जापान का ऐलान, पहली बार F-2 फाइटर जेट जाएगा भारत, चीन को ज्यादा मिर्ची क्यों लगी ?

By Defence Detective

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भारत और जापान के बीच रक्षा संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। इसके बीच जापान एक संयुक्त अभ्यास में भाग लेने के लिए पहली बार भारत में F-2 फाइटर जेट भेजने की योजना बना रहा है। बताया जा रहा है कि इसका उदेद्श्य चीन को एक कड़ा सामरिक संदेश देना है। दोनों देशों ने 2023 में जापान में अपना पहला संयुक्त फाइटर अभ्यास किया, जो इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के बीच रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार को दर्शाता है।    

जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी 17 अगस्त से आस्ट्रेलिया और भारत के दौरे पर रहेंगे। भारत यात्रा में वह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमान को अभ्यास के लिए भारत भेजने के बारे में चर्चा करेंगे। कोइज़ुमी और राजनाथ सिंह के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने और रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण पर चर्चा होने की उम्मीद है।

चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच, टोक्यो बीजिंग पर लगाम लगाने के मकसद से नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना चाहता है। जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने जुलाई में भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

रणनीतिक मंशा पर चीन ने उठाए सवाल

जापान द्वारा F-2 फाइटर जेट भारत भेजे की योजना सार्वजनिक होने के बाद चीन में इस पर खलबली मची हुई है। मीडिया से लेकर बौद्धिक जगत तक जापान की इस योजना की रणनीतिक मंशा पर सवाल उठा रहा हैं। चीनी स्टेट मीडिया जापान के इस कदम को भारत के साथ सैन्य समन्वय मजबूत करने के तौर पर देख रहा है। मीडिया का तर्क है कि प्रस्तावित तैनाती जापान की उस व्यापक कोशिश को दिखाती है, जिसके तहत वह भारत के साथ सैन्य तालमेल को गहरा करने के साथ-साथ युद्ध के बाद की अपनी पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी रक्षा क्षमता का विस्तार कर रहा है। वहीं चीनी थिंक टैंक ‘शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़’ के एक्सपर्ट भी इस पर सवाल उठा रहे हैं।

चीन का भारत और जापान से गहरा विवाद है। उसे भारत-जापान का मजबूत रक्षा संबंध खटकता है। यह दोनों देश अमेरिका और आस्ट्रेलिया के साथ क्वाड में भी है। जिसे चीन अपने विरोध में देखता है। वह भारत-जापान रक्षा संबंधों को भी अपने विरोध में देखने लगा है। ऐसे में आइये जानते हैं कि चीन का भारत और जापान से क्या है विवाद ?

क्या है चीन-भारत विवाद–

चीन के साथ भारत की कुल सीमा लगभग 3,488 किमी लंबी है। इसमें मुख्य विवाद दो क्षेत्रों में है-

लद्दाख–अक्साई चिन – भारत अक्साई चिन को लद्दाख का हिस्सा मानता है। जबकि वर्तमान में अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है।

अरुणाचल प्रदेश – यह प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। फिर भी चीन इसके बड़े हिस्सा पर दावा करता रहता है और इसे Zangnan” (दक्षिणी तिब्बत) कहता है।

2020 के गलवान संघर्ष के बाद यह विवाद विशेष रूप से गंभीर हुआ। हालाँकि दोनों देशों ने सैन्य तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं, किंतु अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है।

चीन-जापान विवाद क्या है ?

इनके बीच मुख्य विवाद पूर्वी चीन सागर (East China Sea) में स्थित छोटे निर्जन द्वीपों को लेकर है। जापान इन द्वीपों को सेनकाकू, जबकि चीन दियाओयू कहता है। फिलहाल इस पर जापान का नियंत्रण है। लेकिन चीन इन पर अपनी संप्रभुता का दावा करता रहता है।

कितने मजबूत हैं भारत-जापान रक्षा संबंध

जापान और भारत, दोनों देश सीमाई विवाद में चीन की आक्रामक रवैये का सामना कर रहे हैं। इसके बीच जापान और भारत के रक्षा संबंध लगातार गहरे होते जा रहे हैं। यह साझेदारी कई अहम पड़ावों से गुज़री है। दोनों पक्षों ने 2014 में अपने रिश्तों को ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ के स्तर तक पहुँचाया। 2020 में ‘एक्विजिशन एंड क्रॉस-सर्विसिंग एग्रीमेंट’ (ACSA) पर हस्ताक्षर किए। ‘2+2 विदेश और रक्षा मंत्रियों की बातचीत’ की व्यवस्था भी शुरू की।

जापान ने अप्रैल में घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे दी थी। इससे भारत जैसे उन देशों को सैन्य बिक्री और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर संभव हो सका, जिनके साथ उसके रक्षा उपकरण समझौते हैं।

जुलाई में हुई भारत-जापान समिट में, दोनों पक्षों के बीच भारतीय नौसेना के लिए जापान के UNICORN इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एंटीना सिस्टम के निर्यात पर एक आम सहमति बनी थी। इसके साथ ही रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में व्यापक सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

क्या है F-2 फाइटर जेट की खूबियां ?

जापान की मुख्य डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर और F-2 बनाने वाली कंपनी, मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज़ के अनुसार, F-2 एक क्लोज़ सपोर्ट फाइटर जेट है जो जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) के पास है। इसे खास तौर पर समुद्री सुरक्षा और दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह जापान और अमेरिका के जॉइंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत F-1 फाइटर जेट की जगह लेने के लिए अमेरिकी F-16 फाइटर प्लेन के आधार पर डिज़ाइन किया गया था।

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