बिगड़े संबंधों के बीच भारत अमेरिकी Javelin मिसाइलें क्यों खरीद रहा है ?

By Defence Detective

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JAVELIN missile

भारत और अमेरिका के रक्षा सहयोग में एक ऐसा कदम सामने आया है, जो आने वाले समय में भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई गति दे सकता है। Tata Advanced Systems Limited (TASL) ने भारत में Javelin मिसाइल के सह-उत्पादन के लिए Javelin Joint Venture (JJV) के साथ Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 30 अगस्त 2026 को घोषित किया गया।

लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक, TASL को भविष्य में देश के भीतर संयुक्त उत्पादन (co-production) के लिए JJV के मुख्य भारतीय साझेदार के तौर पर चुना गया है। Javelin का विकास और उत्पादन Javelin Joint Venture करता है, जिसमें अमेरिकी कंपनियां Raytheon और Lockheed Martin शामिल हैं

समझौते में महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में केवल Javelin के कुछ हिस्सों की असेंबली की बात नहीं हो रही। प्रस्तावित व्यवस्था में भारत में Javelin All Up Round यानी AUR की अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन सुविधा स्थापित करने तथा कुछ कंपोनेंट उत्पादन क्षमताएं विकसित करने की संभावना तलाशने की बात कही गई है। AUR का अर्थ उस पूरी तरह फैक्ट्री-असेंबल मिसाइल से है, जो अपने टैक्टिकल लॉन्च कंटेनर में रखी होती है और उपयोग के लिए तैयार रहती है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय सेना ने अमेरिका के साथ लगभग 60 जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें खरीदने के लिए 292 करोड़ रुपये की सरकारी स्तर की डील को अंतिम रूप दिया है।

कैसे होगा उत्पादन?

अब JJV ने Tata Advanced Systems को भारत में भविष्य के इन-कंट्री को-प्रोडक्शन प्रयासों के लिए अपना प्राइम पार्टनर चुना है। कंपनी का चयन कई भारतीय कंपनियों की क्षमता और विशेषज्ञता के मूल्यांकन के बाद किया गया।

प्रस्तावित मॉडल के तहत अमेरिका में भी उत्पादन जारी रहेगा। Lockheed Martin की Troy, Alabama स्थित सुविधा में सब-असेंबली किट और Raytheon की Tucson, Arizona सुविधा में Guidance Electronics Units (GEU) तैयार किए जाएंगे। इन हिस्सों को भारत भेजा जाएगा, जहां अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन की क्षमता विकसित की जाएगी।

यानी यह पूरी तरह अमेरिकी उत्पादन को भारत स्थानांतरित करने के बजाय भारत-अमेरिका की संयुक्त सप्लाई चेन बनाने का मॉडल है। यही इस समझौते की सबसे बड़ी रणनीतिक खासियत है।

Javelin की क्या हैं खूबियां?

Javelin एक मैन-पोर्टेबल, मध्यम दूरी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) है। इसे बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस सिस्टम का इस्तेमाल मज़बूत ठिकानों और दूसरे लक्ष्यों के ख़िलाफ़ भी किया जा सकता है। इससे पैदल सेना को एक ऐसा हथियार मिल जाता है जिसे युद्ध के मैदान के पास ले जाया और चलाया जा सकता है।

इसकी सबसे चर्चित खूबी हैFire-and-Forget क्षमता। ऑपरेटर लक्ष्य पर लॉक करने के बाद मिसाइल दागता है और उसके बाद उसे लगातार वायर या किसी अन्य लिंक के जरिए निर्देशित करने की जरूरत नहीं होती। इससे फायरिंग के तुरंत बाद सैनिक अपनी स्थिति बदल सकता है।

मिसाइल में Imaging Infrared seeker का इस्तेमाल होता है। इसका सामान्य हमला Top Attack मोड में होता है, जिसमें मिसाइल लक्ष्य के ऊपरी हिस्से पर हमला करती है।

टैंक के ऊपरी हिस्से का कवच आम तौर पर सामने के मुख्य कवच की तुलना में कमजोर होता है। जरूरत पड़ने पर Javelin Direct Attack मोड में भी इस्तेमाल की जा सकती है, खासकर किलेबंद ठिकानों या ऐसे लक्ष्यों के खिलाफ जहां Top Attack उपयुक्त न हो।

अमेरिकी सेना के अनुसार Javelin को 1996 में पहली बार सेवा में शामिल किया गया था और तब से इसमें लगातार सुधार किए गए हैं। आधुनिक संस्करण पुराने सिस्टम की तुलना में बेहतर सेंसर, सॉफ्टवेयर और युद्ध क्षमता लेकर आए हैं।

Raytheon के अनुसार इसका इस्तेमाल अमेरिका और अन्य देशों की सेनाओं में armored vehicles, bunkers और caves जैसे विभिन्न लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है।

भारतीय सेना के लिए रणनीतिक महत्व

भारत की लंबी और संवेदनशील जमीनी सीमाओं को देखते हुए आधुनिक anti-armour weapons की जरूरत लगातार बनी रहती है। चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बड़ी संख्या में टैंक और बख्तरबंद वाहन हैं। ऐसे में एक ऐसी मिसाइल जो सैनिकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से हमला करने और फायरिंग के बाद तुरंत स्थान बदलने की क्षमता देती है, infantry और anti-armour units के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस खरीद से सेना को एक भरोसेमंद एंटी-टैंक सिस्टम मिल जाएगा, जबकि भारत अपनी खुद की स्वदेशी ‘मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल’ विकसित करने का काम जारी रखेगा। इस बीच, जैवलिन सेना की एंटी-आर्मर क्षमता को मज़बूत करने में मदद करेगा और एक ऐसा ऑपरेशनल सिस्टम देगा जिसे स्वदेशी मिसाइल प्रोग्राम के पूरा होने का इंतज़ार किए बिना ही तैनात किया जा सकेगा।  

कौन-कौन से देश इस्तेमाल कर रहे जेवलिन मिसाइल

Javelin अब 25 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच चुकी है। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, यूक्रेन, जॉर्जिया, ऑस्ट्रेलिया जैसे विभिन्न देश इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत अब इसका नया उपयोगकर्ता बन रहा है। Javelin को वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मिली। अमेरिका ने यूक्रेन को बड़ी संख्या में Javelin उपलब्ध कराईं और इस हथियार को रूसी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ यूक्रेनी सेना के प्रमुख पश्चिमी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल में गिना गया।  

Javelin के मुकाबले चीन और पाकिस्तान के पास क्या?

अगर Javelin को चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में देखें तो, तो इसका चीन के HJ-12 सबसे सीधा मुकाबला है, जबकि पाकिस्तान के पास Kornet-E, Baktar-Shikan और TOW variants जैसे अलग-अलग ATGM हैं।

विशेषता🇺🇸 Javelin🇨🇳 HJ-12 Red Arrow-12🇵🇰 Kornet-E🇵🇰 Baktar-Shikan🇵🇰 TOW-2A/2B
देश/मूलअमेरिकाचीनरूसपाकिस्तान/चीनअमेरिका
श्रेणीMan-portable ATGMMan-portable ATGMATGMATGMATGM
GuidanceImaging InfraredIIR/InfraredLaser beam-ridingSACLOS wire-guidedSACLOS wire-guided / RF variants
Fire-and-Forget✅ हां✅ हां❌ नहीं❌ मूल संस्करण में❌ सामान्य संस्करण में
Top Attack❌ पारंपरिक Kornet-E में मुख्यतः direct attackकुछ TOW-2B में ऊपर से हमला करने की क्षमता
Direct Attack
WarheadTandem HEATTandem HEATTandem HEATHEAT / TandemHEAT / अन्य variants
रेंजलगभग 2.5–4.0 km, संस्करण/CLU पर निर्भरलगभग 4 kmलगभग 5.5 km दिन, 3.5 km रातलगभग 3–4 km, variant पर निर्भरलगभग 3.75–4.5 km, variant पर निर्भर
Soft Launch❌/अलग launcher व्यवस्था
Thermal/IR क्षमता✅ CLU मेंThermal sight विकल्पNight/IR sight विकल्पThermal sight variants
मुख्य ताकतFire-and-forget + top attack + thermal seekerJavelin जैसा fire-and-forget + top attackलंबी रेंज और भारी warheadबड़ी संख्या/स्थानीय उत्पादनपुराना लेकिन व्यापक और कई variants
मोबिलिटीबहुत अच्छीबहुत अच्छीअपेक्षाकृत भारीcrew-portableअपेक्षाकृत भारी

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