क्या है भारतीय कंपनी से जुड़ा विवाद, जिसमें एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा

By Defence Detective

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Hanno Pevkur

यूरोप के छोटे से देश एस्टोनिया में एक ऐसा रक्षा सौदा राजनीतिक तूफान बन गया है, जिसकी शुरुआत यूक्रेन को तोप के गोले पहुंचाने की कोशिश से हुई थी और अंत में देश के रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। मामला करीब 70 मिलियन यूरो, यानी लगभग 770 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ा है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद के केंद्र में एक भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी है। आरोप यह नहीं है कि भारत की किसी सरकारी कंपनी ने गलत काम किया, बल्कि विवाद एक इटली में पंजीकृत कंपनी Datasel S.R.L. को लेकर है, जिसे नागपुर स्थित Neco Defence Munitions, जो Jayaswal Group का हिस्सा है, ने मार्च 2024 में खरीदा था।

एस्टोनिया ने इसी कंपनी से यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने का समझौता किया। समस्या तब शुरू हुई जब कंपनी के पास इस तरह के आर्टिलरी गोला-बारूद बनाने या बेचने का कोई पुराना रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इसके बावजूद एस्टोनिया ने उसे करोड़ों यूरो का अग्रिम भुगतान कर दिया। बाद में डिलीवरी में देरी हुई और मिले कुछ गोला-बारूद की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे।

यूक्रेन के लिए एस्टोनिया ने क्यों किया समझौता ?

रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरोप के सामने एक बड़ी सैन्य चुनौती खड़ी कर दी थी। यूक्रेन को लगातार बड़ी मात्रा में तोप के गोले चाहिए थे, लेकिन यूरोप में भी उत्पादन क्षमता सीमित थी। ऐसे समय में यूरोपीय देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—जल्दी से जल्दी गोला-बारूद जुटाना और यूक्रेन तक पहुंचाना।

एस्टोनिया ने इसी जरूरत को देखते हुए गोला-बारूद खरीदने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए यूरोपीय संघ के European Peace Facility (EPF) से जुड़े फंड का इस्तेमाल किया गया।

यानी यह सिर्फ एस्टोनिया का सामान्य सरकारी खरीद सौदा नहीं था। इसमें यूरोपीय धन भी जुड़ा हुआ था। यही कारण है कि मामला बिगड़ने के बाद इसकी गंभीरता और बढ़ गई।

क्या है Datasel S.R.L. का इतिहास?

सौदे के केंद्र में Datasel S.R.L. नाम की इटली में पंजीकृत कंपनी है। कंपनी की शुरुआत 2005 में इतालवी कारोबारी Sandro Pazzini ने की थी। उसका पुराना कारोबार रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर से जुड़ा था, न कि बड़े पैमाने पर आर्टिलरी गोला-बारूद बनाने से।

  • रिपोर्टों के मुताबिक 2023 में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम थी और उसका कारोबार लगभग 120,000 यूरो से थोड़ा अधिक था।
  • फिर जनवरी 2024 में कंपनी की पंजीकृत गतिविधियों में हथियार, हथियार प्रणालियों और सैन्य गोला-बारूद के थोक कारोबार को शामिल किया गया।
  • इसके कुछ ही समय बाद, 6 मार्च 2024 को Datasel को Neco Defence Munitions ने खरीद लिया। और यहीं से कहानी तेजी से बदल गई

कंपनी के अधिग्रहण के कुछ ही महीनों बाद वह एस्टोनिया के बड़े गोला-बारूद खरीद सौदे में शामिल हो गई।

  • एस्टोनिया की रक्षा खरीद एजेंसी Estonian Centre for Defence Investments (ECDI) ने अगस्त 2024 में Datasel के साथ पहला अनुबंध किया। इसके तहत करीब 15 मिलियन यूरो का अग्रिम भुगतान किया गया।
  • अक्टूबर 2024 में दूसरा अनुबंध हुआ और इसमें भी 10 मिलियन यूरो से अधिक की रकम अग्रिम दी गई।
  • इसके बाद कई अन्य अनुबंध हुए और कुल अग्रिम भुगतान बढ़कर लगभग 70 मिलियन यूरो तक पहुंच गया।

यानी एस्टोनिया ने एक ऐसी कंपनी को बहुत बड़ी रकम पहले ही दे दी, जिसका आर्टिलरी गोला-बारूद के क्षेत्र में स्थापित उत्पादन रिकॉर्ड नहीं था। यही सवाल आज इस पूरे मामले का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।

गोले यूक्रेन कब पहुंचने थे और क्या हुआ?

योजना के मुताबिक गोला-बारूद की पहली खेप नवंबर 2024 में यूक्रेन तक पहुंचनी थी। लेकिन डिलीवरी में देरी होने लगी। शुरुआत में समस्या को उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के रूप में देखा गया। युद्धकालीन परिस्थितियों में गोला-बारूद की वैश्विक मांग बहुत अधिक थी और सप्लाई चेन पर दबाव भी था। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।

2025 में जब गोला-बारूद की खेप पहुंची, तो उसकी गुणवत्ता को लेकर भी विवाद सामने आया। एस्टोनियाई पक्ष के मुताबिक कुछ गोला-बारूद आवश्यक मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद एस्टोनिया ने अनुबंध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया और रकम वापस हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की।

अब जानिए कंपनी का पक्ष

इस घटना का दूसरा पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। Datasel ने एस्टोनिया के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि वह इस विवाद में खुद को पीड़ित पक्ष मानती है। कंपनी के अनुसार उसने लगभग 58 मिलियन यूरो मूल्य की सामग्री सप्लाई और इनवॉइस की थी, जबकि उसे करीब 59 मिलियन यूरो का अग्रिम भुगतान मिला था।

कंपनी ने यह भी कहा कि अनुबंधों में कई देशों की जटिल अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन शामिल थी। इसके लिए अलग-अलग सरकारों, नियामक एजेंसियों और अन्य संस्थाओं से मंजूरी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करनी थी। इससे कुछ सरकारी और नियामकीय मंजूरियों में देरी हुई। कंपनी के अनुसार उसने ऐसी सामग्री भी तैयार कर ली थी जो डिलीवरी के लिए तैयार थी या उत्पादन में थी, लेकिन ECDI ने उसे स्वीकार नहीं किया और अनुबंध समय से पहले समाप्त कर दिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी ने कहा है कि अनुबंध के तहत हुई जांच में गुणवत्ता संबंधी समस्याएं स्थापित नहीं हुई थीं। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी ने जानबूझकर खराब गोला-बारूद दिया या पैसे लेकर गायब हो गई। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और विवाद कानूनी प्रक्रिया में है।

फिर रक्षा मंत्री को इस्तीफा क्यों देना पड़ा?

यहीं से मामला रक्षा खरीद विवाद से निकलकर राजनीतिक संकट बन गया। एस्टोनिया के रक्षा मंत्री Hanno Pevkur, जो जुलाई 2022 से रक्षा मंत्री थे, ने अब पद से इस्तीफा दे दिया है। Pevkur ने कहा कि वह रक्षा मंत्रालय के हर व्यक्तिगत अनुबंध के लिए सीधे जिम्मेदार व्यक्ति नहीं हैं। लेकिन एक मंत्री के रूप में वह पूरे रक्षा क्षेत्र की राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हैं।

उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, लेकिन अगर रक्षा व्यवस्था के भीतर गंभीर समस्याएं सामने आती हैं तो राजनीतिक जिम्मेदारी से बचना भी उचित नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि एस्टोनिया के प्रधानमंत्री Kristen Michal ने Pevkur को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं बताया था। लेकिन राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल फिर भी बना रहा।

ऑडिट रिपोर्ट ने भी बढ़ाई मुश्किल

Pevkur का इस्तीफा केवल Datasel सौदे से नहीं जुड़ा था। एस्टोनिया के National Audit Office ने 28 अगस्त को जारी अपनी जांच में रक्षा क्षेत्र में फंड के इस्तेमाल और सैन्य संपत्तियों की accounting को लेकर कमियां बताई थीं। इससे पहले भी रक्षा खरीद और फंड प्रबंधन को लेकर सवाल उठ चुके थे।

सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर करीब 70 मिलियन यूरो की रकम वापस नहीं आती, तो इसका बोझ अंततः एस्टोनिया के सरकारी बजट पर पड़ सकता है। यानी जिस पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन की मदद के लिए किया जाना था, उसके फंस जाने पर एस्टोनिया को खुद आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पैसे कैसे होंगे वापस?

एस्टोनिया ने अनुबंध समाप्त करने के बाद विवाद को arbitration तक पहुंचा दिया है। सरकार यूरोपीय आयोग के साथ भी इस मामले पर काम कर रही है ताकि रकम की रिकवरी की जा सके। इस मामले में यूरोपीय संघ के पैसे का इस्तेमाल हुआ था, इसलिए केवल एस्टोनिया की चिंता नहीं है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि EU funds से की गई रक्षा खरीद में कंपनियों की जांच और supplier verification कितनी मजबूत थी।

यूरोपीय आयोग ने भी एस्टोनियाई अधिकारियों के साथ इस मामले में संपर्क रखा है और EU funds की सुरक्षा तथा recovery mechanisms पर जोर दिया है।

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