युद्ध के मैदान में दुश्मन की गोलियों और मिसाइलों से बचना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है अपनी कम्युनिकेशन लाइन को सुरक्षित रखना और दुश्मन की संचार व्यवस्था को बाधित करना। आधुनिक युद्ध में सैनिक, कमांड पोस्ट, ड्रोन, वाहन और हथियार लगातार रेडियो नेटवर्क के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। ऐसे में अगर दुश्मन की कम्युनिकेशन व्यवस्था को जाम कर दिया जाए, तो उसकी लड़ने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है।
लेकिन अब यह काम पहले जितना आसान नहीं रहा। आधुनिक Cognitive Radio यानी ऐसे ‘स्मार्ट’ रेडियो विकसित हो रहे हैं, जो अपने आसपास के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वातावरण को समझकर खुद अपनी फ्रीक्वेंसी बदल सकते हैं। अगर किसी फ्रीक्वेंसी पर जैमिंग शुरू हो जाए, तो रेडियो दूसरी फ्रीक्वेंसी पर चला जाता है।
यही चुनौती अब भारत के सामने है। इसी को ध्यान में रखते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) का Defence Electronics Research Laboratory (DLRL) एक नए Smart Communication Jammer System (SCJS) पर काम कर रहा है। जिसका मकसद ऐसे आधुनिक और तेजी से फ्रीक्वेंसी बदलने वाले सैन्य रेडियो और कम्युनिकेशन नेटवर्क को खोजकर उनकी संचार क्षमता को बाधित करना है।
क्या बना रहा है DRDO?
DRDO की योजना के मुताबिक SCJS एक मोबाइल वाहन पर लगाया जाने वाला इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम होगा। यानी यह कोई एक जगह स्थायी रूप से लगा हुआ जैमर नहीं होगा। इसे सैन्य वाहनों के साथ अलग-अलग इलाकों में ले जाकर तैनात किया जा सकेगा।
- इस सिस्टम का काम सिर्फ जैमिंग करना नहीं होगा। इसे एक साथ कई महत्वपूर्ण क्षमताओं के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
- इनमें दुश्मन के रेडियो सिग्नल को Detect करना, Analyse करना, Classify करना, उसकी दिशा पता करना यानी Direction Finding, Monitor करना और जरूरत पड़ने पर Jam करना शामिल है।
- यानी आसान भाषा में समझें तो SCJS पहले यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि आसपास कौन-कौन से रेडियो सिग्नल मौजूद हैं, वे किस तरह के हैं और कहां से आ रहे हैं।
- इसके बाद सिस्टम यह तय करने में मदद करेगा कि किस संचार लिंक को बाधित करना है।
कितनी बड़ी रेंज में करेगा काम?
Smart Communication Jammer System (SCJS) को 30 MHz से 6 GHz तक के फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम में रेडियो सिग्नल को detect, analyse, classify, direction-find और jam करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
- इसके अलावा सिस्टम से 360 डिग्री कवरेज की अपेक्षा की गई है। यानी इसे किसी एक दिशा में ही नहीं, बल्कि चारों तरफ से आने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
- इसकी बताई गई प्रभावी कवरेज करीब 20 किलोमीटर है। यह क्षमता इसे सामरिक स्तर पर उपयोगी बना सकती है, खासकर तब जब किसी क्षेत्र में दुश्मन के मोबाइल कम्युनिकेशन नेटवर्क, कमांड लिंक या दूसरे रेडियो आधारित सिस्टम सक्रिय हों।
- इस सिस्टम के लिए 5 माइक्रोसेकंड से कम reaction time का लक्ष्य बताया गया है। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि जिस रेडियो को यह पकड़ना है वह बहुत तेजी से अपना व्यवहार बदल सकता है।
Cognitive Radio होता क्या है?
सामान्य रेडियो किसी निर्धारित फ्रीक्वेंसी या चैनल पर काम कर सकता है। लेकिन आधुनिक Cognitive Radio अपने आसपास के रेडियो वातावरण को लगातार समझ सकता है।
मान लीजिए कोई सैन्य रेडियो एक फ्रीक्वेंसी पर काम कर रहा है और उसे पता चलता है कि उस फ्रीक्वेंसी पर भारी interference या jamming है। तब वह उपलब्ध दूसरी फ्रीक्वेंसी तलाश सकता है और अपना संचार वहां स्थानांतरित कर सकता है।
यानी रेडियो का व्यवहार कुछ हद तक ऐसा हो जाता है जैसे वह परिस्थिति के अनुसार खुद फैसला ले रहा हो।
यही वजह है कि Cognitive Radio को पारंपरिक रेडियो की तुलना में पकड़ना और जाम करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है। ऐसे सिस्टम में Artificial Intelligence और Machine Learning का इस्तेमाल वातावरण का विश्लेषण करने तथा संचार के लिए बेहतर विकल्प चुनने में किया जा सकता है।
पुराना जैमर कहां पीछे रह जाता है?
पारंपरिक जैमर का मूल उद्देश्य रेडियो संचार में इतना interference पैदा करना होता है कि दुश्मन का receiver उपयोगी संदेश हासिल न कर सके। लेकिन समस्या तब आती है जब सामने वाला रेडियो बार-बार अपनी फ्रीक्वेंसी बदलता रहे
अगर जैमर किसी एक फ्रीक्वेंसी को निशाना बना रहा है और रेडियो उससे बचने के लिए दूसरी फ्रीक्वेंसी पर चला गया, तो जैमर को भी तुरंत नई स्थिति का पता लगाना होगा। यहीं से speed और intelligence महत्वपूर्ण हो जाती है।
DRDO की नई प्रणाली के लिए बताई गई आवश्यकता के अनुसार इसे ऐसे रेडियो का मुकाबला करने में सक्षम होना चाहिए जो एक सेकंड में 2,000 बार तक frequency hopping (रेडियो का बार-बार अपनी communication frequency बदलते रहना) कर सकते हैं। यही आंकड़ा बताता है कि चुनौती कितनी तेज है।
ड्रोन और दूसरे सिस्टम भी निशाने पर
इस तरह की व्यापक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता का इस्तेमाल केवल पारंपरिक सैनिक रेडियो के खिलाफ ही नहीं हो सकता। DRDO की बताई आवश्यकताओं में जिस व्यापक फ्रीक्वेंसी रेंज की बात है, वह आधुनिक tactical communication systems की कई श्रेणियों को कवर कर सकती है।
इनमें Unmanned Aerial Vehicles (UAVs), loitering munitions और software-defined radios जैसे सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि किसी विशेष हथियार या प्लेटफॉर्म के खिलाफ SCJS की अंतिम operational capability अभी घोषित नहीं हुई है।
MANET भी क्यों महत्वपूर्ण है?
इस सिस्टम का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य Mobile Ad Hoc Networks यानी MANETs भी हैं।
MANET को आसान भाषा में ऐसे मोबाइल नेटवर्क के रूप में समझ सकते हैं जिसमें जुड़े हुए रेडियो या दूसरे उपकरण किसी स्थायी टावर या फिक्स्ड नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना आपस में संचार कर सकते हैं।
युद्ध के मैदान में यह बेहद उपयोगी है। सैनिकों की टुकड़ियां आगे बढ़ रही हों, वाहन लगातार अपनी जगह बदल रहे हों या कमांड यूनिट अलग-अलग स्थानों पर हों, तब मोबाइल नेटवर्क तेजी से बदलते battlefield के अनुसार संचार बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
लेकिन यही लचीलापन दुश्मन के लिए उन्हें monitor और disrupt करना कठिन भी बना सकता है। SCJS को इसी तरह के tactical communication networks को पहचानने और बाधित करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
तीन यूनिट और तेजी से तैनाती की योजना
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस कार्यक्रम में तीन यूनिट बनाए जाने की बात सामने आई है। वाहन आधारित डिजाइन का फायदा यह होगा कि सिस्टम को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग ऑपरेशनल क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा।
एक रिपोर्ट में वाहन से सिस्टम को operational deployment के लिए तैयार करने में एक घंटे से कम समय का लक्ष्य भी बताया गया है। वहीं कार्यक्रम के लिए 21 महीने में development, delivery और testing पूरा करने की समयसीमा की जानकारी सामने आई है।
सेना के पास अभी क्या ?
भारतीय सेना पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए दुश्मन के रेडियो संचार को detect, intercept और jam करने की क्षमता रखती है। लेकिन नए cognitive और frequency-hopping radios इस काम को ज्यादा कठिन बना रहे हैं। DRDO का नया Smart Communication Jammer System इसी अगली पीढ़ी के रेडियो को निशाना बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है।
1- Samyukta Electronic Warfare System
यह भारतीय सेना के लिए विकसित एक मोबाइल Integrated Electronic Warfare (EW) System है। इसका काम सिर्फ जैमिंग करना नहीं है। यह दुश्मन के electromagnetic signals को:
- Detect/Monitor करना
- Intercept करना
- सिग्नल की Direction Finding करना
- उसका विश्लेषण करना
- और जरूरत पड़ने पर Jam करना जैसी क्षमताएं देता है।
- इसका communication और non-communication दोनों तरह के electromagnetic emissions से निपटने वाला architecture है।
2- Himshakti Electronic Warfare System
Himshakti को भारतीय सेना की high-altitude/mountainous terrain के लिए electronic warfare और signals-intelligence capability के रूप में रिपोर्ट किया गया है। इसका उद्देश्य कठिन पहाड़ी इलाकों में दुश्मन के electromagnetic/communication activity को monitor और exploit करने में मदद करना है।
इसे सिर्फ “जैमर” कहना सही नहीं होगा। यह व्यापक EW/communication-intelligence भूमिका का हिस्सा है।
3- नए communication jammers भी विकसित/प्रस्तुत किए जा रहे हैं-
BEL ने जनवरी 2026 में Ground-Based VUHF Communication Jammer (GBVU) का मॉडल प्रदर्शित किया था। BEL के अनुसार यह 30–1,000 MHz के communication signals को intercept, monitor और jam कर सकता है तथा signal की range और bearing भी उपलब्ध करा सकता है








