भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और स्वदेशी जहाज निर्माण को नई गति देने वाली एक बड़ी योजना सामने आई है। नौसेना के लिए चार Next Generation Destroyers (NGD) बनाने का प्रस्ताव अब रक्षा खरीद प्रक्रिया के अगले चरण में बढ़ने वाला है। इन अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोतों का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में ही किया जाएगा और इसके लिए देश के सरकारी तथा निजी शिपयार्डों के बीच प्रतिस्पर्धा होगी।
रिपोर्टों के अनुसार, चार विध्वंसकों का प्रस्ताव Defence Procurement Board (DPB) के सामने रखा जाएगा। DPB से मंजूरी मिलने के बाद मामला Defence Acquisition Council (DAC) के पास जाएगा। DAC की मंजूरी के बाद Cabinet Committee on Security (CCS) की स्वीकृति जरूरी होगी। इसके बाद ही निर्माण के लिए औपचारिक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रक्रिया अगले वर्ष तक आगे बढ़ सकती है।
- DPB की अध्यक्षता रक्षा सचिव करते हैं और इसमें तीनों सेनाओं के उप प्रमुख शामिल होते हैं।
- DAC की अध्यक्षता रक्षा मंत्री और CCS की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
क्या होंगी नए विध्वंसकों की खूबियां?
प्रस्तावित NGD की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनका आकार शामिल है। नए विध्वंसकों को अत्यधिक शक्तिशाली मिसाइल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक-
- इन जहाजों का वजन लगभग 10,000 टन होगा और वे भारतीय नौसेना के मौजूदा विध्वंसकों से बड़े होंगे।
- भारत के Project 15A Kolkata-class और Project 15B Visakhapatnam-class destroyers लगभग 7,500 टन श्रेणी के हैं।
- इन जहाजों पर Extended-Range BrahMos जैसी लंबी दूरी के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम को शामिल किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट में इसकी संभावित मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर तक बताई गई है।
- इसके अलावा, जहाजों के लिए लंबी दूरी की Surface-to-Air Missile (SAM) प्रणाली भी महत्वपूर्ण होगी।
- रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के 2028-29 के आसपास उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य जहाज को दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों के खिलाफ अधिक प्रभावी सुरक्षा देना होगा।
- रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहाज के 2034-35 के आसपास तैयार होने की उम्मीद है।
Project 18 से जुड़ा है कार्यक्रम?
Next Generation Destroyer कार्यक्रम को आम तौर पर Project 18 या P-18 से जोड़ा जाता है। यह भारतीय नौसेना के Warship Design Bureau की अगली पीढ़ी के बड़े युद्धपोतों की योजना है और इसे मौजूदा Visakhapatnam-class के बाद की दिशा में देखा जाता है।
Project 18 को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई रिपोर्टें सामने आती रही हैं। नवंबर 2025 में Naval News ने Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) के अधिकारियों के हवाले से बताया था कि नौसेना एक नए destroyer programme पर विचार कर रही है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹70,000-80,000 करोड़ हो सकती है। उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि कार्यक्रम Project 18 होगा या Project 15C जैसा कोई अंतरिम डिजाइन।
इसलिए मौजूदा रिपोर्ट को Project 18 के औपचारिक निर्माण अनुबंध के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण विकास यह है कि चार जहाजों के शुरुआती पैकेज को सरकारी खरीद प्रक्रिया में आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है।
लगभग 100 प्रतिशत स्वदेशीकरण का लक्ष्य
इस कार्यक्रम का दूसरा बड़ा पहलू आत्मनिर्भर भारत है। इन जहाजों में लगभग 100 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इस लक्ष्य की सफलता काफी हद तक उन स्वदेशी तकनीकों पर निर्भर करेगी जो आने वाले वर्षों में तैयार होनी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत को लगभग 2028 तक नया डीजल इंजन और करीब 2031 तक गैस टर्बाइन उपलब्ध होने की उम्मीद है। यदि ये प्रणोदन प्रणालियां निर्धारित समय पर विकसित और प्रमाणित होती हैं, तो भविष्य के बड़े युद्धपोतों में विदेशी प्रणोदन पर निर्भरता घट सकती है।
यही कारण है कि NGD केवल एक जहाज निर्माण परियोजना नहीं है। यह भारत के युद्धपोत डिजाइन, गैस टर्बाइन, डीजल इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, सेंसर, हथियार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के स्वदेशीकरण की व्यापक परीक्षा भी होगी।
नए विध्वंसकों की जरूरत क्यों ?
नए विध्वंसकों की जरूरत का एक कारण भारतीय नौसेना के पुराने युद्धपोतों का धीरे-धीरे सेवा से बाहर होना भी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-class destroyers अब लगभग 25-30 वर्ष पुराने हो चुके हैं। इसके अलावा रूसी मूल के Kashin-class destroyers भी काफी पुराने हैं।
नई पीढ़ी के छह जहाजों के आने से लंबी अवधि में पुराने विध्वंसकों को हटाने और fleet में आधुनिक combat capability बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में चीन की नौसैनिक गतिविधियों के बढ़ने के बीच भारत के लिए बड़े और अधिक सक्षम surface combatants का महत्व लगातार बढ़ रहा है। चीन ने बड़े पैमाने पर destroyers और अन्य surface combatants का निर्माण किया है। ऐसे में भारतीय नौसेना को केवल संख्या ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की मिसाइल, आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध और बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमता से लैस युद्धपोतों की आवश्यकता है।
भारतीय शिपयार्डों के लिए बड़ा अवसर
इस परियोजना का सबसे सीधा आर्थिक प्रभाव भारतीय शिपयार्डों पर पड़ेगा। भारत पहले ही बड़े युद्धपोतों के निर्माण में अपनी क्षमता साबित कर चुका है। Mazagon Dock Shipbuilders ने Kolkata और Visakhapatnam वर्ग के विध्वंसकों के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई है। भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में दस स्वदेशी निर्मित destroyers हैं, जिनमें Kolkata और Visakhapatnam वर्ग शामिल हैं।
अब नई नीति के तहत केवल एक सरकारी शिपयार्ड को परियोजना देने के बजाय प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाने की संभावना भारतीय निजी रक्षा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे Larsen & Toubro जैसे निजी क्षेत्र के बड़े shipbuilding players और अन्य योग्य शिपयार्डों को भविष्य की नौसैनिक परियोजनाओं में बड़ी भूमिका मिल सकती है।








