कौन हैं उत्तर प्रदेश के शरदेंदु ? क्यों ठुकराई ₹46 लाख की नौकरी ? मिली नाकामी पर नाकामी और अब वर्दी

By Defence Detective

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Shardendu Tiwari जिन्होंने Amazon की ₹46 लाख की नौकरी छोड़कर भारतीय सेना ज्वाइन की

बात सिर्फ एक शानदार नौकरी छोड़ने की नहीं, बल्कि एक युवा के उस सपने की है, जिद की है, जिसने लगातार असफलताओं के बावजूद कोशिश जारी रखी। Amazon में करीब ₹46 लाख सालाना पैकेज पर Cloud Engineer की नौकरी, Airbus में करियर का मौका और तकनीकी क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य। इन सबके बावजूद उन्होंने आखिरकार जैतूनी वर्दी को चुना। वह युवा हैं लखनऊ के नीलमथा निवासी एक इंजीनियर शरदेंदु तिवारी, जो 5 सितंबर 2026 को Officers Training Academy (OTA), Gaya की Passing Out Parade में वह भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन होने जा रहे हैं।

आखिर क्यों चुनी सैन्य वर्दी ?

आज के दौर में किसी युवा इंजीनियर के लिए Amazon जैसी वैश्विक टेक कंपनी में करीब ₹46 लाख सालाना पैकेज हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। शरदेंदु तिवारी ने यह मुकाम हासिल किया था। वह Amazon में Cloud Engineer के रूप में काम कर रहे थे और उनके सामने कॉरपोरेट दुनिया में आगे बढ़ने का मजबूत रास्ता मौजूद था।

उन्हें वैश्विक एयरोस्पेस कंपनी Airbus में भी काम करने का अवसर मिला था। यानी उनके पास टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस—दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने के विकल्प थे।

लेकिन उनके लिए करियर की सफलता की परिभाषा केवल सैलरी और पद तक सीमित नहीं थी। सेना की वर्दी पहनने का सपना लगातार उनके साथ बना रहा। आखिरकार उन्होंने कॉरपोरेट करियर को पीछे छोड़कर सैन्य सेवा का रास्ता चुना। और इसके पीछे कारण है पिता की सैन्य विरासत और देश सेवा की इच्छा।

क्या है पिता की सैन्य विरासत ?

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के पीपरगांव से ताल्लुक रखने वाले शरदेंदु की कहानी को समझने के लिए उनके परिवार की पृष्ठभूमि पर भी नजर डालना जरूरी है। असल में शरदेंदु अपने परिवार से दूसरी पीढ़ी के सैनिक हैं।

उनके पिता Honorary Captain Raj Kumar Tiwari Army Service Corps (ASC) में करीब 36 वर्षों तक सेवा कर चुके हैं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद पिता ने Honorary Captain का दर्जा हासिल किया।

यही वह पारिवारिक वातावरण था जिसने Shardendu के भीतर सैन्य सेवा के प्रति आकर्षण पैदा किया। उन्हें सेना की जिंदगी में adventure, field service और चुनौतीपूर्ण वातावरण भी आकर्षित करता था।

उनके सामने दो अलग-अलग दुनिया थीं—एक तरफ टेक इंडस्ट्री का आरामदायक और आर्थिक रूप से आकर्षक करियर। दूसरी तरफ सैनिक जीवन की चुनौती और जिम्मेदारी। अंतत: उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।

कहां से हुई शरदेंदु की पढ़ाई-लिखाई?

शरदेंदु की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी इस कहानी को खास बनाती है। उन्होंने हरियाणा में Kendriya Vidyalaya, Chandimandir से स्कूली शिक्षा हासिल की और इसके बाद Punjab Engineering College (PEC), Chandigarh) से इंजीनियरिंग की।

इस तरह उनकी पढ़ाई तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी रही। उन्होंने Bachelor of Engineering in Information Technology किया और बाद में M.Tech in Computer Science and Information Security की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद उनका करियर Cloud Engineering की दिशा में आगे बढ़ा और Amazon में नौकरी मिली। लेकिन तकनीकी करियर बनाते हुए भी सेना में जाने की कोशिश उन्होंने छोड़ी नहीं। यही इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नाकामी पर नाकामी, कितनी बार ?

किसी प्रतियोगी परीक्षा या चयन प्रक्रिया में एक-दो बार असफल होना ही बहुत से उम्मीदवारों के लिए सपना छोड़ने की वजह बन जाता है। Shardendu के मामले में तस्वीर बिल्कुल अलग रही।

उन्होंने Army selection के लिए आठ बार प्रयास किया। पहले सात प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कोशिश बंद नहीं की।

आठवें प्रयास में उनका चयन हुआ और वह Technical Graduate Course (TGC) के जरिए सेना में प्रवेश की दिशा में आगे बढ़े। उन्हें 14 Services Selection Board (SSB), Allahabad के माध्यम से Technical Graduate Course के लिए recommend किया गया।

इस तरह Amazon के Cloud Engineer की कहानी धीरे-धीरे Army officer बनने की कहानी में बदल गई।

Technical Entry ने इंजीनियरिंग और सैन्य सेवा को जोड़ा

Shardendu का सेना में प्रवेश technical route से हुआ। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि उनकी तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री बनकर नहीं रह जाती, बल्कि सैन्य सेवा में भी उपयोगी हो सकती है।

भारतीय सेना को आज पारंपरिक combat skills के साथ-साथ cyber, communications, electronics, unmanned systems, artificial intelligence और अन्य तकनीकी क्षेत्रों की समझ रखने वाले अधिकारियों की भी जरूरत है।

OTA Gaya से निकलने वाले इस बैच के प्रशिक्षण में भी आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर जोर दिया गया है। Academy के Commandant Lieutenant General Sandeep Singh के अनुसार कैडेट्स को multi-domain operations के लिए तैयार किया गया और प्रशिक्षण में AI, drones, cyber systems और robotics जैसी नई तकनीकों से परिचित कराया गया।

इस लिहाज से Shardendu की Cloud Engineering और Computer Science की पृष्ठभूमि भविष्य की तकनीक-आधारित सैन्य जरूरतों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

OTA Gaya में भी शरदेंदु ने खुद को किया साबित

कॉरपोरेट ऑफिस में काम करने और सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण लेने के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। सेना में अधिकारी को केवल तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन, शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और टीम को कठिन परिस्थितियों में आगे ले जाने की क्षमता भी दिखानी होती है।

OTA Gaya में Shardendu के प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें Senior Under Officer (SUO) नियुक्त किया गया।

SUO अकादमी में कैडेट्स के बीच मिलने वाली वरिष्ठतम नियुक्तियों में से एक है। यह नियुक्ति केवल वरिष्ठता का संकेत नहीं होती, बल्कि नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी संभालने की क्षमता की पहचान भी मानी जाती है।

इस तरह Amazon में तकनीकी जिम्मेदारियां संभालने वाले Shardendu ने OTA Gaya में अपने साथियों के बीच भी नेतृत्व क्षमता साबित की।

किस तरह का शौक रखते हैं शरदेंदु ?

Shardendu की व्यक्तिगत रुचियां भी उनके सैन्य चुनाव से जुड़ती दिखाई देती हैं। वह mountain trekking के शौकीन हैं। इसके अलावा उनके basketball और table tennis खेलने का भी उल्लेख मिलता है।

सेना में आने के पीछे केवल नौकरी बदलने की इच्छा नहीं थी। उन्होंने खुद बताया कि उन्हें Armed Forces में मिलने वाला adventure और field service आकर्षित करता था।

सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव 5 सितंबर

शरदेंदु के सफर का अगला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 5 सितंबर 2026 को OTA Gaya में होने वाली 29वीं Passing Out Parade है। जिसके बाद वह भारतीय सैन्य अधिकारी के रूप में सेवाएं देंगे।

समारोह में कुल 254 कैडेट्स के भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन होने की तैयारी है।

इनमें 219 पुरुष और 35 महिला कैडेट्स शामिल हैं।

समारोह में Vietnam People’s Army के Lieutenant General Le Van Huong के Chief Guest के रूप में शामिल होने की घोषणा की गई है।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद होने वाली Passing Out Parade (POP) वह महत्वपूर्ण समारोह है जिसमें कैडेट्स सैन्य प्रशिक्षण की अंतिम दहलीज पार करके भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन होते हैं।

OTA गया क्या है और कहाँ है?

OTA Gaya यानी Officers Training Academy, Gaya भारतीय सेना की प्रमुख अधिकारी प्रशिक्षण अकादमियों में से एक है। यह बिहार के गया जिले में स्थित है और मुख्य रूप से Technical Entry Scheme (TES), Technical Graduate Course (TGC) तथा कुछ अन्य तकनीकी प्रवेश योजनाओं के माध्यम से चयनित कैडेट्स को सैन्य अधिकारी बनने के लिए प्रशिक्षण देती है।

भारतीय सेना को बड़ी संख्या में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की जरूरत को देखते हुए OTA Gaya की स्थापना की गई। यह अकादमी विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो इंजीनियरिंग/तकनीकी शिक्षा के बाद भारतीय सेना में अधिकारी बनना चाहते हैं।

यहाँ कैडेट्स को केवल तकनीकी प्रशिक्षण नहीं मिलता, बल्कि उन्हें सैन्य जीवन के लिए आवश्यक इन चीजों की भी कठोर ट्रेनिंग दी जाती है।

  • Military training
  • Physical fitness
  • Weapon training
  • Leadership
  • Tactical training
  • Drill और discipline
  • Teamwork और field craft

OTA Chennai से कैसे अलग है?

भारतीय सेना की दो प्रमुख Officers Training Academies में OTA Chennai और OTA Gaya शामिल हैं। दोनों का उद्देश्य अधिकारियों को तैयार करना है, लेकिन उनके प्रवेश मार्ग और प्रशिक्षण संरचना में महत्वपूर्ण अंतर हैं।

OTA Chennai मुख्य रूप से Short Service Commission (SSC) के लिए जाना जाता है, जबकि OTA Gaya की पहचान विशेष रूप से Technical Entry से जुड़ी हुई है।

IMA Dehradun में क्या होता है?

IMA यानी Indian Military Academy, देहरादून, भारतीय सेना के भावी Commissioned Officers को सैन्य प्रशिक्षण देने वाली देश की प्रमुख अकादमी है। इसकी स्थापना 1932 में हुई थी और यह उत्तराखंड के देहरादून में स्थित है।

IMA में मुख्य रूप से वे उम्मीदवार आते हैं जिन्हें Indian Army में Permanent Commission के लिए चुना गया है। इनमें अलग-अलग प्रवेश योजनाओं से आने वाले उम्मीदवार शामिल होते हैं, जैसे:

  • NDA के बाद Army में जाने वाले कैडेट
  • CDS के माध्यम से चयनित उम्मीदवार
  • Technical Graduate Course (TGC) के उम्मीदवार
  • कुछ अन्य विशेष प्रवेश योजनाओं के उम्मीदवार

IMA में उम्मीदवारों को सिर्फ हथियार चलाना नहीं सिखाया जाता, बल्कि उन्हें Officer और Leader बनने के लिए तैयार किया जाता है। इनके प्रशिक्षण में शामिल होते हैं-

  • Physical Training और endurance
  • Drill और military discipline
  • Weapon training
  • Tactics और field craft
  • Map reading और navigation
  • Leadership और decision-making
  • Battlefield communication
  • Teamwork और command
  • Outdoor exercises और field training

यानी लक्ष्य यह होता है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कैडेट कठिन परिस्थितियों में अपने सैनिकों का नेतृत्व कर सके।

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