीरों में उस परिसर पर हमले से स्पष्ट नुकसान दिखाई नहीं दिया।
50 मीटर दूर तक कैसे पहुंची घातक मार?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू PrSM के वारहेड का व्यवहार है। PrSM को केवल किसी लक्ष्य पर सीधा प्रहार करने वाली पारंपरिक मिसाइल के रूप में नहीं देखा जाता। Airwars और हथियार विशेषज्ञों के अनुसार लामेर्ड में जिस प्रकार के विस्फोट के संकेत मिले, वे हवा में विस्फोट करने वाले वारहेड से मेल खाते हैं। विस्फोट के दौरान बड़ी संख्या में घने धातु के छर्रे तेज गति से चारों दिशाओं में फैल सकते हैं।
लामेर्ड में इमारतों, सड़कों और वाहनों पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे गहरे निशानों का पैटर्न इसी तरह के फ्रैगमेंटेशन प्रभाव से मेल खाता पाया गया। Airwars ने एक मामले में कम से कम 170 मीटर का नुकसान क्षेत्र दर्ज किया। वहीं एक नागरिक की मौत उस अनुमानित विस्फोट बिंदु से करीब 50 मीटर दूर हुई।
इसका मतलब यह नहीं है कि PrSM की हर फायरिंग में 170 मीटर का निश्चित घातक क्षेत्र होगा। यह लामेर्ड में उपलब्ध भौतिक नुकसान और नागरिक हताहतों के स्थान से निकाला गया एक विशिष्ट अनुमान है। खुद Airwars ने कहा है कि अमेरिकी सेना और Lockheed Martin ने मिसाइल के वास्तविक प्रभाव-क्षेत्र की सार्वजनिक विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
Airwars ने कैसे निर्धारित की 50 मीटर की दूरी ?
Airwars की जांच में लामेर्ड के Tal-e Khandagh इलाके में दो वर्षीय Avina Barzegar की मौत का भी उल्लेख है। संस्था ने उसके घर की स्थिति को उपलब्ध वीडियो से जियो-लोकेट किया और फिर अनुमानित मिसाइल विस्फोट बिंदु से दूरी मापी। उसके मुताबिक वह दूरी करीब 50 मीटर थी।
यही मामला इस बहस का सबसे गंभीर हिस्सा है कि अत्यधिक सटीक मानी जाने वाली लंबी दूरी की मिसाइल भी आबादी वाले इलाके में इस्तेमाल होने पर व्यापक नागरिक नुकसान पैदा कर सकती है।
एक अन्य विस्फोट Shahid Naimi Sports Hall के ऊपर हुआ। Airwars के अनुसार इस विस्फोट से लगभग 170 मीटर दूर स्थित एक स्कूल को भी नुकसान पहुंचा और इस घटना में सात नागरिकों की मौत हुई। इनमें बच्चे भी शामिल थे।
क्या यह वाकई अमेरिकी PrSM थी?
अमेरिकी सेना ने मार्च में स्पष्ट रूप से कहा था कि उसने लामेर्ड में या उसके आसपास हमला नहीं किया। U.S. Central Command (CENTCOM) ने 31 मार्च के बयान में कहा कि 28 फरवरी को अमेरिकी सेनाओं ने लामेर्ड या उसके 30 मील के दायरे में कोई हमला नहीं किया। CENTCOM ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल को PrSM मानने से भी इनकार किया और उसे ईरान की Hoveyzeh क्रूज मिसाइल के अनुरूप बताया।
लेकिन बाद की स्वतंत्र जांच ने इस दावे पर सवाल खड़े किए। AP से बातचीत में छह हथियार विशेषज्ञों, जिनमें दो पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी शामिल थे, ने कहा कि उपलब्ध दृश्य प्रमाण PrSM से अधिक मेल खाते हैं। विशेषज्ञों ने मिसाइल की आकृति, उड़ान और विस्फोट के तरीके तथा घटनास्थल पर मिले नुकसान के पैटर्न को आधार बनाया। AP के मुताबिक ईरानी Hoveyzeh मिसाइल से इसकी तुलना भी विशेषज्ञों को संतोषजनक नहीं लगी।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य कि CENTCOM ने 1 मार्च को ईरान अभियान के दौरान PrSM के प्रक्षेपण की तस्वीर जारी की थी और कुछ दिन बाद उसने ईरान में PrSM के इस्तेमाल को ऐतिहासिक पहली बार बताया था। लेकिन उसने उस समय यह नहीं बताया कि मिसाइल किस स्थान पर इस्तेमाल हुई थी। बाद में लामेर्ड हमले से अमेरिकी संबंध की खबरें सामने आने पर CENTCOM ने वहां PrSM इस्तेमाल करने से इन्कार किया।
PrSM कितनी खतरनाक ?
PrSM अमेरिकी सेना की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। इसे Lockheed Martin ने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम को रिप्लेस करने के लिए विकसित किया है। इसकी खासियत केवल लंबी दूरी नहीं है। PrSM को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर और सैनिकों की महत्वपूर्ण तैनाती जैसे लक्ष्यों को दूर से निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। Lockheed Martin के अनुसार-
- इसकी वर्तमान क्षमता 499 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक लक्ष्य भेदने की है।
- इसे HIMARS और M270/M270A2 जैसे मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम से दागा जा सकता है और एक लॉन्च पॉड में दो PrSM रखे जा सकते हैं।
- Lockheed Martin इसे एक मॉड्यूलर और ओपन-सिस्टम आर्किटेक्चर वाली प्रणाली के रूप में पेश करता है, ताकि भविष्य में इसके सेंसर और मिशन क्षमता को अपग्रेड किया जा सके।
- इसका मूल उद्देश्य आबादी वाले इलाकों में व्यापक विनाश करना नहीं, बल्कि दूर स्थित उच्च-मूल्य सैन्य लक्ष्यों पर सटीक हमला करना है।
विवाद इस बात को लेकर है कि लामेर्ड जैसी आबादी के बीच इसके इस्तेमाल की स्थिति में इसका फ्रैगमेंटेशन प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है।
अमेरिका के लिए मामला महत्वपूर्ण क्यों ?
लामेर्ड विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका PrSM को अपने भविष्य के लंबी दूरी के स्ट्राइक हथियारों में तेजी से शामिल कर रहा है। AP के मुताबिक लामेर्ड हमलों के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने Lockheed Martin के साथ 4 अरब डॉलर से अधिक का अनुबंध किया, जिसका उद्देश्य PrSM उत्पादन को चार गुना तक बढ़ाना है।
ब्रिटेन ने भी इस हथियार की खरीद के लिए धन अलग रखा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहले ही PrSM कार्यक्रम में शामिल हो चुका है। Airwars ने भी Lockheed Martin के लिए उत्पादन विस्तार से जुड़े 8.4 अरब डॉलर के अनुबंध का उल्लेख किया है।
इसका रणनीतिक महत्व साफ है—अमेरिका लंबी दूरी के ऐसे हथियार चाहता है जिन्हें दुश्मन की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली के बावजूद काफी दूरी से इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन लामेर्ड जैसी घटना यह सवाल खड़ा करती है कि इस क्षमता का इस्तेमाल आबादी के बेहद करीब स्थित लक्ष्यों के विरुद्ध किस तरह किया जाना चाहिए।
क्या PrSM की ‘सटीकता’ और ‘घातकता’ में विरोधाभास है?
यहां एक महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर समझना जरूरी है। Precision का अर्थ मुख्य रूप से लक्ष्य तक मिसाइल को सटीक तरीके से पहुंचाना है। इसका अर्थ यह नहीं कि विस्फोट के बाद निकलने वाला हर टुकड़ा केवल लक्ष्य के भीतर ही रहेगा।
यदि कोई मिसाइल लक्ष्य के ऊपर हवा में विस्फोट करती है और उसके बाद हजारों घने धातु के छर्रे अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं, तो मिसाइल का लक्ष्य तक पहुंचना बेहद सटीक होने के बावजूद आसपास के क्षेत्र में नुकसान हो सकता है।
यही कारण है कि विशेषज्ञों ने आबादी वाले क्षेत्रों के पास PrSM के इस्तेमाल को लेकर सावधानी की सलाह दी है। पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी Michael Meier ने AP से कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में PrSM के इस्तेमाल को उचित ठहराना कठिन होगा। अन्य विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी कि खुले या कमजोर ढांचे में मौजूद लोग ऐसे फ्रैगमेंटेशन प्रभाव से सुरक्षित नहीं रह सकते।








