इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के पास हूती ड्रोन ढेर, फिर मिसाइलों से भी दहला सऊदी

By Defence Detective

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The Houthis denied they had targeted Mecca, where Islam's most sacred shrine is located

सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस बीच संघर्ष अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी एयर डिफेंस ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के पास एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।

इसके अलावा हूतियों ने सऊदी अरामको की एक फैसिलिटी और खमीस मुशैत मिलिट्री एयरबेस को निशाना बनाया है। हूती पक्ष का कहना है कि इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

मक्का के पास आखिर हुआ क्या?

सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उसे शहर के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया गया।

  • सऊदी पक्ष ने मक्का की सुरक्षा को अपनी रेड लाइन बताया।
  • अभी यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुआ है कि ड्रोन का वास्तविक लक्ष्य मक्का ही था।
  • हालांकि हूती अधिकारियों ने मक्का या किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाने से इनकार किया है।

अरामको और एयरबेस पर हूतियों का कितना बड़ा दावा ?

बुधवार को हूती सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि उसके संगठन ने सऊदी अरब के खिलाफ दो सैन्य अभियान चलाए।

  • पश्चिमी सऊदी अरब के यान्बू में अरामको की एक सुविधा को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया।
  • दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयरबेस पर भी हमला किया गया। यह दक्षिणी सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र है।
  • हूती पक्ष ने इन हमलों को सऊदी सैन्य कार्रवाई के जवाब में बताया।
  • लेकिन सऊदी अरब ने इन दोनों हमलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

यान्बू क्यों बना सबसे अहम निशाना?

यान्बू सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर है। हाल के संघर्ष के दौरान इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि सऊदी अरब के लिए लाल सागर के रास्ते ऑयल एक्सपोर्ट का महत्व बढ़ा है।

रॉयटर्स के मुताबिक, 15 सितंबर को यान्बू से कच्चे तेल की लोडिंग रोक दिए जाने की खबर सामने आई थी। यह उस समय हुआ जब सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद उसका संचालन बाधित था।

इसका सीधा असर बाजार पर भी पड़ा। 15 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 3 डॉलर चढ़कर 108.75 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बाद में सऊदी अरब ने ओमान के रास्ते ज्यादा कच्चा तेल भेजना शुरू किया, जिससे बुधवार को बाजार की चिंता कुछ कम हुई।

सऊदी ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना दबाव बढ़ा?

मौजूदा संकट केवल एक ड्रोन हमले तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पिछले कुछ दिनों में कई घटनाएं हुई हैं।

  • ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद इसका संचालन प्रभावित हुआ।
  • यह पाइपलाइन सऊदी तेल को पूर्वी हिस्से से लाल सागर के यान्बू क्षेत्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • यान्बू की तेल लोडिंग में रुकावट ने एक्सपोर्ट को लेकर चिंता बढ़ाई।
  • रॉयटर्स के अनुसार, कुछ यूरोपीय ग्राहकों के लिए सितंबर की तेल खेपें भी रद्द की गईं।

रॉयटर्स की 15 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, हूती हमले में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी और सऊदी सैन्य ठिकाने के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर थी।

सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई ?

इन हमलों के बीच सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई कार्रवाई कर रहा है। हूतियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब ने 450 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं और इसी के जवाब में उसने सऊदी ठिकानों पर हमले किए।

यह आंकड़ा हूती पक्ष का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यानी दोनों पक्ष अब एक-दूसरे की कार्रवाई को जवाबी हमले के तौर पर पेश कर रहे हैं। इससे संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ी है।

सऊदी यात्रा को लेकर अमेरिका की क्या एडवाइजरी ?

तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सऊदी अरब की यात्रा को लेकर Level 3—“Reconsider Travel” एडवाइजरी जारी रखी है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक इसके पीछे ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से अमेरिकी हितों को खतरा, सशस्त्र संघर्ष और आतंकवाद जैसे जोखिम हैं। साथ ही यमन सीमा के लिए Level 4—“Do Not Travel” चेतावनी है।

इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे सऊदी अरब को यात्रा के लिए बंद घोषित किया गया है, बल्कि अमेरिका अपने नागरिकों को मौजूदा सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दे रहा है।

मक्का के पास ड्रोन पर भारत ने क्या कहा ?

मक्का के पास ड्रोन की घटना पर भारत ने भी गहरी चिंता जताई है और सऊदी क्षेत्र, नागरिकों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले हमलों की निंदा की है। भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है।

भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा संकट का असर तेल, समुद्री व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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