यमन के हाउती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमलों को एक बार फिर बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है। 8 सितंबर को सऊदी अरब ने कहा कि हाउतियों के ताजा हमलों में 73 लोग घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हाउतियों ने नजरान समेत अबहा, खमिस मुशैत और जिजान में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
इसी दौरान हाउतियों ने किंग खालिद एयर बेस, अबहा एयरपोर्ट और सऊदी तेल कंपनी अरामको से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
यह सिर्फ यमन और सऊदी अरब के बीच पुरानी दुश्मनी की वापसी नहीं है। इसके पीछे अब ईरान-अमेरिका टकराव, लाल सागर में समुद्री यातायात, बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और खाड़ी की तेल अर्थव्यवस्था जैसे कई मोर्चे एक साथ जुड़ गए हैं।
सऊदी शहरों को क्यों बनाया निशाना?
ताजा हमलों में दक्षिणी सऊदी अरब के चार शहर प्रभावित हुए। इनमें अबहा और खमिस मुशैत विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह क्षेत्र यमन की सीमा के नजदीक है और यहां सऊदी सैन्य तथा हवाई प्रतिष्ठान मौजूद हैं। किंग खालिद एयर बेस भी खमिस मुशैत में स्थित है और यहां सऊदी वायुसेना के लड़ाकू विमान तैनात रहे हैं।
- हाउतियों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इन इलाकों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, किंग खालिद एयर बेस के लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
- जिजान में अरामको की तेल सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। वहां नुकसान का आकलन जारी है।
- हाउती हैं कौन, सऊदी से दुश्मनी क्यों?
हाउती हैं कौन, सऊदी से दुश्मनी क्यों?
हाउती यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक-धार्मिक आंदोलन है, जिसका आधिकारिक नाम अंसार अल्लाह है। इसका आधार मुख्य रूप से उत्तरी यमन के जायदी शिया समुदाय में है। यह यमन के सबसे ज़्यादा आबादी वाले हिस्सों और उत्तर के ज़्यादातर हिस्से को कंट्रोल करता है।
2014 में हाउतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और इसके बाद देश गृहयुद्ध में चला गया। सऊदी अरब ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, जिसका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से सुन्नी है। यही वह बिंदु है जहां से हाउती-सऊदी संघर्ष सीधे क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष में बदल गया।
हाउतियों के लिए सऊदी अरब सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि यमन में उनके सबसे बड़े सैन्य विरोधियों में से एक है। दूसरी तरफ सऊदी अरब के लिए हाउती मिसाइल और ड्रोन क्षमता उसकी सीमा, शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों के लिए सीधा खतरा है।
ईरान से हाउतियों का क्या रिश्ता?
हाउतियों को शिया बहुल ईरान द्वारा समर्थित संगठन बताया जाता है। लेकिन उन्हें ईरान की पूरी तरह नियंत्रित कठपुतली कहना भी सही नहीं होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक हाउती नेतृत्व के अपने स्थानीय और राजनीतिक हित हैं, जबकि ईरान उन्हें हथियार, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और खुफिया सहयोग देकर उनकी सैन्य क्षमता बढ़ाता रहा है।
- ईरानी सहायता से हाउतियों के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ लंबी दूरी के ड्रोन और एंटी-शिप हथियारों की क्षमता विकसित हुई है।
- यही वजह है कि एक स्थानीय यमनी विद्रोही समूह अब सऊदी अरब के भीतर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
यमन में फिर क्यों भड़की लड़ाई?
यमन का संघर्ष मूल रूप से सत्ता, क्षेत्रीय नियंत्रण और राजनीतिक प्रभाव की लड़ाई है। धार्मिक पहचान ने इसे जरूर गहरा किया है। मौजूदा हमले अचानक शुरू नहीं हुए हैं। यमन में 2022 में संघर्ष विराम के बाद कई वर्षों तक बड़े पैमाने की लड़ाई अपेक्षाकृत शांत रही। लेकिन अब हाउतियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच लड़ाई फिर तेज हो गई है।
- पिछले कुछ दिनों में हाउतियों ने बाब-अल-मंदेब के करीब इलाकों में आगे बढ़ने की कोशिश की है।
- इस दौरान 300 से अधिक लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
- संयुक्त राष्ट्र के यमन दूत ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बड़े पैमाने पर लड़ाई फिर शुरू हुई तो इसके नागरिकों पर गंभीर परिणाम होंगे।
- हाउतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की भी घोषणा की है। इसका अर्थ यह है कि संघर्ष अब केवल यमन की जमीन तक सीमित नहीं रह गया है।
बाब-अल-मंदेब इतना महत्वपूर्ण क्यों?
यहीं से इस पूरे संकट का सबसे खतरनाक हिस्सा शुरू होता है। बाब-अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। एशिया और यूरोप के बीच जाने वाले जहाजों के लिए यह प्रमुख रणनीतिक चोक-प्वाइंट है। लाल सागर के रास्ते स्वेज नहर तक पहुंचने वाला समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण
यदि हाउती इस क्षेत्र में जहाजों के खिलाफ हमले बढ़ाते हैं या समुद्री यातायात को बड़े पैमाने पर बाधित करते हैं, तो जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे समय, ईंधन और माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी।
- सबसे महत्वपूर्ण बात—यह संकट ऐसे समय में है जब दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अमेरिका को धमकी दी है।
- एक तरफ ईरान होर्मुज के जरिए ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव डालने की क्षमता रखता है और दूसरी तरफ ईरान से जुड़े हाउती बाब-अल-मंदेब और लाल सागर को प्रभावित कर सकते हैं।
- अगर दोनों समुद्री chokepoints एक साथ गंभीर रूप से बाधित होते हैं, तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व पर नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर पड़ सकता है।
अमेरिका के लिए यह संकट क्यों गंभीर?
अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता यह है कि संघर्ष कई मोर्चों में फैल सकता है। अमेरिकी नौसेना के लिए लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की सुरक्षा पहले से बड़ी चुनौती रही है। हाउतियों ने पहले भी अमेरिकी और अन्य देशों के जहाजों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में अमेरिका ने यमन में हाउती मिसाइल, रडार, एयर डिफेंस और ड्रोन लॉन्च साइटों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं।
अब यदि हाउती सऊदी अरब पर हमले तेज करते हैं और अमेरिका सऊदी सुरक्षा में अधिक सक्रिय होता है, तो अमेरिका और हाउतियों के बीच सीधा सैन्य टकराव बढ़ सकता है। और चूंकि हाउतियों का ईरान से सैन्य संबंध है, इससे अमेरिका-ईरान संघर्ष का एक नया मोर्चा भी खुल सकता है।
इजरायल के लिए भी खतरा ?
हाउतियों ने पहले ही इजरायल को निशाना बनाने की क्षमता प्रदर्शित की है। 2023 के बाद उन्होंने इजरायल से जुड़े जहाजों और लाल सागर के समुद्री मार्गों पर हमलों को फिलिस्तीन के समर्थन से जोड़ा था। ईरान के साथ मौजूदा टकराव में भी हाउतियों की भूमिका क्षेत्रीय संघर्ष को और फैलाने की क्षमता रखती है। इसलिए इजरायल के लिए खतरा दो स्तरों पर है—एक तरफ हाउती मिसाइल और ड्रोन, दूसरी तरफ लाल सागर की समुद्री सुरक्षा।
यदि हाउती इजरायल या उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले बढ़ाते हैं, तो इजरायल यमन में फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इससे संघर्ष का एक और मोर्चा खुल सकता है।
स्थानीय युद्ध बन सकता है क्षेत्रीय युद्ध ?
मौजूदा स्थिति की गंभीरता इस बात में है कि यमन का गृहयुद्ध अब केवल यमन का मामला नहीं रह गया है। एक तरफ हाउती और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच लड़ाई है। दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका टकराव है। तीसरी तरफ इजरायल से जुड़ा संघर्ष है। इनके बीच लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग जुड़े हुए हैं।
सऊदी अरब पर ताजा हमले इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें सिर्फ सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि नागरिक और आर्थिक ढांचा भी प्रभावित हुआ है। सऊदी गठबंधन ने इसे गंभीर escalation बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
यदि इसके बाद सऊदी अरब यमन में बड़े पैमाने पर जवाबी अभियान शुरू करता है, हाउती मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ाते हैं और अमेरिका या इजरायल सीधे इसमें अधिक सक्रिय होते हैं, तो मध्य-पूर्व में संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।








