इंडियन एयरफोर्स को इजरायल देगा ₹8,000 करोड़ के ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ एयरक्राफ्ट ? रूस-यूरोप रेस से बाहर

By Defence Detective

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Indian Air Force tanker aircraft refuelling a fighter jet in mid-air, symbolic image.

भारतीय वायुसेना (IAF) की लंबी दूरी के हवाई अभियानों की क्षमता को बड़ी रणनीतिक मजबूती मिलने जा रही है ? टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इजरायल, भारत के एक एक अहम डिफेंस डील को अंतिम रूप देने के करीब है। इस डील के तहत भारतीय वायुसेना को 6 एरियल रिफ्यूलिंग ( उड़ान के दौरान  ईंधन भरने वाले) विमान उपलब्ध कराएगी।

इस प्रोजेक्ट की एक और अहम बात यह कि इसमें भारत की भी औद्योगिक भागीदारी होगी। रिपोर्टों के अनुसार, कम-से-कम 30 प्रतिशत काम भारत में किया जाना है।यह प्रस्तावित विमान वायुसेना को टैंकर और परिवहन, दोनों भूमिकाओं में सहायता देंगे।

इन विमानों से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी के मिशन संचालित करने और लड़ाकू विमानों को अधिक समय तक हवा में बनाए रखने की क्षमता मजबूत होगी। इनके जरिए लड़ाकू विमान उड़ान के दौरान ईंधन ले सकेंगे। साथ ही, जरूरत के मुताबिक सैनिकों और सैन्य सामान का परिवहन भी किया जा सकेगा।

क्या भारत-इजरायल डील पक्की, कब की है यह डील ?

Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की सरकारी कंपनी इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज यानी IAI सौदे में सबसे आगे बताई जा रही है और सौदे के एकदम करीब है। दरअसल  IAI इस खरीद प्रक्रिया में एकमात्र योग्य बोलीदाता के रूप में उभरी है।

  • रूसी और यूरोपीय कंपनियों के प्रस्ताव भी प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन वे मूल्यांकन की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कर पाए।
  • इससे इजरायली कंपनी की स्थिति बेहद मजबूत हुई है।
  • हालांकि, इसका अर्थ कंपनी को अंतिम कॉन्ट्रैक्ट मिल जाना नहीं है।
  • तकनीकी या अन्य मूल्यांकन में योग्य पाए जाने और अंतिम खरीद अनुबंध मिलने के बीच अंतर होता है।
  • कीमत, आवश्यक मंजूरियों और अनुबंध की शर्तों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खरीद को अंतिम रूप मिलता है।

इसलिए फिलहाल खबर का मुख्य घटनाक्रम IAI का आगे होना है। यानी अभी सामने आई खबरें सौदा हासिल करने की इजरायली संभावना से जुड़ी हैं। फिलहाल इन्हें अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर की घोषणा नहीं माना जा सकता है।

छह अतिरिक्त मिड-एयर रिफ्यूलर खरीदने के प्रस्ताव को फरवरी 2024 में रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी मिली थी। इसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ी।

क्या है इस सौदे की खास बातें ?

यह डील लगभग ₹8,000 करोड़ रुपये की है। प्रोजेक्ट की एक खास बात यह है कि इसमें पहले इस्तेमाल किए जा चुके छह बोइंग 767 यात्री विमानों को सैन्य जरूरतों के अनुरूप मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट यानी MMTT में बदला जाएगा। यानी उपलब्ध बोइंग 767 विमानों का टैंकर में रूपांतरण (Conversion) होना है।

  • विमान का प्रकार:  संभावित सौदे के तहत पहले इस्तेमाल किए जा चुके छह बोइंग 767 (Boeing 767) कमर्शियल यात्री विमानों को मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट (MMTT) में बदला जाएगा। ये विमान हवा में ईंधन भरने के साथ सैनिकों और सैन्य सामान के परिवहन में भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
  • मेक इन इंडिया (Make in India) भागीदारी: रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना का कम-से-कम 30 प्रतिशत काम भारत में किया जाएगा। यह हिस्सेदारी विमान के कन्वर्ज़न और संबंधित कार्यों से जुड़ी है।
  • भारतीय साझेदार: सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के इस परियोजना में IAI की प्रमुख भारतीय साझेदार बनने की संभावना है।
  • HAL को स्थानीय प्रणालियां जोड़ने, वायरिंग और विमान के ढांचे में जरूरी बदलाव जैसे काम मिल सकते हैं।
  • दोनों कंपनियों ने अप्रैल 2022 में भारत में यात्री विमानों को MMTT में बदलने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) किया था।
  • डिलीवरी की संभावित समयसीमा: आवश्यक मंजूरियों और डील की प्रक्रिया पूरी होने पर विमानों की डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच होने का अनुमान है।

एक नजर में सौदे की खास बातें-

बिंदुप्रस्तावित विवरण
उपयोगकर्ताभारतीय वायुसेना
विमान की संख्याछह
मूल प्लेटफॉर्मपहले इस्तेमाल किए जा चुके Boeing 767 यात्री विमान
सैन्य स्वरूपMulti-Mission Tanker Transport—MMTT
प्रमुख कंपनीIsrael Aerospace Industries—IAI
अनुमानित कीमत90.57 करोड़ डॉलर, लगभग ₹8,000 करोड़
भारतीय भागीदारीकम-से-कम 30 प्रतिशत काम
संभावित भारतीय साझेदारहिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड—HAL
अनुमानित आपूर्ति2028–2030, मंजूरियों और अनुबंध के अधीन
मुख्य भूमिकाहवा में ईंधन भरना और परिवहन

भारतीय वायुसेना को टैंकरों की जरूरत क्यों ?

भारतीय वायुसेना के लिए ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ माने जाने वाले एयर-टू-एयर रिफ्यूलर बहुत आवश्यक हैं। इस समय वायुसेना रूसी मूल के छह इल्यूशिन Il-78MKI टैंकर विमानों पर निर्भर है, जिन्हें 2003–04 में उज्बेकिस्तान से खरीदा गया था। विमान रूसी मूल के डिजाइन पर आधारित हैं, लेकिन इनका निर्माण उज्बेकिस्तान के ताशकंद स्थित विमान कारखाने में हुआ था।

इसके अलावा, पायलटों की ट्रेनिंग के लिए एक टैंकर विमान वेट-लीज पर लिया गया है। मार्च 2025 में रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना और नौसेना के पायलटों को हवा में ईंधन भरने की ट्रेनिंग देने के लिए एक टैंकर विमान ‘वेट-लीज’ पर लेने का अनुबंध किया था। इस व्यवस्था में विमान के साथ उसे उड़ाने वाला चालक दल और रखरखाव की सुविधा भी मिलती है

  • ऐसे में सीमित संख्या और रखरखाव संबंधी चुनौतियों के कारण अतिरिक्त टैंकरों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
  • पिछले करीब दो दशकों में नए टैंकर खरीदने के कई प्रयास हुए, लेकिन ऊंची लागत और खरीद प्रक्रिया की अड़चनों के चलते वे पूरे नहीं हो सके।
  • बोइंग 767 से कन्वर्ट किए गए नए टैंकर आने से भारतीय वायुसेना की हवा में ईंधन भरने की क्षमता बढ़ेगी।
  • उपयुक्त रिफ्यूलिंग प्रणाली के साथ ये राफेल और सुखोई Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल रेंज और हवा में बने रहने की अवधि बढ़ाने में मदद करेंगे।
  • इससे लड़ाकू विमान ईंधन लेने के लिए बार-बार एयरबेस पर लौटे बिना लंबी दूरी के मिशन और अधिक समय तक गश्त कर सकेंगे।

उपलब्ध टैंकरों की संख्या बढ़ने से वायुसेना को विभिन्न क्षेत्रों में मिशनों की योजना बनाने और एक साथ अधिक अभियानों को सहायता देने में सुविधा होगी।

पाकिस्तान और चीन के पास कितने टैंकर?

  • पाकिस्तान के पास चार Il-78 टैंकर हैं।
  • चीन के मामले में सार्वजनिक अनुमानों में अंतर है। अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में उसके पास लगभग 43 बड़े टैंकर या टैंकर की भूमिका निभाने में सक्षम विमान बताए गए हैं—तीन Il-78, करीब 30 YY-20A और 10 बहुउद्देशीय Y-20B।

यात्री विमान को सैन्य टैंकर में कैसे बदला जाएगा?

बोइंग 767 मूल रूप से यात्री परिवहन के लिए विकसित विमान है। इसे MMTT बनाने के लिए हवा में ईंधन देने वाली प्रणाली, उसके नियंत्रण उपकरण, ऑपरेटर स्टेशन और सैन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां लगाई जाती हैं। आवश्यकतानुसार विमान की संरचना और कार्गो व्यवस्था में भी बदलाव होते हैं।

IAI के अनुसार, उसके कन्वर्जन प्रोजेक्ट में विमान की संरचनात्मक मजबूती, उड़ान सुरक्षा और आगे की परिचालन अवधि का मूल्यांकन शामिल है। कंपनी रखरखाव, इंजीनियरिंग, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता के विकल्प भी उपलब्ध कराती है। इसका उद्देश्य उपलब्ध विमान को सैन्य मिशनों के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म में बदलना है।

एयर रिफ्यूलर से लड़ाकू विमानों की पहुंच कैसे बढ़ेगी?

लड़ाकू विमान उड़ान में ईंधन खर्च करता है और उपलब्ध ईंधन उसके मिशन की अवधि को सीमित करता है। हवा में ईंधन मिलने पर उसे केवल ईंधन लेने के लिए वापस हवाई अड्डे पर लौटने की जरूरत घटती है। इससे दूर के क्षेत्रों तक पहुंचने और वहां अधिक समय तक अभियान चलाने में मदद मिलती है। इस क्षमता का लाभ लंबी दूरी की उड़ानों और गश्त जैसे अभियानों में मिलता

ईंधन के अलावा सैनिक और सामान भी ले जा सकेगा MMTT

IAI के आधिकारिक विवरण में B767 MMTT के लिए कई भूमिका विकल्प दिए गए हैं। इनमें हवा में ईंधन भरना, सैनिक और यात्री परिवहन, कार्गो ढुलाई तथा चिकित्सा निकासी शामिल हैं। ग्राहक की जरूरत के अनुसार विशेष संचार और निगरानी संबंधी प्रणालियां भी जोड़ी जा सकती हैं।

विमान में कार्गो दरवाजे और सामान रखने की व्यवस्था के साथ ऐसी सीटें तथा उपकरण लगाए जा सकते हैं, जिन्हें जरूरत के मुताबिक बदला जा सके। इससे एक ही प्लेटफॉर्म अलग-अलग मिशनों में इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि, भारत के विमानों में इनमें से कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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