युद्ध के बावजूद भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 का समापन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ किया है, जहां देश के गुड्स एक्सपोर्ट ने लगभग 442 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छू लिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1% अधिक है। सेवाओं का निर्यात भी मजबूत रहा और $418.3 अरब डॉलर तक पहुँचा। कुल मिलाकर, गुड्स एंड सर्विसेज़ दोनों मिलाकर भारत का निर्यात $860 अरब डॉलर रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 4% की वृद्धि दर्शाता है। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती व्यापार चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी निर्यात क्षमता का मजबूत प्रदर्शन किया है।
कमजोर वैश्विक मांग के बावजूद निर्यात में वृद्धि हुई
भारत की यह उपलब्धि न केवल देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका का भी संकेत देती है। यह उपलब्धि कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह भारत के मजबूत आर्थिक लचीलेपन (resilience) को दर्शाती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष, अमेरिकी टैरिफ और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियों के बावजूद निर्यात में वृद्धि हुई—और वह भी वैश्विक औसत से तेज। इस वृद्धि के पीछे सोना-चांदी के निर्यात में उछाल के साथ-साथ ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन रहा।
व्यापार घाटा बढ़ा
भारत का इंपोर्ट 7.5% बढ़कर 775 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे इंपोर्ट में 333 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार घाटा हुआ है, इसका मतलब ये हुआ कि भारत अभी भी एक्सपोर्ट से ज्यादा इंपोर्रट कर रहा है। दूसरी ओर, कुल इंपोर्ट लगभग ~$970–979 अरब डॉलर तक पहुँचा, जिसमें6.4% की वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही, मार्च 2026 में एक्सपोर्ट में गिरावट देखी गई, क्योंकि पश्चिम एशिया के साथ व्यापार पर संघर्ष का असर पड़ा। इसके बावजूद, पूरे साल का रिकॉर्ड यह दिखाता है कि भारत की निर्यात क्षमता मजबूत बनी हुई है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के बावजूद भारत ने बानाया रिकॉर्ड

“भारत ने नया निर्यात रिकॉर्ड बनाया! यह गर्व का विषय है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में $860 अरब डॉलर का निर्यात हासिल किया।” – केंद्रिय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत का निर्यात प्रदर्शन वैश्विक औसत से तेज़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ और ईरान युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। अग्रवाल ने आगे बताया कि आने वाले समय में यूके, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते भारत की निर्यात क्षमता को और मज़बूत करेंगे। यह बयान भारत की रणनीतिक दिशा को दर्शाता है—जहाँ देश न केवल मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि नए बाज़ारों और साझेदारियों के माध्यम से अपने व्यापारिक विस्तार को सुनिश्चित कर रहा है। यही नहीं अगर पिछले 12 साल के एक्सोपोर्ट की तुलना करें तो इसमें 84 प्रतिशत से भी ज्यादा की वृद्धि हुई है, साल 2013-14 में कुल एक्सपोर्ट जहां 466 बिलियन डॉलर का था वहीं साल 2025-26 में ये 860 बिलियन डॉलर को भी पार कर गया है।

चीन को कंपोनेंट एक्सपोर्ट में भी ज़बरदस्त उछाल
Apple के भारत स्थित वेंडर्स ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में चीन को लगभग $2.5 बिलियन के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट किए हैं। यह एक ऐतिहासिक बदलाव है क्योंकि पहले चीन से भारत में पार्ट्स आते थे, अब भारत से चीन को सप्लाई हो रही है। अनुमान है कि FY26 के अंत तक भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट चीन को $3.5 बिलियन तक पहुँच सकते हैं। पिछले वर्ष चीन को $920 मिलियन का एक्सपोर्ट हुआ था। एक्सपोर्ट करने वाले मुख्य वेंडर्स Foxconn, Tata Electronics, Wistron जैसे Apple सप्लायर्स हैं। इसमें सरकार की स्कीम Production Linked Incentive (PLI) और Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) का भी योगदान है। साथ इससे ये भी साबित होता है कि ट्रेड फ्लो में बदलाव आया है, पहले चीन से भारत को कंपोनेंट्स आते थे। अब भारत से चीन को कंपोनेंट्स जा रहे हैं। यह बदलाव भारत की ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
मोबाइल फोन एक्सपोर्ट 9 गुना बढ़ा
भारत दुनियाभर में मोबाइल एक्सपोर्ट का एक बड़ा प्लेयर बन गया है। पिछले 5 वर्ष में भारत से होने वाला मोबाइल एक्पोर्ट 9 गुना तक बढ़ गया है। भारत में अब तक (PLI स्कीम के तहत) $70 बिलियन का iPhone उत्पादन हो चुका है। कुल एक्सपोर्ट जो मुख्यत: अमेरिका को हुआ है, वो करीब $51 बिलियन का है।









