₹155 करोड़ का ऑर्डर : सीमा से VVIP सुरक्षा तक होगा ‘इंद्रजाल रेंजर’

By Defence Detective

Published On:

Date:

Indrajaal Ranger mobile counter-drone system developed for India’s border and urban securit

ड्रोन आधारित सुरक्षा खतरों के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वदेशी काउंटर-ड्रोन तकनीक को बड़ा सरकारी प्रोत्साहन मिला है। हैदराबाद-बेस्ड Indrajaal Autonomous Defense Systems और Sigma Advanced Systems के कंसोर्टियम को केंद्र सरकार से लगभग ₹155 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डरों के तहत Indrajaal Ranger नामक मोबाइल एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन को सीमा सुरक्षा, शहरी सुरक्षा और VVIP सुरक्षा जैसे संवेदनशील अभियानों में तैनात किया जाएगा। कुल ऑर्डर को मुख्य रूप से दो हिस्सों में देखा जा सकता है।

पहला और सबसे बड़ा हिस्सा करीब ₹145 करोड़ का है। यह ऑर्डर Indrajaal-Sigma consortium को बॉर्डर सिक्योरिटी में Indrajaal Ranger की तैनाती के लिए मिला है।

दूसरा ऑर्डर करीब ₹10 करोड़ का है, जिसे शहरी पुलिस व्यवस्था के तहत VVIP protection और शहरी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यानी पहली बार इस तरह की मोबाइल counter-UAS क्षमता को केवल सैन्य ठिकानों या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों तक सीमित रखने के बजाय ऐसे इलाकों में ले जाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है जहां खतरा लगातार स्थान बदल सकता है।

क्या है इंद्रजाल रेंजर?

इंद्रजाल रेंजर को एक मोबाइल Counter-Unmanned Aircraft System (C-UAS)  प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया गया है। इसका मूल विचार पारंपरिक फिक्स्ड एंटी-ड्रोन सिस्टम से अलग है। आमतौर पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स किसी संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान, एयरबेस या स्थायी सुरक्षा क्षेत्र में लगाए जाते हैं। लेकिन सीमा पर गश्त कर रहे जवान, वीवीआइपी काफिले, बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम अथवा किसी महत्वपूर्ण शहर में सुरक्षा बलों को एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता हो सकती है जो उनके साथ आगे कदम से कदम मिला कर चल सके। आज के दौर में, जब ड्रोन हर जगह आम होते जा रहे हैं, इसे शामिल करना एक ज़रूरी कदम है। यह अलग-अलग तरह के इलाकों और स्थितियों में काम कर सकता है।  

  • इंद्रजाल रेंजर ड्रोन एक मोबाइल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जो दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम है।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म अपनी SkyOS टेक्नोलॉजी के ज़रिए सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर फ़्यूज़न, कमांड और कंट्रोल और लेयर्ड काउंटरमेज़र्स को एक साथ जोड़ता है।
  • इसके साथ Drone Recovery, Virtual Fencing और Physical Interception से संबंधित sub-systems इंटीग्रेट किए गए हैं। इनमें Retractor, Lakshman Rekha और Net Interceptor जैसे components शामिल हैं।  
  • इसको ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया गया है जो चलते हुए, ड्रोन को detect, track, identify और counter करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • यह उच्च गति से चलते हुए भी counter-drone mission को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • एक जगह पर फिक्स रहने वाली काउंटर-ड्रोन सुविधा के उलट, मोबाइल प्लेटफॉर्म सुरक्षा कर्मियों को ज़रूरत के हिसाब से एंटी-ड्रोन समाधानों को प्रभावी ढंग से तैनात करने में मदद करते हैं – जैसे कि सीमाओं, VVIP कॉरिडोर, अहम इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरों की सुरक्षा के लिए।
  • इसका अर्थ यह है कि सुरक्षा बल किसी स्थिर anti-drone bubble के बजाय आवश्यकता के अनुसार एक mobile protected airspace तैयार कर सकते हैं।

दुश्मन ड्रोन को कैसे बनाता है निशाना ?

यदि कोई दुश्मन ड्रोन सामने आ जाए, तो इंद्रजाल रेंजर उसका काम कैसे तमाम करेगा? इस संबंध में कई विकल्प हैं। हर ड्रोन को गोली मारने की जरूरत नहीं होती है। खतरे के हिसाब से अलग-अलग mitigation layer इस्तेमाल की जा सकती हैं।

1. Cyber Takeover –  अगर सिस्टम, ड्रोन के communication protocol को समझ और access कर पाता है, तो Cyber Takeover के जरिए उसके नियंत्रण को अपने हाथ में लेने की कोशिश की जाती है। सफल होने पर ड्रोन को सुरक्षित जगह पर उतारा जा सकता है।

कंपनी इसे Soft Capture कहती है और Ranger के लिए इसकी घोषित envelope लगभग 4 km तक है।

2. RF Jamming – अगर ड्रोन radio-frequency communication पर निर्भर है, तो Ranger उसके communication links को jam कर सकता है। इसका उद्देश्य ड्रोन और उसके operator के बीच संपर्क को बाधित करना होता है।

ऐसे में ड्रोन का व्यवहार उसके flight-control logic पर निर्भर करेगा—वह hover कर सकता है, land कर सकता है, वापस लौट सकता है या नियंत्रण खो सकता है।

3. GNSS Spoofing —यह सिग्नल बंद करने से अलग तकनीक है। jamming  कहता है कि “signal नहीं मिलेगा।” जबकि Spoofing कहता है कि “गलत signal को असली समझो।” यानी Ranger का GNSS spoofer ड्रोन को गलत navigation information देने की कोशिश करता है। इससे ड्रोन को ऐसा लग सकता है कि वह किसी दूसरी location पर है।

कंपनी के अनुसार इसके जरिए drone को stall, loop या गलत दिशा में जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। Ranger की घोषित Soft Kill envelope लगभग 3 km है।

4. Hard Kill — अब आते हैं उस स्थिति पर जब सामने वाला ड्रोन autonomous है, communication link नहीं इस्तेमाल कर रहा, GNSS-denied environment में उड़ रहा है या jamming/spoofing से प्रभावित नहीं हो रहा। तब kinetic interception का विकल्प आता है।

Ranger में इसके लिए Zombee interceptor drone इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक छोटा autonomous interceptor है जो लक्ष्य का पीछा करके उससे physical interception करता है। कंपनी इसे hard-kill layer बताती है। Ranger के लिए कंपनी की घोषित Hard Kill range लगभग 2 km है।

यह सीमा सुरक्षा में क्यों महत्वपूर्ण?

भारत की लंबी और चुनौतीपूर्ण सीमाओं पर छोटे ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार बढ़ती चुनौती बन चुके हैं। कम लागत वाले कॉमर्सियल और मिलिट्री-ग्रेड UAVs का इस्तेमाल निगरानी, हथियार या अन्य सामग्री पहुंचाने और संवेदनशील क्षेत्रों की जासूसी के लिए किया जा सकता है। ऐसे वातावरण में केवल पारंपरिक निगरानी पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा बलों को drone detection से लेकर identification और neutralisation तक एक integrated chain की आवश्यकता होती है। ऐसे में इंद्रजाल रेंजर जैसे सिस्टम को सीमा क्षेत्रों में तैनात करने से सुरक्षा बलों को बदलते threat locations के अनुसार counter-drone capability को स्थानांतरित करने की सुविधा मिल सकती है। इसे counter-drone security को traditional fixed installations से आगे border villages और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों तक ले जाने के रूप में रेखांकित किया जा सकता है।

VVIP और शहरी सुरक्षा में नया आयाम

₹10 करोड़ का अर्बन -पुलिस ऑर्डर  आकार में छोटा है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इसका महत्व काफी अधिक हो सकता है।

बड़े शहरों में VVIP movement, राजनीतिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन, सार्वजनिक समारोह और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐसे क्षेत्र हैं जहां छोटे ड्रोन्स सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में स्थायी anti-drone installation हमेशा व्यावहारिक नहीं होती।

Ranger का mobile architecture ऐसे अभियानों में सुरक्षा एजेंसियों को खतरे वाले क्षेत्र के साथ सिस्टम को स्थानांतरित करने की क्षमता दे सकता है। इसके संभावित इस्तेमाल में VVIP routes, public events और critical urban areas शामिल हैं।

सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स-इंद्रजाल साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण?

सिग्मा और इंद्रजाल की साझेदारी भी इस सौदे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स भारत की एक प्रमुख एयरोस्पेस और डिफेंस प्रिसिजन कंपोनेंट्स निर्माता कंपनी है। जबकि इंद्रजाल एक technology-led counter-drone company है। Sigma के पास engineering, manufacturing और defence supply-chain capabilities हैं।

इस combination से एक ऐसी व्यवस्था बनती है जिसमें technology development और बड़े पैमाने पर manufacturing/deployment capabilities एक-दूसरे से जुड़ती हैं।

Sigma की अपनी जानकारी के अनुसार, Indrajaal partnership ने उसे higher-value और IP-led defence opportunities में प्रवेश करने में मदद की है। एक हालिया industry analysis में Indrajaal के deployments को भारत और Southeast Asia में लगभग 50 locations तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है।

भारत की counter-drone strategy के लिए क्या संदेश?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक संदेश यह है कि भारत में anti-drone warfare अब केवल armed forces के fixed military installations का विषय नहीं रह गया है।

सीमा चौकियों, VVIP movements, urban policing, public events और critical infrastructure की सुरक्षा में भी mobile C-UAS systems की मांग बढ़ सकती है।

ड्रोन तकनीक सस्ती और तेजी से उपलब्ध हो रही है। इसलिए भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था में केवल महंगे missile-based interceptors पर निर्भर रहना हर परिस्थिति में व्यावहारिक नहीं होगा। layered defence में electronic warfare, detection sensors, AI-based identification, physical interception और अन्य countermeasures को एक साथ इस्तेमाल करना होगा।

Indrajaal Ranger का ₹155 करोड़ का सरकारी ऑर्डर इसी बदलती रणनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

Leave a Comment