क्या अब यहूदी ड्रोन से लैस होगी पाकिस्तानी आर्मी ? आसिम मुनीर ने इजरायली आर्मी के पूर्व ऑफिसर की कंपनी से क्यों की डील ?

By Defence Detective

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PAKISTAN- POWERUS DRONE DEAL

गाजा में इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ पाकिस्तान लगातार फिलिस्तीन के समर्थन की बात करता रहा है। पाकिस्तान की आधिकारिक नीति आज भी साफ है कि वह इजरायल को मान्यता नहीं देता और 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की मांग का समर्थन करता है। पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी इजरायल की यात्रा को लेकर प्रतिबंध दर्ज है।

लेकिन अब पाकिस्तान की सेना ने एक अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus के साथ रक्षा सहयोग का रास्ता खोल दिया है। 16 सितंबर 2026 को Powerus का डेलिगेशन पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और Chief of Defence Forces आसिम मुनीर से रावलपिंडी में मिला। इसके बाद कंपनी ने पाकिस्तान सेना के साथ MoU और Unmanned Aerial Systems का शुरुआती ऑर्डर होने की पुष्टि की। सौदे की कीमत और सटीक सिस्टम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इस डील को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा Powerus के सह-संस्थापक Ziv Marom को लेकर है। Powerus उन्हें IDF (इजरायल डिफेंस फोर्सेज) veteran बताती है और उपलब्ध प्रोफाइलों के अनुसार Marom ने Israel Defense Forces Intelligence Corps में सेवा की थी।

एक विचित्र विरोधाभाष है कि इजरायल को मान्यता नहीं देने वाला पाकिस्तान अब ऐसी अमेरिकी ड्रोन कंपनी के साथ सैन्य सहयोग कर रहा है, जिसके संस्थापक समूह में इजरायली सैन्य खुफिया पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है।

पाकिस्तान की इजरायल नीति ?

पाकिस्तान ने जून 2026 में भी Abraham Accords को लेकर कहा था कि उसकी स्थिति फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से जुड़ी हुई है और उसकी नीति में बदलाव नहीं हुआ है।

सितंबर 2026 में भी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देता और फिलिस्तीनी राज्य के अधिकार का समर्थन करता है।

लेकिन पाकिस्तान जैसे मजहबी मुल्क के एंगल से एक राजनीतिक विरोधाभास का सवाल जरूर सामनेत आता है कि एक तरफ पाकिस्तान इजरायल के खिलाफ अपनी कूटनीतिक स्थिति बनाए रखता है, दूसरी तरफ उसकी सेना ऐसी कंपनी के साथ रक्षा तकनीक पर काम कर रही है जिसके सह-संस्थापक की सैन्य पृष्ठभूमि इजरायल के Intelligence Corps से जुड़ी है।

Abraham Accords (अब्राहम समझौते) अमेरिका की मध्यस्थता में 2020 से शुरू हुई उन समझौतों की श्रृंखला है, जिनका उद्देश्य इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य करना था। मुख्य बातें:-

  • 2020 में शुरुआत हुई।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए।
  • बाद में मोरक्को ने भी इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए।
  • सूडान ने भी सामान्यीकरण की घोषणा की थी, हालांकि उसका क्रियान्वयन अलग परिस्थितियों से प्रभावित हुआ।
  • अमेरिका ने इन समझौतों में महत्वपूर्ण मध्यस्थ भूमिका निभाई।
  • नाम Abraham (अब्राहम) इसलिए रखा गया क्योंकि यहूदी, ईसाई और इस्लाम—तीनों धर्मों में पैगंबर/हज़रत इब्राहिम (Abraham) का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है।

Ziv Marom कौन हैं ?

Powerus की leadership में Ziv Marom को Co-founder और Chief Vision Officer बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने सैन्य करियर की शुरुआत IDF Intelligence Corps में की थी। इसके अलावा, उनकी शिक्षा और शुरुआती कार्यक्षेत्र भी इज़राइल ही रहा है।

उनका बैकग्राउंड यहूदी-इज़राइली (Jewish-Israeli) है, जो हाल ही में Powerus कंपनी और पाकिस्तान के बीच हुए ड्रोन समझौते (MoU) के बाद काफी चर्चा का विषय बनी हुई है।

यही तथ्य इस डील को सामान्य अमेरिकी-पाकिस्तान ड्रोन समझौते से अलग बनाता है। हालांकि Marom का इजरायली – बैकग्राउंड का मतलब यह नहीं कि Powerus इजरायल की सरकारी कंपनी है।

Powerus एक अमेरिकी रक्षा-तकनीक कंपनी है। पाकिस्तान की डील भी Powerus के साथ है, इजरायल सरकार के साथ नहीं।

फिर सवाल इतना बड़ा क्यों है?

क्योंकि पाकिस्तान में इजरायल को लेकर राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता बहुत ज्यादा है। इस्लामाबाद आधिकारिक तौर पर इजरायल को मान्यता नहीं देता। फिलिस्तीन के मुद्दे पर पाकिस्तान लगातार इजरायल पर मुंह से हमला करता रहा है।

ऐसे माहौल में एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी कंपनी के साथ सेना का रक्षा सहयोग, जिसने इजरायली सैन्य खुफिया इकाई में काम किया हो, पाकिस्तान में राजनीतिक बहस का विषय बनना स्वाभाविक है।

गाजा पर पाकिस्तान का रुख बनाम Powerus डील

यही इस कहानी का सबसे धारदार विरोधाभास है।

गाजा और फिलिस्तीन पर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख:

  • इजरायल को मान्यता नहीं।
  • फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन।
  • 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर समाधान की मांग।
  • अल-कुद्स/यरुशलम को फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी बनाने की स्थिति।

Powerus डील में पाकिस्तान की स्थिति:

  • अमेरिकी रक्षा कंपनी के साथ सैन्य तकनीकी सहयोग।
  • UAS का शुरुआती ऑर्डर।
  • भविष्य में उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावना।
  • कंपनी पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर तकनीक विकसित करने के विकल्प तलाश रही है।

ईरान इस डील को कैसे देख सकता है?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के संबंध इस समय केवल पड़ोसी देशों के रिश्ते तक सीमित नहीं हैं। सितंबर की शुरुआत में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि आसिम मुनीर ने 25 अगस्त को तेहरान का दौरा किया था और पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव कम कराने तथा क्षेत्रीय कूटनीति में भूमिका निभा रहा था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी।

दूसरी ओर ईरान और इजरायल के बीच रणनीतिक टकराव बेहद गंभीर है। ऐसे में पाकिस्तान का किसी ऐसी कंपनी के साथ रक्षा तकनीकी संबंध बनाना जिसके सह-संस्थापक की IDF Intelligence Corps पृष्ठभूमि है, तेहरान के लिए राजनीतिक रूप से असहज सवाल पैदा कर सकता है।

लेकिन अभी तक उपलब्ध स्रोतों में ईरान सरकार की Powerus-Pakistan डील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

अगर Powerus-Pakistan सहयोग आगे बढ़ता है और उसमें अत्याधुनिक autonomous systems, Counter-UAS, surveillance या दूसरे संवेदनशील defence technologies शामिल होते हैं, तो इस डील का क्षेत्रीय महत्व बढ़ सकता है।

ईरान यह देख सकता है कि पाकिस्तान जिस अमेरिकी रक्षा तकनीक को अपना रहा है, उसका क्षेत्रीय इस्तेमाल किस प्रकार होता है।

पाकिस्तान के लिए Powerus डील का असली फायदा ?

इस डील का सबसे बड़ा फायदा शायद इजरायल कनेक्शन नहीं, बल्कि अमेरिकी ड्रोन तकनीक तक पहुंच है।

पाकिस्तान की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बहुत बड़ी है। Financial Times ने SIPRI के आंकड़ों के आधार पर बताया कि पाकिस्तान के defence imports में चीन की हिस्सेदारी लगभग 80% है। पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा major-arms importer भी बताया गया है।

Powerus के साथ सहयोग पाकिस्तान को एक अतिरिक्त technology source दे सकता है। कंपनी ने पाकिस्तान में स्थानीय उत्पादन की संभावना भी जताई है।

हालांकि अभी पाकिस्तान के ऑर्डर के बारे में तीन अहम चीजें गोपनीय हैं:-

  • सटीक ड्रोन/सिस्टम कौन-सा है?
  • सौदे की कीमत कितनी है?
  • सिस्टम की operational capability क्या है?

Powerus ने सुरक्षा और confidentiality का हवाला देकर इनका खुलासा नहीं किया है।

इसलिए ज्यादा संभावित व्याख्या यह है कि पाकिस्तान ने यहां धार्मिक या वैचारिक नहीं, बल्कि सैन्य-तकनीकी और रणनीतिक हित को प्राथमिकता दी है। यही सौदे का सबसे बड़ा संदेश है।  

भारत के लिए खतरे की असली घंटी ?

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि Powerus पहले ही भारत के साथ रक्षा समझौता कर चुकी है। जून 2026 में Powerus की सहायक कंपनी Tandem Defense ने Paras Defence & Space Technologies के साथ समझौता किया।

इसके तहत Paras Defence को भारत में Guardian-1 interceptor counter-drone system बनाने और commercialise करने के exclusive rights मिले।

अब वही Powerus पाकिस्तान सेना के साथ UAS संबंधी शुरुआती ऑर्डर कर रही है।

यानी—

भारत Guardian-1 Counter-Drone technology

पाकिस्तान UAStechnology और संभावित आगे का सहयोग

हालांकि यह जरूरी नहीं कि दोनों देशों को समान तकनीक मिलेगी। पाकिस्तान के ऑर्डर का सटीक मॉडल और capability अभी सार्वजनिक नहीं है। अगर अमेरिकी कंपनी, पाकिस्तान को कोई घातक ड्रोन, तकनीकी देती है, अपने सहयोग को बहुत गहरा करती है, तो यह भारत के लिए जरूर गौर करने वाली बात होगी।

1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की मांग का मतलब जानें-

पाकिस्तान की आधिकारिक नीति है कि 1967 से पहले की स्थिति को आधार बनाकर वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम वाले क्षेत्रों को मिलाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनाया जाए।

दरअसल जून 1967 के Six-Day War में इजरायल ने मिस्र, जॉर्डन और सीरिया से लड़ाई के दौरान कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। इनमें मुख्य रूप से:

  • वेस्ट बैंक (West Bank) — उस समय जॉर्डन के नियंत्रण में था।
  • पूर्वी यरुशलम (East Jerusalem) — उस समय जॉर्डन के नियंत्रण में था।
  • गाजा पट्टी (Gaza Strip) — उस समय मिस्र के नियंत्रण में थी।

बाद में इन क्षेत्रों को लेकर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद जारी रहा।

जब कोई देश “1967 borders” या “1967 lines” की बात करता है, तो उसका आशय सामान्यतः वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम को आधार बनाकर फिलिस्तीनी राज्य बनाने से होता है।

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