होर्मूज़ को दोबारा बंद कर ईरान ने दिया सीधे अमेरिका को चैलेंज, फिर शुरू होगी बड़ी लड़ाई

By Shilpi Sharma

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सीज़फायर के बीच ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से बड़ी जंग शुरू होने वाली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ को लेकर जिस तरह ईरानी और अमेरिकी सेना आमने-सामने है, उससे साफ झलकता है कि लड़ाई थमने वाली नहीं है। ईरान ने 17-18 अप्रैल 2026 को अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी के जवाब में होर्मूज़ को पूरी तरह बंद कर दिया। यह फैसला अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की जारी नाकेबंदी के जवाब में लिया गया है। ईरानी सेना ने शनिवार को कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण “पहले की स्थिति में लौट आया है।” जलडमरूमध्य को बंद करने का निर्णय उसे कुछ घंटों पहले फिर से खोले जाने के बाद लिया गया। उस समय अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम समझौता हुआ था और कई जहाज वहां से गुजर चुके थे। ईरान के इस कदम के साथ सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, क़तर, बहरीन और ओमान सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की सूची में आ गए हैं।

जंग से खौफ में पूरा इलाका, लोगों की घर वापसी पर गहरा असर

होरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य-पूर्व में पर्यटन और रिपैट्रिएशन ऑपरेशन्स पर गंभीर असर पड़ा है। एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। क्रूज़ कंपनियों ने सुरक्षा जोखिमों के कारण खाड़ी क्षेत्र में अपनी सेवाएँ रद्द कर दी हैं, और यूएई, क़तर तथा ओमान जैसे पर्यटन केंद्रों में यात्रियों की संख्या घटने से अरबों डॉलर का राजस्व नुकसान होने की आशंका है। इस बीच, हजारों प्रवासी और पर्यटक खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं, जिससे भारत, मिस्र और यूरोपीय देशों को विशेष उड़ानों और नौसैनिक जहाज़ों के माध्यम से निकासी अभियान चलाना पड़ रहा है। बहरीन, क़तर और ओमान के बंदरगाहों पर जहाज़ों की भीड़ बढ़ने से रिपैट्रिएशन (घर वापसी) की प्रक्रिया धीमी हो गई है। तेल कीमतों में तेज़ उछाल और समुद्री सुरक्षा स्तर “गंभीर” घोषित होने से स्थिति और जटिल हो गई है, जिससे पर्यटन कंपनियाँ पीछे हट रही हैं और निकासी अभियान महंगे तथा कठिन हो गए हैं।

लड़ाई से मिडिल ईस्ट में टूरिज्म ठप

होरमुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से पर्यटन पर भी गहरा असर पड़ा है। एयरलाइंस को खाड़ी क्षेत्र से बचते हुए लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और लागत बढ़ गई है और हवाई किराए में तेज़ी आई है। क्रूज़ कंपनियों ने सुरक्षा जोखिमों के कारण अपनी सेवाएँ स्थगित कर दी हैं, जिससे क़तर और बहरीन जैसे देशों में पर्यटन लगभग ठप हो गया है। ओमान में मस्कट और Duqm पोर्ट पर भीड़ बढ़ने से पर्यटन धीमा हो गया है। यूएई में दुबई जैसे बड़े पर्यटन केंद्रों पर उड़ानों के मार्ग बदलने और टिकट कीमतों में इज़ाफा होने से पर्यटकों की संख्या घट रही है। सऊदी अरब में भूमि मार्ग उपलब्ध होने के कारण पर्यटन पर दूसरे देशों की तुलना में कम असर पड़ा है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता ने पर्यटकों की संख्या कम कर दी है। कुल मिलाकर, इस संकट ने क़तर, बहरीन और यूएई जैसे देशों के पर्यटन को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है, जबकि दूसरे देशों की तुलना मेंं सऊदी अरब और ओमान में असर सीमित रहा है।

तेल बाज़ार पर भी गहरा असर

ईरान के होरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद करने के फैसले का तेल बाज़ार पर सीधा और गंभीर असर पड़ा है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और LNG व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, इसलिए इसके बंद होने से आपूर्ति बाधित हो गई है और कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई तेल और गैस टैंकरों ने मार्ग बदल लिया या वापस लौट गए, जिससे बाज़ार में अनिश्चितता और अस्थिरता बढ़ गई। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में 7% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और शिपिंग बीमा लागत भी बढ़ रही है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा है, जिससे रणनीतिक भंडार का उपयोग करने की संभावना बढ़ गई है। मध्य-पूर्व देशों ने अपने-अपने विकल्प अपनाए हैं—सऊदी अरब ने East–West पाइपलाइन का उपयोग शुरू किया है, यूएई ने Habshan–Fujairah पाइपलाइन सक्रिय की है, जबकि क़तर और बहरीन के पास कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण वे सबसे अधिक प्रभावित हैं। ओमान Duqm पोर्ट का सहारा ले रहा है, लेकिन उसकी क्षमता सीमित है, और इराक उत्तरी पाइपलाइन के ज़रिए तेल तुर्की तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि राजनीतिक अस्थिरता वहाँ एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस प्रकार, ईरान के इस कदम ने न केवल तेल आपूर्ति को बाधित किया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को अस्थिर कर दिया है।

भारत पर आर्थिक और रणनीतिक असर

भारत पर होरमुज़ संकट का असर सीधा और गंभीर है—तेल आयात महंगा हुआ है, ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है। तेल की वैश्विक कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे भारत को महंगे आयात का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जहाज़ों के लिए बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं, जिससे परिवहन लागत और बढ़ी है। इसके अलावा हाल में हुई घटना ने भी भारत की चिंताए बढ़ा दी हैं। दरअसल, 18 अप्रैल 2026 को ईरानी गनबोट्स ने दो भारतीय-झंडे वाले जहाज़ों पर गोलीबारी की, जिनमें से से एक जहाज़ VLCC सुपर टैंकर था, जो लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था। गोलीबारी के बाद जहाज़ों को पश्चिम की ओर लौटना पड़ा। भारत ने तुरंत ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। ईरान ने भारत को “मित्र देश” बताते हुए कुछ जहाज़ों को गुजरने की अनुमति दी थी, लेकिन गोलीबारी की घटना ने भारत की रणनीतिक और आर्थिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

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