चीन-तुर्की के बाद पाकिस्तान का नया ड्रोन चैनल, अमेरिका से हुई ड्रोन डील, क्या है इसका ट्रंप कनेक्शन ?

By Defence Detective

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पाकिस्तान लंबे समय से चीन और तुर्की से अपने ड्रोन और सैन्य प्लेटफॉर्म की जरूरत पूरी करता रहा है। लेकिन अब उसकी सेना ने एक अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus के साथ नया रास्ता खोला है।

इसमें कहानी सिर्फ कुछ ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है। बल्कि इस समझौते में अनमैन्ड एरियल सिस्टम की शुरुआती खरीद के साथ पाकिस्तान में तकनीक डेवलप करने और संभावित लोकल प्रोडक्शन की बात भी सामने आई है।

दिलचस्प बात यह कि डील उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान-अमेरिका रक्षा संबंध फिर से गर्म हो रहे हैं और Powerus का जल्द ही ऐसी अमेरिकी कंपनी के साथ मर्जर (विलय) होना प्रस्तावित है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की इन्वेस्टमेंट के तौर पर हिस्सेदारी है।

पाकिस्तान की डील क्या है?

17 सितंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक Memorandum of Understanding यानी MoU किया है। Powerus के को-फाउंडर रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच ने Reuters को बताया कि समझौते में अनमैन्ड एरियल सिस्टम के तौर पर ड्रोन से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात कि पाकिस्तान को कौन-सा ड्रोन मिलेगा, कितनी संख्या में मिलेगा और इसकी कीमत कितनी है, ऐसी जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनी ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए विवरण देने से इनकार किया।

कैसे हुई यह डील ?

इस समझौते से ठीक पहले Robert Bret Velicovich की अगुआई में कंपनी के डेलिगेशन ने 16 सितंबर को रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के General Headquarters में फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।

पाकिस्तान की सैन्य मीडिया शाखा ISPR के मुताबिक बातचीत में डिफेंस प्रोक्योरमेंट, प्रोडक्शन और लॉन्ग-टर्म कैपेसिटी बिल्डिंग पर चर्चा हुई। हालांकि उस समय जारी आधिकारिक बयान में MoU का जिक्र नहीं किया गया था। बाद में Powerus ने Reuters को समझौते और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की।

यानी पहले सैन्य नेतृत्व के स्तर पर बातचीत हुई, फिर ड्रोन ऑर्डर और अंत में MoU की पुष्टि।

Powerus आखिर है क्या?

Powerus अमेरिका की एक नई ड्रोन और ऑटोनॉमस डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी है। इसका पूरा कॉरपोरेट नाम Autonomous Power Corporation है और यह Powerus ब्रांड के तहत काम करती है। कंपनी का मुख्यालय West Palm Beach, Florida में है। 8 अक्टूबर 2025 को स्थापित इस कंपनी का काम सिर्फ एक तरह के UAV तक सीमित नहीं है।

कंपनी के पास PowerAir नाम का autonomous air systems business और PowerSea नाम का autonomous maritime systems business भी है।  

इसके प्रमुख क्षेत्र हैं:

  • Heavy-lift aerial systems — भारी पेलोड ले जाने वाले UAV
  • Tactical drones — सैन्य अभियानों के लिए मॉड्यूलर ड्रोन
  • Maritime autonomous systems — समुद्री unmanned platforms
  • Drone autonomy और control systems
  • Counter-drone/interceptor systems
  • अलग-अलग platforms को एक common autonomous architecture में जोड़ना

क्या है डील का ट्रंप कनेक्शन ?

Powerus का Aureus Greenway Holdings के साथ मर्जर प्रस्तावित है। मार्च 2026 में दोनों कंपनियों ने merger agreement किया था। अगस्त में संबंधित registration statement प्रभावी हो चुका था और कंपनियों ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत के आसपास merger पूरा होने की उम्मीद जताई है।  हालांकि यह अभी भी बाकी शर्तों और approvals पर निर्भर है।

Aureus Greenway में ट्रंप के बेटे Donald Trump Jr. और Eric Trump से जुड़ा निवेश है। दोनों की हिस्सेदारी American Ventures नाम के investment fund के माध्यम से है। ज्वाइंट कंपनी में American Ventures की संभावित beneficial ownership लगभग 9.9% बताई गई है।

पाकिस्तान का डील से असली फायदा ?

यह डील पाकिस्तान के लिए ड्रोन खरीद से आगे की मानी जा रही है। Powerus के को-फाउंडर Velicovich ने कहा है कि लक्ष्य अमेरिका और पाकिस्तान की तकनीकी क्षमताओं को जोड़कर joint technology relationship बनाना है। यानी कंपनी पाकिस्तान में तकनीक बनाने की संभावनाएं भी तलाश रही है।

इसका मतलब आगे चलकर सहयोग का फोकस इन क्षेत्रों तक बढ़ सकता है:

  • ड्रोन सिस्टम की स्थानीय असेंबली या उत्पादन
  • ऑटोनॉमस सिस्टम
  • unmanned technology development
  • तकनीकी सपोर्ट
  • लंबी अवधि की औद्योगिक क्षमता
  • अमेरिकी और पाकिस्तानी कंपनियों के बीच संयुक्त तकनीकी काम

ड्रोन खरीद से पाकिस्तान को कितनी ताकत मिलेगी?

फिलहाल अभी इसका सटीक जवाब देना संभव नहीं है। क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े ही सार्वजनिक नहीं हैं।

जानकारीस्थिति
MoUहां
Initial UAS orderहां
ड्रोन की संख्यासार्वजनिक नहीं
कीमतसार्वजनिक नहीं
मॉडलसार्वजनिक नहीं
Rangeसार्वजनिक नहीं
Payloadसार्वजनिक नहीं
Weapon capabilityपुष्टि नहीं
Local productionसंभावना/चर्चा
Joint technology developmentकंपनी की योजना

यही वजह है कि इस डील को लेकर सबसे बड़े दावे करने के बजाय इसके आगे के चरण पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

डील का भारत के लिए क्या मायने?

भारत के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान ने कितने ड्रोन खरीदे। असल सवाल है—क्या यह सिर्फ शुरुआती UAS खरीद है या पाकिस्तान में अमेरिकी unmanned technology का नया production ecosystem बनने की शुरुआत?

अगर भविष्य में Powerus और पाकिस्तान के बीच स्थानीय manufacturing, technology transfer या joint development के ठोस समझौते सामने आते हैं, तब इस डील का सामरिक महत्व आज के शुरुआती ऑर्डर से कहीं ज्यादा हो सकता है।

क्योंकि पाकिस्तान को अगर चीन और तुर्की के बाद अमेरिकी unmanned technology का तीसरा बड़ा तकनीकी चैनल भी मिल जाता है, तो भारत-पाकिस्तान ड्रोन मुकाबले का मैदान और जटिल हो सकता है।

एक बात पूरी तरह साफ है कि इस समझौते ने पाकिस्तान के लिए अमेरिकी unmanned technology के साथ संभावित दीर्घकालीन सहयोग का दरवाजा जरूर खोला है।

पहलूभारत के लिए मतलब
UAS ऑर्डरपाकिस्तान की unmanned क्षमता में संभावित बढ़ोत्तरी
Local productionभविष्य में इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने की संभावना
US technology linkपाकिस्तान के लिए चीन-तुर्की के अलावा नया तकनीकी स्रोत
    

क्या भारत-अमेरिका ड्रोन साझेदारी भी है ?

पाकिस्तान ने अब अमेरिकी कंपनी Powerus के साथ UAS समझौता किया है, लेकिन भारत-अमेरिका का ड्रोन रिश्ता इससे कहीं पहले और कहीं बड़े स्तर पर बन चुका है। भारत के मामले में सहयोग सिर्फ ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है—MQ-9B, भारत में असेंबली, MRO, ISR, AI और रक्षा-तकनीक सहयोग तक इसका दायरा पहुंच चुका है।

  • भारत की अमिरका से 31 MQ-9B HALE (High Altitude Long Endurance) RPAS (Remotely Piloted Aircraft System) लेने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 16 MQ-9B SkyGuardian और 15 MQ-9B SeaGuardian शामिल हैं। जून 2023 में DAC की AoN में इन 31 प्लेटफॉर्म के लिए अमेरिकी सरकार की ओर से करीब $3.072 अरब का अनुमानित खर्च बताया गया था। अंतिम कीमत बातचीत के जरिए तय होनी है।
  • अगस्त 2026 में भारतीय नौसेना ने 2 MQ-9B SeaGuardian को 30 महीने के लिए लीज पर लेने का करीब ₹1,943 करोड़ का करार किया।   इन SeaGuardian का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार Maritime Domain Awareness, ISR और निगरानी क्षमता बढ़ाना है।
  • भारत-अमेरिका की योजना में MQ-9B को भारत में असेंबल करने और General Atomics द्वारा भारत में Comprehensive Global MRO facility स्थापित करने की बात भी शामिल है।
  • INDUS-X के जरिए दोनों देश startups, industry और research institutions को जोड़कर advanced defence technology में innovation और co-production बढ़ा रहे हैं। इसका पूरा नाम India-U.S. Defense Acceleration Ecosystem है। INDUS-X को जून 2023 में शुरू किया गया था। इसका मकसद भारत और अमेरिका की रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को साथ लाकर नई सैन्य तकनीक को विकसित और आगे उत्पादन तक पहुंचाना है
  • MQ-9B ecosystem में भारतीय कंपनियों और startups के साथ AI, semiconductor और component technologies पर सहयोग की दिशा भी सामने आई है।

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