पूर्व IAF अधिकारी को क्यों मिली 3 साल की कठोर कैद ?

By Defence Detective

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पंजाब के मोहाली की एक विशेष अदालत ने 2008 के एक कोकीन मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त जूनियर वारंट ऑफिसर (JWO) दारा सिंह और उनके सहयोगी गुरदर्शन सिंह को तीन-तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। दारा सिंह की उम्र अब 80 साल और गुरदर्शन सिंह की उम्र 77 साल है। दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

स्पेशल जज हरदीप सिंह ने यह फैसला 3 सितंबर 2026 को सुनाया। मामला सीधे तौर पर किसी नई बरामदगी का नहीं, बल्कि करीब 18 साल पहले सामने आए मामले का है।

क्या है पूरा मामला ?

इस पूरे मामले की जड़ में है कोकीन बरामदगी। अगस्त 2008 में मोहाली पुलिस ने दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस के मुताबिक उनके कब्जे से 1.23 किलोग्राम कोकीन बरामद हुई थी। उस समय इस ड्रग की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई थी।

जांच के दौरान पुलिस को दो बैंक चेक भी मिले। इन दोनों चेकों की कुल रकम 10 लाख रुपये थी। अभियोजन के अनुसार ये चेक दारा सिंह ने गुरदर्शन सिंह को कथित तौर पर कोकीन खरीदने के लिए दिए थे।

यहीं से मामला केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा। बाद में इन्हीं चेकों को लेकर यह सवाल उठा कि क्या वे उस कथित अपराध से जुड़ी ऐसी संपत्ति हैं, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ‘proceeds of crime’ यानी अपराध से हासिल संपत्ति माना जा सकता है।

पहले NDPS केस में क्या हुआ था?

2008 की पुलिस कार्रवाई के बाद मामला नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट यानी NDPS Act के तहत आगे बढ़ा। ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2015 में दोनों को मूल पुलिस केस में दोषी ठहराया था।

दारा सिंह ने इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। बाद में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी और उनकी अपील लंबित रही। इसलिए 2026 का नया फैसला समझते समय यह अंतर महत्वपूर्ण है कि मूल ड्रग्स केस और मौजूदा PMLA केस एक ही चीज नहीं हैं।

मौजूदा फैसला उसी 2008 की घटना से जुड़े अलग मनी लॉन्ड्रिंग अभियोजन पर है।

ED की एंट्री और मामला PMLA तक

मूल पुलिस मामले के कई साल बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अक्टूबर 2019 में दोनों के खिलाफ Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के तहत मामला दर्ज किया।

ED ने अक्टूबर 2022 में चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी ने 2008 के मामले में बरामद कोकीन और दोनों बैंक चेकों को अपराध से जुड़ी संपत्ति यानी proceeds of crime के तौर पर पेश किया।

यहीं से मुकदमे का कानूनी केंद्र बदल गया। अब सवाल केवल यह नहीं था कि ड्रग्स की बरामदगी हुई थी या नहीं, बल्कि यह भी था कि उस कथित अपराध से जुड़े लेनदेन और संपत्ति को PMLA के तहत किस तरह देखा जाए।

बचाव पक्ष के तर्क क्या थे ?

मुकदमे में बचाव पक्ष ने ED के दावे का विरोध किया। उसका तर्क था कि बरामद ड्रग्स और चेकों को ‘proceeds of crime’ नहीं माना जा सकता, क्योंकि मूल मामले में ऐसी कोई रकम सामने नहीं आई थी जिसे ड्रग्स की बिक्री से कमाई गई राशि कहा जा सके।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि यह साबित नहीं हुआ कि उस लेनदेन में कोई पैसा वास्तव में कमाया या एक्सचेंज किया गया था।

दूसरी तरफ ED ने PMLA में ‘property’ की व्यापक परिभाषा का सहारा लेते हुए तर्क दिया कि अपराध में इस्तेमाल या उससे संबंधित संपत्ति भी कानून के दायरे में आ सकती है।

मोहाली कोर्ट ने चेकों को माना ‘proceeds of crime’

अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि दोनों आरोपियों के बीच हुए कथित लेनदेन से जुड़े बैंक चेकों को अपराध से संबंधित संपत्ति माना जा सकता है।

अदालत के अनुसार, ये चेक दोनों आरोपियों के बीच हुई डीलिंग का परिणाम थे और इसलिए इन्हें proceeds of crime की श्रेणी में रखा जा सकता है।

इसके आधार पर कोर्ट ने दोनों को PMLA की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध करने का दोषी माना, जिसकी सजा धारा 4 में निर्धारित है। दोनों को इसी धारा के तहत दोषी ठहराया गया।

नरमी की अपील का क्या हुआ ?

सजा तय होने के दौरान दोनों दोषियों ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने अपनी उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया।

दोनों ने खुद को परिवार का मुख्य कमाने वाला बताया और यह भी कहा कि वे निर्दोष हैं तथा मूल पुलिस केस गलत तरीके से दर्ज किया गया था।

लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

कितने साल की थी IAF की सेवा ?

दारा सिंह ने भारतीय वायुसेना में करीब 29 वर्ष सेवा की और जूनियर वारंट ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पंजाब टेक्निकल एजुकेशन बोर्ड में भी काम किया और वहां करीब नौ साल तक पुनर्नियुक्ति पर रहे।

यानी 2008 में मामला सामने आने के समय तक उनका लंबा सैन्य करियर रहा था।

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