शिया मस्जिद में भीषण विस्फोट से दहला पाकिस्तान, दर्जनों की मौत

By Defence Detective

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में जुमे की नमाज के दौरान ऐसा भीषण विस्फोट हुआ, जिसने कुछ ही सेकंड में एक मस्जिद को मलबे में बदल दिया। धमाके की आवाज के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग घायलों को मलबे से निकालने में जुट गए और एंबुलेंस लगातार अस्पताल की ओर दौड़ने लगीं।

यह धमाका आम इलाके में नहीं, बल्कि कोहाट की Old Police Lines के पास स्थित मस्जिद में हुआ। यानी विस्फोट ऐसी जगह हुआ जो पुलिस प्रतिष्ठानों से घिरी हुई है। शुरुआती जानकारी में कम से कम 15 लोगों की मौत और 56 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। यह संख्या और बढ़ सकती है।

मरने वालों में कम से कम पांच पुलिस अधिकारी और 10 आम नागरिक हैं। स्थानीय पुलिस और राहतकर्मियों ने इलाके को घेर लिया और घायलों को मलबे से बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव एवं जांच अभियान जारी है।

यह हमला उत्तर-पश्चिमी हंगू ज़िले में सुरक्षा बलों के काफ़िले पर सड़क किनारे हुए बम धमाके के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें छह सैनिक मारे गए थे।

अफगानिस्तान सीमा के पास है कोहाट

घटना 18 सितंबर 2026 को कोहाट में हुई। कोहाट खैबर पख्तूनख्वा का वह जिला है जो अफगानिस्तान की सीमा के नजदीक स्थित है और पिछले कुछ समय से आतंकवादी हिंसा से प्रभावित रहा है।

AP के अनुसार धमाका उस समय हुआ जब लोग इबादत के लिए मस्जिद में मौजूद थे। घायलों में ज्यादातर नमाजी बताए गए हैं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मस्जिद की छत ढह गई और आसपास की दुकानों तथा मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

सवाल यह भी है कि क्या इस विस्फोट का कोई कनेक्शन अफगानिस्तान से है? इस समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बड़े पैमाने पर तनाव है।

कितना शक्तिशाली था धमाका?

धमाके की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मस्जिद की छत तक ढह गई। आसपास के मकानों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा।

घटना के बाद स्थानीय लोग और बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। कोहाट के District Headquarters Hospital में बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने के बाद इमरजेंसी घोषित कर दी गई।

धमाके के बाद Kohat-Hangu Road को भी यातायात के लिए बंद कर दिया गया और पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां इलाके में तैनात की गईं।

कैसे किया गया धमाका?

खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस प्रमुख जुल्फिकार हमीद ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को मस्जिद से टकराया गया। हालांकि पुलिस ने यह भी कहा कि धमाके की प्रकृति की अभी जांच की जा रही है। इसलिए अभी इसे अंतिम रूप से आत्मघाती वाहन हमला या किसी विशेष संगठन की कार्रवाई बताना जल्दबाजी होगी।

गोलीबारी भी हुई ?

घटना सिर्फ विस्फोट तक सीमित नहीं रही। धमाके के बाद इलाके में आतंकियों के साथ गोलीबारी भी हुई। पुलिस ने इलाके को घेर लिया और अतिरिक्त बल तैनात किया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर कितने थे, उनका लक्ष्य क्या था और विस्फोट के पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल किसी संगठन ने सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है।

क्या Police Lines थी निशाने पर ?

इस हमले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है। मस्जिद Old Police Lines के पास स्थित है और वहां पुलिस से जुड़े महत्वपूर्ण यूनिट मौजूद हैं। जैसे कि Old Police Lines परिसर में Counter-Terrorism Department यानी CTD का ऑफिस

इसलिए जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि हमला केवल नमाजियों को निशाना बनाने के लिए था या पुलिस यूनिटों को भी इसके लक्ष्य में शामिल किया गया था।

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कुछ ही सप्ताह पहले कोहाट पुलिस ने एक कथित आतंकी साजिश का खुलासा किया था।

अगर सुरक्षा एजेंसिया सतर्क होतीं तो ?

19 अगस्त 2026 को सरकारी समाचार एजेंसी Associated Press of Pakistan (APP) ने रिपोर्ट किया था कि Kohat Police और CTD ने TTP से जुड़े दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में आरोपियों ने  Police Lines Mosque, CTD Police Station और दूसरे सरकारी बिल्डिंग को निशाना बनाने की योजना का खुलासा किया था। अधिकारियों ने कहा था कि साजिश Muharram के दौरान हमलों से जुड़ी थी और जांच आगे बढ़ रही थी।

अब सितंबर में उसी Police Lines इलाके के पास मस्जिद में धमाका होना जांच के लिए इस पुराने मामले को भी महत्वपूर्ण बना देता है।

अगर पुलिस व सुरक्षा एजेंसिया सतर्क होतीं तो संभवत: इस विस्फोट को टाला जा सकता था।

TTP पर शक गहराया

फिलहाल अभी किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन पाकिस्तान में पुलिस और नागरिक ठिकानों पर बढ़ते हमलों के बीच शक Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) की ओर जा रहा है।

2023 में, पेशावर की एक मस्जिद के अंदर हुए हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने 101 लोगों की जान ली थी।

TTP और अफगान तालिबान एक ही संगठन नहीं हैं। दोनों अलग संगठन हैं, हालांकि उनके बीच संबंध बताए जाते हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर TTP को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है, जबकि काबुल इन आरोपों को खारिज करता है।

कोहाट में पहले भी हुआ है हमला ?

कोहाट खैबर पख्तूनख्वा में स्थित है और अफगान सीमा से जुड़े क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों का दबाव लंबे समय से रहा है।

फरवरी 2026 में भी कोहाट में पुलिस बल पर घात लगाकर हमला किया गया था, जिसमें कई पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी।

ऐसे माहौल में Police Lines जैसे सुरक्षा परिसर के आसपास हुआ यह धमाका पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है। यह सवाल भी खड़ा करता है कि पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को आतंकी नेटवर्क किस हद तक चुनौती दे पा रहे हैं।

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