फ्रांस के फ्यूचर वॉरशिप का कौन कर सकेगा मुकाबला? मिसाइलों के जखीरे से लेकर हर तरह के ड्रोन का होगा ऑपरेशन सेंटर

By Defence Detective

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AI-generated conceptual image of a futuristic French warship inspired by Naval Group’s SCX 26 concept.

नौसैनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन हमलों, हाइपरसोनिक मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक और साइबर वॉरफेयर के बढ़ते खतरे को देखते हुए फ्रांस ने बेहद आधुनिक फ्यूचर वॉरशिप का कॉन्सेप्ट पेश किया है। पेरिस में आयोजित Euronaval 2026 प्रदर्शनी में 3 नवंबर को सामने आए इस डिजाइन में भारी हथियारों के साथ ड्रोन ऑपरेशन को खास जगह दी गई है।

फ्रांसीसी युद्धपोत निर्माता कंपनी Naval Group ने भविष्य के जिस युद्धपोत का कॉन्सेप्ट पेश किया है, वह भारी मिसाइल ताकत के साथ हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे काम करने वाले ड्रोन का ऑपरेशन सेंटर भी होगा।

इसका नाम है—SCX 26। इसमें लेजर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गन लगाने का भी प्रस्ताव है। कंपनी इसके जरिए दिखा रही है कि आने वाले दशकों में बड़े युद्धपोतों का डिजाइन और उनका लड़ने का तरीका कैसे बदल सकता है।

इसका फोकस है—भारी हमलों का सामना करना, ज्यादा हथियार रखना और बड़े ड्रोन नेटवर्क को ऑपरेट करना है। कंपनी युद्धपोत को ऐसी भूमिका में देख रही है, जहां वह अपने हथियारों से लड़ने के साथ आसपास तैनात कई तरह के अनमैन्ड सिस्टम का केंद्र भी बने।

हालांकि, प्रदर्शनी में सामने आए इस कॉन्सेप्ट और समुद्र में उतरने वाले वास्तविक युद्धपोत के बीच अभी लंबा रास्ता है।

क्या है SCX 26, अभी किस चरण में है प्रोजेक्ट?

SCX 26 भविष्य के बड़े सरफेस कॉम्बैटेंट यानी सतह पर लड़ने वाले युद्धपोत का रिसर्च कॉन्सेप्ट है। Naval Group इसके जरिए हालिया संघर्षों से मिले सबक, नई ऑपरेशनल जरूरतों और आने वाले वर्षों में विकसित हो सकने वाली तकनीकों को एक डिजाइन में परख रही है।

कितना बड़ा होगा यह युद्धपोत? सामने आई कॉन्सेप्ट डिटेल्स के मुताबिक:-

विशेषताप्रस्तावित आंकड़ा
लंबाईलगभग 170 मीटर
चौड़ाईलगभग 24 मीटर
डिस्प्लेसमेंटकरीब 8,000 टन; कुछ रिपोर्टों में फुल लोड पर 10,000 टन तक
अधिकतम रफ्तार30 नॉट (लगभग 56 किलोमीटर प्रति घंटा)
समुद्री रेंजलगभग 8,000 नॉटिकल मील (करीब 14,800 किमी)
मुख्य क्रूलगभग 150
अतिरिक्त जगह100 कमांड स्टाफ, ड्रोन ऑपरेटर और विशेषज्ञों के लिए

प्रोपल्शन सिस्टम: इसमें CODLAG (Combined Diesel-Electric and Gas Turbine) तकनीक का इस्तेमाल (डीजल-इलेक्ट्रिक व्यवस्था और गैस टर्बाइन का इस्तेमाल) प्रस्तावित है।

सामान्य रफ्तार पर डीजल जनरेटर से बनी बिजली इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाएगी, जबकि तेज रफ्तार के लिए गैस टर्बाइन अतिरिक्त ताकत देगी। यह व्यवस्था सामान्य गति पर ईंधन की बचत और कम शोर में मदद करेगी।

सर्वाइवेबिलिटी: हमले के बाद भी जहाज की काम करने की क्षमता बनाए रखने के लिए इसके अहम सिस्टम अलग-अलग हिस्सों में रखने और उनकी बैकअप व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।

दो अलग सुपरस्ट्रक्चर में सेंसर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण बांटने से एक हिस्से को नुकसान पहुंचने पर बाकी सिस्टम काम जारी रख सकेंगे।

कितने तरह के हथियारों से होगा लैस ?

Naval Group ने SCX 26 में बड़ी मिसाइल क्षमता, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गन और लेजर हथियार और ड्रोन को एक साथ रखने की परिकल्पना की है। इसका उद्देश्य अलग-अलग खतरों से मुकाबला करना और लगातार हमलों के बीच जहाज की लड़ने की क्षमता बनाए रखना है।

  • इस कड़ी में SCX 26 के लिए 100 से ज्यादा वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल प्रस्तावित बताए गए हैं। ये जहाज के भीतर बने लॉन्च खांचे होते हैं, जिनसे मिसाइल ऊपर की ओर दागी जाती है।
  • संभावित हथियारों के तौर पर Aster 30 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और MdCN जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल का उल्लेख है।
  • हाइपरसोनिक खतरों से निपटने की जरूरत को देखते हुए सेंसर प्रस्तावित हैं।

मिसाइलों के अलावा अतिरिक्त कौन सी मारक क्षमता ?

SCX 26 की मुख्य गन के लिए तेजी से फायर करने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियार का प्रस्ताव है। ऐसी तकनीक में प्रोजेक्टाइल को गति देने के लिए इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक बल इस्तेमाल होता है।

  • इससे पारंपरिक हथियारों के मुकाबले तेज प्रोजेक्टाइल और अपेक्षाकृत कम लागत वाले हमलों की संभावना तलाश की जा रही है।
  • हालांकि, SCX 26 की प्रस्तावित गन की रेंज, कैलिबर और प्रति शॉट लागत घोषित नहीं हैं। पर्याप्त बिजली, लगातार फायरिंग और बैरल की उम्र जैसी चुनौतियां भी इसकी उपयोगिता तय करेंगी।

इसके अलावा दो Rampart मल्टीपर्पज मॉड्यूलर लॉन्चर लगाने की योजना है। इनसे कम दूरी की मिसाइलें, गाइडेड रॉकेट और दुश्मन के हथियारों को भ्रमित करने वाले डिकॉय इस्तेमाल किए जा सकेंगे। रिमोट से संचालित सहायक हथियार भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

कितना मारक होगा लेजर हथियार ?

कॉन्सेप्ट में 100 किलोवॉट का हाई-एनर्जी लेजर हथियार भी शामिल है। लेजर लक्ष्य के किसी हिस्से पर ऊर्जा केंद्रित करके उसे गर्म करने और नुकसान पहुंचाने का काम करता है। इसका उद्देश्य ड्रोन जैसे खतरों के खिलाफ जहाज को अतिरिक्त विकल्प देना है।

लेजर को शामिल करने के पीछे सोच यह है कि छोटे और अपेक्षाकृत सस्ते खतरों से निपटने के लिए जहाज के पास महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों के अलावा भी साधन हों।

इसकी एक और बड़ी खासियत ड्रोन मदरशिप

SCX 26 को ऐसे युद्धपोत के रूप में सोचा गया है, जो अपने साथ कई तरह के अनमैन्ड सिस्टम लेकर चले। यह हवा, जमीन और पानी वाले यानी तीनों तरह के ड्रोन से लैस होगा। मिशन के मुताबिक इसके ड्रोन समूह में बदलाव किया जा सकेगा।

  • हवाई ड्रोन: निगरानी, इंटेलिजेंस और अन्य मिशन।
  • सरफेस ड्रोन: समुद्र की सतह पर निगरानी और सुरक्षा संबंधी काम।
  • अंडरवॉटर ड्रोन: पानी के नीचे निगरानी तथा एंटी-सबमरीन ऑपरेशन में सहायता।
  • हेलिकॉप्टर: मिशन के मुताबिक निगरानी, परिवहन और पनडुब्बी रोधी भूमिका।

ड्रोन ऑपरेशन के लिए SCX 26 में बड़ा मिशन बे रखने का प्रस्ताव है। यहां ड्रोन रखने, उनकी देखभाल और मरम्मत करने तथा उन्हें मिशन के लिए तैयार करने की सुविधाएं होंगी।

एक बड़ी लिफ्ट मिशन बे को फ्लाइट डेक से जोड़ेगी। कंपनी जहाज पर ड्रोन या उनके कुछ पुर्जे बनाने की संभावना भी तलाश रही है। इसका मतलब समुद्र में जरूरत के मुताबिक मानवरहित सिस्टम को लंबे समय तक सपोर्ट करने की क्षमता विकसित करना है।

इसमें दो अलग टावर क्यों बनाए गए हैं?

SCX 26 के डिजाइन में दो अलग सुपरस्ट्रक्चर हैं। इनके बीच अतिरिक्त उपकरण और मॉड्यूलर सिस्टम लगाने के लिए लचीली जगह रखी गई है। महत्वपूर्ण सेंसर और सिस्टम को अलग-अलग स्थान पर रखने का उद्देश्य हमले के बाद भी जहाज की कार्यक्षमता बनाए रखना है।

  • प्रस्तावित सेंसर में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए UHF रडार, पनडुब्बी खोजने के लिए सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम शामिल हैं।
  • AI और ऑटोनॉमी से सेंसरों की जानकारी समझने, स्थिति का आकलन करने और कई सिस्टम के बीच तालमेल बनाने में मदद लेने का प्रस्ताव है।

क्या फ्रांस इसे बनाने जा रहा है ?

अभी इसे फ्रांसीसी नौसेना का मंजूर नया डिस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट नहीं कहा जा सकता। Naval Group इसे भविष्य की जरूरतों और तकनीकों को परखने वाला रिसर्च प्रोजेक्ट बता रही है।

SCX 26 का कॉन्सेप्ट 2040 के दशक की नौसैनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि, इसके निर्माण या सेवा में आने की समयसीमा घोषित नहीं हुई है।

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