F-22 और F-35 ! अमेरिका के 5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट। दोनों रडार डिटेक्टरों को परेशान करने के लिए कुख्यात! लेकिन खामी कि इन दोनों अमेरिकी विमानों की हीट सिग्नेचर को छिपाना मुश्किल है। तो क्या ये अब चीनी मिसाइलों से छिप सकते हैं ? दरअसल चीन ने एक ऐसा हल्का एआइ सिस्टम विकसित किया है, जो हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को उड़ान के दौरान इन्फ्रारेड (तापीय) सिग्नेचर को पहचानने में सक्षम बना सकता है। इस नए सिस्टम के साथ एक हालिया सिमुलेटेड लैबोरेटरी टेस्ट के दौरान चीनी मिसाइलों ने F-22 और F-35 की हीट सिग्नेचर को स्वायत्त रूप से पहचाना है।
बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और चाइना एयरबोर्न मिसाइल एकेडमी ने इसे मिसाइल पर लगाए जाने वाले इन्फ्रारेड इमेजिंग सिस्टम के लिए डिजाइन किया है। इस सिस्टम ने सिमुलेटेड F-22, F-35 और loitering munition टारगेट की पहचान का टेस्ट करने के लिए 3,245 इन्फ्रारेड तस्वीरों का इस्तेमाल किया। परीक्षण में इन लक्ष्यों की पहचान में बहुत अधिक सटीकता का दावा किया गया।
आसान भाषा में कहें तो इस परीक्षण का मतलब है कि मिसाइल का सेंसर अब केवल रडार सिग्नल पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि लक्ष्य से निकलने वाली इन्फ्रारेड/तापीय ऊर्जा के पैटर्न को AI की मदद से पहचानने की कोशिश करेगा। इससे स्टील्थ विमानों का पता लगाने की चीन की क्षमता बढ़ सकती है।
लड़ाकू विमानों के लिए रिकग्निशन रेट रहा 90%
शोधकर्ताओं ने अपने AI सिस्टम को इन्फ्रारेड तस्वीरों का इस्तेमाल करके प्रशिक्षित किया। ये तस्वीरें मिसाइल पर लगे स्कैनिंग सिस्टम से एकत्र की गई थीं। डेटासेट में हवाई लक्ष्यों की तीन श्रेणियां शामिल थीं, जिनमें F-22 और F-35 के सिम्युलेटेड (कृत्रिम/अनुकरण किए गए) विमान लक्ष्य भी शामिल थे। रिसर्चर्स के अनुसार,
- टेस्टिंग के दौरान मॉडल ने 97.1 प्रतिशत रिकग्निशन एक्यूरेसी हासिल की। एक अलग टेस्ट में सिम्युलेटेड फाइटर टारगेट के लिए रिकग्निशन रेट लगभग 90% रहा।
- हालांकि इन नतीजों से यह पता नहीं चलता कि असल F-22 या F-35 एयरक्राफ़्ट के मुकाबले यह सिस्टम कैसा काम करेगा।
- मुख्य रिसर्चर एन जियांगशान ने कहा कि इससे जुड़ा टेस्ट डेटा गोपनीय है और उसे ज़ाहिर नहीं किया जा सकता।
मिसाइल में AI मॉडल लगाने की हार्डवेयर चुनौती
शोधकर्ताओं को AI मॉडल को मिसाइल में लगाने से पहले हार्डवेयर से जुड़ी एक बड़ी समस्या का समाधान करना पड़ा। सामान्य डीप-लर्निंग सिस्टम को काफी कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है, जबकि छोटी मिसाइलों में आकार, वजन और बिजली की खपत पर कड़े प्रतिबंध होते हैं।
शोधकर्ताओं ने अपने AI मॉडल को काफी छोटा किया। टीम ने अपने मॉडल को पिछले तरीकों में इस्तेमाल होने वाले पैरामीटर्स के मुकाबले 16.1 प्रतिशत तक कम कर दिया। स्टडी के मुताबिक, इससे कंप्यूटिंग की ज़रूरतें भी घटकर 19.2 प्रतिशत रह गईं।
इसके बाद एक समर्पित AI एक्सेलेरेटर (AI Accelerator) ने सिस्टम की क्षमता को और बढ़ाया। इस हार्डवेयर में ऑप्टिमाइज्ड कन्वोल्यूशन ऑपरेशन, पैरेलल प्रोसेसिंग और डेटा बफरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इन्फ्रारेड तस्वीरों को अधिक कुशलता से प्रोसेस किया जा सके। हार्डवेयर परीक्षण के दौरान सिस्टम ने-
- 96.4% सटीकता हासिल की।
- प्रत्येक इन्फ्रारेड तस्वीर को लगभग 1.5 मिलीसेकंड में प्रोसेस किया।
- इसकी कुल बिजली खपत लगभग 2.2 वाट रही।
इससे शोधकर्ताओं को मिसाइल पर लगाए जा सकने वाला कम बिजली खपत वाला AI सिस्टम मिला।
इसका महत्व क्या है?
मिसाइल के लिए यह गति महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी हवाई युद्ध के दौरान उसके पास यह तय करने के लिए बहुत कम समय होता है कि सेंसर को दिखाई दे रहा हीट सिग्नेचर वास्तविक विमान का है या डिकॉय का। इमेज को मिसाइल के अंदर ही प्रोसेस करने से सीकर बाहरी कंप्यूटिंग सिस्टम पर निर्भर हुए बिना टारगेट की पहचान कर सकता है।
चुनौतीभरा है हीट सिग्नेचर पढ़ना
विमान के इंजन से निकलने वाली गर्म गैसों, एरोडायनमिक हीटिंग (वायुगतिकीय घर्षण) से पैदा होने वाली गर्मी और एयरफ्रेम के अन्य हिस्सों से इन्फ्रारेड (तापीय) सिग्नेचर उत्पन्न होते हैं। हीट-सीकिंग मिसाइलें इन तापीय उत्सर्जनों का पता लगा सकती हैं। वहीं, लड़ाकू विमान फ्लेयर छोड़कर ऐसे अतिरिक्त इन्फ्रारेड लक्ष्य पैदा कर सकते हैं, जो मिसाइल को भ्रमित करें।
इससे मिसाइल के सामने लक्ष्य की पहचान की चुनौती पैदा होती है। इन्फ्रारेड सीकर को यह तय करना होता है कि उसे दिखाई दे रही गर्मी वास्तविक विमान से आ रही है या किसी डिकॉय (भटकाने वाले नकली लक्ष्य) से। इसके लिए उसके पास अक्सर कुछ मिलीसेकंड का ही समय होता है।
शोध कितना बड़ा स्टील्थ चैलेंज?
फिलहाल इस चीनी रिसर्च से यह साबित नहीं होता कि चीनी मिसाइलें ऑपरेशनल F-22 या F-35 फाइटर जेट्स की पहचान कर सकती हैं। क्योंकि इन प्रयोगों में नकली टारगेट का इस्तेमाल किया गया था, और रिसर्च करने वालों का कहना है कि पहचान की सटीकता और प्रोसेसिंग स्पीड, दोनों को बेहतर बनाने के लिए और काम करने की ज़रूरत होगी।
टीम ने अपनी स्टडी को सिर्फ़ कम दूरी वाली हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के फ़्यूज़ तक ही सीमित रखा। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि क्या यह तरीका ज़मीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम के खिलाफ़ भी काम कर सकता है।
अमेरिका के लिए क्या है इसका मतलब ?
अमेरिका के लिए यह रिसर्च एक जानी-पहचानी समस्या की ओर इशारा करती है, जिसमें एक नया पहलू भी है। स्टील्थ एयरक्राफ्ट रडार की पकड़ में आने की संभावना को काफी कम कर सकते हैं, लेकिन वे अपने इंजन और हवा में चलने से पैदा होने वाली गर्मी को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते।
अधिक सक्षम इन्फ्रारेड सेंसर इन अपरिहार्य तापीय उत्सर्जनों को लक्ष्य की पहचान और निशाना साधने के लिए उपयोगी जानकारी में बदल सकते हैं।
इसके बाद छोटे और कॉम्पैक्ट AI प्रोसेसर भविष्य की मिसाइलों के सीकर को इस इन्फ्रारेड जानकारी का पहले की प्रणालियों की तुलना में अधिक तेजी से विश्लेषण और लक्ष्य वर्गीकरण करने में मदद कर सकते हैं।
क्या है F-22 और F-35 की खूबियां ?
F-22 (रैप्टर) और F-35 (लाइटनिंग II) दोनों ही एडवांस्ड, पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट हैं, जिन्हें लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिकी सेना के लिए बनाया है। F-22 खास तौर पर हवा में दबदबा बनाने वाला फाइटर जेट है, जबकि F-35 कई तरह के काम करने वाला (मल्टी-रोल) स्ट्राइक फाइटर है, जिसमें अत्याधुनिक सेंसर और नेटवर्किंग क्षमताएं हैं।
| विशेषता | F-22 Raptor | F-35 Lightning II (F-35A) |
|---|---|---|
| श्रेणी | 5वीं पीढ़ी, Air Dominance | 5वीं पीढ़ी, Multirole |
| निर्माता | Lockheed Martin + Boeing | Lockheed Martin |
| इंजन | 2 × Pratt & Whitney F119 | 1 × Pratt & Whitney F135 |
| इंजन थ्रस्ट | 35,000 lb प्रत्येक | 43,000 lb |
| अधिकतम गति | Mach 2 class | Mach 1.6 |
| Supercruise | हाँ | नहीं |
| ऊंचाई | 50,000+ ft | 50,000+ ft |
| लंबाई | 18.9 m | 15.7 m |
| अधिकतम टेकऑफ वजन | 38,000 kg | 31,750 kg |
| आंतरिक हथियार | 6 × AIM-120 + 2 × AIM-9 तक | मिशन/वेरिएंट के अनुसार |
| मुख्य ताकत | Air superiority, stealth, maneuverability, supercruise | Stealth, sensor fusion, data sharing, multirole capability |
| प्रमुख सेंसर | AESA radar + integrated avionics | AESA radar, DAS, EOTS, advanced sensor fusion |
| चालक दल | 1 | 1 |
किन देशों के पास हैं F-22 और F-35 ?
एफ-22 रैप्टर का इस्तेमाल केवल अमेरिका (यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स) करता है, क्योंकि अमेरिकी कानून द्वारा इसके निर्यात पर प्रतिबंध है। वहीं, एफ-35 लाइटनिंग II का उपयोग अमेरिका के अलावा यूनाइटेड किंगडम, इटली, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, जापान, नॉर्वे, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया और पोलैंड जैसे कई देश कर रहे हैं।
चीनी शोध का भारत के लिए मायने
अगर चीन का यह दावा/शोध वास्तव में सफल होता है, तो भारत के लिए इसका असर महत्वपूर्ण होगा। खासकर भविष्य के Stealth aircraft और air-to-air combat के संदर्भ में। हालांकि अभी उपलब्ध रिपोर्ट में परीक्षण laboratory conditions और simulated F-22/F-35 targets पर हुआ है। फिलहाल इसे वास्तविक युद्धक्षमता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।








