TATA ने बनाया स्वदेशी MALE UAV, फाइनल फ्लाइट टेस्ट हुआ पूरा

By Defence Detective

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ऑपरेशन तैयारियों के लिहाज से मध्यम ऊंचाई और लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले (MALE – Medium Altitude Long Endurance) मानव रहित विमान (UAV) कार्यक्रम में उल्लेखनीय कामयाबी मिली है। IDRW वेबसाइट के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) द्वारा विकसित किए जा रहे स्वदेशी MALE UAV ने अपने अंतिम उड़ान परीक्षण पूरे कर लिए हैं। अब जबकि इसके डेवलपमेंट और फ्लाइट वैलिडेशन से जुड़े अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं, माना जा रहा कि यह प्लेटफॉर्म अब भारतीय सशस्त्र सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप मूल्यांकन के लिए तैयार हो रहा है।

यह विकास ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सशस्त्र सेनाओं के लिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये की 87 MALE UAV खरीद कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। यह प्रोजेक्ट देश के सबसे बड़े स्वदेशी ड्रोन खरीद पहलों में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय मैन्युफैक्चर्स को टोह लेने वाले और लक्ष्यों पर सटीक हमला करने वाले ड्रोन के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना भी है। इससे विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता भी कम होने की उम्मीद की जा रही है।

भारतीय सेना और सशस्त्र बल वर्तमान में मुख्य रूप से हेरॉन (Heron) और MQ-9B सी गार्डियन MALE (मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस) यूएवी का उपयोग कर रहे हैं। हेरॉन इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा बनाया गया MALE ड्रोन है जिसे लंबी दूरी की निगरानी, टोही (ISR) और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए सीमा पर तैनात किया गया है। वहीं MQ-9B सी गार्डियन अमेरिका से लिया गया ड्रोन है। ये उन्नत ड्रोन लंबी अवधि की समुद्री और स्थलीय निगरानी में मदद करते हैं।

क्या है MALE UAV की खासियतें ?

रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी डिजाइन, विकास एवं निर्माण श्रेणी के तहत अगस्त 2025 में 87 MALE UAV खरीद को हरी झंडी दिखाई गई थी। इसके तहत जो पैरामीटर निर्धारित किए गए हैं, वह विभिन्न तरह की खूबियों से लैस होगा-

  • ये ड्रोन एडवांस्ड सर्विलांस और कॉम्बैट सुविधाओं से लैस होंगे, जिनमें रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) क्षमताएं होंगी।
  • यह ड्रोन 10,000 से 30,000 फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होगा।
  • 24 घंटे से ज़्यादा समय तक इसकी हवा में रहने की क्षमता होगी।
  • पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट होगा।
  • इनमें स्वदेशी मिसाइलें लगाने की भी योजना है, ताकि ये सिर्फ़ निगरानी नहीं बल्कि हमले में भी सक्षम हो।
  • अमेरिकी MQ-9 रीपर और इजरायल के Heron TP से इसकी तुलना की जा रही है।

प्रोजेक्ट के लिए भारतीय कंपनियां हैं दौड़ में

भारतीय वायुसेना पर केंद्रित होने के साथ तीनों सेनाओं से जुड़े इस प्रोजेक्ट के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की लगभग 10 भारतीय कंपनियों ने बोली लगाई है। इसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, एडडिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो, अदाणी डिफेंस और राफे एमफिबर लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल ड्रोन खरीदना नहीं, बल्कि भारत में एक पूरा UAV इकोसिस्टम तैयार करना है। बड़े पैमाने पर स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए, अंतिम ऑर्डर को दो जीतने वाली कंपनियों के बीच 64:36 के अनुपात में बांटा जाएगा, जिससे दो स्वतंत्र घरेलू असेंबली लाइनें स्थापित होंगी।

MQ-9B और Heron TP जैसे ड्रोनों से तुलना कितना सही?

हालांकि स्वदेशी MALE UAV की अभी अंतिम क्षमता और विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है, फिर भी इसके बारे में जिस तरह की बातें अभी तक सामने आई हैं। उसकी तुलना अमेरिका के MQ-9B  और Heron TP जैसे ड्रोनों से की जाने लगी है। इसे भारत का स्वदेशी और प्रभावी विकल्प बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह पूरी तरह निर्धारित उद्देश्यों और लक्ष्यों के हिसाब से अंतिम रूप में सामने आया तो निश्चय ही विदेशी हथियारों के मुकाबले एक श्रेष्ठ विकल्प बनेगा।  

स्वदेशी MALE UAV भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण ?

TASL का MALE UAV भारत के लिए केवल एक नया ड्रोन नहीं है, बल्कि स्वदेशी सैन्य एयरोस्पेस उद्योग के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है। यह कुशल निगरानी क्षमता, रियल टाइम इंटेलीजेंस जैसी अनेक अत्याधुनिक एवं उन्नत खूबियों से लैस है। माना जा रहा है कि भारतीय सेना के इससे लैस होने पर निगरानी सहित उसकी विभिन्न क्षमताओं में भारी बढ़ोत्तरी होगी। LAC और LoC जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दुश्मन सैनिकों, वाहनों, ठिकानों और गतिविधियों पर सटीक नजर रखा जा सकेगा। क्योंकि मानवयुक्त विमान की तुलना में इनका लंबे समय तक एक क्षेत्र में रहना संभव होता है। इसके साथ हिंद महासागर में भी चौकसी और धारदार हो जाएगी, जो नौसेना को ताकतवर बनाएगी। यदि यह पूरा प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और भविष्य के ड्रोन वारफेयर में एक महत्वपूर्ण क्षमता हासिल कर सकता है।

भारत के MALE UAV प्रोजेक्ट्स

1. DRDO का Archer-NG

यह फिलहाल भारत का सबसे अहम नई पीढ़ी का स्वदेशी MALE UAV है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Archer-NG को अब केवल “आँखों वाला ड्रोन” नहीं रखा जा रहा, बल्कि इसे एक बहु-भूमिका लड़ाकू UAV बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

2. TAPAS-BH-201 — Rustom-2 की विरासत

यह भारत का पुराना और बहुत महत्वपूर्ण MALE कार्यक्रम है। TAPAS को मूल रूप से Rustom-2 के रूप में विकसित किया गया था। DRDO के अनुसार इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के लिए ISTAR—यानी खुफिया, निगरानी, लक्ष्य अधिग्रहण और टोही—क्षमता देना था। इसकी डिजाइन में लगभग 30,000 फीट की ऊँचाई, 24 घंटे तक की सहनशक्ति और लगभग 350 किलोग्राम पेलोड की क्षमता का लक्ष्य रखा गया था। TAPAS को मूल रूप में operational requirement पूरी करने में दिक्कतें आईं। इसके बाद Archer-NG को ज्यादा सक्षम अगली पीढ़ी के समाधान के रूप में आगे बढ़ाया गया। साथ ही TAPAS प्लेटफॉर्म पर स्वदेशी इंजन और क्षमता सुधार का काम भी जारी रहने की रिपोर्टें हैं।

3. Raphe mPhibr का नया 1.5-टन MALE UAV

यह सबसे दिलचस्प निजी क्षेत्र का स्वदेशी MALE प्रोजेक्ट है। Raphe mPhibr ने 2026 में लगभग 1.5 टन वर्ग का MALE UAV सामने रखा है। इसमें सबसे खास बात केवल ड्रोन नहीं बल्कि इसका 250 kW यानी लगभग 335 HP का स्वदेशी इंजन है। कंपनी का दावा है कि यह 15 मीटर के आसपास wingspan वाला MALE प्लेटफॉर्म है और 30 घंटे से ज्यादा की endurance की दिशा में डिजाइन किया गया है। यह इसलिए बड़ा विकास है क्योंकि भारत की MALE UAV कहानी में लंबे समय से इंजन एक बड़ी कमजोरी रही है।

भारत के पास अब एक नहीं, बल्कि सरकारी और निजी क्षेत्र के कई स्वदेशी MALE ड्रोन रास्ते में हैं—और पहली बार मुकाबला सिर्फ ड्रोन के airframe का नहीं, बल्कि indigenous engine, sensors, weapons और autonomy का भी है।

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