उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने अपनी नौसेना को मजबूत करने को लेकर ऐसा कदम उठाया है, जिसने कोरियाई प्रायद्वीप में नई चिंता पैदा कर दी है। उत्तर कोरिया ने अपना नया विध्वंसक ‘Kang Kon’ नौसेना में शामिल कर लिया है। किम ने साफ कहा है कि यह युद्धपोत देश की ‘स्टेट न्यूक्लियर काउंटरएक्शन सिस्टम’ यानी परमाणु जवाबी कार्रवाई व्यवस्था का हिस्सा होगा।
6 सितंबर को पूर्वी तटीय शहर वॉनसन में आयोजित कमीशनिंग समारोह में किम ने Kang Kon को मूल रूप से एक आक्रामक विध्वंसक बताया। उन्होंने कहा कि यह जहाज दुश्मन के खिलाफ विनाशकारी जवाबी हमला करने वाली ताकत का हिस्सा होगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान Freedom Edge संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में Kang Kon की कमीशनिंग केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है।
Kang Kon की क्या हैं खूबियां ?
Kang Kon कोई अलग डिजाइन का अकेला जहाज नहीं है। यह उत्तर कोरिया की नई Choe Hyon-class का दूसरा विध्वंसक है। पहला जहाज Choe Hyon है, जिसे जून 2026 में उत्तर कोरियाई नौसेना में शामिल किया गया था। यह केवल समुद्री गश्त करने वाला जहाज नहीं है। इसे एक मल्टी-रोल मिसाइल युद्धपोत के रूप में विकसित किया गया है। यानी अब दो Choe Hyon-class जहाज सेवा में हैं—Choe Hyon और Kang Kon। पहला पश्चिमी तट की West Sea Fleet में और नया Kang Kon पूर्वी तट की East Sea Fleet में लगाया गया है। किम जोंग उन ने इस श्रेणी के और युद्धपोत बनाने की योजना घोषित की है। 2026 में उन्होंने इस वर्ग के हर साल दो विध्वंसक बनाने की महत्वाकांक्षा भी जताई थी।
- लगभग 5,000 टन श्रेणी के इस वर्ग के जहाज उत्तर कोरिया द्वारा अब तक बनाए गए सबसे बड़े सतही युद्धपोत हैं।
- इनकी लंबाई करीब 140-144 मीटर आंकी जाती है और इनका डिजाइन पुराने उत्तर कोरियियाई छोटे युद्धपोतों से बिल्कुल अलग है।
- इसका सबसे बड़ा बदलाव है—Vertical Launch System यानी VLS।
- VLS का मतलब ऐसे मिसाइल लॉन्च सेल हैं जिनसे अलग-अलग प्रकार की मिसाइलें जहाज के अंदर से लगभग किसी भी दिशा में तेजी से दागी जा सकती हैं।
- उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक Choe Hyon में कुल 88 VLS सेल हैं। इसके अलावा जहाज पर अलग एंटी-शिप/क्रूज मिसाइल लॉन्चर भी लगाए गए हैं।
88 VLS सेल में कौन-कौन सी मिसाइलें?
यहीं से Kang Kon की असली ताकत सामने आती है। Choe Hyon-class के हथियारों की पूरी सूची उत्तर कोरिया ने सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन तस्वीरों, परीक्षणों और विशेषज्ञ विश्लेषण से पता चलता है कि इसके VLS में अलग-अलग आकार के सेल हैं। बड़े सेल लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें उत्तर कोरिया की Hwasal-2 जैसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल शामिल होने का आकलन किया गया है।
| विशेषता | Hwasal-2 |
| 🇰🇵 देश | उत्तर कोरिया |
| प्रकार | लंबी दूरी की Land-Attack Cruise Missile (LACM) |
| मारक क्षमता | लगभग 2,000 किमी तक का दावा |
| उड़ान | कम ऊंचाई पर, terrain-following क्षमता का दावा |
| Guidance | उपग्रह/Inertial Navigation सहित Multi-System Guidance का दावा |
| वारहेड | उत्तर कोरिया इसे परमाणु-सक्षम बताता है |
| लक्ष्य | जमीन पर स्थित रणनीतिक/सैन्य लक्ष्य |
| महत्व | संभावित रूप से जमीन और समुद्र आधारित प्लेटफॉर्म से उपयोग |
| खास खतरा | कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण रडार से पहचान और interception कठिन हो सकता है |
उत्तर कोरिया ने Choe Hyon से क्रूज मिसाइलों के परीक्षण भी किए हैं। 2026 में हुए परीक्षणों में जहाज से कम समय के अंतराल में कई मिसाइलें दागी गईं, जिससे इसके VLS और फायर-कंट्रोल सिस्टम के एक साथ काम करने की क्षमता का संकेत मिला।
इसके अलावा जहाज पर आठ inclined missile launchers भी देखे गए हैं। इनमें एंटी-शिप मिसाइलें या अतिरिक्त क्रूज मिसाइलें तैनात किए जाने का आकलन है। कुछ विश्लेषण इन्हें Kumsong-3 जैसी एंटी-शिप मिसाइलों से जोड़ते हैं।
जहाज की बाकी मारक क्षमता?
Kang Kon और Choe Hyon-class में केवल मिसाइलें ही नहीं हैं। इन जहाजों पर लगभग 127 मिमी की मुख्य नौसैनिक तोप, करीब 30 मिमी की क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) और कम दूरी की एयर डिफेंस व्यवस्था देखी गई है। CIWS का काम दुश्मन की आने वाली मिसाइलों या विमानों को बहुत कम दूरी पर रोकना होता है।
जहाज में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और decoy systems भी शामिल हैं। यानी इसका उद्देश्य केवल हमला करना नहीं, बल्कि दुश्मन के रडार और मिसाइलों से खुद को बचाना भी है। उत्तर कोरिया ने 2025 के परीक्षणों में जहाज से क्रूज मिसाइल, एंटी-एयर मिसाइल, जहाज-विरोधी हथियार, तोप और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम के परीक्षण की जानकारी दी थी।
दक्षिण कोरिया के पास क्या है?
यहीं पर दोनों देशों की नौसैनिक क्षमता में बड़ा अंतर दिखाई देता है। दक्षिण कोरिया की नौसेना के पास पहले से ही KDX यानी Korean Destroyer experimental कार्यक्रम के तहत आधुनिक विध्वंसकों की पूरी श्रृंखला है।
इसमें तीन KDX-I Gwanggaeto the Great-class, छह KDX-II Chungmugong Yi Sun-sin-class और अत्याधुनिक KDX-III Bath-I Sejong the Great-class Aegis destroyers शामिल हैं। 2024 में दक्षिण कोरिया ने KDX-III Batch-II का पहला जहाज Jeongjo the Great भी हासिल किया।
सबसे खास हैं Sejong the Great-class Aegis destroyers। इनका फुल-लोड विस्थापन करीब 10,000 टन है और प्रत्येक जहाज में लगभग 128 missile cells वाला VLS configuration है। इनमें अमेरिकी SM-2 जैसी air-defence missiles के साथ दक्षिण कोरियाई land-attack और anti-submarine weapons भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में, एक दक्षिण कोरियाई Sejong the Great-class जहाज के पास अकेले ही Kang Kon के अनुमानित VLS से ज्यादा missile cells हैं।
KDX-III Batch-II को दक्षिण कोरिया ने अपनी अगली पीढ़ी के Aegis destroyer के रूप में विकसित किया है। इसका Jeongjo the Great करीब 170 मीटर लंबा और लगभग 8,200 टन श्रेणी का जहाज है। इसमें अधिक आधुनिक Aegis combat system है और इसे वायु रक्षा, मिसाइल रक्षा, सतह पर हमला तथा anti-submarine warfare जैसे कई मिशनों के लिए तैयार किया गया है।
जुलाई 2026 में उसने KDDX नाम के अगले चरण के कार्यक्रम की शुरुआत भी की, जिसके तहत लगभग 7,000 टन के नए विध्वंसक विकसित करने की योजना है।
फिर Kang Kon दक्षिण कोरिया के लिए कितना खतरा?
इसका सीधा जवाब थोड़ा मुश्किल है। लेकिन सिर्फ जहाज से जहाज की तुलना करें तो दक्षिण कोरिया स्पष्ट रूप से आगे है। उसके पास ज्यादा बड़े, ज्यादा अनुभवी और Aegis जैसी परिपक्व combat-management प्रणाली वाले विध्वंसक हैं। लेकिन Kang Kon की चिंता उसकी संख्या से ज्यादा उसके हथियारों की भूमिका को लेकर है।
- चलता-फिरता लॉन्च प्लेटफॉर्म: युद्धपोत अपनी स्थिति बदल सकता है, इसलिए लॉन्च प्वाइंट पहले से तय नहीं रहेगा। दुश्मन को भी पहले यह पता लगाना होगा कि जहाज कहां है, फिर यह अनुमान लगाना होगा कि वह किस दिशा से मिसाइल दाग सकता है।
- ट्रैक करना कठिन: दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान को जहाज की लगातार निगरानी करनी होगी।
- नई हमले की दिशा: समुद्र से क्रूज मिसाइलें अलग-अलग दिशाओं से आ सकती हैं।
- परमाणु आयाम: Kang Kon को उत्तर कोरिया की nuclear response system से जोड़ दिया है।
- Missile Defence पर दबाव: कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग चुनौती पेश करती हैं।
- फिर भी Kang Kon दक्षिण कोरिया के Aegis destroyers से बेहतर नहीं है। असली चिंता भविष्य में ऐसे जहाजों की संख्या बढ़ने और उन्हें परमाणु भूमिका से जोड़ने की है
Freedom Edge क्या है?
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के Trilateral Multi-Domain Military Exercise Freedom Edge का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की सेनाओं के बीच साझा कार्रवाई, संचार और उत्तर कोरिया के मिसाइल-परमाणु खतरे से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।
2026 का अभ्यास:–
- 7–11 सितंबर 2026 — पांच दिन
- दक्षिण कोरिया के Jeju Island के पूर्व और दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र
- समुद्री, हवाई और अन्य multi-domain operations
उत्तर कोरिया vs दक्षिण कोरिया vs जापान: विध्वंसक ताकत
2026 तक की स्थिति को आधार मानकर, अगर सिर्फ मुख्य destroyer/guided-missile destroyer गिने जाएं तो संक्षिप्त तुलना इस तरह रख सकते हैं। frigates और helicopter carriers को इसमें नहीं जोड़ा गया है।
| देश | कुल विध्वंसक | प्रमुख क्लास | आकार/हथियार | मुख्य खूबियां | रणनीतिक भूमिका |
| उत्तर कोरिया | 2 | Choe Hyon-class | 5,000 टन, VLS, लंबी दूरी की मिसाइलें | मिसाइल स्ट्राइक, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर | संभावित परमाणु जवाबी क्षमता |
| दक्षिण कोरिया | 13 | KDX-I, KDX-II, KDX-III | KDX-III ~10,000 टन, 128 VLS | Aegis, एयर/मिसाइल डिफेंस, एंटी-शिप, एंटी-सबमरीन | क्षेत्रीय वायु/मिसाइल रक्षा |
| जापान | 35 | Kongō, Atago, Maya, Murasame, Akizuki आदि | Aegis DDG + आधुनिक DD | Aegis, बैलिस्टिक-मिसाइल डिफेंस, एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन | फ्लीट डिफेंस व समुद्री नियंत्रण |








