भूमध्यसागर में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच इजरायल और ग्रीस ने एक ऐसा रक्षा समझौता किया है, जिसका सीधा असर तुर्किये की सुरक्षा पर पड़ सकता है। 31 अगस्त 2026 को दोनों देशों ने करीब €3 अरब यानी लगभग $3.6 अरब के ‘अकीलिस शील्ड’ (Achilles Shield) कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए। यह इजरायल और ग्रीस के बीच अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील है और इजरायल के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा निर्यात परियोजनाओं में भी शामिल है।
इस समझौते के तहत इजरायल ग्रीस के लिए एक बहु-स्तरीय और एकीकृत एयर एवं मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करेगा। इसकी खासियत यह होगी कि अलग-अलग दूरी और अलग-अलग प्रकार के हवाई खतरों के लिए अलग-अलग प्रणालियां एक साझा कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे में काम करेंगी। यानी ग्रीस केवल कुछ मिसाइल बैटरियां नहीं खरीद रहा, बल्कि देशव्यापी एयर डिफेंस आर्किटेक्चर तैयार कर रहा है।
इजरायल और ग्रीस पिछले कुछ वर्षों में लगातार करीब आए हैं। इसकी वजह केवल रक्षा सौदे नहीं हैं। दोनों देशों के पूर्वी भूमध्यसागर में साझा रणनीतिक हित हैं और दोनों तुर्किये की बढ़ती क्षेत्रीय सक्रियता को ध्यान से देखते हैं। इजरायल के लिए ग्रीस यूरोप और पूर्वी भूमध्यसागर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। वहीं ग्रीस को इजरायल की युद्ध-परीक्षित मिसाइल और ड्रोन रोधी तकनीक में बड़ा लाभ दिखाई देता है।
क्या है ‘अकीलिस शील्ड’ और इसमें कौन-कौन से सिस्टम होंगे?
यह केवल एक खरीद नहीं बल्कि ग्रीस की राष्ट्रीय एयर और मिसाइल डिफेंस आर्किटेक्चर तैयार करने की योजना है। इस इंटिग्रेटेड नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी बहु-स्तरीय संरचना होगी। इजरायल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘अकीलिस शील्ड’ में David’s Sling, BARAK MX और SPYDER जैसे प्रमुख इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम शामिल होंगे। इसके साथ MMR मल्टी-मिशन रडार और एक नया राष्ट्रीय कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम भी लगाया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि किसी लक्ष्य का पता लगने के बाद उपयुक्त इंटरसेप्टर को चुना जा सके और पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क को एकीकृत तरीके से संचालित किया जाए। इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने इसे पहली बार किसी दूसरे देश के लिए व्यापक, पूर्ण एयर डिफेंस एरे के रूप में उपलब्ध कराने वाली परियोजना बताया है।
इसके अलावा ग्रीस ने इजरायल की सरकारी स्वामित्व वाली रक्षा कंपनी Rafael Advanced Defense Systems के Drone Dome सिस्टम के लिए अलग से करीब €26 मिलियन का समझौता भी किया है। यह एक एंटी-ड्रोन सिस्टम है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण ठिकानों को ड्रोन खतरों से बचाना है।
| सिस्टम | निर्माता | मुख्य भूमिका | प्रमुख क्षमता/खासियत | किस खतरे के खिलाफ |
|---|---|---|---|---|
| David’s Sling | Rafael + अमेरिकी सहयोग | मध्यम/ऊपरी स्तर की मिसाइल रक्षा | Stunner interceptor; लगभग 40–300 किमी तक की सार्वजनिक रूप से बताई गई engagement range | बैलिस्टिक मिसाइल, बड़े रॉकेट, क्रूज मिसाइल और अन्य उन्नत हवाई लक्ष्य |
| BARAK MX | IAI | मल्टी-लेयर एयर डिफेंस | लगभग 15–150 किमी की मारक क्षमता, अलग-अलग दूरी के interceptors वाला modular सिस्टम; BARAK परिवार में MRAD/LRAD/ER जैसी क्षमताएं | विमान, हेलीकॉप्टर, UAV, क्रूज मिसाइल और कुछ बैलिस्टिक खतरे |
| SPYDER | Rafael | कम/मध्यम दूरी की त्वरित वायु रक्षा | 20–80 किमी तक, variant के अनुसार Python और Derby परिवार के interceptor; तेज प्रतिक्रिया और मोबाइल deployment | लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और ड्रोन |
| MMR Radar | ELTA/IAI | हवाई निगरानी और लक्ष्य ट्रैकिंग | Multi-Mission Radar; एक साथ कई हवाई लक्ष्यों की detection/tracking और fire-control support | विमान, UAV, मिसाइल एवं अन्य हवाई लक्ष्य |
| National C2 System | Rafael | एयर-डिफेंस नेटवर्क का Command & Control “दिमाग” | अलग-अलग रडार, सेंसर और missile batteries की जानकारी को एक common air picture में जोड़ना | खुद लक्ष्य नहीं मारता; सही सिस्टम को सही लक्ष्य सौंपता है |
| Drone Dome | Rafael | Counter-UAS/Anti-Drone | छोटे लक्ष्यों की detection 3.5 किमी से अधिक; वास्तविक engagement range configuration पर निर्भर, रडार, RF detection, electro-optical/thermal sensors और electronic warfare/jamming | छोटे UAV, ड्रोन और swarm-type खतरे |
ग्रीस को इतनी मजबूत एयर डिफेंस की जरूरत क्यों पड़ी?
इसका सबसे बड़ा कारण ग्रीस की व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण योजना और तुर्किये के साथ लंबे समय से चला आ रहा रणनीतिक तनाव है। दोनों NATO सदस्य हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके बीच एजियन सागर, समुद्री सीमाओं, हवाई क्षेत्र, द्वीपों की सैन्य स्थिति और पूर्वी भूमध्यसागर में ऊर्जा संसाधनों को लेकर गंभीर मतभेद रहे हैं।
एजियन सागर में दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है। तुर्किए के पश्चिमी तट के सामने बड़ी संख्या में ग्रीक द्वीप मौजूद हैं। इनके कारण समुद्री और हवाई प्रभाव क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के दावे टकराते रहे हैं।
इसके अलावा साइप्रस और पूर्वी भूमध्यसागर में ऊर्जा संसाधनों को लेकर भी दोनों के हित कई बार आमने-सामने आए हैं। इसलिए ग्रीस अपनी वायुसेना, नौसेना, मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमताओं को एक साथ मजबूत कर रहा है।
ग्रीस की व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण योजना में F-35 लड़ाकू विमान, नई फ्रिगेट्स, मिसाइल और रॉकेट सिस्टम भी शामिल हैं। Reuters के अनुसार ग्रीस 2036 तक लगभग €28 अरब का रक्षा निवेश कार्यक्रम चला रहा है।
इसी बड़े कार्यक्रम में ‘अकीलिस शील्ड’ को ग्रीस की हवाई और मिसाइल सुरक्षा की केंद्रीय परत के रूप में देखा जा रहा है।
तुर्किये और ग्रीस की दुश्मनी क्यों?
तुर्किए और ग्रीस की प्रतिद्वंद्विता कोई नई घटना नहीं है। इसकी जड़ें आधुनिक तुर्की और ग्रीस के बनने से पहले तक जाती हैं और 20वीं सदी के युद्धों, आबादी के विस्थापन तथा साइप्रस विवाद ने इसे और गहरा किया।
आज मुख्य विवाद एजियन सागर और पूर्वी भूमध्यसागर से जुड़े हैं। इनमें क्षेत्रीय जल, महाद्वीपीय शेल्फ, Exclusive Economic Zone यानी EEZ, हवाई क्षेत्र और कुछ द्वीपों की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
तुर्किए का मानना है कि ग्रीक द्वीपों के आधार पर समुद्री क्षेत्र का अत्यधिक विस्तार उसके अपने समुद्री अधिकारों को सीमित करता है। दूसरी ओर ग्रीस अंतरराष्ट्रीय कानून और अपने संप्रभु अधिकारों के आधार पर अपने दावों का बचाव करता है।
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद वे NATO के सदस्य बने हुए हैं।
इजरायल और तुर्किये के संबंध क्यों बिगड़े?
इजरायल-तुर्किये संबंधों की कहानी भी जटिल है। कभी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा सहयोग था, लेकिन तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के दौर में संबंध लगातार खराब होते गए।
2010 की Mavi Marmara घटना ने रिश्तों को गंभीर नुकसान पहुंचाया। इसके बाद गाजा युद्ध, फिलिस्तीन और हमास को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेद और बढ़े। हाल के वर्षों में तुर्किये ने इजरायल की गाजा नीति की कड़ी आलोचना की है, जबकि इजरायल ने तुर्किये की क्षेत्रीय भूमिका पर चिंता जताई है।
Mavi Marmara घटना 31 मई 2010 की है। तुर्किए से गाजा जा रहे मानवीय सहायता वाले Mavi Marmara जहाज को इजरायली नौसेना ने गाजा की समुद्री नाकाबंदी के दौरान रोककर कब्जे में लेने की कोशिश की। जहाज पर सवार कुछ यात्रियों और इजरायली कमांडो के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें 9 यात्री मारे गए और कई घायल हुए। मृतकों में अधिकांश तुर्की नागरिक थे
2026 में सीरिया को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। Reuters के अनुसार अमेरिका को तुर्किये और इजरायल के बीच सीरिया में संभावित सैन्य गलतफहमी रोकने के लिए एक deconfliction mechanism पर काम करना पड़ा है।
ऐसे माहौल में इजरायल द्वारा तुर्किये के प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ग्रीस को इतनी व्यापक एयर डिफेंस क्षमता देना अंकारा के लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
डील का तुर्किये पर क्या असर ?
ग्रीस की यह खरीद तुर्किये के लिए सिर्फ “एक और एयर डिफेंस खरीद” नहीं है। इसका बड़ा असर हवाई शक्ति के संतुलन, deterrence और भविष्य की सैन्य योजना पर पड़ेगा। तुर्किये के पास S-400 है, जिसकी लंबी दूरी की air-defense क्षमता, ग्रीस की नई व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण asset है। लेकिन S-400 अकेले Achilles Shield का जवाब नहीं है।
| असर | तुर्किये के लिए इसका मतलब |
|---|
| 1. ग्रीस पर हवाई हमला कठिन होगा | ग्रीस के पास अलग-अलग दूरी पर SPYDER + BARAK MX + David’s Sling की परतें होंगी। किसी बड़े हवाई अभियान को केवल एक एयर-डिफेंस सिस्टम नहीं, बल्कि कई layers को पार करना होगा। |
| 2. S-400 का महत्व बढ़ेगा, लेकिन समस्या भी रहेगी | तुर्किये के पास S-400 की लंबी दूरी की क्षमता पहले से है। लेकिन S-400 को उसके स्वदेशी Steel Dome के साथ पूरी तरह integrated मानना सही नहीं है। इसलिए Ankara को अपने indigenous network को और मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। |
| 3. Steel Dome पर दबाव बढ़ेगा | ग्रीस अब विदेशी प्रणालियों को केवल अलग-अलग batteries के रूप में नहीं, बल्कि National C2 के जरिए एकीकृत नेटवर्क में ला रहा है। इससे तुर्किये के लिए अपने Steel Dome की sensor-to-shooter integration क्षमता बढ़ाना और जरूरी हो जाएगा। |
| 4. तुर्की के ड्रोन लाभ को चुनौती | तुर्किये ने TB2, Akıncı जैसे UAVs के कारण बड़ी strike क्षमता विकसित की है। लेकिन SPYDER, BARAK MX और Drone Dome जैसी layered defenses ग्रीस के खिलाफ बड़े drone operations की सफलता को कठिन बना सकती हैं। |
| 5. Fighter operations की planning बदलेगी | तुर्किये के F-16 और भविष्य के KAAN को ग्रीक air-defense network के खिलाफ अभियान में अधिक sophisticated EW, stand-off weapons, decoys और suppression of enemy air defenses (SEAD) की जरूरत पड़ सकती है। |
| 6. Israel-Greece strategic alignment मजबूत होगा | यह केवल हथियारों की खरीद नहीं है। Israel और Greece के बीच training, technology और defense-industrial cooperation भी बढ़ रहा है। इससे Ankara के लिए Eastern Mediterranean का strategic environment अधिक जटिल हो सकता है। |
| 7. हथियारों की प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है | ग्रीस का Achilles Shield और तुर्किये का Steel Dome दोनों ही multi-layered air defense की दिशा में जा रहे हैं। इससे दोनों देशों में radar, EW, missiles, drones और counter-drone systems की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। |
भारत इस डील को किस नजर से देखे?
भारत के लिए यह घटनाक्रम खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली और अंकारा के संबंधों में भी हाल के वर्षों में तनाव आया है,। तुर्किये, पाकिस्तान के साथ लगातार रक्षा संबंध बढ़ा रहा है। जबकि भारत और ग्रीस के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तुर्किये द्वारा पाकिस्तान के समर्थन ने नई दिल्ली में गंभीर चिंता पैदा की थी। इसके बाद 2026 में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने Mecca Joint Defence Agreement किया।
ऐसे में रणनीतिक दृष्टि से भारत के लिए यह जरूर महत्वपूर्ण है कि तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा सहयोग के समानांतर भारत-ग्रीस और भारत-इजरायल संबंध भी मजबूत हो रहे हैं।








