वेस्ट एशिया में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत के लिए समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़ी एक अहम राहतकारी खबर सामने आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट्स में शामिल ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से भारतीय जहाजों को गुजरने की छूट दे दी है। इसके साथ चीन, इराक और कतर के जहाजों को भी Hormuz से गुजरने पर लगी पाबंदियों से छूट दी गई है।
वरिष्ठ ईरानी सांसद और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति (नेशनल सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी कमेटी) के उपाध्यक्ष हयात-मोकद्दम ने 3 नवंबर 2026 को इन चार देशों को मिली छूट की जानकारी दी। हालांकि, आवाजाही की यह राहत सभी देशों के लिए मुफ्त नहीं है।
होर्मुज में भारत समेत चार देशों के जहाजों को मिली छूट की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब इस समुद्री रास्ते पर पाबंदियों और जहाजों पर हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की चिंता बढ़ा रखी है।
हालांकि इस राहत के पीछे ईरान की अपनी आर्थिक जरूरतें और कूटनीतिक प्राथमिकताएं भी हैं। वहीं भारत के लिए इसकी अहमियत एनर्जी सप्लाई और खाड़ी देशों के साथ समुद्री व्यापार में है।
फिलहाल इसे बड़ी जियोपॉलिटिकल कामयाबी मानने से पहले यह देखना होगा कि यह राहत जमीन पर कितनी सुरक्षित, नियमित और किफायती आवाजाही में बदलती है।
चार देशों को कैसी राहत, क्या सबके लिए एक जैसी शर्तें ?
अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सांसद ने बताया कि भारत सहित चारों देशों के जहाज होर्मुज से गुजर रहे हैं और अमेरिकी भी उन्हें नहीं रोकते।
हालांकि इन देशों को दी गई रियायतें किसी खैरात का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह विशुद्ध रूप से ईरान के “द्विपक्षीय और पारस्परिक हितों” (Mutual Interests) पर आधारित कूटनीतिक व्यापार है। गिव एंड टेक का फॉर्मूला चला है।
- हालांकि उन्होंने भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांजिट फीस लिए जाने की बात भी कही है।
- जबकि क़तर के जहाज बिना शुल्क गुजर रहे हैं।
- इराक के जहाजों से फीस ली जा रही है या नहीं, इसका उल्लेख नहीं किया गया।
भारत को क्यों मिली छूट ?
भारत को मिली राहत के पीछे ईरान की अपनी जरूरत सामने आई है। ईरानी सांसद ने छूट को भारत से ईरान में दवाओं का इम्पोर्ट आसान बनाने से जोड़ा है।
- हयात मोकद्दम के मुताबिक, भारतीय जहाजों की आवाजाही आसान करने से ईरान को भारत से दवाएं मंगाने में मदद मिलेगी।
- हालांकि बयान में किसी खास दवा, कंपनी, सप्लाई की मात्रा या नए फार्मा समझौते का विवरण नहीं दिया गया।
- फिर भी, बयान यह दिखाता है कि तनाव के बीच भारत के साथ व्यापारिक संपर्क बनाए रखना ईरान के लिए फायदेमंद है।
- दवाओं की जरूरत भारतीय जहाजों को राहत देने का स्पष्ट कारण बनकर सामने आई है।
चीन को छूट क्यों ?
चीन को छूट के संदर्भ में भारत से अलग वजह बताई गई है। ईरानी सांसद के मुताबिक, बीजिंग का राजनीतिक समर्थन (पॉलिटकल सपोर्ट) हासिल करने के उद्देश्य से चीनी जहाजों को राहत दी गई है।
इन बातों से साफ है कि ईरान होर्मुज में राहत को अपने आर्थिक और कूटनीतिक हितों से जोड़ रहा है। भारत के मामले में दवाओं की उपलब्धता और चीन के मामले में राजनीतिक समर्थन का जिक्र इसी सोच को दिखाता है।
क़तर और इराक के लिए क्या वजह है?
क़तर इस व्यवस्था में अलग स्थिति में दिखाई देता है। सांसद के मुताबिक, उसके जहाजों से ट्रांजिट फीस नहीं ली जा रही है। लेकिन क़तर को यह सुविधा क्यों मिली, इसका विस्तार उपलब्ध बयान में नहीं है।
इराक को भी आवाजाही की छूट मिली हुई है, लेकिन उसके लिए फीस और अन्य शर्तों की जानकारी नहीं दी गई।
इसलिए चारों देशों को एक जैसे समझौते के तहत राहत मिलने की बात कहना सही नहीं होगा। सांसद का कहना था कि हर देश के साथ राहत के पीछे अलग विचार और समझौते हैं।
क्या इसमें अमेरिका का भी कोई रोल है?
हयात मोकद्दम ने दावा किया कि इन चार देशों के जहाजों को अमेरिकी भी नहीं रोकते। यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही अमेरिका–ईरान टकराव से प्रभावित है।
- लेकिन इस बयान से अपने आप यह साबित नहीं होता कि चारों देशों के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कोई औपचारिक संयुक्त समझौता हुआ है।
- चारों देशों के लिए किसी संयुक्त अमेरिकी–ईरानी समझौते का दस्तावेज या अमेरिकी पुष्टि नहीं दी गई है।
- लिहाजा, अमेरिकी हस्तक्षेप नहीं होने की बात फिलहाल ईरानी सांसद के दावे के तौर पर ही सामने है।
ऐसी स्थिति में आवाजाही की छूट जहाजों के लिए महत्वपूर्ण राहत है, लेकिन वास्तविक सुरक्षा समुद्री हालात और संबंधित सैन्य गतिविधियों पर भी निर्भर करेगी।
आखिर होर्मुज में पाबंदियां क्यों लगी हुई हैं?
फरवरी 2026 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भड़के सीधे सैन्य संघर्ष के बाद से ही हॉर्मुज स्ट्रेट में संकट बना हुआ है। ईरान जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियों के जरिए इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर नियंत्रण मजबूत करने और अमेरिका पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, इसे पूरे जलमार्ग के सभी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ईरान कुछ देशों के जहाजों को अपनी शर्तों और समन्वय के आधार पर गुजरने की अनुमति देता रहा है
भारत के लिए होर्मुज इतना जरूरी क्यों है?
यह ईरान और ओमान के बीच का समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) से जोड़ता है। खाड़ी देशों से तेल और गैस बाहर भेजने के लिए यह अहम रास्ता है।
भारत के मौजूदा कच्चे तेल इम्पोर्ट का करीब 30% इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए वहां आवाजाही की सुविधा भारत की एनर्जी सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर छूटें सही ढंग से जमीन पर उतरती हैं तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा की बहाली में अहम होगा। बीमा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी होगी।
छूट कब तक और किन जहाजों पर लागू ?
बयान में कहा गया है कि चारों देशों को “फिलहाल” छूट मिली हुई है। छूट की शुरुआत की तारीख, अवधि और समाप्ति की शर्तें नहीं बताई गई हैं।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि “भारतीय जहाज” की पहचान झंडे, मालिकाना हक, ऑपरेटर या भारत आने वाले कार्गो के आधार पर होगी।
इसलिए हर भारत आने वाले विदेशी जहाज पर यह छूट लागू मानना सही नहीं होगा।
क्या भारतीय जहाजों के फीस देने की पुष्टि हो गई है ?
ईरानी सांसद के ट्रांजिट फीस के दावे की कड़ी में एक पुराना भारतीय बयान भी प्रासंगिक है। 24 मार्च 2026 को भारतीय शिपिंग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने कहा था कि भारतीय टैंकरों के सुरक्षित ट्रांजिट के लिए कोई फीस या प्रोटेक्शन मनी नहीं दी जा रही है।
हालांकि वह मार्च की स्थिति थी। अब नए घटनाक्रम के बाद भारत सरकार का पक्ष सामने पर चीजें और साफ हो सकेंगी।








