रूस और यूक्रेन की लड़ाई का फिलहाल कोई अंत नहीं दिखता। दोनों ओर से मिसाइल और ड्रोनों की बौछार जारी है। इसके बीच यूक्रेन में आर्सेलर मित्तल क्रिवी रिह माइनिंग और मेटलर्जिकल कॉम्प्लेक्स रविवार को रूसी मिसाइलों का निशाना बन गया। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की इस कंपनी पर रूसी मिसाइल हमले में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि 10 से अधिक लेबर और कॉन्ट्रैक्टर्स घायल हैं। मुख्य ऊर्जा व ब्लास्ट-फर्नेस ऑपरेशन्स को नुकसान पहुंचने के कारण प्रोडक्शन को आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।
आर्सेलर-मित्तल क्रिवी रिह ने पुष्टि की कि मिसाइल हमले में उसकी एक साइट पर हमला हुआ था और कामकाज आंशिक रूप से रोक दिया गया है।कीव पोस्ट के अनुसार, 2022 में भी रूस के मिसाइल हमले में यह प्लांट निशाना बना था, जिसमें एक रोलिंग मिल नष्ट हो गई थी और एक कर्मचारी की मौत हुई थी। यूक्रेन का क्रिवी रिह शहर राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का गृहनगर है।
क्रिवी रिह शहर स्थित यह स्टील प्लांट, यूक्रेन का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले यानी 2021 में यहां करीब 27,000 लोग काम करते थे। जिसमें लगभग 22,000 कंपनी के कर्मचारी थे और 5,000 कॉन्ट्रैक्टर्स थे। साल 2022 में कंपनी से जुड़े स्टील प्लांट्स और माइंस में करीब 26,000 कर्मचारी बताए गए थे। 2024 के आखिर और साल 2025 के आसपास कर्मचारियों की संख्या घटकर 18,000+ रह गई थी। कंपनी के CEO के अनुसार, 2021 के बाद करीब 9,000 लोग कंपनी से बाहर हुए, जिनमें लगभग 3,000 सेना में चले गए थे। कंपनी की वेबसाइट अभी भी इसे 20,000+ jobs देने वाला बड़ा employer बताती है।

क्रिवी रिह में रूसी मिसाइल हमले में दो लोगों की मौत और 14 घायल हुए हैं। सूमी शहर में भी एक की मौत हुई है।
Volodymyr Zelenskyy, President, Ukraine
कौन हैं लक्ष्मी निवास मित्तल ?
‘स्टील किंग’ के तौर पर मशहूर लक्ष्मी निवास मित्तल भारतीय मूल के अरबपति कारोबारी हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्टील कारोबारियों में से एक हैं लक्ष्मी निवास मित्तल ArcelorMittal के Executive Chairman हैं। कंपनी दुनिया की प्रमुख स्टील और माइनिंग कंपनियों में शामिल है। 2004 में Mittal Steel का गठन हुआ और 2006 में Mittal Steel का फ्रांस की Arcelor के साथ विलय हुआ। Lakshmi Mittal ने 2006 में Arcelor को लगभग $34 अरब की डील में हासिल किया था। इसी से ArcelorMittal का निर्माण हुआ और मित्तल वैश्विक स्टील उद्योग के सबसे प्रभावशाली कारोबारियों में शामिल हो गए। राजस्थान के सादुलपुर (चुरु जिला) में 15 जून 1950 को जन्मे लक्ष्मी मित्तल को वैश्विक स्तर पर घाटे में चल रही स्टील मिलों का अधिग्रहण करके उन्हें Profitable बनाने के लिए जाना जाता है।
यूक्रेन ने भी ताबडतोड़ ड्रोन हमले
वहीं यूक्रेन भी रूस पर हमलों में पीछे नहीं है। रविवार को यूक्रेन के एक बड़े हवाई हमले में रूस में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन ने सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर लंबी दूरी के हमले तेज करने के साथ रूस भर में सैकड़ों ड्रोन भेजे। मास्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में 83 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत भी हुई है।
एक और यूक्रेनी हमले की वजह से पोदोल्स्क शहर में ‘वाइल्डबेरीज़’ (Wildberries) के वेयरहाउस में आग लग गई। यह रूस का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिटेलर है और इस कंपनी को देश की सबसे अमीर महिला, अरबपति तात्याना किम चलाती हैं।
रूस के दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव इलाके के तीन कस्बों पर एक और ड्रोन हमला हुआ, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने रात भर में 822 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए। इनमें से सैकड़ों का निशाना मास्को था।
यूक्रेन की बनी लंबी दूरी की मिसाइलें रूस पर हमले में भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। जेलेंस्की ने शनिवार को बताया कि यूक्रेनी मिसाइलों से रूस के समारा शहर में रॉकेट रिसर्च और प्रोडक्शन सेंटर पर हमला किया गया, जो यूक्रेनी सीमा से लगभग 900 किलोमीटर दूर है।
युद्ध में नया मोर्चा
इस साल यूक्रेन ने रूस पर अपने हमले तेज़ कर दिए हैं। वह लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन के झुंडों से रूस के मिलिट्री उद्योगों और एनर्जी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। उसने लॉजिस्टिक्स की बड़ी कंपनी ‘वाइल्डबेरीज़’ (Wildberries) के गोदामों पर भी हमले बढ़ा दिए हैं, जिससे अरबों डॉलर का सामान जलकर खाक हो गया है। हमलों ने युद्ध को रूसी आम जनता तक पहुँचा दिया है। लड़ाई तेज है और बातचीत ठप। ऐसे में, युद्धरत देशों ने एक-दूसरे के इलाके में काफी अंदर तक लंबी दूरी के हमले तेज़ कर दिए हैं। इसके चलते नागरिकों की मौत का आंकड़ा 2022 में युद्ध के शुरुआती महीनों के बाद से सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है।
क्या है रूस-यूक्रेन युद्ध ?
रूस-यूक्रेन युद्ध वर्तमान में बहुत भीषण दौर में है, जहाँ दोनों देश एक-दूसरे के शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े ड्रोन और मिसाइल हमलों से पलटवार कर रहे हैं। 24 फरवरी 2022 को रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से शुरू हुआ यह संघर्ष, आज यूरोपीय क्षेत्र का सबसे बड़ा युद्ध बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 16,000 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है।
क्यों शुरू हुआ युद्ध ?
फिलहाल इस लड़ाई की जड़ें 2014 में हैं, जब यूक्रेन में राजनीतिक संकट के बाद रूस ने क्रीमिया पर कब्जा करके उसे रूस में मिला लिया। इसके बाद इसका मौजूदा और सबसे व्यापक चरण फरवरी 2022 में शुरू हुआ, जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रमण शुरू किया। रूस लंबे समय से पूर्वी यूरोप में NATO के विस्तार को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है। दूसरी ओर, यूक्रेन यूरोपीय संघ और NATO के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता था। यही रूस और पश्चिम के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा बना। ऐसे में फरवरी 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में “special military operation” घोषित कर युद्ध छेड़ दिया, जो अब तक जारी है।
रूस की प्रमुख मांगें–
- यूक्रेन की NATO सदस्यता रोकना
- कब्जे वाले क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना
- यूक्रेन की सैन्य और पश्चिमी सुरक्षा व्यवस्था को सीमित करना
यूक्रेन की स्थिति –
- अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता बनाए रखना
- रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की वापसी
- भविष्य में रूस के दोबारा हमले से सुरक्षा की गारंटी
इन्हीं कारणों के चलते शांति वार्ता बेहद कठिन रही है। रूस युद्ध के “मूल कारणों” को पहले संबोधित करने की मांग करता है, जबकि यूक्रेन और उसके यूरोपीय समर्थक युद्धविराम और मजबूत सुरक्षा गारंटी पर जोर देते हैं।
युद्ध में कौन-कौन हैं शामिल ?
यूं तो सीधी और प्रत्यक्ष लड़ाई केवल रूस और यूक्रेन के मध्य हो रही है। लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन को हथियार और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ रूस पर आर्थिक दंडात्मक कार्रवाईयां भी कर रहे हैं। वहीं रूस को भी चीन सहायता मुहैया करा रहा है। रूस से तेल खरीद को उसकी आर्थिक सहायता के तौर पर पश्चिमी देश भारत को लगातार निशाना बनाते आ रहे हैं। इस कारण यह युद्ध केवल रूस बनाम यूक्रेन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका व्यापक असर यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था, रूस-पश्चिम संबंधों और भारत पर भी पड़ा है।








