फ्रेंच पायलट ने उठाए राफेल पर सवाल, मॉडर्न वॉरफेयर में टिकना मुश्किल

By Defence Detective

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Rafale fighter jet of the Indian Air Force flying in the sky

फ्रांस के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल Rafale को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। फ्रांसीसी Institute for International Relations (IFRI) की एक रिसर्च रिपोर्ट में फ्रांसीसी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरव्यू के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा सेंसर तकनीक के साथ Rafale के लिए स्टील्थ यानी Very Low Observable (VLO) लड़ाकू विमानों के खिलाफ युद्ध जीतना बेहद कठिन हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 से 2035 के बीच फ्रांस को हाई-इंटेंसिटी युद्ध में अपने सहयोगी देशों के स्टील्थ विमानों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।

इस खुलासे के बाद भारत के लिए सवाल स्वाभाविक है कि जब चीन के पास J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं और भारत खुद AMCA जैसे स्टील्थ फाइटर पर काम कर रहा है, तो फिर 114 और Rafale खरीदना कितना सही फैसला है?

फ्रांसीसी रिपोर्ट में और क्या है?

IFRI की रिपोर्ट The Future of Air Superiority: Command of the Air in High Intensity Warfare में कहा गया है कि फ्रांसीसी वायुसेना पारंपरिक यानी गैर-स्टील्थ लड़ाकू विमानों के खिलाफ काफी सक्षम है। लेकिन VLO तकनीक में मौजूदा कमी के कारण पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के खिलाफ उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है।

रिपोर्ट में रिसर्च इंटरव्यू के हवाले से कहा गया है कि फ्रांसीसी पायलट नियमित रूप से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के खिलाफ अभ्यास करते हैं और उनका आकलन है कि मौजूदा सेंसरों के साथ Rafale से स्टील्थ विमानों के खिलाफ कॉम्बैट मिशन जीतना बहुत मुश्किल है।

यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है कि यह हाई-एंड, हाई-थ्रेट युद्ध में सेंसर और स्टील्थ के बीच मौजूद तकनीकी असमानता का आकलन है।

स्टील्थ विमान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसे दुश्मन के रडार द्वारा देर से देखा और ट्रैक किया जा सकता है। इससे उसे पहले हमला करने और अपने हथियारों के इस्तेमाल की बेहतर स्थिति मिल सकती है।

Rafale की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

Rafale की खासियत उसकी बहुउद्देश्यीय क्षमता है। Dassault Aviation के अनुसार इसे एयर सुपीरियरिटी, एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक, डीप स्ट्राइक, टोही, एंटी-शिप स्ट्राइक और परमाणु मिशन तक के लिए डिजाइन किया गया है। यह जमीन के एयरबेस के अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर से भी ऑपरेट हो सकता है।

  • इसमें RBE2 AESA रडार लगा है, जो कई लक्ष्यों को एक साथ खोजने और ट्रैक करने में सक्षम है।
  • इसके साथ SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम रडार, मिसाइल और लेजर आधारित खतरों की चेतावनी देने, उनकी पहचान करने और जैमिंग तथा डिकॉय जैसी प्रतिक्रियाओं में मदद करता है।
  • Rafale का एक और बड़ा फायदा इसका हथियारों का व्यापक विकल्प है। इसमें Meteor लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, MICA, SCALP क्रूज मिसाइल, AASM/HAMMER जैसे एयर-टू-ग्राउंड हथियार और 30-mm तोप शामिल हैं।
  • यही वजह है कि Rafale को केवल एक फाइटर जेट के बजाय एक मल्टी-रोल कॉम्बैट सिस्टम के तौर पर देखा जाता है।
पहलूRafale
पीढ़ी4.5-Generation
स्टील्थपांचवीं पीढ़ी जैसा VLO स्टील्थ नहीं
अधिकतम गतिMach 1.8
अधिकतम टेक-ऑफ वजन24.5 टन
बाहरी हथियार/स्टोर क्षमता9.5 टन
रडारRBE2 AESA
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयरSPECTRA
प्रमुख BVR मिसाइलMeteor
लंबी दूरी की स्ट्राइकSCALP
भूमिकाAir-to-Air, Air-to-Ground, Reconnaissance, Anti-Ship आदि
नौसैनिक संस्करणRafale M
बड़ी ताकतMulti-role क्षमता, सेंसर, EW, हथियार और combat experience
प्रमुख सीमाVLO/स्टील्थ विमानों के सामने detection और survivability में नुकसान

इसकी सीमाएं भी हैं

Rafale की सबसे बड़ी तकनीकी सीमा यह है कि यह शुरू से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान के रूप में डिजाइन नहीं किया गया था। इसका अपना रडार क्रॉस सेक्शन पांचवीं पीढ़ी के VLO विमानों जितना नहीं है।

इसका असर खास तौर पर उस स्थिति में पड़ सकता है जब Rafale को ऐसे दुश्मन से लड़ना हो जिसके पास आधुनिक स्टील्थ विमान, लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और मजबूत Integrated Air Defence System यानी IADS हो।

IFRI की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस को भविष्य में इसी वजह से SEAD यानी दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को दबाने की क्षमता में भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस की पूर्ण SEAD क्षमता Rafale F5 के आने तक सीमित रह सकती है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि Rafale की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता कमजोर है। उलटे, SPECTRA इसकी प्रमुख survivability technologies में से एक है। समस्या यह है कि स्टील्थ विमान की शुरुआती detection, tracking और engagement में VLO प्लेटफॉर्म को स्वाभाविक बढ़त मिलती है।

भारत होगा राफेल का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर  

सालों की बहस, टेस्टिंग, बातचीत और कड़ी मोल-भाव के बाद, भारत ने फ़्रांसीसी राफ़ेल को चुना है। भारत ने 2016 में 36 राफ़ेल का ऑर्डर दिया था और इसके बाद 2025 में 26 राफ़ेल M (नेवी वाला वर्शन) का एक और ऑर्डर दिया।

भारत फ़्रांस के साथ 114 नए राफ़ेल के लिए भी बातचीत कर रहा है। अगर यह डील फ़ाइनल हो जाती है, तो भारत के पास 176 राफ़ेल का बेड़ा होगा, जिससे वह फ़्रांस के बाद दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा।

इसके अलावा भारत फ्रांस के बाद ऐसा पहला देश होगा जो Rafale के Air और Marine दोनों संस्करणों को संचालित करेगा।

इस सवाल के बाद कि यह स्टील्थ विमान के सामने नहीं टिक सकता, भारत का खरीदना कितना तार्किक कहा जा सकता है ? तो Rafale पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ विमान नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि वह आधुनिक हवाई युद्ध में कमजोर विमान है। वास्तव में भारत की मौजूदा परिस्थितियों में Rafale की जरूरत और उसकी सीमाएं, दोनों को साथ-साथ समझना जरूरी है।

कितने देश इस्तेमाल कर रहे Rafale?

Rafale की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता भी इसकी मजबूती का एक संकेत है। Dassault Aviation के अनुसार इसके सात विदेशी ग्राहक हैं—भारत, मिस्र, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया। इसके अलावा सर्बिया ने भी Rafale का ऑर्डर दिया है।

इंडोनेशिया को 42 Rafale के सौदे के तहत शुरुआती विमान 2026 की शुरुआत में मिल चुके हैं। UAE ने भी अपने 80 Rafale के ऑर्डर के तहत पहला विमान 2025 में प्राप्त किया था।

यानी Rafale अब केवल फ्रांस का लड़ाकू विमान नहीं रहा है। यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटर बेस वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है। इन तकनीकी आंकड़ों में Dassault के अनुसार Rafale की अधिकतम गति Mach 1.8, सर्विस सीलिंग 50,000 फीट और बाहरी स्टोर क्षमता 9.5 टन है।

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