यूक्रेन ने रूस के S-400 को बनाया निशाना, दो लॉन्चर तबाह!

By Defence Detective

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Russia S-400 air defense system launcher

रूस के जिस S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के नाम मात्र से दुश्मन के लड़ाकू विमान और मिसाइलें अलर्ट रहती हैं,  क्या अब वह सिस्टम यूक्रेन के Deep-Strike मिशन का निशाना बन रहा है ?

यूक्रेन ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने 16-17 सितंबर की रात रूस के ब्रायंस्क क्षेत्र में दो S-400 लॉन्चरों को निशाना बनाया है। यूक्रेनी जनरल स्टाफ के मुताबिक हमला ब्रायंस्क के Vygonichi इलाके में किया गया। यह क्षेत्र यूक्रेन की सीमा से लगे रूसी इलाकों में आता है और यहां तैनात एयर-डिफेंस सिस्टम रूस के पश्चिमी हिस्से की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ जब रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।

ब्रायंस्क में आखिर हुआ क्या?

यूक्रेन के General Staff ने 17 सितंबर को बताया कि उसकी सेनाओं ने रूसी S-400 सिस्टम के दो लॉन्चरों पर हमला किया है। इसके साथ रूस की दूसरी सैन्य फैसिलिटीज को भी निशाना बनाया गया है।

हालांकि रूसी पक्ष ने इस इलाके में एयर डिफेंस सिस्टम के किसी भी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। ब्रियांस्क क्षेत्र के एक्टिंग गवर्नर येगोर कोवलचुक ने यह जरूर माना कि यूक्रेनी ड्रोन ने इस इलाके पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। उनके मुताबिक, 24 घंटों के भीतर ब्रियांस्क क्षेत्र में 82 एयरक्राफ्ट-टाइप ड्रोन नष्ट कर दिए गए। उन्हें रोकने के लिए रूसी एयर डिफेंस यूनिट्स, मोबाइल फायर ग्रुप्स (जिनमें “BARS-ब्रियांस्क” ब्रिगेड भी शामिल थी) और रूसी नेशनल गार्ड की यूनिट्स को तैनात किया गया था।

वहीं यूक्रेनी जनरल स्टाफ़ ने भी यह साफ़ नहीं किया कि इन टारगेट्स पर हमला करने के लिए किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया और अभी तक हमले के नतीजों की कोई फ़ोटो या वीडियो भी जारी नहीं की है।

फिलहाल S-400 पर हमले की कोई स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

Vygonichi में पहले भी हुआ है हमला ?

इसके पहले फरवरी में यूक्रेनी ड्रोन ने Vygonichi में हमला किया था, जिसमें इलाके के पावर ग्रिड के अहम हिस्सों में से एक, 750-kV नोवोब्रियांस्क सबस्टेशन को निशाना बनाया गया था।

वहीं यूक्रेन की डिफेंस इंटेलिजेंस ने हाल ही में खुद S-400 सिस्टम के लिए RM-48U बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रोडक्शन, कंपोनेंट सप्लाई चेन, प्रोडक्शन में शामिल कंपनियों और रूसियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विदेशी उपकरणों के बारे में भी जानकारी दी थी।

S-400 की खासियत क्या है ?

S-400 कोई साधारण एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम नहीं है। यह रूस की long-range air-defence architecture का अहम हिस्सा है। यह एक mobile, long-range surface-to-air missile system है। इसे aircraft, UAV, cruise missiles और कुछ ballistic-missile threats से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत एक अकेली missile नहीं, बल्कि radar, command system और अलग-अलग range की interceptor missiles का पूरा नेटवर्क है।

पैरामीटरप्रमुख आंकड़ा
System typeMobile Long-Range SAM
Maximum advertised/claimed range380–400 km class
40N6 मिसाइल rangeलगभग 380–400 km class
48N6 मिसाइल family rangeलगभग 250 km
9M96E2 मिसाइल rangeलगभग 120 km
9M96E मिसाइल rangeलगभग 40 km
Maximum engagement altitudeलगभग 30 km
Ballistic-target engagementलगभग 60 km class
91N6E radar instrumented rangeलगभग 600 km
Tracked targetsस्रोत/कॉन्फिगरेशन के अनुसार 100–300 class
System roleAircraft + UAV + Cruise Missile + Ballistic Missile Defence

यानी इसकी असली ताकत है—

Long-range radar + multiple interceptor missiles + mobile launchers + command-and-control + layered engagement capability.

यही खूबी इसे आसमान का पहरेदार का तमगा दिलाती है।

S-400 Defensive Shield से High-Value Target क्यों?

यहीं इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है। किसी भी युद्ध में अगर एक पक्ष को दुश्मन के इलाके के अंदर जाकर aircraft, missile या दूसरे strategic targets पर हमला करना है, तो उसे दुश्मन की air defence से गुजरना पड़ेगा।

इसलिए पहले उस air-defence network को कमजोर करने की कोशिश की जाती है। सैन्य भाषा में इसे broadly SEAD/DEAD — Suppression/Destruction of Enemy Air Defences कहा जाता है।

यानी पहले दुश्मन की हवाई ढाल को कमजोर करो, फिर उसके पीछे मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला आसान बनाओ।

यही वजह है कि S-400 जैसे long-range systems दुश्मन के लिए High-Value Target बन जाते हैं। इसलिए दो लॉन्चरों पर हमला सिर्फ दो वाहनों को निशाना बनाने की घटना नहीं है। इसका मकसद रूस के air-defence network पर दबाव बढ़ाना भी हो सकता है।

रूस खुद S-400 से यूक्रेन पर हमला कर चुका है

इस कहानी में एक और दिलचस्प पहलू है। S-400 का रोल सिर्फ defensive नहीं रहा है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस ने S-400 family की missiles को ground targets पर strike के लिए भी इस्तेमाल किया है, ऐसा यूक्रेनी और पश्चिमी रिपोर्टों में बताया गया है।

इससे S-400 की strategic importance और बढ़ जाती है। यानी एक ही सिस्टम दुश्मन के aircraft को रोक सकता है, missile threats से रक्षा कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में जमीन पर strike capability में भी इस्तेमाल हो सकता है।

ऐसे सिस्टम को battlefield में नष्ट करना इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

यूक्रेन पहले भी कर चुका है ऐसा दावा ?

ब्रायंस्क की घटना को अकेले देखने के बजाय पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से जोड़कर देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

यूक्रेन ने इससे पहले भी रूसी S-400 components को निशाना बनाने का दावा किया है। इसमें 92N6 engagement radar जैसे महत्वपूर्ण component पर हमला करने के दावे शामिल हैं।

तारीखजगहयूक्रेन का दावानिशाना
23 अगस्त 2023ओलेनिव्का, क्रीमियाS-400 सिस्टम नष्ट करने का दावाS-400 पूरा सिस्टम
14 सितंबर 2023क्रीमियाएक और S-400 Triumf को नष्ट करने का दावाS-400 लॉन्चर/सिस्टम
17 अप्रैल 2024दझांकोय, क्रीमियाचार S-400 लॉन्चरों को नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करने का दावा4 लॉन्चर + 3 रडार + एयर-डिफेंस कंट्रोल प्वाइंट
मई 2024दझांकोय क्षेत्रS-400 के 92N6E रडार को नष्ट और कम-से-कम एक लॉन्चर को नुकसान पहुंचाने का दावा92N6E रडार + लॉन्चर
जून 2024दझांकोय क्षेत्रदो S-400 लॉन्चर और एक रडार को नष्ट करने का दावा2 लॉन्चर + रडार
16 जनवरी 2025बेलगोरोद क्षेत्र92N6 रडार स्टेशन को नष्ट/disable करने का दावाS-400 का 92N6 radar
26 जून 2025क्रीमियाS-400 के कई critical components पर हमला करने का दावा2×92N2E multifunction radars + 2×91N6E radars + 1 launcher
28 अगस्त 2025क्रीमियाS-400 के 91N6E रडार को निशाना बनाने का दावा91N6E radar

खबर भारत के लिए क्यों अहम?

यह खबर भारत के लिए इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि भारत दुनिया के प्रमुख S-400 operators में शामिल है। भारत ने शुरुआत में रूस से पांच S-400 squadrons के लिए 5 अक्टूबर 2018 को करीब $5.43 अरब का अंतिम contract किया था। सितंबर 2026 तक चार S-400 units भारत पहुंचकर operational हो चुकी हैं, जबकि पांचवें और अंतिम सिस्टम की डिलीवरी नवंबर 2026 तक होने की जानकारी सामने आई है।

अब पांच और S-400 systems हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मार्च 2026 में Defence Acquisition Council ने पांच अतिरिक्त S-400 systems के लिए Acceptance of Necessity (AoN) को मंजूरी दी थी। इसके बाद रूस की तरफ से इसके लिए ₹50,000 करोड़ से अधिक के सौदे का प्रस्ताव सामने आने की रिपोर्ट आई है।

Operation Sindoor के बाद और बढ़ी अहमियत Operation Sindoor के दौरान भारत की integrated air-defence व्यवस्था ने पाकिस्तान की तरफ से आए drones और missiles के खतरे का मुकाबला किया। S-400 ने लगभग 350 km की दूरी पर एक airborne early-warning platform को neutralise किया था। यही operational experience भारत के लिए long-range air defence की अहमियत को रेखांकित करता है।

भारत के लिए सबसे बड़ा सबक

यूक्रेन का ब्रायंस्क strike claim S-400 को कमजोर साबित नहीं करता। बल्कि यह आधुनिक युद्ध की एक दूसरी सच्चाई दिखाता है कि जितना महत्वपूर्ण आपका air-defence system होगा, उतना ही बड़ा target वह दुश्मन के लिए बन सकता है।

भारत के लिए S-400 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की layered air-defence व्यवस्था में long-range layer प्रदान करता है। लेकिन इसके साथ mobility, deception, electronic warfare, radar protection और दूसरे air-defence systems का integration भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

रूस और भारत के अलावा चार और देश S-400 के ऑपरेटर

देशस्थितिखास जानकारी
चीनऑपरेटरपहला विदेशी ग्राहक; 2014 में सौदा, 2018 से डिलीवरी
तुर्कियेऑपरेटर2017 में सौदा; 2019 से सिस्टम की डिलीवरी
बेलारूसऑपरेटररूस से S-400 प्राप्त किया; 2022 में डील/डिलीवरी की प्रक्रिया
अल्जीरियाऑपरेटरS-400 हासिल और तैनात करने की रिपोर्ट; 2025 में इसके operational होने की रिपोर्टें

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