Powerus से डील: भारत ने पहले ही मारी बाजी, पाकिस्तान मलता रहेगा हाथ!

By Defence Detective

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INDIA-POWERUS DEAL IN JUNE

अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus को लेकर इन दिनों भारत और पाकिस्तान में भारी हलचल है। कंपनी ने पाकिस्तान के साथ हाल ही में ड्रोन से जुड़ा समझौता किया है, लेकिन उससे भी अधिक चौंकाने वाली बात है कि पाकिस्तान से करीब ढाई महीने पहले ही भारत Powerus के साथ डील कर चुका है।

वह भी ऐसी डील जिसमें सिर्फ ड्रोन खरीदने की बात नहीं है, बल्कि अमेरिकी काउंटर-ड्रोन तकनीक को भारत में बनाने और बेचने का रास्ता खुला है।

यही दोनों देशों की डील का सबसे बड़ा फर्क है।

पाकिस्तान को Powerus से Unmanned Aerial Systems यानी UAS का शुरुआती ऑर्डर मिला है, लेकिन इसकी कीमत, संख्या और सटीक सिस्टम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

 दूसरी तरफ भारत में Powerus ने अपनी Guardian-1 Interceptor तकनीक के निर्माण और commercialisation के लिए भारतीय कंपनी Paras Defence को एक्सक्लूसिव लाइसेंस दिया है।

भारत ने क्यों मारी बाजी?

Powerus और Paras Defence के बीच 30 जून 2026 को डील हुई थी। इसके तहत Paras Defence को भारत में Guardian-1 Interceptor की मैन्युफैक्चरिंग और commercialisation के लिए एक्सक्लूसिव लाइसेंस मिला।

इसके बाद अब 16 सितंबर 2026 को Powerus के डेलिगेशन ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से रावलपिंडी में मुलाकात की। इसके बाद कंपनी ने -17 सितंबर को पाकिस्तान आर्मी के साथ MoU और UAS से जुड़ा शुरुआती ऑर्डर मिलने की जानकारी दी।

टाइमलाइन बिल्कुल साफ है:-

समयदेशPowerus के साथ क्या हुआ?
जून 2026भारतGuardian-1 बनाने और बेचने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस
सितंबर 2026पाकिस्तानUAS का शुरुआती, गोपनीय ऑर्डर + MoU

इसलिए पाकिस्तान वाली खबर सामने आने के बाद जून की भारत वाली डील फिर चर्चा में आई है। भारत की डील पाकिस्तान वाली डील के बाद नहीं हुई थी, बल्कि पहले हो चुकी थी।

भारत को डील का सबसे बड़ा फायदा ?

भारत को डील का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को ड्रोन नहीं, बल्कि ड्रोन बनाने का अधिकार मिला है। Powerus की इकाई Tandem Defense LLC ने Paras Defence को Guardian-1 की संबंधित बौद्धिक संपदा (इंटिलेक्चुअल प्रॉपर्टी) यानी IP का भारत में इस्तेमाल करने का एक्सक्लूसिव अधिकार दिया है।

इसके तहत Paras Defence:-

  • Guardian-1 को भारत में बना सकती है।
  • भारतीय बाजार में इसका commercialisation कर सकती है।
  • जरूरत के अनुसार घरेलू साझेदारों के साथ प्रोडक्शन और संबंधित गतिविधियां कर सकती है।
  • भारत में इसकी बिक्री से कारोबारी लाभ हासिल कर सकती है।
  • समझौते में Powerus के लिए लाइसेंस फीस और भारत में बिक्री से होने वाले नेट प्रॉफिट में हिस्सेदारी का भी प्रावधान है।
  • शुरुआती लाइसेंस अवधि 12 महीने है, जिसे दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

यानी भारत ने Powerus के साथ सिर्फ ग्राहक बनने का रास्ता नहीं चुना। भारतीय कंपनी को उसी तकनीक के लोकल प्रोडक्शन और बिक्री की भूमिका मिली है।

Guardian-1 क्या है?

Guardian-1 एक हाई-स्पीड, बैटरी से चलने वाला काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर है। Powerus इसे कम लागत वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और दूसरे हवाई खतरों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया सिस्टम बताती है। इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि आधुनिक युद्ध में छोटे और अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं।

Guardian-1 की प्रमुख खूबियां

खासियतGuardian-1 की क्षमता
भूमिकाहाई-स्पीड Counter-UAS Interceptor
मुख्य निशानाShahed-136, Geran-2 जैसे One-Way Attack Drone और Group-3 वर्ग के UAV
अधिकतम रफ्तार290–340 किमी/घंटा
क्रूज स्पीड160 किमी/घंटा
ऑपरेशनल एंगेजमेंट रेडियस15 किमी तक
अधिकतम उड़ान ऊंचाई5,000 मीटर
अधिकतम उड़ान समय28 मिनट तक
वजनबैटरी सहित 2.65 किलोग्राम
ढांचामजबूत Carbon-Fiber Airframe
ऑपरेटरएक व्यक्ति से संचालन के लिए डिजाइन
इंटरसेप्शन तरीकाKinetic Intercept — लक्ष्य ड्रोन को सीधे टक्कर मारकर रोकने की अवधारणा
कैमरा1080p, 100 fps डिजिटल वीडियो सिस्टम
कंट्रोल/गाइडेंसELRS Diversity Control + कैमरा आधारित अंतिम चरण की निगरानी/गाइडेंस
बैटरी/मोटर8S 8500mAh बैटरी, 3115 900KV मोटर
तैनातीRapid Deployment के लिए डिजाइन
खास उद्देश्यकम लागत वाले ड्रोन के खिलाफ महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर का विकल्प देना

भारत के लिए इस डील का फायदा तीन स्तर पर है: –

पहला—तकनीक: विदेशी विकसित काउंटर-ड्रोन तकनीक तक पहुंच।

दूसरा—उत्पादन: सिस्टम को भारत में बनाने का रास्ता।

तीसरा—बाजार: भारतीय बाजार में इसे commercialise करने का अधिकार।

पाकिस्तान को डील में क्या मिला?

Powerus ने पाकिस्तान आर्मी के साथ MoU किया है और इसके तहत Unmanned Aerial Systems का शुरुआती ऑर्डर मिलने की पुष्टि की है। लेकिन यहां सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया कि:-

  • कितने UAS का ऑर्डर है?
  • कौन-सा मॉडल दिया जाएगा?
  • ऑर्डर की कीमत कितनी है?
  • इनकी डिलीवरी कब होगी?
  • इनका सटीक सैन्य इस्तेमाल क्या होगा?

Powerus ने सुरक्षा और commercial confidentiality का हवाला देते हुए इन विवरणों को सार्वजनिक नहीं किया है। Reuters ने भी पाकिस्तान वाले ऑर्डर को undisclosed बताया है।

इसलिए अभी पाकिस्तान के लिए सबसे पक्की बात यही है—उसे Powerus से UAS का शुरुआती ऑर्डर मिला है।

पाकिस्तान आगे क्या हासिल कर सकता है?

Powerus ने पाकिस्तान के साथ हुए MoU को unmanned और autonomous systems में व्यापक सहयोग का ढांचा बताया है। कंपनी के अधिकारियों ने पाकिस्तान में भविष्य में तकनीकी सहयोग और लोकल प्रोडक्शन की संभावनाओं की बात भी की है। यानी आगे पाकिस्तान में:

UAS सप्लाई तकनीकी सहयोग संभावित स्थानीय उत्पादन

जैसा मॉडल विकसित हो सकता है।

लेकिन अभी इसे पक्का उत्पादन कार्यक्रम कहना सही नहीं होगा। भविष्य में joint venture या local manufacturing की संभावना बताई गई है, लेकिन उसका वास्तविक पैमाना और समयसीमा अभी सामने नहीं है।

यहीं भारत और पाकिस्तान की डील में एक बड़ा अंतर बनता है।

भारत का फायदा अभी ज्यादा साफ क्यों दिख रहा है?

दोनों डील को साथ रखिए तो तस्वीर काफी साफ हो जाती है।

भारत

  • Guardian-1 का एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस
  • भारत में निर्माण का अधिकार
  • भारत में commercialisation का अधिकार
  • स्थानीय कंपनी Paras Defence की भागीदारी
  • बिक्री से कारोबारी लाभ का अवसर
  • आगे भारतीय रक्षा बाजार में विस्तार की संभावना

पाकिस्तान

  • UAS का शुरुआती ऑर्डर
  • UAS से संबंधित सपोर्ट
  • व्यापक unmanned/autonomous systems सहयोग का MoU
  • भविष्य में स्थानीय उत्पादन की संभावना

इसलिए आज उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर भारत का फायदा ज्यादा ठोस और स्पष्ट है। पाकिस्तान को वास्तविक ऑर्डर मिला है, लेकिन उसकी कीमत और क्षमता तक सार्वजनिक नहीं है। जबकि भारत की डील में उत्पाद, लाइसेंस, निर्माण और commercialisation का ढांचा स्पष्ट रूप से सामने आया है।

Powerus को दोनों देशों से क्या मिला?

इस कहानी में तीसरा और सबसे बड़ा लाभार्थी Powerus भी है।

भारत में उसे Paras Defence के जरिए लोकल डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम स्थानीय रक्षा उत्पादन तंत्र और बड़े डिफेंस मार्केट में इंट्री मिली।

पाकिस्तान में उसे सीधा UAS ऑर्डर और भविष्य के औद्योगिक सहयोग का रास्ता मिला। यानी फिलहाल कंपनी ने दोनों देशों को एक जैसा प्रोडक्ट नहीं बेचा है।

भारत के लिए मॉडल:
Powerus की तकनीक Paras Defence → भारत में निर्माण भारतीय बाजार

पाकिस्तान के लिए मॉडल:
Powerus → UAS सप्लाई आगे तकनीकी/औद्योगिक सहयोग की संभावना

यही रणनीति कंपनी को भारत-पाकिस्तान दोनों बाजारों में अलग-अलग तरीके से पैर जमाने देती है।

ट्रंप परिवार का कनेक्शन भी क्यों चर्चा में है?

Powerus की चर्चा सिर्फ भारत-पाकिस्तान डील की वजह से नहीं है। कंपनी का कारोबारी ढांचा अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बेटों Donald Trump Jr. और Eric Trump से जुड़े निवेश से भी जुड़ा है।

Powerus प्रस्तावित रूप से Nasdaq-listed Aureus Greenway Holdings के साथ मर्जर के जरिए सार्वजनिक कंपनी बनने की तैयारी में है। इसमें ट्रंप के बेड़ों से जुड़ा investment vehicle American Ventures संयुक्त कंपनी में हिस्सेदारी रखने वाला है।

डील का असली कहानी ?

Powerus की भारत-पाकिस्तान डील को एक लाइन में समझें तो तस्वीर यह है:-

पाकिस्तान ने Powerus से UAS लेने का रास्ता खोला है, जबकि भारत ने Powerus की Guardian-1 काउंटर-ड्रोन तकनीक को अपने यहां बनाने और बेचने का रास्ता खोल लिया है।

यानी पाकिस्तान को ड्रोन मिला है और भारत को ड्रोन बनाने का अधिकार! यही वजह है कि मौजूदा सार्वजनिक जानकारी में भारत का फायदा पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है।

हालांकि पाकिस्तान के साथ आगे बड़े ऑर्डर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या स्थानीय उत्पादन शुरू होता है तो तस्वीर बदल सकती है। अभी उसके बारे में उपलब्ध जानकारी मुख्यतः शुरुआती ऑर्डर और भविष्य के सहयोग की संभावना तक सीमित है।

पाकिस्तान के साथ Powerus की डील सितंबर में सुर्खियों में आई, लेकिन उससे पहले ही भारत इस अमेरिकी कंपनी की तकनीक को अपने रक्षा उत्पादन तंत्र में जगह दे चुका था।

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