गुयाना में मेड इन इंडिया विमान
भारत ने गुयाना को HAL निर्मित डोर्नियर 228 विमान सौंपकर उसके नागरिक उड्डयन क्षेत्र को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर शनिवार को चेदी जगन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा और विमान सौंपा गया। जल्द ही दूसरा C-17 भी एक और विमान लेकर पहुँचेगा। यह सिर्फ़ विमान आपूर्ति नहीं है, बल्कि भारत-गुयाना के बीच गहरी होती साझेदारी का प्रतीक है। गुयाना की सरकार ने इसे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ऐतिहासिक सहयोग बताया है। भारत की ओर से यह कदम दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) की मिसाल है, जहाँ विकासशील देश एक-दूसरे की क्षमताओं को मज़बूत कर रहे हैं।
गुयाना कहां हैं ?
गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित है। गुयाना एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है, जहाँ भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। भारत और गुयाना के संबंध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कूटनीतिक स्तर पर गहरे हैं। 1966 से अब तक यह साझेदारी लगातार मज़बूत हुई है और आज शिक्षा, रक्षा और एविएशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग इसका नया आयाम है।
HAL का गुयाना का डोर्नियर विमान सौदा
भारत की एविएशन इंडस्ट्री अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। HAL के विमान पहले से ही नेपाल, मालदीव और मॉरीशस जैसे देशों में उपयोग किए जा रहे हैं। गुयाना को दिए गए विमान भारत की सॉफ्ट पावर और रक्षा-उद्योग निर्यात नीति का हिस्सा हैं। यह सौदा भारत की Make in India पहल और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करता है। 2024 में भारत ने गुयाना को दो HAL डोर्नियर 228 विमान दिए थे। यह आपूर्ति भारत द्वारा दी गई लाइन-ऑफ-क्रेडिट व्यवस्था के तहत हुई थी। अब मार्च 2026 में तीसरा और चौथा विमान पहुँच रहा है, जिससे गुयाना की एविएशन क्षमता और भी बढ़ेगी।
गुयाना को विमान देने का रणनीतिक महत्व
- डोर्नियर 228 विमान छोटे और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त हैं। ये विमान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, निगरानी और यात्री परिवहन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
- गुयाना जैसे देश के लिए, जहाँ हवाई संपर्क सीमित है, इन विमानों का उपयोग दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में होगा।
- भारत के लिए यह सौदा राजनयिक और रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करता है। यह दिखाता है कि भारत अब केवल घरेलू रक्षा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मित्र देशों की एविएशन ज़रूरतों को भी पूरा कर रहा है।
डोर्नियर 228 विमान का इतिहास और उपयोग
डोर्नियर 228 एक ट्विन-टर्बोप्रॉप STOL (शॉर्ट टेकऑफ और लैंडिंग) उपयोगिता विमान है, जिसे जर्मनी की Dornier GmbH ने 1981 में डिजाइन किया था। इसका पहला उड़ान मार्च 1981 में हुआ था और जुलाई 1982 में इसे परिचालित किया गया। जर्मनी में लगभग 245 विमान बनाए गए। 1983 में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसका उत्पादन लाइसेंस खरीदा और भारत के कानपुर में 125 विमान बनाए। यह विमान छोटे यात्री और माल ढुलाई के लिए उपयुक्त है और इसकी मजबूती और बहुमुखी क्षमता के लिए जाना जाता है।
भारत में उपयोग
भारतीय वायुसेना, भारतीय तटरक्षक और भारतीय नौसेना डोर्नियर 228 का उपयोग कर रहे हैं। भारत वर्तमान में लगभग 60 से अधिक डोर्नियर 228 विमान का उपयोग कर रहा है। भारतीय वायुसेना के पास 30 से अधिक डोर्नियर 228 विमान हैं, जो मुख्य रूप से हल्के परिवहन और समुद्री निगरानी के लिए उपयोग किए जाते हैं। हाल ही में, HAL ने भारतीय वायुसेना के लिए छह नए उन्नत डोर्नियर 228 विमान भी सौंपे हैं, जिनमें आधुनिक इंजन, उन्नत एवियोनिक्स और ग्लास कॉकपिट शामिल हैं। डोर्नियर 228 का उपयोग कई देशों में किया जाता है, जिनमें भारत के अलावा जर्मनी, गुयाना, और अन्य मित्र देशों के वायुसेना और नागरिक उड्डयन शामिल हैं। कुल मिलाकर, जर्मनी में 245 और भारत में HAL द्वारा 125 विमान बनाए गए हैं।

भारत–गुयाना संबंध
- 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय मज़दूरों को गुयाना ले जाया गया।
- आज वहाँ की आबादी का बड़ा हिस्सा इंडो-गुयानीज़ समुदाय है, जो भारतीय संस्कृति, त्योहार और परंपराओं को जीवित रखे हुए है।
- गुयाना ने 26 मई 1966 को स्वतंत्रता प्राप्त की और उसी समय भारत के साथ औपचारिक संबंध स्थापित हुए।
- भारत ने 1965 में जॉर्जटाउन में एक मिशन खोला, जिसे 1968 में हाई कमीशन का दर्जा मिला।
- प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1968 में गुयाना का दौरा किया।
- उपराष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 1988 में दौरा किया।
- उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने 2006 में दौरा किया।
- भारत और गुयाना दोनों कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं।
- भारत गुयाना को लाइन-ऑफ-क्रेडिट और तकनीकी सहयोग के माध्यम से मज़बूत कर रहा है।
भारत और गुयाना में सहयोग के क्षेत्र
दोनों देशों के बीच कई तरह के सहयोग हैं। शिक्षा और प्रशिक्षण (ITEC कार्यक्रम के तहत हर साल लगभग 40 छात्रवृत्तियाँ) दिया जाता है। इसके अलावा कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, आयुर्वेद और रक्षा सहयोग भी लगातार जारी है। यही नहीं दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव भी है, इंडो-गुयानीज़ समुदाय के कारण भारतीय त्योहार और परंपराएँ वहाँ लोकप्रिय हैं।








