Kalavinka लाया ऑटोनॉमस लोइटरिंग म्यूनिशन Nyx Mark-I, बिना GPS करेगा हमले

By Defence Detective

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Kalavinka Technologies Nyx MK-I autonomous loitering munition operating in a GPS-denied battlefield

आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी और हमले का साधन नहीं रह गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, GPS जामिंग और संचार नेटवर्क पर हमलों के बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसे स्वायत्त हथियारों की जरूरत बढ़ा दी है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने मिशन को पूरा कर सकें। इसके बीच भारतीय डिफेंस स्टार्टअप Kalavinka Technologies ने कम ऊंचाई और कम दूरी के precision missions के लिए Nyx Mark-I नामक एक पूरी तरह स्वायत्त लोइटरिंग सिस्टम विकसित किया है।

कंपनी के अनुसार Nyx Mark-I को विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा रहा है जहां GPS उपलब्ध नहीं हो, संचार बाधित हो या इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के कारण पारंपरिक ड्रोन की ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित हो।

क्या है Nyx Mark-I की खूबियां ?

Nyx MK‑I को ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ लोइटरिंग म्यूनिशन बताया गया है। इसका मतलब है कि एक बार लॉन्च होने के बाद, यह बिना किसी ऑपरेटर इनपुट के खुद ही नेविगेट करता है, अपने टारगेट की पहचान करता है और उस पर हमला करता है। इस सिस्टम को ऐसे माहौल में काम करने के लिए बनाया गया है जहाँ GPS सिग्नल नहीं मिलते। इस वजह से यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग का सामना कर सकता है, जो आज के युद्ध क्षेत्रों में एक बड़ी चुनौती है।

  • इस म्यूनिशन की क्रूज़ स्पीड 120 km/h है, रेंज 12–15 km है।
  • यह 1 kg का पेलोड ले जा सकता है।
  • हालाँकि बड़ी और लंबी दूरी तक मार करने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन की तुलना में इसकी क्षमता कम है।
  • Nyx MK‑I की कीमत ऐसी रखी गई है कि इसे बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सके, जो सैचुरेशन अटैक और डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेशन के लिए एक अहम बात है।

सबसे बड़ी खासियत—GPS के बिना navigation

Nyx Mark-I की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा GPS-denied operation है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में GPS/GNSS signals को जाम या spoof किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में केवल सैटेलाइट नेविगेशन पर निर्भर ड्रोन के लिए अपनी स्थिति और दिशा निर्धारित करना कठिन हो सकता है। Nyx को ऐसे वातावरण में नेविगेशन और मिशन कंप्लीशन  में सक्षम बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के दौर में लगातार रेडियो कम्युनिकेशन और GPS पर निर्भरता छोटे unmanned platforms की कमजोरी बन सकती है। यही वजह है कि Nyx का जोर onboard intelligence और resilient navigation पर है।

इसकी दूसरी प्रमुख विशेषता onboard artificial intelligence और autonomy की दिशा में इसका विकास है। पारंपरिक FPV या remotely piloted drones में ऑपरेटर की लगातार भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन जब battlefield में communication link को jam किया जाए तो operator और drone के बीच connection टूट सकता है।

Kalavinka का तर्क है कि भविष्य के unmanned systems को ऐसे वातावरण में अधिक autonomous होना पड़ेगा। कंपनी Nyx को ऐसी प्रणाली के रूप में देख रही है जो satellite signals या continuous communication पर कम निर्भर रहते हुए अपने mission को पूरा कर सके।

इसके पीछे हैं IIT खड़गपुर के इंजीनियर

Nyx Mark-I के पीछे IIT Kharagpur से जुड़े युवा इंजीनियरों की टीम है। दरअसल Kalavinka Technologies की स्थापना 2026IIT Kharagpur से जुड़े इंजीनियरों ने की है। कंपनी के सह-संस्थापक आयुष अरोड़ा ने Nyx Mark-I को कंपनी की शुरुआती ऑटोनॉमस डिफेंस प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया है।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में रक्षा स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से छोटे, कम लागत वाले और मिशन-विशिष्ट अनमैन्ड सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। Nyx इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा दिखाई देता है, जहां बड़ी और महंगी UAV प्रणालियों के साथ-साथ छोटे ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म को भी battlefield capability के रूप में देखा जा रहा है।

tail-sitter VTOL architecture पर आधारित है यह

Nyx Mark-I को tail-sitter VTOL architecture पर आधारित बताया गया है। इसका मतलब है कि aircraft-like platform अपने tail पर लगभग vertical orientation में take-off और landing कर सकता है और उड़ान के दौरान fixed-wing configuration में बदलकर आगे बढ़ सकता है।

इस architecture का फायदा यह हो सकता है कि इसे runway की जरूरत न पड़े। सीमित स्थानों से deployment की संभावना बढ़ती है और fixed-wing flight की efficiency का लाभ भी लिया जा सकता है।

Ukraine और आधुनिक युद्ध से मिला सबक

रूस-यूक्रेन युद्ध ने छोटे drones और loitering munitions की उपयोगिता को अभूतपूर्व तरीके से सामने रखा है। साथ ही इस युद्ध ने यह भी दिखाया है कि electronic warfare छोटे UAVs के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

FPV drones को लगातार operator control और communication link की आवश्यकता हो सकती है। इसी कारण GPS-denied navigation, autonomous flight और onboard processing पर दुनिया भर की defence companies का ध्यान बढ़ा है।

Kalavinka भी इसी battlefield trend को Nyx के विकास का आधार मानती है। कंपनी ने कहा है कि आने वाले समय में precision-strike systems धीरे-धीरे manually piloted platforms से intelligent autonomous systems की ओर बढ़ सकते हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है Nyx?

भारत के संदर्भ में Nyx जैसी प्रणाली का महत्व तीन स्तरों पर देखा जा सकता है।

पहला, indigenisation। छोटे autonomous strike systems के लिए विदेशी navigation, communication और control technologies पर निर्भरता कम करना भारत के लिए रणनीतिक लाभ हो सकता है।

दूसरा, electronic warfare resilience। चीन और पाकिस्तान जैसे संभावित विरोधियों के साथ किसी high-intensity conflict में GNSS jamming और communication disruption महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे वातावरण के लिए तैयार unmanned systems भारतीय सशस्त्र बलों की operational flexibility बढ़ा सकते हैं।

तीसरा, mass deployment की संभावना। बड़े और महंगे combat UAVs की तुलना में छोटे autonomous systems को अधिक संख्या में तैनात करने की अवधारणा आधुनिक युद्ध में तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। हालांकि Nyx की वास्तविक लागत और उत्पादन क्षमता अभी सार्वजनिक नहीं है, इसलिए इसे फिलहाल संभावित low-cost/scalable architecture के रूप में देखना चाहिए।

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