अमेरिका ने भविष्य के ड्रोन युद्ध को लेकर अपनी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत दिए हैं। लंबे समय से अमेरिकी वायुसेना के प्रमुख Medium-Altitude Long-Endurance (MALE) ड्रोन MQ-9A Reaper ने ईरान के खिलाफ लड़ाई में जबरदस्त उपयोगिता साबित की, लेकिन इसी अभियान ने उसकी एक बड़ी कमजोरी भी उजागर कर दी कि भारी वायु रक्षा वाले क्षेत्र में एक महंगा ड्रोन खोना आर्थिक और सैन्य दोनों दृष्टि से महंगा पड़ सकता है।
इसी अनुभव के बाद अमेरिकी वायुसेना अब ऐसे नए ड्रोन की दिशा में बढ़ रही है जो Reaper की कई भूमिकाएं निभा सके, लेकिन कम लागत वाला, तेजी से उत्पादन योग्य, मॉड्यूलर और बड़ी संख्या में तैनात किया जा सके। इस पहल को Massed Modular Aircraft (MMA) नाम दिया गया है। इसका लक्ष्य केवल “बेहतर Reaper” बनाना नहीं, बल्कि ऐसी पूरी अवधारणा विकसित करना है जिसमें युद्ध में कुछ ड्रोन खोने के बावजूद मिशन जारी रहे।
नई MMA अवधारणा इसी समस्या का समाधान खोजने का प्रयास है। अमेरिकी रक्षा नवाचार इकाई Defense Innovation Unit (DIU) ने जुलाई 2026 में उद्योग से ऐसे विमानों के प्रस्ताव मांगे जो अपेक्षाकृत कम लागत में बड़ी संख्या में बनाए जा सकें। DIU के अनुसार मौजूदा $30 मिलियन या उससे अधिक लागत वाले कम संख्या के “exquisite” unmanned aircraft पर निर्भर रहना भविष्य के layered air-defence वातावरण में टिकाऊ नहीं है।
सस्ते विकल्प के लिए क्यों मजबूर हुआ अमेरिका ?
ईरान के विरुद्ध MQ-9 Reaper अमेरिकी अभियानों का एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया। अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल Kenneth Wilsbach ने मई 2026 में अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि अभियान में Reaper शायद सबसे मूल्यवान प्लेटफॉर्म था और किसी अन्य प्लेटफॉर्म की स्ट्राइक संख्या उसके करीब नहीं थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार MQ-9 को स्ट्राइक, ISR यानी Intelligence, Surveillance and Reconnaissance, लक्ष्य निगरानी और समन्वय जैसे मिशनों के लिए इस्तेमाल किया गया। लेकिन सफलता के साथ भारी नुकसान भी हुआ।
- ईरान अभियान के दौरान लगभग 45 MQ-9 के नुकसान की जानकारी सामने आई।
- MQ-9A की कीमत उसके कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करती है। लेकिन पूर्ण सेंसर पैकेज के साथ एक Reaper की कीमत लगभग 50 मिलियन डॉलर तक हो सकती है।
- ऐसे में उसे ऐसे वातावरण में भेजना जहां दुश्मन के पास layered air defence, surface-to-air missiles और कम लागत वाले anti-aircraft systems मौजूद हों, आर्थिक रूप से कठिन निर्णय बन जाता है।
- यही विरोधाभास अमेरिका की नई ड्रोन रणनीति का आधार बन गया है—जिस प्लेटफॉर्म की युद्ध में सबसे ज्यादा जरूरत है, वही प्लेटफॉर्म अत्यधिक महंगा होने के कारण बड़ी संख्या में खोना स्वीकार्य नहीं है।
“Attritable” ड्रोन का मतलब क्या?
MMA की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा attrition tolerance है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका जानबूझकर ड्रोन खोना चाहता है। बल्कि डिजाइन ऐसा होगा कि यदि कुछ विमान दुश्मन की वायु रक्षा से नष्ट भी हो जाएं, तो पूरी सैन्य क्षमता पर अस्वीकार्य असर न पड़े। यह Reaper मॉडल से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पारंपरिक सोच में एक अत्यधिक सक्षम UAV को बचाना महत्वपूर्ण होता है।
- MMA मॉडल में विचार यह है कि एक महंगे ड्रोन के बजाय कई अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन मैदान में भेजे जाएं।
- इनमें से कुछ ISR कर सकते हैं, कुछ हथियार ले जा सकते हैं, कुछ electronic warfare कर सकते हैं और कुछ communication relay का काम कर सकते हैं।
- इससे दुश्मन के लिए समस्या केवल एक लक्ष्य को मार गिराने की नहीं होगी, बल्कि एक साथ कई विमानों से निपटने की होगी।
“swarm drone” समझना भी ठीक नहीं
MMA को सामान्य “swarm drone” समझना सही नहीं होगा। यह छोटे quadcopter जैसे स्वॉर्म ड्रोन की अवधारणा से काफी अलग है। DIU की आवश्यकताओं के अनुसार-
- नए विमान में कम से कम 2,800 पाउंड यानी लगभग 1,270 किलोग्राम payload ले जाने की क्षमता होनी चाहिए।
- इसके अलावा उसे बिना refuelling लगभग 2,300 nautical miles combat radius हासिल करना होगा।
- एक तरफ यह बड़ी payload क्षमता है और दूसरी तरफ लंबी दूरी। इसका अर्थ है कि अमेरिका छोटे tactical drones की संख्या बढ़ाने के बजाय एक ऐसे मध्यम/बड़े unmanned aircraft ecosystem पर काम कर रहा है जिसे mass production के लिए डिजाइन किया जाएगा।
- नए विमान से कम से कम 8,000 nautical miles one-way self-deployment क्षमता भी मांगी गई है। यानी उसे एक थिएटर से दूसरे थिएटर में लंबी दूरी तक स्वयं तैनात किया जा सके।
Modular architecture होगी सबसे बड़ी ताकत
MMA का दूसरा प्रमुख पहलू modularity है। अमेरिकी वायुसेना ऐसा विमान चाहती है जिसमें sensor, weapon, fuel और अन्य mission packages को तेजी से बदला जा सके।
- उदाहरण के लिए एक sortie में विमान ISR sensor ले जा सकता है, जबकि अगले मिशन में electronic warfare payload या weapons लगाया जा सकता है।
- इससे एक ही airframe कई मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
- यह approach acquisition और maintenance costs को भी प्रभावित कर सकती है। यदि पूरी aircraft architecture को नए मिशन के लिए बदलने के बजाय केवल payload बदलना हो, तो नई क्षमताओं को field करने में कम समय लग सकता है।
एक ऑपरेटर, कई ड्रोन
MMA की अवधारणा में autonomy भी महत्वपूर्ण है। DIU ने one-to-many operator-to-UAS control ratio जैसी क्षमता की आवश्यकता रखी है। इसका मतलब भविष्य में एक मानव ऑपरेटर एक साथ कई unmanned aircraft की निगरानी या mission management कर सके। यह capability massed operations के लिए आवश्यक होगी।
यदि 10 या 20 ड्रोन तैनात करने के लिए 10 या 20 अलग-अलग मानव ऑपरेटरों की जरूरत पड़े, तो manpower और infrastructure का बोझ बहुत बढ़ जाएगा।
Autonomy उस समस्या को कम कर सकती है। मानव मिशन के महत्वपूर्ण निर्णयों पर नियंत्रण रखेगा जबकि drones navigation, formation management और कुछ tactical functions को स्वायत्त रूप से संभाल सकते हैं।
नया विमान केवल strike platform नहीं होगा। अमेरिकी योजना में ISR, electronic warfare, communications relay और weapons delivery जैसी भूमिकाएं शामिल हैं।
यानी भविष्य का MMA एक flying multi-mission node हो सकता है।
विशेष रूप से electronic warfare की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि बड़ी संख्या में drones दुश्मन की air-defence network के आसपास काम कर रहे हों, तो कुछ drones sensors और weapons के बजाय electronic warfare payload ले जाकर enemy radar और communications को बाधित कर सकते हैं।
GPS और SATCOM बाधित होने पर भी संचालन
भविष्य के युद्धक्षेत्र में satellite communication और navigation systems पर निर्भरता एक गंभीर कमजोरी हो सकती है। इसलिए MMA के लिए resilient communications की आवश्यकता रखी गई है।
DIU ने hybrid SATCOM और mesh-network connectivity तथा degraded या denied command-and-control परिस्थितियों में संचालन की क्षमता पर जोर दिया है।
इसका सीधा संबंध चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वियों द्वारा विकसित anti-access/area-denial capabilities से है। यदि किसी क्षेत्र में satellite links बाधित हो जाएं, तो drone को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होना चाहिए।
2031 तक शुरुआती ऑपरेशनल क्षमता
अमेरिका इस परियोजना को वर्षों तक केवल research programme बनाए रखने के बजाय तेज गति से field करना चाहता है। DIU की योजना के अनुसार prototype को contract award के 21 महीने के भीतर full-scale flight testing में पहुंचना चाहिए।
लक्ष्य है कि Fiscal Year 2031 तक Initial Operating Capability हासिल की जाए। इसकी परिभाषा भी स्पष्ट रखी गई है—एक operational unit को 20 mission-ready aircraft उपलब्ध कराना।
MQ-9 Reaper खत्म हो जाएगा?
हालांकि नए MMA को Reaper successor के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन MQ-9A अचानक अमेरिकी सेवा से गायब नहीं होगा। General Atomics ने 2025 में MQ-9A की उत्पादन लाइन बंद कर दी थी क्योंकि अमेरिकी वायुसेना ने अतिरिक्त खरीद जारी नहीं रखने का निर्णय लिया था। लेकिन Operation Epic Fury ने इस निर्णय के बाद Reaper की उपयोगिता को फिर से सामने ला दिया।
- अब अमेरिकी वायुसेना उपलब्ध Reaper को repair और sustain करने की कोशिश कर रही है।
- अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कुछ capital assets General Atomics से खरीदे जा रहे हैं ताकि fleet capacity को बनाए रखा जा सके।
- इसलिए आने वाले वर्षों में अमेरिकी वायुसेना में MQ-9 और नई MMA क्षमता समानांतर रूप से देखने को मिल सकती है।
भारत और दुनिया के लिए क्या संदेश?
भारत के लिए भी यह विकास महत्वपूर्ण है। भारतीय सैन्य सेवाएं MALE और HALE UAVs, autonomous systems, loitering munitions तथा swarm technologies पर तेजी से ध्यान दे रही हैं।
भविष्य में केवल एक अत्यधिक सक्षम MALE drone खरीदना पर्याप्त नहीं होगा; उसके साथ affordable attritable UAVs, autonomous teaming, electronic warfare और resilient communications का ecosystem भी महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
MQ-9 Reaper ने ईरान के विरुद्ध अपनी उपयोगिता साबित की, लेकिन उसी युद्ध ने उसकी लागत और survivability की सीमाओं को भी उजागर कर दिया। अमेरिका अब Reaper को केवल अधिक शक्तिशाली बनाने के बजाय एक अलग दर्शन की ओर बढ़ रहा है—सस्ता, modular, autonomous और mass-producible unmanned aircraft।
Massed Modular Aircraft की असली ताकत किसी एक ड्रोन की क्षमता नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में एक साथ काम करने वाले drones की सामूहिक क्षमता होगी।
भविष्य का सवाल शायद यह नहीं होगा कि “सबसे शक्तिशाली ड्रोन कौन-सा है?”, बल्कि यह होगा कि कौन-सी वायुसेना कम लागत में कितने सक्षम drones एक साथ युद्ध क्षेत्र में उतार सकती है—और कितने खोने के बाद भी अपना मिशन जारी रख सकती है।








