पाकिस्तान का दावा भारत के भीतर 3 हजार किमी हमला करने की मिली ताकत, हकीकत या फिर छलावा ?

By Defence Detective

Updated On:

Date:

पाकिस्तान के D-248 लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन का चित्र

पाकिस्तान ने हाल ही में एक नया लंबी दूरी एक लंबी दूरी का लॉइटरिंग म्यूनिशन D-248 पेश किया है। इसे ‘इंडस रोबोटिक्स एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (RAS) एक्सपो 2026’ में ‘हैवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला’ (HIT) ने आधिकारिक तौर पर सबके सामने रखा। इस “कामिकेज़ ड्रोन” की ऑपरेशनल रेंज 2200 से 3,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है और यह बिना रिफ्यूलिंग 12 से 14 घंटे तक हवा में रह सकता है।

क्योंकि यह रेंज पाकिस्तान के मौजूदा हथियारों के जखीरे में शामिल लगभग सभी पारंपरिक मिसाइलों से कहीं ज़्यादा है, इसलिए इस घोषणा ने ड्रोन की असली क्षमताओं और इसकी टेक्नोलॉजी के स्रोत को लेकर काफी दिलचस्पी पैदा कर दी है।

डेल्टा विंग लॉइटरिंग म्यूनिशन (D-248) देखने में काफी हद तक ईरान के ‘शाहेद’ (Shahed) सीरीज़ के अटैक ड्रोन जैसा लगता है। जानकारों का मानना ​​है कि इसकी अंदरूनी टेक्नोलॉजी पर चीन के ड्रोन डेवलपमेंट का काफी असर हो सकता है। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसके खास इंजन, नेविगेशन सिस्टम और अभी इसके प्रोडक्शन की क्या स्थिति है, इस बारे में कुछ नहीं कहा है। लेकिन D-248 के आने से साफ पता चलता है कि पाकिस्तान लंबी दूरी तक मार करने वाले, वन-वे अटैक ड्रोन बनाना चाहता है।

ऐसे हथियारों की मदद से सेनाएं पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बहुत कम खर्च में अहम ठिकानों पर हमला कर सकती हैं।

एक्सपो में, HIT ने एक और लंबी दूरी का ड्रोन S-369 भी प्रदर्शित किया, जिसकी रेंज 1500 से 2200 किलोमीटर तक है।

क्या हैं D-248 की खासियतें ?

इसे पाकिस्तान का सबसे लंबी-रेंज का लॉइटरिंग म्यूनिशन बताया जा रहा है। इसका डिजाइन tailless delta-wing है। ड्रोन को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसमें तिकोने आकार के पंख, एक कॉम्पैक्ट मुख्य बॉडी और पीछे की तरफ प्रोपेलर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।

  • इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन लगभग 240 किलोग्राम, विंगस्पैन 3.3 मीटर, अधिकतम गति 225 किमी/घंटा और क्रूज स्पीड करीब 185 किमी/घंटा बताई गई है।
  • 30 से 50 किलोग्राम का विस्फोटक पेलोड ले जा सकते है।
  • इस ड्रोन के पंखों की चौड़ाई 3.3 मीटर है और यह 4,500 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ सकता है।

D-248 की सबसे खास बात इसकी लंबी दूरी तक जाने की क्षमता है। इसकी 3,000 किलोमीटर की रेंज का मतलब है कि यह नया ड्रोन पाकिस्तान के ज़्यादातर पारंपरिक प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों की तुलना में दुश्मन के इलाके में कहीं ज़्यादा अंदर तक उड़ान भर सकता है।

इतनी ज़्यादा दूरी तक उड़ने की क्षमता और सहनशक्ति आमतौर पर बहुत बड़े और महंगे मिलिट्री एयरक्राफ्ट में देखी जाती है, न कि छोटे, एक बार इस्तेमाल होने वाले उन ड्रोन में जिन्हें अपने टारगेट से टकराकर नष्ट होने के लिए बनाया गया है। सैद्धांतिक तौर पर, इससे सेना पाकिस्तान के अंदर सुरक्षित जगहों से ड्रोन लॉन्च कर सकती है और अपने पड़ोसी देशों से भी बहुत दूर मौजूद लक्ष्यों को खतरे में डाल सकती है।

क्योंकि ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ धीरे-धीरे उड़ते हैं और रडार पर आसानी से पकड़ में नहीं आते, इसलिए वे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से भ्रमित और परेशान कर सकते हैं, जिससे उन्हें लंबे समय तक हाई अलर्ट पर रहना पड़ता है।

S-369 की खूबियां –

HIT, S-369 को ‘एरो-डेल्टा विंग’ वाला लोइटरिंग म्यूनिशन बताता है। S-369 का MTOW 215-225 किलोग्राम, विंगस्पैन 4 मीटर, पेलोड क्षमता 30-50 किलोग्राम, अधिकतम गति 220 किलोमीटर प्रति घंटा, क्रूज़ गति 160-180 किलोमीटर प्रति घंटा और उड़ान की अधिकतम ऊंचाई 4,500 मीटर तक है।

ईरानी और चीनी टेक्नोलॉजी से है संबंध

D-248 का बाहरी रूप-रंग तुरंत ईरान के पहले से साबित हो चुके शाहेद ड्रोन डिज़ाइनों की याद दिलाता है। उसी तरह के तिकोने पंखों और साधारण बॉडी शेप को अपनाकर, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ईरान द्वारा अपनाए गए सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादन (mass-production) के तरीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

शाहेद (Shahed) ड्रोनों ने दुनिया को दिखाया है कि सस्ते और साधारण ड्रोनों की बड़ी खेप भेजकर आसानी से बहुत एडवांस्ड और महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को थकाया और उन पर हावी हुआ जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में, पाकिस्तान ने डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर कई देशों के साथ मिलकर काम किया है। इसी वजह से, कई लोगों का मानना ​​है कि D-248 का डिज़ाइन महज़ एक संयोग नहीं है।

हालांकि इस खास प्रोजेक्ट पर ईरान के साथ सीधी साझेदारी का कोई आधिकारिक सबूत नहीं है, लेकिन दिखने में और काम करने के तरीकों में इतनी समानताएं हैं कि मिलिट्री एनालिस्ट्स इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। डेल्टा-विंग शेप का इस्तेमाल करने से सिंगल-यूज़ अटैक ड्रोनों को साफ़ फ़ायदे मिलते हैं। इससे बनाने की प्रक्रिया आसान और सस्ती हो जाती है, अंदर फ़्यूल के लिए ज़्यादा जगह बनती है, और लंबी दूरी तक स्थिर उड़ान सुनिश्चित होती है।

हालांकि ईरान से संबंध साफ़ है, लेकिन ड्रोन के अंदरूनी पार्ट्स संभवतः चीन की ओर इशारा करते हैं। पिछले बीस वर्षों में, पाकिस्तान का डिफेंस उद्योग चीनी मिलिट्री टेक्नोलॉजी के साथ गहराई से जुड़ गया है। दोनों देशों ने पहले ही JF-17 फ़ाइटर जेट, कई तरह के आर्म्ड ड्रोन और एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर सफलतापूर्वक साझेदारी की है।

चीन अभी बहुत बड़ी मात्रा में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उत्पादन करता है, जिसमें हल्के वज़न वाले बॉडी मटीरियल, सैटेलाइट नेविगेशन टूल, ऑटोमेटेड फ़्लाइट कंप्यूटर और कम फ़्यूल खपत वाले इंजन शामिल हैं। हालांकि किसी खास चीनी कंपनी का नाम सार्वजनिक रूप से D-248 से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि इसके अंदरूनी पार्ट्स—जैसे इंजन, कम्युनिकेशन गियर और नेविगेशन मॉड्यूल—चीनी सप्लायर्स से लिए गए थे।

इसके अलावा, हैवी इंडस्ट्रीज़ टैक्सिला (Heavy Industries Taxila)—वह कंपनी जिसने इस ड्रोन को पेश किया—पारंपरिक रूप से टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां बनाने के लिए जानी जाती है, न कि एडवांस्ड एयरक्राफ़्ट बनाने के लिए। एविएशन के क्षेत्र में इस अनुभव की कमी से साफ़ पता चलता है कि D-248 को विकसित करने में विदेशी टेक्नोलॉजी पार्टनर्स या अन्य बाहरी संगठनों ने अहम भूमिका निभाई है।

भारत के पास इसके मुकाबले क्या है?

भारत के पास लॉइटरिंग म्यूनिशन की कई स्वदेशी और सहयोगी प्रणालियां हैं,  लेकिन भारत की सार्वजनिक रूप से प्रमाणित लॉइटरिंग म्यूनिशन क्षमता फिलहाल D-248 के घोषित 3,000 किमी दायरे के आसपास नहीं पहुंचती।

भारत का Nagastra-1 इसका एक उदाहरण है। DRDO के मुताबिक यह करीब 9 किलोग्राम वजन वाला man-portable fixed-wing loitering munition है। इसकी man-in-the-loop range करीब 15 किमी और autonomous mode में करीब 30 किमी बताई गई है। इसमें लगभग 1 किलोग्राम warhead, day/night cameras और parachute-based recovery capability है।

भारत के पास इससे बड़ी श्रेणी में ALS-50 भी है। DRDO के संकलित विवरण में इसकी range करीब 50 किमी और payload 50 किलोग्राम बताया गया है।

इसके अलावा Vayu Astra ने 100 किमी तक की range वाली परीक्षण क्षमता प्रदर्शित की है और करीब 10 किलोग्राम warhead की क्षमता बताई गई है। हालांकि यह D-248 की तरह 2,000–3,000 किमी श्रेणी का operational system नहीं है।

भारत की दिशा जरूर बदल रही है। अगस्त 2026 में रक्षा मंत्रालय ने Tata Advanced Systems और NIBE के साथ भारतीय सेना के लिए लगभग 1,577 करोड़ रुपये के Loiter Munition Systems के अनुबंध किए। इससे स्पष्ट है कि भारतीय सेना भी इस श्रेणी को बड़े पैमाने पर अपनी artillery और precision-strike क्षमता में शामिल कर रही है।

D-248 बनाम भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन

विशेषतापाकिस्तान D-248भारत Nagastra-1भारत ALS-50भारत Vayu Astra
श्रेणीLong-range loitering munitionMan-portable LMHeavy LMLong-range LM
घोषित/रिपोर्टेड रेंज2,200–3,000 किमी15–30 किमी50 किमी100 किमी
Endurance12–14 घंटे30 मिनट*लगभग 1 घंटासार्वजनिक परीक्षण आंकड़े सीमित
Payload30–50 किग्रा1 किग्रा50 किग्रा10 किग्रा
अधिकतम गति225 किमी/घंटाकम गति वाला tactical systemसार्वजनिक आंकड़े सीमितसार्वजनिक आंकड़े सीमित
स्थितिप्रदर्शित/घोषित क्षमताभारतीय सेना मेंभारतीय सेवा/प्रोक्योरमेंट ecosystemपरीक्षण/प्रदर्शन
3,000 किमी क्षमतादावानहींनहींनहीं

एक ऐसा हथियार, जिस पर होनी चाहिए नजर

ईरानी ड्रोन की सफल डिज़ाइन रणनीतियों और चीनी टेक्नोलॉजी से गहराई से जुड़े एयरोस्पेस उद्योग के मेल से बना D-248, क्षेत्रीय सैन्य ताकत में एक संभावित बड़े बदलाव का संकेत देता है। अलग-अलग तरह के प्रभावों का यह अनोखा मेल वैश्विक रक्षा जगत में अटकलों का दौर जारी रखे हुए है।

D-248 का अपने बड़े-बड़े दावों पर खरा उतरना अभी बाकी है, लेकिन इसके सार्वजनिक तौर पर सामने आने से यह साबित होता है कि पाकिस्तान लंबी दूरी तक मार करने वाले स्ट्राइक ड्रोन बनाने या उन्हें असेंबल करने में लगा हुआ है। पाकिस्तान के इस हथियार की विकास प्रक्रिया पर हमारी नजर बनी रहनी चाहिए।

Leave a Comment