इंडियन नेवी के ऑफिसर का हुआ कोर्ट मार्शल, 7 साल की सजा, 75 लाख जुर्माना

By Alok Ranjan

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भारतीय नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में Military Court ने कड़ी सजा सुनाई है। Commodore Sreekumar K. Pillai, जो भारतीय नौसेना अकादमी (INA), एझिमाला में तैनात INS Zamorin के Commanding Officer रह चुके हैं, को कई आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद 7 साल के कठोर कारावास, ₹75 लाख के जुर्माने और सेवा से बदनामी के साथ बर्खास्तगी (Dismissal from Service with Disgrace) की सजा सुनाई गई है।
Military Court का फैसला आने के बाद यह मामला अब Chief of the Naval Staff की पुष्टि के लिए भेजा गया है। यानी अदालत ने सजा सुना दी है, लेकिन उसके अंतिम रूप से लागू होने के लिए नौसेना प्रमुख की औपचारिक पुष्टि अभी बाकी है।
अगर ₹75 लाख का जुर्माना नहीं भरा जाता है तो अधिकारी को दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

कौन हैं Commodore Sreekumar K. Pillai?

Commodore Sreekumar K. Pillai भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 10 नवंबर 2023 को INS Zamorin की कमान संभाली थी।
INS Zamorin भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नौसैनिक प्रतिष्ठान है। यहां अधिकारियों और कैडेटों के प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। इसलिए इस पद पर तैनात अधिकारी की जिम्मेदारी केवल एक पोत के संचालन तक सीमित नहीं रहती। Pillai की विशेषज्ञता Gunnery और Missile Warfare से जुड़ी बताई जाती है और वह वरिष्ठ कमांड पदों पर रह चुके हैं।

नवंबर 2025 में सामने आया मामला

रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर 2025 को Naval Intelligence ने Commodore Sreekumar K. Pillai को एक ठेकेदार से कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
आरोप था कि रिश्वत का संबंध INA Ezhimala में होने वाले निर्माण और दूसरे कामों से जुड़े ठेकों तथा मंजूरियों से था।
बताया जाता है कि Naval Intelligence काफी समय से अधिकारी की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया।
इस कार्रवाई का समय भी काफी महत्वपूर्ण था। जिस समय अधिकारी को पकड़ा गया, उस समय तत्कालीन Chief of the Naval Staff Admiral Dinesh K. Tripathi भी एझिमाला में मौजूद थे।

जांच बढ़ी तो आरोपों की संख्या भी बढ़ती गई

शुरुआत में मामला रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ा दिखाई दे रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ मामले का दायरा बढ़ता गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Commodore Pillai के खिलाफ करीब 75 आरोप लगाए गए थे। इनमें कथित तौर पर शामिल थे।

  • ठेकेदारों से रिश्वत लेना
  • सरकारी कार्यों और ठेकों में अनियमितता
  • अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करना
  • जमीन और संपत्ति से जुड़े संदिग्ध लेन-देन
  • सोने की खरीद और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी अनियमितताएं
  • ₹2 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति की जानकारी मिली

गवाह को प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप

इस मामले का एक और गंभीर पहलू गवाह को प्रभावित करने की कथित कोशिश है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले के एक महत्वपूर्ण गवाह ने आरोप लगाया कि उस पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कुछ लोग उसके घर पहुंचे और उसे डराने-धमकाने की कोशिश की। इस घटना के संबंध में Payyannur Police Station में अलग मामला दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में परिवार के एक बच्चे को बंधक बनाए जाने और चाकू दिखाकर धमकाने जैसे गंभीर आरोपों का भी उल्लेख है।

एझिमाला में हुआ Court-Martial

Commodore Sreekumar K. Pillai के खिलाफ सैन्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत Court-Martial की कार्यवाही शुरू की गई। रिपोर्टों के मुताबिक इसकी सुनवाई अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में Indian Naval Academy, Ezhimala में शुरू हुई। कार्यवाही के दौरान बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। रिपोर्टों में करीब 100 गवाहों के परीक्षण का उल्लेख मिलता है। लंबी सुनवाई और सबूतों की जांच के बाद Military Court ने Commodore Pillai को भ्रष्टाचार से जुड़े कई आरोपों में दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ कठोर सजा सुनाई।

सात साल की कठोर कैद और ₹75 लाख जुर्माना

Military Court द्वारा सुनाई गई सजा में तीन प्रमुख हिस्से हैं।
पहला— सात साल का Rigorous Imprisonment।
यानी उन्हें सात वर्ष की कठोर कैद की सजा दी गई है।
दूसरा— ₹75 लाख का जुर्माना।
यह रकम नहीं चुकाने पर उन्हें दो वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
तीसरा— सेवा से Dismissal with Disgrace।
इसका अर्थ है कि उन्हें भारतीय नौसेना की सेवा से केवल हटाया नहीं जाएगा, बल्कि सैन्य सेवा से गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत बदनामी के साथ बर्खास्त किया जाएगा।
यह किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के करियर पर बेहद गंभीर कार्रवाई है।

सजा अभी अंतिम रूप से लागू क्यों नहीं हुई?

इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है।
Military Court का फैसला Chief of the Naval Staff की पुष्टि के लिए भेजा गया है। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सटीक है कि: Military Court ने Commodore Sreekumar K. Pillai को दोषी ठहराकर 7 साल की सजा सुनाई है, लेकिन सजा के अंतिम क्रियान्वयन के लिए Naval Chief की पुष्टि आवश्यक है।
पुष्टि के बाद उन्हें नौसेना की हिरासत से बाहर निकालकर सामान्य केंद्रीय जेल व्यवस्था में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

अभी कहां हैं अधिकारी?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार Commodore Pillai फिलहाल Ezhimala में Indian Navy की हिरासत में हैं। Naval Chief की ओर से सजा की पुष्टि होने के बाद उन्हें Kannur Central Prison भेजे जाने की उम्मीद है। यानी फिलहाल वह नौसेना की अपनी हिरासत व्यवस्था में हैं और आगे की प्रक्रिया औपचारिक पुष्टि पर निर्भर करती है।

यह मामला भारतीय नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

इस पूरे मामले का महत्व सिर्फ इस वजह से नहीं है कि एक अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में सजा हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपी अधिकारी Commodore रैंक के थे। भारतीय नौसेना में Commodore एक वरिष्ठ कमांड स्तर का पद है। ऐसे अधिकारी प्रशासन, संचालन, प्रशिक्षण और संसाधनों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभा सकते हैं। और यहां मामला Indian Naval Academy, Ezhimala जैसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण प्रतिष्ठान से जुड़ा हुआ है।
इसलिए यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी पर ठेके और सरकारी संसाधनों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप साबित होते हैं, तो मामला व्यक्तिगत भ्रष्टाचार से आगे बढ़कर सैन्य संस्थानों में वित्तीय निगरानी और जवाबदेही का मुद्दा बन जाता है।
इस मामले में एक दूसरी चीज भी ध्यान देने लायक है वो है Naval Intelligence की भूमिका। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी को गिरफ्तार करने से पहले उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी गई थी। इसके बाद मामला सैन्य न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय सशस्त्र बलों के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी आंतरिक निगरानी और जांच की व्यवस्था सक्रिय है। यह सैन्य संस्थानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रक्षा बलों में अनुशासन और कमांड की विश्वसनीयता बेहद अहम होती है।

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