पाकिस्तान सीमा पर इंडियन एयरफोर्स के 17 दिनों के NOTAM का मतलब क्या है ?

By Defence Detective

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FIGHTER PLANE During .Military Exercise

भारत ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक यानी 17 दिनों के लिए एक बड़े एयरस्पेस को सैन्य गतिविधियों के लिए रिजर्व करने वाला NOTAM जारी किया है। इसको लेकर पाकिस्तान में भारी हलचल है। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नोटिफिकेशन के असर का आकलन करने के लिए तत्काल बैठक की और भारत-पाकिस्तान सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

दरअसल भारतीय वायुसेना सितंबर के आखिर से पश्चिमी राजस्थान में बड़े पैमाने पर हवाई युद्धाभ्यास करने जा रही है। माना जा रहा है कि इसी संदर्भ में भारत ने बड़े हिस्से का एयरस्पेस सैन्य गतिविधियों के लिए अस्थायी रूप से रिजर्व किया है। इस NOTAM की खास बात सिर्फ इसकी 17 दिन की अवधि नहीं, बल्कि इसका इलाका भी है।

क्या होता है NOTAM ?

NOTAM का अर्थ Notice to Airmen है। यह विमानन क्षेत्र की एक आधिकारिक सूचना होती है, जिसके जरिए पायलटों, एयरलाइंस, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और दूसरे विमानन ऑपरेटरों को किसी इलाके में अस्थायी बदलाव या खतरे की जानकारी दी जाती है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी क्षेत्र में सैन्य अभ्यास होना है और वहां लड़ाकू विमान बड़ी संख्या में उड़ान भरने वाले हैं, तो उस इलाके को सामान्य नागरिक विमानों के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधित या नियंत्रित किया जा सकता है। इसके बारे में पहले से NOTAM जारी किया जाता है।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सैन्य विमान और सामान्य नागरिक विमान एक-दूसरे के रास्ते में न आएं और हवाई क्षेत्र में दुर्घटना का खतरा कम हो।

किस इलाके के लिए है NOTAM?

इस बार जारी NOTAM का संबंध पूरे राजस्थान से नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सैन्य गतिविधियों के लिए रिजर्व किया गया एयरस्पेस पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर में फैला है। इसका एक हिस्सा पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 20 किलोमीटर तक नजदीक आता है। बीकानेर के नाल (NAL) क्षेत्र के आसपास का एयरस्पेस भी सैन्य गतिविधियों के लिए रिजर्व किया गया है।

यानी यह क्षेत्र भारत के पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तान की सीमा के काफी करीब है। रिपोर्ट के मुताबिक आरक्षित एयरस्पेस की ऊंचाई लगभग 40,000 फीट तक है।  यहां एक बात विशेष रूप से समझना जरूरी है। 20 किलोमीटर NOTAM की रेंज नहीं है। यह उस आरक्षित एयरस्पेस के एक हिस्से की पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूरी है।

क्यों रिजर्व रहेगा एयरस्पेस?

सितंबर में होने वाले वीर गार्जियन और तरंग शक्ति जैसे बड़े अभ्यासों के कारण पश्चिमी राजस्थान का आसमान लंबे समय तक सैन्य गतिविधियों का केंद्र रहने वाला है। माना जा रहा है कि भारत ने  एयरस्पेस इसी संदर्भ में सैन्य गतिविधियों के लिए रिजर्व किया है।

  • सबसे पहले भारत और जापान का ‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास है। यह 9 सितंबर से 21 सितंबर तक प्रस्तावित है।
  • इस अभ्यास में पहली बार जापानी लड़ाकू विमान किसी भारतीय एयरबेस से ऑपरेशन करेंगे। जापान ने इसके लिए तीन F-2A लड़ाकू विमान और करीब 110 सैन्यकर्मियों की तैनाती की घोषणा की है।
  • इसके बाद बहुराष्ट्रीय ‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास होना है। इसका आयोजन जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक किया जाना है।
  • इस अभ्यास में भारत के साथ मित्र देशों की वायुसेनाएं शामिल होंगी और इसका उद्देश्य संयुक्त हवाई अभियानों, प्रशिक्षण और अलग-अलग वायुसेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर करना है।

इन संदर्भों में लगातार फाइटर जेट की गतिविधियां होने की उम्मीद है। इंडियन एयर फ़ोर्स के लिए, ये एक्सरसाइज़ असल हालात में ऑपरेशनल प्रक्रियाओं, तालमेल, तैनाती के तरीकों और कर्मियों व एयरक्राफ़्ट की तैयारी को परखने का मौका देंगी, जिसमें एडवांस्ड फाइटर प्लेटफ़ॉर्म के साथ मिलकर किए जाने वाले ऑपरेशन भी शामिल हैं।

पाकिस्तान में आपात बैठक क्यों ?

पाकिस्तान की चिंता को सिर्फ एक NOTAM से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसके पीछे कई परिस्थितियां एक साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ा कारण है स्थानभारत ने जिस एयरस्पेस को रिजर्व किया है, वह पाकिस्तान की सीमा के नजदीक पश्चिमी राजस्थान में है।

दूसरा कारण है अभ्यास की अवधि। 17 दिनों तक एयरस्पेस रिजर्व रहने का मतलब है कि इस अवधि में लगातार या अलग-अलग चरणों में सैन्य हवाई गतिविधियां हो सकती हैं।

तीसरा कारण है भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद सैन्य तनाव। पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के सैन्य प्रतिष्ठान एक-दूसरे की गतिविधियों को लेकर ज्यादा सतर्क हैं। मौजूदा अभ्यासों को ऑपरेशन सिंदूर के बाद के तनावपूर्ण माहौल के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

ऐसे माहौल में सीमा के पास बड़े एयर कॉम्बैट अभ्यास की घोषणा पाकिस्तान के लिए स्वाभाविक रूप से संवेदनशील मामला बन जाती है।  इसलिए वह सीमा पर खास नजर रख रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नोटिफिकेशन की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई।

पाकिस्तान के वरिष्ठ सुरक्षा सूत्रों के अनुसार नोटिफिकेशन का विस्तृत आकलन किया गया और इसकी जानकारी पाकिस्तान के Chief of Defence Forces के कार्यालय तक पहुंचाई गई। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सार्वजनिक रूप से स्थिति को लेकर अत्यधिक चिंता दिखाने से इनकार किया है।

चिंता की कोई बात नहीं है और भारत ने जो अभ्यास घोषित किया है, उसके लिए NOTAM जारी किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत की ओर से कोई जोखिम पैदा होता है तो पाकिस्तान अपनी प्रतिक्रिया देगा।
khawaja Asif, Defence minister, Pakistan

क्यों सावधानी बरत रहा पाकिस्तान ?

माना जा रहा है कि इस सावधानी के पीछे 6 मई 2025 को वायुसेना द्वारा पाकिस्तान सीमा के पास बड़े हवाई अभ्यास के लिए NOTAM जारी करने के बाद अभ्यास के बजाय ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर देने की घटना भी एक बड़ा कारण है।

दरअसल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद भारत ने एक साथ कई स्तरों पर सैन्य तैयारी की थी। 24 अप्रैल को वायुसेना ने ‘आक्रमण’ अभ्यास शुरू किया, जिसमें लड़ाकू विमानों के जरिए जटिल अभियानों और युद्ध जैसी परिस्थितियों में तैयारी को परखा गया।

इसके समानांतर अरब सागर में नौसेना ने मिसाइल फायरिंग और समुद्री अभ्यास किए। 29 अप्रैल को सेना और सशस्त्र पुलिस बलों ने संयुक्त ड्रिल की।

मई की शुरुआत में नौसेना की गतिविधियां जारी रहीं और 6 मई को IAF ने घोषणा की कि 7 मई की रात से 9 मई की सुबह तक राजस्थान में पाकिस्तान सीमा के करीब बड़ा हवाई अभ्यास होगा। इसके लिए NOTAM जारी हुआ।

लेकिन असली ट्विस्ट यह है कि—

6-7 मई की रात लगभग 1:44 बजे ऑपरेशन सिंदूर शुरू हो गया, यानी जिस रात IAF का घोषित अभ्यास शुरू होना था, उसी रात भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर दिया।

भारत के लिए यह अभ्यास क्यों अहम है?

आधुनिक हवाई युद्ध केवल लड़ाकू विमान और पायलट तक सीमित नहीं है। इसमें एयरबोर्न सर्विलांस, कमांड और कंट्रोल, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, संचार और अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे बड़े अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपने पायलटों को जटिल और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित कर सकती है। अलग-अलग एयरबेस और विमानों के बीच समन्वय भी परखा जाता है।

इसके अलावा जापान के साथ वीर गार्जियन का एक विशेष महत्व है। जापान के F-2A विमान का भारतीय एयरबेस से ऑपरेशन दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को एक नया आयाम देता है। इसके बाद तरंग शक्ति में कई देशों की वायुसेनाओं के साथ अभ्यास होने से भारतीय पायलटों को अलग-अलग देशों के ऑपरेशनल तरीकों और प्लेटफॉर्म के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।

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