जर्मनी ने इजरायली LORA बैलिस्टिक मिसाइल का किया परीक्षण, भारत की इस ‘गेम चेंजर’ पर नजर क्यों?

By Defence Detective

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German Navy Naval LORA ballistic missile test in North Atlantic

यूरोप में रूस से बढ़ते सैन्य खतरे के बीच जर्मनी ने अपनी लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जर्मन नौसेना ने इजरायल की Israel Aerospace Industries (IAI) की LORA बैलिस्टिक मिसाइल का उत्तरी अटलांटिक में सफल लाइव-फायर परीक्षण किया है। खास बात यह है कि परीक्षण के बाद जर्मनी ने LORA की खरीद की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, LORA मिसाइल का यह टेस्ट बर्लिन द्वारा पिछले महीने लीपज़िग/हैल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की कोशिश के लिए रूस को सार्वजनिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराने और इसके जवाब में कदम उठाने के आदेश देने के बाद हुआ है।

यह खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। दरअसल भारत और इजरायल के बीच LORA को लेकर पहले से औद्योगिक सहयोग मौजूद है। 2023 में भारत की Bharat Electronics Limited (BEL) और IAI ने भारत में LORA Weapon System के घरेलू निर्माण और आपूर्ति के लिए MoU किया था। हाल की रिपोर्टों में भारतीय वायुसेना की Air LORA में दिलचस्पी की भी बात सामने आई है।

जर्मनी ने कैसे किया LORA का परीक्षण?

जर्मन नौसेना ने यह परीक्षण Marine 2035 and Beyond योजना के तहत चलाए जा रहे Operational Experimentation यानी OPEX कार्यक्रम के अंतर्गत किया। परीक्षण के दौरान LORA को एक ऑपरेशनल जर्मन नौसैनिक पोत से लॉन्च किया गया। मिसाइल ने निर्धारित प्रक्षेपवक्र पर उड़ान भरी, लक्ष्य तक नेविगेट किया और उसे सटीकता से हिट किया। IAI के मुताबिक हथियार प्रणाली और मिसाइल दोनों ने परीक्षण के सभी उद्देश्यों को पूरा किया।

“हमारी यूनिट्स इस सिस्टम को सफलतापूर्वक तैनात कर सकती हैं और इसकी संभावित रेंज अब तक देखी गई किसी भी चीज़ से ज़्यादा है। जर्मनी और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा के मामले में, यह टेस्ट रोकथाम और समुद्री रक्षा तैयारियों के लिहाज़ से एक नया अध्याय है।”
Vice Adm. Jan Christian Kaack, chief of the German Navy 

रॉयटर्स के अनुसार जर्मनी के पास फिलहाल अपनी सैन्य सूची में कोई बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है। उसके पास Taurus जैसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें हैं, लेकिन LORA जर्मनी को एक अलग तरह की तेज और उच्च-प्रक्षेपवक्र वाली स्ट्राइक क्षमता दे सकती है।

LORA मिसाइल इतनी खास क्यों ?

LORA का पूरा नाम Long-Range Artillery Weapon System है। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत तेज गति से लक्ष्य की ओर जाती है और अपने प्रक्षेपवक्र में बदलाव करने की क्षमता के कारण पारंपरिक बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र से अलग तरीके से काम कर सकती है। इससे दुश्मन के लिए इसकी उड़ान को ट्रैक और इंटरसेप्ट करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  • जर्मन रक्षा मंत्रालय के मुताबिक LORA की रेंज 500 किलोमीटर तक बताई है।
  • यह एक quasi-ballistic यानी अर्ध-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
  • LORA में GPS/INS आधारित नेवीगेशन है और इसकी घोषित सटीकता लगभग 10 मीटर CEP तक है।
  • इसका इस्तेमाल एयरबेस, कमांड पोस्ट, एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल/रॉकेट यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों जैसे स्थिर लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।
  • मिसाइल का वजन लगभग 1,600 किलोग्राम, लंबाई 5.2 मीटर और व्यास लगभग 624 मिलीमीटर है।
  • इसमें सिंगल-स्टेज सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल होता है। मिसाइल को सीलबंद कैनिस्टर में रखा जाता है, जिससे रखरखाव अपेक्षाकृत आसान रहता है।

जर्मनी को LORA की जरूरत क्यों?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रूस के साथ बढ़ता तनाव और यूरोप में लंबी दूरी के प्रिसीजन स्ट्राइक हथियारों की कमी है। यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों को यह दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में दुश्मन के बहुत पीछे मौजूद कमांड सेंटर, एयरबेस, लॉजिस्टिक हब और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को जल्दी और सटीक तरीके से निशाना बनाने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है।

जर्मनी के पास Taurus क्रूज मिसाइल मौजूद है, लेकिन वह विमान से लॉन्च होती है। LORA के Naval संस्करण से जर्मन नौसेना को समुद्र से जमीन या समुद्र में मौजूद लक्ष्य के खिलाफ लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता मिल सकती है। IAI के मुताबिक Naval LORA को छोटे डेक क्षेत्र में भी तैनात किया जा सकता है।

जर्मनी के लिए इसका एक और फायदा यह है कि इसे जहाज से इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी नौसेना किसी संभावित संकट क्षेत्र के करीब जाकर बिना अपने लड़ाकू विमानों को जोखिम में डाले, लंबी दूरी के महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता हासिल कर सकती है।

भारत का LORA कनेक्शन ?

Aero India 2023 के दौरान BEL ने IAI के साथ LORA Weapon System के लिए MoU किया था। BEL के अनुसार इसका उद्देश्य भारतीय तीनों सेनाओं के लिए LORA Weapon System का भारत में घरेलू निर्माण और आपूर्ति करना था। इस व्यवस्था में BEL को प्रमुख भारतीय उत्पादन भागीदार की भूमिका मिलनी थी और IAI को तकनीकी सहयोग देना था।

2025 में कई रिपोर्टों में यह बताया गया कि Operation Sindoor के बाद भारतीय वायुसेना ने IAI की Air LORA में रुचि दिखाई है। Air LORA जमीन से लॉन्च होने वाली LORA से अलग है, क्योंकि इसे विमान से लॉन्च करने के लिए बनाया गया है।

भारत और जर्मनी के LORA में क्या अंतर होगा?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मिसाइल परिवार एक ही है, लेकिन लॉन्च प्लेटफॉर्म और ऑपरेशनल भूमिका अलग है।

विशेषताजर्मनी – Naval LORAभारत – संभावित/रिपोर्टेड Air LORAभारत का LORA Weapon System/भूमि संस्करण
निर्माताIAI, इजरायलIAI, इजरायलIAI + BEL सहयोग
लॉन्च प्लेटफॉर्मनौसैनिक पोतलड़ाकू विमानमोबाइल ग्राउंड लॉन्चर
मुख्य भूमिकाSea-to-Shore और Sea-to-Sea स्ट्राइकएयर-लॉन्च्ड स्टैंड-ऑफ स्ट्राइकGround-to-Ground स्ट्राइक
रेंजजर्मनी ने परीक्षण में LORA परिवार का इस्तेमाल किया; जर्मन रक्षा मंत्रालय ने 500 km तक बतायासार्वजनिक रिपोर्टों में लगभग 400 km तक की क्षमता बताई गईIAI का सार्वजनिक आंकड़ा 90–430 km
नेवीगेशनGPS/INS आधारितGPS/INS और एयर-लॉन्च कॉन्फिगरेशनGPS/INS
सटीकतालक्ष्य बिंदु से लगभग 10 मीटर के दायरे तकलक्ष्य बिंदु से लगभग 10 मीटर के दायरे मेंलक्ष्य बिंदु से लगभग 10 मीटर के दायरे में
मिसाइल वजनलगभग 1.6 टन परिवार-स्तरीय आंकड़ाकॉन्फिगरेशन पर निर्भरलगभग 1.6 टन
लॉन्च समयतेज प्रतिक्रियाविमान से स्टैंड-ऑफ हमलाकुछ मिनटों में लॉन्च की क्षमता
प्रमुख फायदानौसेना को लंबी दूरी की स्ट्राइकलड़ाकू विमान की पहुंच बढ़ाना और एयर डिफेंस से दूरी बनाए रखनामोबाइल, जमीन आधारित लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक
स्थितिसफल जर्मन लाइव-फायर परीक्षण; खरीद आगे बढ़ाने की योजनाभारत की रुचि रिपोर्टेड2023 में BEL-IAI उत्पादन सहयोग का आधिकारिक MoU

भारत के लिए Air LORA क्यों महत्वपूर्ण हो सकती है?

भारत के पास पहले से ही BrahMos, Pralay और अन्य लंबी दूरी के स्ट्राइक हथियार हैं। ऐसे में LORA का महत्व केवल “एक और लंबी दूरी की मिसाइल” के रूप में नहीं है। इसकी खासियत अलग-अलग लॉन्च विकल्पों में है। LORA परिवार को जमीन, समुद्र और अब हवा से लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया है। इसलिए भारत अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग संस्करणों का इस्तेमाल कर सकता है। भारत के संदर्भ में Air LORA की सबसे बड़ी उपयोगिता स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक होगी।

सका मतलब है कि भारतीय लड़ाकू विमान को दुश्मन की सीमा के बहुत अंदर जाने की जरूरत नहीं होगीदुश्मन की एयर डिफेंस सीमा से बाहर रहकर लंबी दूरी के महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला किया जा सकेगा।

ऐसी क्षमता पाकिस्तान और चीन दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती है। एयरबेस, कमांड सेंटर, रडार साइट, मिसाइल बैटरी और अन्य हाई-वैल्यू सैन्य ठिकाने संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।

कौन-कौन से देश इस्तेमाल कर रहे LORA

फिलहाल अभी LORA के वास्तविक ऑपरेटर/उपयोगकर्ता देशों की सूची काफी छोटी है। खासकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी देश ने LORA में रुचि दिखाई हो, परीक्षण किया हो या खरीद समझौता किया हो—इसका मतलब यह नहीं कि वह अभी इसे ऑपरेशनल रूप से इस्तेमाल कर रहा है।

LORA इस्तेमाल करने वाले देश

देशस्थितिLORA का संस्करण/भूमिका
इजरायलइस्तेमाल कर चुका हैGround/land-based LORA; इजरायली सेना ने इसका इस्तेमाल किया है
अजरबैजानऑपरेशनल उपयोगकर्ताGround-based LORA; 2020 नागोर्नो-कराबाख युद्ध में इस्तेमाल की रिपोर्ट
जर्मनीअभी परीक्षण चरणNaval LORA; 2 सितंबर 2026 को जर्मन नौसेना ने सफल लाइव-फायर किया
ग्रीसखरीद/प्राप्ति की दिशा मेंGround-based LORA; इसे अभी मौजूदा ऑपरेटरों की सूची में रखना सावधानी मांगता है
भारतअभी ऑपरेटर नहींBEL-IAI का उत्पादन सहयोग; Air LORA में रुचि की रिपोर्ट

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