पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हिंसा की घटनाएं थमती नहीं दिख रही हैं। चागाई जिले के दालबंदीन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और बलूच अलगाववादियों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। NEWS18 के मुताबिक स्थानीय सुरक्षा सूत्रों के हवाले से आई जानकारी में दावा किया गया है कि इस भिड़ंत में तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। मरने वालों में एक कैप्टन भी शामिल है।
वहीं द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चागाई के एक और क्षेत्र में रेको दिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट से कर्मचारियों को छोड़कर लौट रहे वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में 12 हमलावर मारे गए।
इन घटनाओं की वजह से चागाई का इलाका एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौती के केंद्र में आ गया है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि चागाई में रेको दिक परियोजना पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण तांबा और सोना खनन प्रोजेक्ट्स में से एक
दालबंदीन में हुई मुठभेड़
इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों और बलूच अलगाववादी लड़ाकों के बीच मुठभेड़ की रिपोर्ट सामने आई है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक डालबंदीन क्षेत्र में हुई भिड़ंत में तीन सुरक्षा कर्मी मारे गए, जिनमें पाकिस्तान सेना के एक युवा कैप्टन भी शामिल थे। इस अधिकारी की पहचान कैप्टन उबैदुल्लाह के रूप में हुई है।
रेको दिक से लौट रहे काफिले पर हमला
यह घटना चागाई के दूसरे क्षेत्र में सोमवार को हुई। लगभग तीन दर्जन खाली वाहन रेको दिक कॉपर-गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट साइट से कर्मचारियों को छोड़ने के बाद क्वेटा की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान बलूच अलगाववादियों ने काफिले को निशाना बनाया और वाहनों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक काफिले के साथ चल रहे सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभाला। इसके बाद अलगाववादी लड़ाकों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। पाकिस्तान के अधिकारियों ने बताया कि इस मुठभेड़ में 12 बलूच लड़ाके मारे गए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, गोलीबारी लगभग दो घंटे तक चली।
पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि मुठभेड़ में दो सुरक्षा कर्मी घायल हुए और मारे गए लड़ाकों के पास से हथियार तथा गोला-बारूद बरामद किया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 12 अलगाववादियों के मारे जाने की पुष्टि की और कहा कि प्रांत में खुफिया जानकारी पर आधारित लक्षित अभियान जारी हैं।
चागाई क्यों है महत्वपूर्ण?
चागाई जिला पाकिस्तान के लिए केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यही वह क्षेत्र है जहां रेको दिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट स्थित है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार यह परियोजना पाकिस्तान के सबसे बड़े खनन उपक्रमों में से एक है और इसे कनाडा स्थित बैरिक माइनिंग, पाकिस्तान सरकार तथा बलूचिस्तान सरकार की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है।
रेको दिक अफगानिस्तान और ईरान की सीमाओं के करीब स्थित है। ऐसे संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र में बड़े विदेशी निवेश वाले खनन प्रोजेक्ट की सुरक्षा पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना को पाकिस्तान की विदेशी निवेश आकर्षित करने और खनिज निर्यात बढ़ाने की योजनाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए काफिले पर हुआ हमला केवल एक सामान्य सुरक्षा घटना नहीं है। यह दिखाता है कि खनन परियोजना से जुड़े कर्मचारियों और उनकी आवाजाही की सुरक्षा भी सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन चुकी है।
खनन परियोजनाएं क्यों निशाने पर हैं?
बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा जारी है। बीएलए सहित विभिन्न बलूच उग्रवादी संगठन पाकिस्तान सरकार पर प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी की राजनीतिक-आर्थिक उपेक्षा का आरोप लगाते रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी और देश की स्थिरता के लिए खतरा मानती है।
पिछले कुछ महीनों में चागाई में सुरक्षा बलों तथा उग्रवादी संगठनों के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं। जून 2026 में डालबंदीन क्षेत्र में पाकिस्तान के सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक कथित खुफिया अभियान में पांच बीएलए कैडरों के मारे जाने की रिपोर्ट आई थी। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल ने उस घटना को द खैबर क्रॉनिकल्स की रिपोर्ट के हवाले से दर्ज किया था।
इससे संकेत मिलता है कि डालबंदीन और आसपास का क्षेत्र केवल खनन परियोजनाओं के कारण ही नहीं, बल्कि उग्रवादी गतिविधियों और उनके खिलाफ सुरक्षा अभियानों के कारण भी लगातार संवेदनशील बना हुआ है।
रेको दिक पर पहले भी हो चुका है हमला
चागाई क्षेत्र में खनन गतिविधियों को पहले भी हिंसा का सामना करना पड़ा है। अप्रैल 2026 में चागाई जिले के दारिगवान क्षेत्र में नेशनल रिसोर्सेज लिमिटेड के कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट पर सशस्त्र हमलावरों ने हमला किया था। डॉन के अनुसार, 30 से अधिक हथियारबंद लोग मोटरसाइकिलों पर परियोजना स्थल में घुसे और कर्मचारियों पर गोलीबारी की। स्थानीय अधिकारियों ने कम से कम 10 लोगों की मौत की पुष्टि की थी।
एक अन्य रिपोर्ट में उस घटना में एक तुर्की नागरिक सहित 10 लोगों के मारे जाने और एक अन्य विदेशी नागरिक के अपहरण की जानकारी दी गई थी। अधिकारियों के अनुसार हमले में सुरक्षा गार्ड और खनन परियोजना से जुड़े कर्मचारी भी मारे गए थे।
इन घटनाओं को देखते हुए रेको दिक तथा चागाई के दूसरे खनन क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान के लिए लगातार गंभीर मुद्दा बनी हुई है।
BLA पाकिस्तानी सैनिकों को क्यों बना रहा निशाना?
BLA एक प्रतिबंधित बलूच अलगाववादी संगठन है जो बलूचिस्तान के लिए ज़्यादा स्वायत्तता या आज़ादी चाहता है। इसके अभियान में पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र के साथ-साथ पाकिस्तानी सरकार और चीन से जुड़े बुनियादी ढांचे और प्रोजेक्ट्स को भी लगातार निशाना बनाया गया है।
इस समूह ने पहले भी कई बड़े हमलों की ज़िम्मेदारी ली है, जिसमें 2025 में जाफ़र एक्सप्रेस का अपहरण भी शामिल है। इसने प्रांत में सुरक्षा बलों और चीन से जुड़े हितों को बार-बार निशाना बनाया है।
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यहाँ तांबा और सोना जैसे खनिज और प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं। ईरान और अफ़गानिस्तान से सटी इसकी रणनीतिक स्थिति इस संघर्ष को और जटिल बनाती है।








